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Bijnor Breaking News: थानों में दलालों पर शिकंजा | बिजनौर पुलिस ने लागू किया आगंतुक हाजिरी रजिस्टर, अब हर आगंतुक का होगा रिकॉर्ड

ब्यूरो चीफ- मोहम्मद हिफजान

बिजनौर। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुलिस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से उठाए गए कदमों के तहत जनपद बिजनौर में एक नई व्यवस्था लागू की गई है। शासन के निर्देशों के बाद जिले के सभी थाना, पुलिस चौकी और पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) कार्यालयों में “आगंतुक हाजिरी रजिस्टर” की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। इस नई प्रणाली का उद्देश्य पुलिस कार्यालयों में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का रिकॉर्ड रखना, अनावश्यक आवाजाही पर नियंत्रण करना तथा कथित बिचौलियों और दलालों की सक्रियता पर रोक लगाना बताया जा रहा है।

इस संबंध में 23 जून 2026 से 26 जून 2026 तक जिला मुख्यालय पर अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में शासन के निर्देशों के अनुरूप नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीति तैयार की गई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा के निर्देशन में पूरे जनपद के सभी थानों, पुलिस चौकियों और सीओ कार्यालयों में आगंतुक हाजिरी रजिस्टर उपलब्ध करा दिए गए।

क्या है आगंतुक हाजिरी रजिस्टर?

नई व्यवस्था के तहत पुलिस कार्यालय में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को रजिस्टर में अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर, आने का समय और आने का कारण दर्ज करना होगा। यदि कोई व्यक्ति दोबारा उसी मामले में आता है तो उसे यह भी बताना होगा कि पहली बार आने के बाद उसकी समस्या का समाधान क्यों नहीं हुआ और दोबारा आने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इससे मामलों की निगरानी आसान होगी और शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी बन सकेगी।

बिचौलियों और दलालों पर कसेगा शिकंजा

पुलिस विभाग का कहना है कि लंबे समय से यह शिकायतें मिलती रही हैं कि कुछ लोग बार-बार थानों और पुलिस कार्यालयों में आकर स्वयं को प्रभावशाली बताकर पीड़ितों से धन उगाही करते हैं। ऐसे लोगों पर आरोप लगते रहे हैं कि वे पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों अथवा अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों का नाम लेकर मामलों में हस्तक्षेप करने का दावा करते हैं।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब प्रत्येक आगंतुक का रिकॉर्ड दर्ज होगा, जिससे यह स्पष्ट रहेगा कि कौन व्यक्ति कितनी बार और किस उद्देश्य से पुलिस कार्यालय आया। इससे अनावश्यक रूप से बार-बार आने वालों की पहचान करना भी आसान होगा।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों को अधिक पारदर्शी और बेहतर पुलिस सेवा उपलब्ध कराना है। विभाग का कहना है कि आम जनता बिना किसी बिचौलिए के सीधे पुलिस तक अपनी बात पहुंचा सके, यही इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी दर्ज करता है या बिना उचित कारण के बार-बार थाने अथवा पुलिस कार्यालय आता है, तो आवश्यकतानुसार उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई भी की जा सकती है।

जिला स्तर पर हुई समीक्षा बैठक

सूत्रों के अनुसार 23 से 26 जून के बीच जिला मुख्यालय पर हुई बैठक में इस व्यवस्था को लेकर विस्तृत चर्चा की गई थी। बैठक में विभिन्न थाना प्रभारियों और अधिकारियों को नई प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए। इसके बाद सभी संबंधित कार्यालयों में रजिस्टर उपलब्ध कराए गए और कर्मचारियों को इसकी प्रक्रिया से अवगत कराया गया।

पुलिस का पक्ष

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह जनहित में लागू की गई है। उनका उद्देश्य किसी भी आम नागरिक को परेशान करना नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है।

अधिकारियों के अनुसार अब प्रत्येक शिकायतकर्ता की उपस्थिति दर्ज होने से शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा भी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। साथ ही यह भी पता लगाया जा सकेगा कि किन मामलों में शिकायतकर्ता को बार-बार कार्यालय आना पड़ रहा है और उसका कारण क्या है।

स्थानीय लोगों ने किया स्वागत

जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से इस पहल को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो पुलिस कार्यालयों में अनावश्यक हस्तक्षेप कम होगा और आम नागरिकों को अपनी शिकायत दर्ज कराने में अधिक सुविधा मिलेगी।

कई समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए इसे पारदर्शी प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि इससे पुलिस और जनता के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।

भ्रष्टाचार रोकने की दिशा में पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगंतुक रजिस्टर का नियमित रूप से पालन किया गया और उसकी समय-समय पर समीक्षा होती रही, तो इससे पुलिस कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ कम होगी तथा कथित बिचौलियों की भूमिका सीमित हो सकती है। साथ ही प्रत्येक आगंतुक का रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से प्रशासनिक जवाबदेही भी बढ़ेगी।

आगे क्या?

पुलिस प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि इस व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाएगी। यदि कहीं इसका पालन नहीं किया जाता है या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों के स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल जनपद बिजनौर के सभी थाना, चौकी और सीओ कार्यालयों में यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। आने वाले समय में इसके प्रभाव का आकलन किया जाएगा कि यह पहल आम जनता को कितनी राहत पहुंचा पाती है और पुलिस व्यवस्था में कितना सुधार लाती है।

Khakhreru News: खेत में करंटयुक्त तार बना काल: बकरी बचाने पहुंचे वृद्ध की दर्दनाक मौत, किसान पर लापरवाही का आरोप

रिपोर्ट: दुर्गेश मिश्रा | खखरेरू, फतेहपुर

फतेहपुर। जिले के खखरेरू थाना क्षेत्र के सुदेशरा गांव में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। खेत की सुरक्षा के लिए लगाए गए कथित करंटयुक्त तार की चपेट में आने से 70 वर्षीय वृद्ध और उसकी बकरी की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया तथा पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

बकरी चराकर लौट रहे थे वृद्ध

जानकारी के अनुसार सुदेशरा गांव निवासी इद्दू पुत्र दरगाही (70 वर्ष) शुक्रवार शाम करीब छह बजे अपनी बकरी चराकर घर वापस लौट रहे थे। रास्ते में सड़क किनारे स्थित एक खेत के चारों ओर सुरक्षा के उद्देश्य से झटका तार लगाया गया था। परिजनों का आरोप है कि इस तार में कथित रूप से 440 वोल्ट बिजली प्रवाहित की जा रही थी।

उसी दौरान इद्दू की बकरी खेत के पास घास चरते हुए करंटयुक्त तार की चपेट में आ गई और उसमें फंस गई। अपनी बकरी को बचाने के लिए जैसे ही इद्दू ने तार को हटाने का प्रयास किया, वह भी तेज करंट की चपेट में आ गए। बिजली का झटका इतना तेज था कि वृद्ध और बकरी दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना से गांव में मचा हड़कंप

हादसे की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंच गए। वृद्ध को जमीन पर पड़ा देखकर लोगों ने बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई। ग्रामीणों ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए खेतों में इस तरह खुलेआम करंट प्रवाहित किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

इद्दू की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक की पुत्रियां रिहाना बानो, बेबी, कमरजहां, फूलजहां और रुखसाना बानो गहरे सदमे में हैं। वहीं उनका पुत्र इम्तियाज अहमद, जो रोजी-रोटी के सिलसिले में मुंबई में रहता है, घटना की सूचना मिलने के बाद घर लौटने की तैयारी में है।

ग्रामीणों के अनुसार इद्दू बेहद मेहनती और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। वह बकरियां चराकर और पशुपालन के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी असामयिक मृत्यु से गांव के लोगों में भी गहरा दुख है।

किसान पर लगाए गंभीर आरोप

मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि खेत की सुरक्षा के नाम पर किसान धर्म सिंह पुत्र राधे ने खेत के चारों ओर झटका तार लगाया था, जिसमें कथित रूप से बिजली प्रवाहित की जा रही थी। उनका कहना है कि यदि खेत की सुरक्षा के लिए लगाए गए तार में करंट न छोड़ा गया होता तो यह दर्दनाक हादसा कभी नहीं होता।

परिजनों ने पुलिस को तहरीर देकर संबंधित किसान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि लापरवाही के कारण एक परिवार का सहारा हमेशा के लिए छिन गया।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलते ही खखरेरू थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

थाना प्रभारी सत्यपाल सिंह ने बताया कि मामले में तहरीर प्राप्त हुई है। तहरीर के आधार पर जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार अग्रिम विधिक कार्रवाई की जाएगी।

खेतों में करंट प्रवाहित करना कितना खतरनाक

ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए कई किसान खेतों के चारों ओर तार लगाते हैं। हालांकि यदि इन तारों में अवैध रूप से बिजली प्रवाहित की जाती है तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि इंसानों और पशुओं के जीवन के लिए भी बेहद घातक साबित हो सकता है। ऐसे मामलों में पहले भी कई दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें लोगों और मवेशियों की जान जा चुकी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों की सुरक्षा के लिए वैध और सुरक्षित उपाय अपनाने चाहिए। बिजली प्रवाहित कर खेतों की घेराबंदी करना गंभीर दुर्घटनाओं को आमंत्रित करता है और इसके लिए संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

ग्रामीणों ने की सख्त कार्रवाई की मांग

घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खेतों में अवैध रूप से करंट प्रवाहित करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उनका कहना है कि एक छोटी सी लापरवाही किसी की जान ले सकती है और ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाना आवश्यक है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बिजनौर कलेक्ट्रेट में भारतीय किसान यूनियन टिकैत का विशाल धरना-प्रदर्शन, बिजली बिल और फर्जी मुकदमों के विरोध में किसानों का हुंकार

ब्यूरो चीफ- मोहम्मद हिफजान

बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के बैनर तले किसानों का विशाल जनसैलाब जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में उमड़ पड़ा। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान, पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए। किसानों ने सरकार और प्रशासन पर उनकी समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

धरना-प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली, किसानों पर दर्ज फर्जी मुकदमों तथा बढ़ते बिजली बिलों को प्रमुख मुद्दा बनाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार और प्रशासन लगातार ऐसी नीतियां लागू कर रहे हैं, जिनका सीधा असर किसानों और आम जनता पर पड़ रहा है।

भारतीय किसान यूनियन टिकैत के पदाधिकारियों ने कहा कि किसानों पर लगाए गए कथित फर्जी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं। उनका आरोप था कि कई किसानों के खिलाफ बिना ठोस आधार के मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिससे किसान मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले किसानों को डराने और दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

धरने में मौजूद किसानों ने बिजली विभाग पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि विभाग मनमाने ढंग से बिजली बिल जारी कर रहा है, जिससे किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि कई बार वास्तविक खपत से अधिक बिल भेजे जाते हैं, जिससे लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

भारतीय किसान यूनियन टिकैत के नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा 2 किलोवाट के स्थान पर 3 किलोवाट का बिजली कनेक्शन लागू किए जाने का निर्णय किसानों और आम उपभोक्ताओं के हित में नहीं है। उनका कहना है कि इस फैसले से बिजली का निश्चित शुल्क बढ़ जाएगा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। किसानों ने मांग की कि सरकार इस निर्णय को तत्काल वापस ले और पुराने नियमों को बहाल करे।

धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए संगठन के मंडल प्रवक्ता आदिल ज़ैदी अपनी टीम के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन हमेशा किसानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी पूरी मजबूती के साथ लड़ती रहेगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेती तो संगठन प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक करेगा।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। कलेक्ट्रेट परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। हालांकि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

किसानों का कहना था कि वे केवल अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार किसानों की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय ऐसे फैसले ले रही है, जिनसे ग्रामीण क्षेत्र और कृषि क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। किसानों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

भारतीय किसान यूनियन टिकैत के नेताओं ने प्रशासन से मांग की कि किसानों पर दर्ज सभी कथित फर्जी मुकदमों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें वापस लिया जाए। साथ ही बिजली विभाग की कथित मनमानी पर रोक लगाई जाए और बढ़े हुए बिजली भार (लोड) संबंधी निर्णय को भी वापस लिया जाए।

फिलहाल धरना-प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की ओर से कोई अंतिम आश्वासन या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। किसान नेताओं का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि किसानों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है। फिलहाल बिजनौर कलेक्ट्रेट में भारतीय किसान यूनियन टिकैत का यह प्रदर्शन जिले की प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का विषय बना हुआ है।

धाता के उकाथू में मुख्य मार्ग बना तालाब, 60 मीटर तक जलभराव से ग्रामीण बेहाल

रिपोर्ट: दुर्गेश मिश्रा | धाता, फतेहपुर

फतेहपुर: विकास खंड धाता के ग्राम पंचायत उकाथू में जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीणों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हल्की सी बारिश के बाद ही गांव का मुख्य मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। लगभग 60 मीटर तक सड़क पर कई फीट गहरा गंदा पानी और कीचड़ जमा हो जाता है, जिससे यह मार्ग किसी तालाब का रूप ले लेता है। इस समस्या के चलते ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है और लोगों का दैनिक जीवन संकट में पड़ गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, यह मुख्य मार्ग गांव को आसपास के क्षेत्रों से जोड़ने वाला प्रमुख रास्ता है। इसी मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों लोग, बाजार, अस्पताल, विद्यालय और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आते-जाते हैं। लेकिन बारिश के बाद सड़क पर जमा गंदा पानी और दलदल जैसी स्थिति लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा देती है।

सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। छोटे-छोटे बच्चे रोजाना इसी गंदे पानी और कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। कई बार फिसलकर बच्चे घायल हो चुके हैं। गंदे पानी के संपर्क में आने से संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा भी लगातार बना हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर वे हमेशा चिंतित रहते हैं।

महिलाओं और बुजुर्गों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। घर से बाहर निकलते समय उन्हें हर कदम संभलकर रखना पड़ता है। कई बुजुर्ग कीचड़ में फिसलकर चोटिल हो चुके हैं। महिलाओं को घरेलू कार्यों, बाजार और स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है। क्षेत्रीय विधायक, ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधान स्वयं इस मार्ग की बदहाल स्थिति का निरीक्षण कर चुके हैं। इसके बावजूद आज तक समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है, लेकिन धरातल पर कोई कार्य दिखाई नहीं देता। बारिश का मौसम आते ही गांव की यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। सड़क पर जमा बदबूदार पानी के कारण आसपास का वातावरण भी दूषित हो रहा है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ-साथ संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क के किनारे पक्की नाली नहीं होने के कारण वर्षा का पानी निकल नहीं पाता और सड़क पर ही भर जाता है। यदि समय रहते जल निकासी की उचित व्यवस्था कर दी जाए और पक्की नाली का निर्माण करा दिया जाए तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सड़क की मरम्मत कराई जाए तथा दोनों ओर पक्की नालियों का निर्माण कराया जाए, ताकि वर्षा का पानी आसानी से निकल सके और लोगों को राहत मिल सके। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों में विकास और मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने का दावा करती है, लेकिन उकाथू गांव की स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है। आज भी लोग सड़क, जल निकासी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेते हैं और कब तक उकाथू गांव के लोगों को जलभराव और बदहाल सड़क से राहत मिलती है।

पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष आलोक सिंह ने लाइसेंसी बंदूक से खुद को मारी गोली, कमरे में मिला खून से लथपथ शव; पुलिस हर पहलू की जांच में जुटी

रिपोर्ट: सुनील तिवारी | कानपुर

कानपुर के नौबस्ता थाना क्षेत्र स्थित बसंत विहार में बुधवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब पंडित पृथ्वीनाथ (PPN) कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और ट्रांसपोर्ट कारोबारी आलोक सिंह का शव उनके कमरे में खून से लथपथ मिला। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उन्होंने अपनी लाइसेंसी बंदूक से सिर में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। हालांकि, घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ, जिसके चलते पुलिस आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह जानने के लिए हर संभावित पहलू की गहन जांच कर रही है।

घटना की सूचना मिलते ही नौबस्ता थाना पुलिस, फॉरेंसिक टीम और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया और साक्ष्य जुटाए गए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

देर रात सुनाई दी धमाके जैसी आवा

जानकारी के मुताबिक, 50 वर्षीय आलोक सिंह अपने पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बसंत विहार स्थित पैतृक मकान में रहते थे। परिवार का ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय है, जिसमें आलोक सिंह भी सक्रिय भूमिका निभाते थे।

मंगलवार रात वह रोज की तरह काम से घर लौटे, परिवार के साथ भोजन किया और पहली मंजिल पर बने अपने कमरे में सोने चले गए। देर रात परिवार के लोगों को तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी, लेकिन उसे सामान्य आवाज समझकर किसी ने विशेष ध्यान नहीं दिया।

सुबह नहीं खुला दरवाजा तो बढ़ी चिंता

बुधवार सुबह जब आलोक सिंह काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं आए तो परिजनों को चिंता हुई। कई बार आवाज लगाने और दरवाजा खटखटाने के बावजूद अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

आखिरकार परिजनों ने दरवाजा तोड़ा तो अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। आलोक सिंह का शव कमरे में पड़ा था और आसपास खून फैला हुआ था। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद मौके पर पुलिस और फॉरेंसिक टीम पहुंची।

शुरुआती जांच में आत्महत्या की आशंका

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आलोक सिंह ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से सिर में गोली मारकर आत्महत्या की। मौके से हथियार बरामद कर लिया गया है।

हालांकि, घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, इसलिए पुलिस फिलहाल किसी एक कारण को आत्महत्या की वजह मानने से बच रही है। अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

1999 में रहे थे PPN कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष

आलोक सिंह वर्ष 1999 में पंडित पृथ्वीनाथ (PPN) कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके थे। छात्र राजनीति के दौरान उनकी अच्छी पहचान थी। इसके अलावा वे स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते थे।

शहर के कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग उन्हें जानते थे। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

पत्नी और बेटियां लखनऊ में रहती हैं

परिजनों के अनुसार आलोक सिंह की पत्नी विनीता पिछले कुछ समय से दोनों बेटियों के साथ लखनऊ में रह रही थीं।

परिवार ने बताया कि बड़ी बेटी मर्चेंट नेवी में कार्यरत है, जबकि छोटी बेटी लखनऊ में 12वीं कक्षा की छात्रा है। परिजनों का कहना है कि पत्नी और बच्चों के अलग रहने के कारण आलोक सिंह मानसिक तनाव में रहते थे।

हालांकि, परिवार ने यह भी स्पष्ट किया कि घर में किसी प्रकार का पारिवारिक विवाद नहीं था और आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह क्या रही, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

सूचना मिलते ही लखनऊ से पहुंचीं दोनों बेटियां

घटना की जानकारी मिलते ही दोनों बेटियां लखनऊ से कानपुर पहुंच गईं। पिता की मौत की खबर सुनकर परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

पोस्टमार्टम हाउस पर रिश्तेदारों, परिचितों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और कई जनप्रतिनिधियों की भीड़ जुट गई। सभी ने शोक व्यक्त करते हुए परिजनों को ढांढस बंधाया।

पुलिस ने क्या कहा?

नौबस्ता थाना पुलिस का कहना है कि घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। इसलिए मामले की जांच पारिवारिक, मानसिक, सामाजिक, आर्थिक और अन्य सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आत्महत्या के कारणों को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने आएगी। फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

जांच पूरी होने के बाद होगा खुलासा

पुलिस का कहना है कि मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, पारिवारिक परिस्थितियों और अन्य तथ्यों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच के दौरान कोई नया तथ्य सामने आता है तो उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पूरे मामले में पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आधिकारिक रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है।

मोहम्मद फैज़ को भारतीय युवा कांग्रेस का नजीबाबाद विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया, संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी

ब्यूरो चीफ- मोहम्मद हिफजान

नजीबाबाद/बिजनौर। भारतीय युवा कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से बड़ा संगठनात्मक निर्णय लिया है। कस्बा साहनपुर निवासी एडवोकेट मोहम्मद फैज़ को भारतीय युवा कांग्रेस का नजीबाबाद विधानसभा अध्यक्ष (जनपद बिजनौर) नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। संगठन के इस फैसले को स्थानीय स्तर पर युवाओं के बीच कांग्रेस को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जिला अध्यक्ष ने जताया भरोसा

जारी नियुक्ति पत्र के अनुसार भारतीय युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ठाकुर गौतम सिसोदिया ने एडवोकेट मोहम्मद फैज़ पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि वह अपनी ऊर्जा, समय और समर्पण के साथ संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने का कार्य करेंगे। साथ ही पार्टी की विचारधारा और जनहित के मुद्दों को आम जनता, विशेषकर युवाओं तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

जिला नेतृत्व का मानना है कि संगठन की मजबूती का आधार मजबूत बूथ संरचना और सक्रिय युवा कार्यकर्ता होते हैं। इसी सोच के तहत विधानसभा स्तर पर नई जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।

शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में करेंगे कार्य

नियुक्ति पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि एडवोकेट मोहम्मद फैज़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व तथा उत्तर प्रदेश इकाई के वरिष्ठ पदाधिकारियों के मार्गदर्शन में संगठन को मजबूत बनाने का कार्य करेंगे।

पत्र में विशेष रूप से निम्न नेताओं के नेतृत्व का उल्लेख किया गया है—

  • राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे
  • पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी
  • लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी
  • राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा
  • भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब
  • राष्ट्रीय सचिव एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी विशाल चौधरी
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष पारस शुक्ला

संगठन ने विश्वास व्यक्त किया है कि मोहम्मद फैज़ इन सभी वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन में विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की नीतियों और कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाएंगे।

युवाओं को संगठन से जोड़ने पर रहेगा विशेष जोर

अपनी नियुक्ति पर एडवोकेट मोहम्मद फैज़ ने भारतीय युवा कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व एवं जिला नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संगठन ने उन पर जो विश्वास जताया है, उस पर खरा उतरने का हर संभव प्रयास करेंगे।

उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता विधानसभा क्षेत्र में अधिक से अधिक युवाओं को संगठन से जोड़ना, सामाजिक एवं जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाना तथा कांग्रेस की नीतियों को गांव-गांव और बूथ स्तर तक पहुंचाना होगी।

मोहम्मद फैज़ ने कहा कि वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ संगठन की जिम्मेदारी निभाएंगे तथा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर संगठन को नई मजबूती प्रदान करने का प्रयास करेंगे।

संगठन विस्तार अभियान को मिलेगी गति

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा स्तर पर नए पदाधिकारियों की नियुक्ति से भारतीय युवा कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को मजबूती मिलेगी। इससे पार्टी को आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों में भी लाभ मिलने की संभावना है।

युवा कांग्रेस लगातार युवाओं को संगठन से जोड़ने, रोजगार, शिक्षा, सामाजिक न्याय और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता बढ़ाने की रणनीति पर कार्य कर रही है। ऐसे में नजीबाबाद विधानसभा में नई नियुक्ति को संगठन विस्तार अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल

मोहम्मद फैज़ की नियुक्ति के बाद साहनपुर एवं नजीबाबाद क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी का माहौल देखा गया। कई कार्यकर्ताओं ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में विधानसभा क्षेत्र में संगठन को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि मोहम्मद फैज़ लंबे समय से सामाजिक और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर सक्रिय रहे हैं तथा युवाओं के बीच उनकी अच्छी पहचान है। ऐसे में उनकी नियुक्ति से संगठन को जमीनी स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है।

जनहित और संगठन दोनों पर रहेगा फोकस

नई जिम्मेदारी मिलने के बाद मोहम्मद फैज़ ने कहा कि वे संगठन के विस्तार के साथ-साथ जनहित के मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाएंगे। उनका प्रयास रहेगा कि अधिक से अधिक युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संगठनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाए तथा समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं को संगठन के माध्यम से संबंधित मंचों तक पहुंचाया जाए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा, संविधान की मूल भावना और सामाजिक समरसता के संदेश को लेकर विधानसभा क्षेत्र में लगातार अभियान चलाए जाएंगे।

कानपुर देहात: वायरल वीडियो से ट्रैफिक चेकिंग पर उठे सवाल, कथित अवैध वसूली के आरोप; जांच की उठी मांग

डेस्क रिपोर्ट

कानपुर देहात। जनपद के मैथा पुल चौराहे से सामने आए एक वायरल वीडियो ने ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जा रहे इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि ट्रैफिक चेकिंग के दौरान वाहन चालकों को रोककर दस्तावेजों की जांच के नाम पर कथित रूप से अवैध वसूली की गई।वायरल वीडियो में कथित तौर पर एक ट्रैफिक सिपाही और एक ट्रैफिक होमगार्ड सड़क पर वाहनों की जांच करते दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि वाहन चालकों से पहले ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी और अन्य आवश्यक दस्तावेज मांगे गए और उसके बाद कुछ लोगों से कथित रूप से पैसे लिए गए। वीडियो रिकॉर्ड करने वाले व्यक्ति का दावा है कि पूरी घटना उसके मोबाइल कैमरे में कैद हुई है।

मामले से जुड़े एक अन्य वीडियो में एक व्यक्ति यह दावा करता हुआ दिखाई देता है कि उससे भी कथित रूप से पैसे लिए गए। हालांकि इन दावों और वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और फिलहाल इनकी सत्यता की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने इस मामले को गंभीरता से उठाया है। कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने @Uppolice और संबंधित अधिकारियों को टैग करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि आरोप सही पाए जाएं तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो इससे पुलिस विभाग की छवि प्रभावित होती है और आम जनता का भरोसा भी कमजोर पड़ता है।

इस मामले पर ट्रैफिक टीआई विवेक सिंह का भी बयान सामने आया है। उनका कहना है कि संबंधित वाहन का ओवर हाइट  नियमों के उल्लंघन के कारण चालान किया गया था। वहीं शिकायतकर्ता का दावा है कि वाहन में कोई माल लदा ही नहीं था, इसलिए ओवर हाइट चालान किए जाने पर सवाल खड़े होते हैं। यही दावे अब जांच का विषय बन गए हैं।

फिलहाल पूरे मामले में आधिकारिक जांच की प्रतीक्षा है। जांच पूरी होने और सक्षम अधिकारियों की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोप कितने सही हैं और संबंधित कार्रवाई नियमानुसार की गई थी या नहीं।

यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो आधिकारिक जांच रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

Khaga News: सेवा सप्ताह के तहत बजरंग दल ने खागा में किया वृक्षारोपण, अस्पताल, तहसील और थाने में लगाए पौधे

संवाददाता- दुर्गेश मिश्रा

खागा (फतेहपुर): विश्व हिंदू परिषद् एवं बजरंग दल द्वारा चलाए जा रहे सेवा सप्ताह के अंतर्गत शनिवार को खागा क्षेत्र में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। पर्यावरण संरक्षण और हरित वातावरण के उद्देश्य से बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सीएससी (हरदो) अस्पताल, खागा तहसील परिसर तथा खागा थाना परिसर में पौधरोपण कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनके संरक्षण का भी संकल्प लिया। उपस्थित पदाधिकारियों ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण को शुद्ध करने का माध्यम ही नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला भी हैं। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की।

इस अवसर पर बजरंग दल के जिला सहसंयोजक रोहित दीक्षित ने कहा कि सेवा सप्ताह के अंतर्गत संगठन समाजहित से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम संचालित कर रहा है। वृक्षारोपण अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संतुलन बनाए रखना तथा लोगों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

कार्यक्रम में जिला गौ रक्षा प्रमुख गौरव गुप्ता ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल भी करे। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही हरित और स्वच्छ वातावरण का निर्माण संभव है।

वहीं प्रखंड सुरक्षा प्रमुख गुड्डू सिंह सहित बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं ने भी वृक्षारोपण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के दौरान संगठन के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे और सभी ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने लगाए गए पौधों की नियमित देखरेख का संकल्प लिया। संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि सेवा सप्ताह के दौरान सामाजिक सेवा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता से जुड़े अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाया जा सके।

Barabanki News: धारा लक्ष्य समाचार का चतुर्थ स्थापना दिवस धूमधाम से संपन्न, विधायक दिनेश रावत ने काटा केक, निष्पक्ष पत्रकारिता की सराहना

ब्यूरो चीफ- महेश कुमार

हैदरगढ़/ बाराबंकी

जनहित, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता की पहचान बन चुके धारा लक्ष्य समाचार का चतुर्थ स्थापना दिवस शुक्रवार को त्रिवेदीगंज (हैदरगढ़) स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में बड़े ही हर्षोल्लास, श्रद्धा और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। समारोह में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, वरिष्ठ पत्रकारों, समाजसेवियों एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर संस्थान की उपलब्धियों की सराहना की और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हैदरगढ़ विधायक दिनेश रावत ने केक काटकर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और समाज को सही दिशा देने में पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने धारा लक्ष्य समाचार की निष्पक्ष एवं जनपक्षधर पत्रकारिता की प्रशंसा करते हुए कहा कि संस्थान लगातार जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य कर रहा है।

सुंदरकांड पाठ से हुई शुरुआत

स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ धार्मिक वातावरण में सुंदरकांड पाठ से हुआ। इसके पश्चात के.के. शर्मा ने विधिवत आरती संपन्न कराई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों ने पूजा-अर्चना कर संस्थान की निरंतर प्रगति एवं सफलता की कामना की। पूरे परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जिससे समारोह का माहौल और भी भव्य दिखाई दे रहा था।

विधायक दिनेश रावत ने दी शुभकामनाएं

अपने संबोधन में विधायक दिनेश रावत ने धारा लक्ष्य समाचार के संपादक सुधीर शर्मा, पत्रकारों, पाठकों और सहयोगियों को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष पत्रकारिता लोकतंत्र की आत्मा है और धारा लक्ष्य समाचार ने कम समय में अपनी विश्वसनीय पहचान बनाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह संस्थान भविष्य में भी समाज के दबे-कुचले और आम नागरिकों की आवाज़ बनकर कार्य करता रहेगा।

अतिथियों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों का दीवार घड़ी, स्मृति-चिन्ह (शील्ड), गमछा एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया। सम्मान समारोह के दौरान अतिथियों ने धारा लक्ष्य समाचार परिवार की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना भी है।

बड़ी संख्या में पहुंचे पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक

कार्यक्रम में विभिन्न समाचार पत्रों एवं न्यूज़ चैनलों से जुड़े पत्रकारों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। इस अवसर पर अंकित मिश्रा, अंतिम सिंह (ब्यूरो प्रमुख, लखीमपुर), अब्दुल मुईद, बैजनाथ जायसवाल (सह संपादक), महेश कुमार (समाचार संपादक), वी.पी. तिवारी, शिवांशु मिश्रा, राजेश कुमार, सतीश गुप्ता, अंबरशरण जायसवाल, अरुण शुक्ला, कुंवर देवेंद्र सिंह, पंकज सिंह, चंद्र प्रकाश यादव (धरा इंफ्रा), बबलू सिंह कोटेदार, दुर्गा बक्स सिंह, रप्पन सिंह, सुनील सिंह (पूर्व ब्लॉक प्रमुख), प्रियंका सिंह (खंड विकास अधिकारी), रीसी पाल सिंह (एडीओ पंचायत), संयम मिश्रा (सचिव), हरिमोहन सक्सेना, गौतम रावत (सपा नेता), आशीष सिंह सिसोदिया (बसपा नेता), वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार सुनील कुमार वाजपेयी, यू.पी. ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के मंडल उपाध्यक्ष राकेश गिरी, पुष्पेंद्र सिंह (जेलर), चंदन सिंह, राजकुमार, राम लखन शर्मा, संदीप सिंह (हिंदुस्तान), शिवम सिंह (एबीएन), आर.पी. सिंह (राष्ट्रीय सहारा), आशीष अवस्थी (राष्ट्रीय स्वरूप), मकरनंद सिंह (राष्ट्रीय सहारा), राम कुमार यादव, बृजेन्द्र वर्मा, कुलदीप वर्मा, आशीष मौर्य, ओम प्रकाश श्रीवास्तव, अपराध नामा, समाजसेवी अतुल शर्मा (शरद), पंकज मौर्या, संजय रावत, सुशील रावत सहित बड़ी संख्या में पत्रकार, बुद्धिजीवी और सम्मानित नागरिक मौजूद रहे।

पत्रकारिता को और मजबूत बनाने का संकल्प

समारोह के दौरान वक्ताओं ने पत्रकारिता की बदलती चुनौतियों पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज के समय में निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता की आवश्यकता पहले से अधिक है। सभी ने एक स्वर में पत्रकारिता को और अधिक सशक्त, जिम्मेदार एवं जनहितकारी बनाने का संकल्प लिया।

भंडारे के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम का समापन विशाल सामूहिक भंडारे के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में उपस्थित अतिथियों, पत्रकारों एवं क्षेत्रवासियों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन के सफल संचालन पर सभी ने धारा लक्ष्य समाचार परिवार की सराहना की और भविष्य में भी इसी प्रकार जनहित से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने की अपेक्षा व्यक्त की।

जनसरोकारों की आवाज़ बना रहेगा धारा लक्ष्य समाचार

अंत में वक्ताओं ने कहा कि धारा लक्ष्य समाचार ने अपने चार वर्षों के सफर में समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को बेबाकी से उठाया है। संस्था ने हमेशा निष्पक्षता, निर्भीकता और जनहित को प्राथमिकता दी है। सभी अतिथियों ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में भी धारा लक्ष्य समाचार जनता की आवाज़ बनकर लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करता रहेगा और समाज के हित में अपनी पत्रकारिता जारी रखेगा।

कौशांबी में गोवंशों के अवशेष मिलने से मचा हड़कंप, हिंदू संगठनों ने जताई गौहत्या की आशंका

संवाददाता- दुर्गेश मिश्रा

खखरेरू /फतेहपुर। फतेहपुर जिले के धाता विकासखंड क्षेत्र स्थित बिछियावां अस्थायी गौशाला के समीप शनिवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब गौशाला से लगभग 150 मीटर दूर ससुर खदेरी नदी किनारे झाड़ियों में एक दर्जन से अधिक गोवंशों के अवशेष, खाल और शरीर के विभिन्न अंग पड़े मिले। घटना की सूचना फैलते ही स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त हो गया। मौके पर पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों, पशु चिकित्सा विभाग की टीम तथा हिंदू संगठनों के पदाधिकारी पहुंच गए। मामले को लेकर हिंदू सुरक्षा परिषद ने गौहत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। वहीं पुलिस ने सभी अवशेषों का पोस्टमार्टम कराकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

चरवाहों ने सबसे पहले देखे अवशेष

जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह क्षेत्र के कुछ चरवाहे अपने पशुओं को चराने के लिए ससुर खदेरी नदी किनारे पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी नजर झाड़ियों में बड़ी संख्या में पड़े गोवंशों के अवशेषों पर पड़ी। पास जाकर देखने पर वहां खाल, हड्डियां और शरीर के अन्य अंग बिखरे मिले। इसकी सूचना तत्काल स्थानीय लोगों और हिंदू सुरक्षा परिषद के गौ रक्षा जिला अध्यक्ष को दी गई। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। संगठन के पदाधिकारियों का दावा है कि करीब 500 मीटर के दायरे में एक दर्जन से अधिक गोवंशों के अवशेष फैले हुए थे।

पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा

घटना की जानकारी मिलते ही कार्यवाहक थाना प्रभारी श्याम सुंदर गिरी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। प्रारंभिक जांच के दौरान सीमा विवाद की स्थिति स्पष्ट होने के बाद सैनी थाना पुलिस को भी मौके पर बुलाया गया। इसके साथ ही क्षेत्राधिकारी सिराथू सत्येंद्र तिवारी भी घटनास्थल पहुंचे और पूरे मामले का निरीक्षण किया। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए और उच्चाधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

हिंदू सुरक्षा परिषद ने जताई गौहत्या की आशंका

हिंदू सुरक्षा परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रवि पांडेय ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद कहा कि वहां कथित रूप से खून के निशान और धारदार हथियार कवर मिलने की बात सामने आई है। उनके अनुसार इन परिस्थितियों में बड़े पैमाने पर गौहत्या की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास नहीं होना चाहिए।

ग्रामीणों ने भी उठाए कई सवाल

घटनास्थल पर मौजूद कई ग्रामीणों ने भी मामले को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जहां अवशेष मिले हैं, वह स्थान आसपास के गांवों से लगभग दो किलोमीटर दूर है और वहां तक पहुंचने का रास्ता भी काफी कठिन है। ग्रामीणों के अनुसार इतनी बड़ी संख्या में मृत गोवंशों को इतनी दूर ले जाकर फेंकना सामान्य घटना नहीं लगती। उनका कहना है कि पूरे मामले की वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक कारण सामने आ सकें।

पोस्टमार्टम के बाद दफनाए गए अवशेष

क्षेत्राधिकारी सत्येंद्र तिवारी ने मौके पर पशु चिकित्सकों की टीम बुलाकर सभी गोवंशों के अवशेषों का पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन ने जेसीबी मशीन की सहायता से गड्ढा खुदवाकर सभी अवशेषों को सुरक्षित तरीके से दफना दिया। पुलिस ने घटनास्थल से मिले अन्य संभावित साक्ष्यों को भी कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

सीओ बोले: रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई

क्षेत्राधिकारी सिराथू सत्येंद्र प्रसाद तिवारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य तथा अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार का अपराध सामने आता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मौके पर मौजूद रहे विभिन्न संगठन

घटनास्थल पर हिंदू सुरक्षा परिषद, बजरंग दल सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। इस दौरान हिंदू सुरक्षा परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रवि पांडेय, गौ रक्षा प्रदेश अध्यक्ष आशीष शुक्ला, मंडल अध्यक्ष रोहित पांडेय, तहसील महासचिव शिवम सिंह सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की।

बीडीओ का पक्ष आना बाकी

गौशाला के समीप मिले गोवंशों के अवशेषों के संबंध में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष मिलने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गोवंशों की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई और क्या इस मामले में किसी आपराधिक कृत्य की पुष्टि होती है। जांच पूरी होने तक प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की है।

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