बिजनौर कलेक्ट्रेट में भारतीय किसान यूनियन टिकैत का विशाल धरना-प्रदर्शन, बिजली बिल और फर्जी मुकदमों के विरोध में किसानों का हुंकार

फर्जी मुकदमे वापस लेने और बिजली विभाग की नीतियों में बदलाव की मांग, प्रशासन को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

ब्यूरो चीफ- मोहम्मद हिफजान

बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के बैनर तले किसानों का विशाल जनसैलाब जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में उमड़ पड़ा। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान, पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए। किसानों ने सरकार और प्रशासन पर उनकी समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

धरना-प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली, किसानों पर दर्ज फर्जी मुकदमों तथा बढ़ते बिजली बिलों को प्रमुख मुद्दा बनाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार और प्रशासन लगातार ऐसी नीतियां लागू कर रहे हैं, जिनका सीधा असर किसानों और आम जनता पर पड़ रहा है।

भारतीय किसान यूनियन टिकैत के पदाधिकारियों ने कहा कि किसानों पर लगाए गए कथित फर्जी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं। उनका आरोप था कि कई किसानों के खिलाफ बिना ठोस आधार के मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिससे किसान मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले किसानों को डराने और दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

धरने में मौजूद किसानों ने बिजली विभाग पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि विभाग मनमाने ढंग से बिजली बिल जारी कर रहा है, जिससे किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि कई बार वास्तविक खपत से अधिक बिल भेजे जाते हैं, जिससे लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

भारतीय किसान यूनियन टिकैत के नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा 2 किलोवाट के स्थान पर 3 किलोवाट का बिजली कनेक्शन लागू किए जाने का निर्णय किसानों और आम उपभोक्ताओं के हित में नहीं है। उनका कहना है कि इस फैसले से बिजली का निश्चित शुल्क बढ़ जाएगा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। किसानों ने मांग की कि सरकार इस निर्णय को तत्काल वापस ले और पुराने नियमों को बहाल करे।

धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए संगठन के मंडल प्रवक्ता आदिल ज़ैदी अपनी टीम के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन हमेशा किसानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी पूरी मजबूती के साथ लड़ती रहेगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेती तो संगठन प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक करेगा।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। कलेक्ट्रेट परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। हालांकि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

किसानों का कहना था कि वे केवल अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार किसानों की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय ऐसे फैसले ले रही है, जिनसे ग्रामीण क्षेत्र और कृषि क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। किसानों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

भारतीय किसान यूनियन टिकैत के नेताओं ने प्रशासन से मांग की कि किसानों पर दर्ज सभी कथित फर्जी मुकदमों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें वापस लिया जाए। साथ ही बिजली विभाग की कथित मनमानी पर रोक लगाई जाए और बढ़े हुए बिजली भार (लोड) संबंधी निर्णय को भी वापस लिया जाए।

फिलहाल धरना-प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की ओर से कोई अंतिम आश्वासन या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। किसान नेताओं का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि किसानों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है। फिलहाल बिजनौर कलेक्ट्रेट में भारतीय किसान यूनियन टिकैत का यह प्रदर्शन जिले की प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का विषय बना हुआ है।

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