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धाता के उकाथू में मुख्य मार्ग बना तालाब, 60 मीटर तक जलभराव से ग्रामीण बेहाल

जल निकासी के अभाव में ग्रामीणों का जीवन हुआ दूभर, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग रोज झेल रहे परेशानी

रिपोर्ट: दुर्गेश मिश्रा | धाता, फतेहपुर

फतेहपुर: विकास खंड धाता के ग्राम पंचायत उकाथू में जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीणों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हल्की सी बारिश के बाद ही गांव का मुख्य मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। लगभग 60 मीटर तक सड़क पर कई फीट गहरा गंदा पानी और कीचड़ जमा हो जाता है, जिससे यह मार्ग किसी तालाब का रूप ले लेता है। इस समस्या के चलते ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है और लोगों का दैनिक जीवन संकट में पड़ गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, यह मुख्य मार्ग गांव को आसपास के क्षेत्रों से जोड़ने वाला प्रमुख रास्ता है। इसी मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों लोग, बाजार, अस्पताल, विद्यालय और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आते-जाते हैं। लेकिन बारिश के बाद सड़क पर जमा गंदा पानी और दलदल जैसी स्थिति लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा देती है।

सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। छोटे-छोटे बच्चे रोजाना इसी गंदे पानी और कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। कई बार फिसलकर बच्चे घायल हो चुके हैं। गंदे पानी के संपर्क में आने से संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा भी लगातार बना हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर वे हमेशा चिंतित रहते हैं।

महिलाओं और बुजुर्गों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। घर से बाहर निकलते समय उन्हें हर कदम संभलकर रखना पड़ता है। कई बुजुर्ग कीचड़ में फिसलकर चोटिल हो चुके हैं। महिलाओं को घरेलू कार्यों, बाजार और स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है। क्षेत्रीय विधायक, ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधान स्वयं इस मार्ग की बदहाल स्थिति का निरीक्षण कर चुके हैं। इसके बावजूद आज तक समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है, लेकिन धरातल पर कोई कार्य दिखाई नहीं देता। बारिश का मौसम आते ही गांव की यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। सड़क पर जमा बदबूदार पानी के कारण आसपास का वातावरण भी दूषित हो रहा है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ-साथ संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क के किनारे पक्की नाली नहीं होने के कारण वर्षा का पानी निकल नहीं पाता और सड़क पर ही भर जाता है। यदि समय रहते जल निकासी की उचित व्यवस्था कर दी जाए और पक्की नाली का निर्माण करा दिया जाए तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सड़क की मरम्मत कराई जाए तथा दोनों ओर पक्की नालियों का निर्माण कराया जाए, ताकि वर्षा का पानी आसानी से निकल सके और लोगों को राहत मिल सके। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों में विकास और मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने का दावा करती है, लेकिन उकाथू गांव की स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है। आज भी लोग सड़क, जल निकासी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेते हैं और कब तक उकाथू गांव के लोगों को जलभराव और बदहाल सड़क से राहत मिलती है।

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