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कौशांबी में गोवंशों के अवशेष मिलने से मचा हड़कंप, हिंदू संगठनों ने जताई गौहत्या की आशंका

संवाददाता- दुर्गेश मिश्रा

खखरेरू /फतेहपुर। फतेहपुर जिले के धाता विकासखंड क्षेत्र स्थित बिछियावां अस्थायी गौशाला के समीप शनिवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब गौशाला से लगभग 150 मीटर दूर ससुर खदेरी नदी किनारे झाड़ियों में एक दर्जन से अधिक गोवंशों के अवशेष, खाल और शरीर के विभिन्न अंग पड़े मिले। घटना की सूचना फैलते ही स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त हो गया। मौके पर पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों, पशु चिकित्सा विभाग की टीम तथा हिंदू संगठनों के पदाधिकारी पहुंच गए। मामले को लेकर हिंदू सुरक्षा परिषद ने गौहत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। वहीं पुलिस ने सभी अवशेषों का पोस्टमार्टम कराकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

चरवाहों ने सबसे पहले देखे अवशेष

जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह क्षेत्र के कुछ चरवाहे अपने पशुओं को चराने के लिए ससुर खदेरी नदी किनारे पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी नजर झाड़ियों में बड़ी संख्या में पड़े गोवंशों के अवशेषों पर पड़ी। पास जाकर देखने पर वहां खाल, हड्डियां और शरीर के अन्य अंग बिखरे मिले। इसकी सूचना तत्काल स्थानीय लोगों और हिंदू सुरक्षा परिषद के गौ रक्षा जिला अध्यक्ष को दी गई। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। संगठन के पदाधिकारियों का दावा है कि करीब 500 मीटर के दायरे में एक दर्जन से अधिक गोवंशों के अवशेष फैले हुए थे।

पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा

घटना की जानकारी मिलते ही कार्यवाहक थाना प्रभारी श्याम सुंदर गिरी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। प्रारंभिक जांच के दौरान सीमा विवाद की स्थिति स्पष्ट होने के बाद सैनी थाना पुलिस को भी मौके पर बुलाया गया। इसके साथ ही क्षेत्राधिकारी सिराथू सत्येंद्र तिवारी भी घटनास्थल पहुंचे और पूरे मामले का निरीक्षण किया। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए और उच्चाधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

हिंदू सुरक्षा परिषद ने जताई गौहत्या की आशंका

हिंदू सुरक्षा परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रवि पांडेय ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद कहा कि वहां कथित रूप से खून के निशान और धारदार हथियार कवर मिलने की बात सामने आई है। उनके अनुसार इन परिस्थितियों में बड़े पैमाने पर गौहत्या की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास नहीं होना चाहिए।

ग्रामीणों ने भी उठाए कई सवाल

घटनास्थल पर मौजूद कई ग्रामीणों ने भी मामले को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जहां अवशेष मिले हैं, वह स्थान आसपास के गांवों से लगभग दो किलोमीटर दूर है और वहां तक पहुंचने का रास्ता भी काफी कठिन है। ग्रामीणों के अनुसार इतनी बड़ी संख्या में मृत गोवंशों को इतनी दूर ले जाकर फेंकना सामान्य घटना नहीं लगती। उनका कहना है कि पूरे मामले की वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक कारण सामने आ सकें।

पोस्टमार्टम के बाद दफनाए गए अवशेष

क्षेत्राधिकारी सत्येंद्र तिवारी ने मौके पर पशु चिकित्सकों की टीम बुलाकर सभी गोवंशों के अवशेषों का पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन ने जेसीबी मशीन की सहायता से गड्ढा खुदवाकर सभी अवशेषों को सुरक्षित तरीके से दफना दिया। पुलिस ने घटनास्थल से मिले अन्य संभावित साक्ष्यों को भी कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

सीओ बोले: रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई

क्षेत्राधिकारी सिराथू सत्येंद्र प्रसाद तिवारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य तथा अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार का अपराध सामने आता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मौके पर मौजूद रहे विभिन्न संगठन

घटनास्थल पर हिंदू सुरक्षा परिषद, बजरंग दल सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। इस दौरान हिंदू सुरक्षा परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रवि पांडेय, गौ रक्षा प्रदेश अध्यक्ष आशीष शुक्ला, मंडल अध्यक्ष रोहित पांडेय, तहसील महासचिव शिवम सिंह सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की।

बीडीओ का पक्ष आना बाकी

गौशाला के समीप मिले गोवंशों के अवशेषों के संबंध में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष मिलने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गोवंशों की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई और क्या इस मामले में किसी आपराधिक कृत्य की पुष्टि होती है। जांच पूरी होने तक प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की है।

आलापुर के कई गांवों में बढ़ता तनाव: फायरिंग, मारपीट और गुटबाजी से सहमे ग्रामीण, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल

 संवाददाता- श्रीकीर्ति उपाध्याय

अंबेडकर नगर। आलापुर तहसील क्षेत्र के कई गांव इन दिनों लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं, गुटबाजी और वर्चस्व की लड़ाई को लेकर चर्चा में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रामनगर महुवर, गोहनारपुर, सरैया हरदो, महमदपुर देवी दयाल, जल्लापुर, मसेना मिर्जापुर और धनुकारा सहित कई गांवों में आए दिन विवाद, मारपीट, फायरिंग, गाली-गलौज और छेड़छाड़ जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। इन घटनाओं ने ग्रामीणों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है, वहीं कानून-व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, अधिकांश विवाद छोटी-छोटी बातों से शुरू होकर हिंसक रूप ले लेते हैं। कभी आपसी वर्चस्व की लड़ाई, कभी गुटीय राजनीति तो कभी व्यक्तिगत रंजिश के कारण तनाव बढ़ जाता है। आरोप है कि कुछ मनबढ़ युवक कानून का भय खो चुके हैं और मामूली विवाद को भी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर मारपीट, फायरिंग और धमकी जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। इससे गांवों का सामाजिक वातावरण लगातार प्रभावित हो रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गांवों में किशोरावस्था से लेकर लगभग 25 वर्ष तक के कुछ युवाओं का एक वर्ग छोटी-छोटी बातों पर आक्रामक रवैया अपनाता है। ऐसे मामलों में कई बार गुटबाजी खुलकर सामने आती है, जिससे विवाद और गंभीर हो जाते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी अप्रिय घटना भी हो सकती है।

ग्रामीण बताते हैं कि लगातार हो रही घटनाओं के कारण महिलाएं, बुजुर्ग और छात्र-छात्राएं भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। शाम ढलने के बाद कई लोग अनावश्यक रूप से घरों से बाहर निकलने से बचते हैं। गांवों में पहले जैसी सामाजिक एकता, भाईचारा और आपसी विश्वास का माहौल कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।

प्रशासन और पुलिस की जवाबदेही

स्थानीय लोगों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद प्रशासन की सक्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं। उनका मानना है कि केवल मुकदमा दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अराजक तत्वों के विरुद्ध समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई भी जरूरी है, ताकि अपराधियों में कानून का भय बना रहे।

ग्रामीणों ने सुझाव दिया है कि संवेदनशील गांवों में नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए। इसके साथ ही संदिग्ध और शरारती तत्वों की निगरानी, हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन और कानून-व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि पुलिस की नियमित मौजूदगी से असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

सामाजिक संवाद की भी जरूरत

सामाजिक स्तर पर भी कई लोगों ने संवाद और जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया है। उनका मानना है कि उपजिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी और थाना प्रभारी की संयुक्त पहल पर गांव-गांव चौपाल आयोजित की जानी चाहिए, जहां लोगों को कानून का सम्मान, सामाजिक सौहार्द और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रेरित किया जाए। इससे छोटी-छोटी बातों पर होने वाले विवादों को बढ़ने से रोका जा सकता है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिन लोगों के विरुद्ध लगातार आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, उनकी गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जानी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट अथवा अन्य वैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि कानून का भय स्थापित हो और आम नागरिक सुरक्षित महसूस कर सकें।

जनहित में जरूरी पहल

हालांकि इन घटनाओं को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पुलिस, प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज के जिम्मेदार लोग मिलकर समय रहते ठोस कदम उठाएं तो बिगड़ते हालात पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों की पहचान शांति, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द से होती है, न कि गुटबाजी, हिंसा और अराजकता से। ऐसे में लगातार बढ़ते विवाद और हिंसक घटनाएं न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि ग्रामीण समाज के सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित कर रही हैं।

स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि प्रशासन रोकथाम आधारित पुलिसिंग, नियमित निगरानी, प्रभावी कार्रवाई और सामाजिक संवाद के माध्यम से क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा। इससे न केवल अपराधों पर अंकुश लगेगा, बल्कि ग्रामीणों का कानून और प्रशासन पर विश्वास भी और मजबूत होगा।

Fatehpur Child Safety: नामजद आरोपी की गिरफ्तारी न होने से सहमा पीड़ित परिवार, एसपी से सुरक्षा और त्वरित कार्रवाई की गुहार

 संवाददाता-दुर्गेश कुमार मिश्रा

खखरेरू/फतेहपुर।

खखरेरू थाना क्षेत्र में दर्ज एक गंभीर प्रकरण में नामजद आरोपी की अब तक गिरफ्तारी न होने से पीड़ित परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन कर रहा है। पीड़ित पक्ष ने पुलिस अधीक्षक एसपी को शिकायती पत्र सौंपकर आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी, निष्पक्ष कार्रवाई तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि आरोपी खुलेआम घूम रहा है और लगातार मुकदमा वापस लेने तथा समझौता करने का दबाव बना रहा है, जिससे पूरा परिवार और दोनों मासूम बच्चियां दहशत में हैं।

शिकायती पत्र के अनुसार, घटना 16 जून की सुबह करीब 11 बजे की है। पीड़ित की आठ वर्षीय पुत्री अपनी नौ वर्षीय सहेली के साथ गांव के बाहर जामुन बीनने गई थी। आरोप है कि इसी दौरान गांव निवासी गोलू पुत्र हीरालाल दोनों बच्चियों को बहला-फुसलाकर गांव के किनारे स्थित एक सुनसान मकान में ले गया, जहां उनके साथ अशोभनीय हरकत और छेड़छाड़ की गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने तत्काल खखरेरू थाने में तहरीर दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। हालांकि, काफी समय बीत जाने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, जिससे पीड़ित परिवार में पुलिस कार्रवाई को लेकर चिंता और असंतोष बढ़ता जा रहा है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी आरोपी खुलेआम गांव में घूम रहा है। इतना ही नहीं, वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए समझौता करने और मुकदमा वापस लेने का दबाव बना रहा है। परिजनों का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण परिवार के सदस्य मानसिक तनाव में हैं और दोनों बच्चियां भी भय के माहौल से बाहर नहीं निकल पा रही हैं।

परिवार का कहना है कि उन्हें अपनी और बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। इसी कारण उन्होंने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष एवं प्रभावी विवेचना, कड़ी कानूनी कार्रवाई तथा पूरे परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े गंभीर मामलों में त्वरित कार्रवाई बेहद आवश्यक है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में यदि समय पर कार्रवाई नहीं होती, तो पीड़ित पक्ष पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है और न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है। फिलहाल मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी शिकायत पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए आवश्यक कदम उठाएगा।

केडीए से अवैध इमारत ढहाने की गुहार, भूमाफिया पर कब्जे का आरोप

सुनील तिवारी

कानपुर: शहर में एक अवैध निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पीड़ित परिवार ने कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के उपाध्यक्ष को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि भूमाफिया और उसके सहयोगियों ने तमंचे के बल पर जबरन बिल्डर एग्रीमेंट कराकर अवैध निर्माण कराया और अब ध्वस्तीकरण आदेश के बावजूद इमारत पर कब्जा जमाए हुए हैं। पीड़ित ने अवैध भवन को तत्काल जमीदोज कराने और कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की हैं। शिकायत के अनुसार मकान स्वामिनी सवा असलम की संपत्ति पर कथित रूप से वसीम खान ने बच्चों को हथियार के बल पर धमकाकर बिल्डर एग्रीमेंट कराया। इसके बाद मानकों के विपरीत बहुमंजिला निर्माण कराया गया। शिकायतों के आधार पर केडीए ने भवन को सील किया था और निगरानी की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस को सौंपी गई थी। आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत से सील भवन के भीतर निर्माण कार्य जारी रखा गया। बाद में केडीए ने भवन ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया, जिसे आयुक्त स्तर पर दायर अपील भी खारिज होने के बाद बरकरार रखा गया। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि इसके बावजूद कुछ दबंगों ने भवन पर अवैध कब्जा कर लिया है और खाली करने से इनकार कर रहे हैं। साथ ही धमकी दी जा रही है कि यदि भवन में आग, भूकंप या अन्य किसी कारण से कोई हादसा हुआ तो उसका जिम्मेदार केडीए या भूमाफिया और उसके सहयोगियों होगे प्रार्थना पत्र में केडीए से अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त कराने तथा कब्जाधारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई हैं।

2022 का आदेश अबतक धरातल से विहीन

कानपुर विकास प्राधिकरण केडीए ने 23 फरवरी 2022 को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था, वह आज भी जस की तस खड़ी है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि भवन का स्वीकृत नक्शा तक नहीं है, इसके बावजूद पांच खंड की इमारत अब भी मौजूद है। इससे केडीए की कार्यप्रणाली और आदेशों के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के आगे प्रशासनिक मशीनरी बेबस नजर आई और अवैध निर्माण को हटाने की बजाय उसे संरक्षण मिलता रहा। इस मामले में केडीए के अधिकारियों की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि भवन का नक्शा स्वीकृत नहीं था और ध्वस्तीकरण का आदेश भी जारी हो चुका था, तो आखिर आज तक इमारत क्यों नहीं गिराई गई। उनका आरोप है कि केडीए कार्यालय में जारी आदेश केवल कागजों तक सीमित रह गया और धरातल पर उसका पालन नहीं हुआ। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ध्वस्तीकरण आदेश का तत्काल पालन कराया जाए तथा यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।

पीड़ित के प्रमुख आरोप

  • तमंचे के बल पर जबरन बिल्डर एग्रीमेंट कराया गया।
  • मानकों के विपरीत बहुमंजिला अवैध निर्माण कराया गया।
  • केडीए ने सील किया, फिर भी निर्माण कार्य जारी रहा।
  • ध्वस्तीकरण आदेश के बावजूद दबंगों ने कब्जा कर रखा है।
  • धमकी दी जा रही है और जिम्मेदारी पीड़ित पर डाली जा रही है।

    पीड़ित की मांग

  • अवैध इमारत को तत्काल ध्वस्त किया जाए
  • कब्जाधारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए

 

 

 

Kanpur News: 43 दिन की फरारी खत्म: महंत पर हमले के आरोपी गैंगस्टर अजय ठाकुर गिरफ्तार

डेस्क रिपोर्ट

कानपुर। रावतपुर क्षेत्र स्थित त्रिलोकी धाम आश्रम के महंत पर हमले के बहुचर्चित मामले में पिछले 43 दिनों से फरार चल रहे गैंगस्टर अजय ठाकुर को शनिवार दोपहर कानपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसे रतनलाल नगर क्षेत्र में एक कार वॉशिंग सेंटर के पास से घेराबंदी कर पकड़ा। गिरफ्तारी के दौरान अजय ठाकुर ने कथित तौर पर एनकाउंटर की आशंका जताते हुए जोर-जोर से कहा कि अगर मुझे कुछ हुआ तो इसके जिम्मेदार ये लोग होंगे। इसके बाद पुलिस उसे अपने साथ लेकर चली गई। अजय ठाकुर की गिरफ्तारी उस मामले में हुई है, जिसमें 29 अप्रैल को केशवपुरम स्थित त्रिलोकी धाम आश्रम के महंत रविकांत शुक्ला उर्फ भोला गिरी पर जानलेवा हमला किया गया था। इस घटना के बाद से पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। हालांकि फरार रहने के दौरान भी अजय ठाकुर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहा और कई वीडियो पोस्ट करता रहा, जिससे पुलिस पर उसकी गिरफ्तारी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।

रतनलाल नगर से हुई गिरफ्तारी

पुलिस सूत्रों के अनुसार शनिवार दोपहर सूचना मिली कि अजय ठाकुर रतनलाल नगर क्षेत्र में एक कार वॉशिंग सेंटर के पास मौजूद है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम सक्रिय हुई और इलाके की घेराबंदी कर उसे बिना किसी बड़ी झड़प के हिरासत में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गिरफ्तारी के दौरान अजय ठाकुर ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कथित तौर पर एनकाउंटर की आशंका जताई और सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि उसके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए कुछ लोग जिम्मेदार होंगे। इस बयान का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि पुलिस की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

महंत पर हमले का क्या है मामला?

यह पूरा मामला 29 अप्रैल का है। केशवपुरम स्थित राणा प्रताप नगर के त्रिलोकी धाम आश्रम के महंत रविकांत शुक्ला उर्फ भोला गिरी ने आरोप लगाया था कि अजय ठाकुर अक्सर आश्रम के पास रहने वाली एक छात्रा से मिलने आता था। महंत ने कई बार इसका विरोध किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ता गया। महंत के मुताबिक, घटना वाले दिन अजय ठाकुर अपने कुछ साथियों के साथ आश्रम पहुंचा। गेट खुलते ही उसने हमला कर दिया। जान बचाने के लिए उन्हें आश्रम के एक कमरे में छिपना पड़ा। आरोप है कि हमलावरों ने बाहर से पथराव भी किया और आश्रम परिसर में दहशत का माहौल बना दिया। घटना के बाद पुलिस ने महंत की शिकायत पर अजय ठाकुर, उसकी कथित गर्लफ्रेंड और उसकी मां के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद से अजय फरार चल रहा था।

33 आपराधिक मुकदमे दर्ज

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार गैंगस्टर अजय ठाकुर के खिलाफ हत्या के प्रयास, मारपीट, धमकी, गैंगस्टर एक्ट सहित कुल 33 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस का दावा है कि वह लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है और उसके खिलाफ कई गंभीर मामलों में कार्रवाई चल रही है। इसी वजह से उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।

फरारी के दौरान भी सोशल मीडिया पर सक्रिय

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि फरार रहने के बावजूद अजय ठाकुर सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहा। बताया जा रहा है कि पिछले 43 दिनों में उसने कई वीडियो और रील साझा कीं। इन वीडियो में वह लग्जरी गाड़ियों के काफिले, स्टंटबाजी और अपने समर्थकों के साथ सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई देता रहा। सोशल मीडिया पर उसकी मौजूदगी को लेकर लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए कि जब आरोपी खुलेआम वीडियो पोस्ट कर रहा था तो उसकी गिरफ्तारी में इतना समय क्यों लगा। हालांकि पुलिस का कहना है कि आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था और उसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगाई गई थीं।

मां ने जताई फर्जी एनकाउंटर की आशंका

अजय ठाकुर की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही उसकी मां रावतपुर थाने पहुंचीं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर बेटे के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि उनके बेटे का फर्जी एनकाउंटर किया जा सकता है। इस संबंध में उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कानूनी प्रक्रिया का पालन करने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की। पुलिस की ओर से फिलहाल इस आरोप पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

आगे क्या होगी कार्रवाई?

पुलिस अब अजय ठाकुर से पूछताछ कर रही है। संभावना है कि पूछताछ के दौरान महंत पर हमले में शामिल अन्य आरोपियों, फरारी के दौरान मदद करने वालों और सोशल मीडिया गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि फरारी के दौरान उसे किसने संरक्षण दिया और वह लगातार पुलिस की पकड़ से कैसे बचता रहा।

जांच जारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अजय ठाकुर द्वारा गिरफ्तारी के दौरान दिए गए कथित बयान और उसकी मां द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा सकती है। फिलहाल पुलिस ने कानून के तहत कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।

Uttar Pradesh Police: वर्दी नहीं, जिम्मेदारी की पहचान: डीसीपी दीपेंद्र नाथ चौधरी का प्रेरणादायक पुलिस सफर

डेस्क रिपोर्ट

कानपुर। पुलिस की वर्दी पहनना एक जिम्मेदारी है, लेकिन उस जिम्मेदारी को ईमानदारी, निष्पक्षता और अनुशासन के साथ निभाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। उत्तर प्रदेश पुलिस के ऐसे ही अधिकारियों में एक नाम है डीसीपी (दक्षिण) कानपुर नगर दीपेंद्र नाथ चौधरी का, जिन्होंने लगभग तीन दशक की पुलिस सेवा में अपनी कार्यशैली, सख्त कानून व्यवस्था और निष्पक्ष कार्रवाई के दम पर अलग पहचान बनाई है। राज्य पुलिस सेवा (SPS) से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) तक का उनका सफर संघर्ष, मेहनत और समर्पण की मिसाल माना जाता है।

साधारण परिवार से IPS तक का सफर

दीपेंद्र नाथ चौधरी का जन्म 1 जुलाई 1970 को उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जनपद में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने एम.एससी. (जियोफिजिक्स) की पढ़ाई की। विज्ञान के विद्यार्थी रहे चौधरी ने जीवन में प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना और 20 मई 1998 को राज्य पुलिस सेवा (SPS) में भर्ती होकर अपने करियर की शुरुआत की।करीब 26 वर्षों तक विभिन्न जनपदों में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के बाद उनकी उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए उन्हें 2017 बैच के प्रमोटी IPS अधिकारी के रूप में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल किया गया। यह उपलब्धि उनके लंबे अनुभव, ईमानदार कार्यशैली और निरंतर बेहतर प्रदर्शन का परिणाम मानी जाती है।

कानपुर दक्षिण की कमान

वर्तमान में दीपेंद्र नाथ चौधरी 17 मार्च 2025 से पुलिस कमिश्नरेट कानपुर नगर के दक्षिण ज़ोन (DCP South) की कमान संभाल रहे हैं। दक्षिण ज़ोन कानपुर का संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे क्षेत्र में उन्होंने अपराध नियंत्रण, पुलिसिंग में पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई के जरिए अपनी अलग कार्यशैली स्थापित की है।

अपराध के खिलाफ सख्त रुख

डीसीपी दीपेंद्र नाथ चौधरी की पहचान अपराधियों के प्रति सख्त रवैये के लिए की जाती है। उनके नेतृत्व में दक्षिण ज़ोन में अपराधियों, गैंगस्टरों, हिस्ट्रीशीटरों और लुटेरों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए। कई वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी हुई और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए। उनकी प्राथमिकता रही कि अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है। इसी सोच के कारण उन्होंने अपराध नियंत्रण के साथ-साथ पुलिस विभाग के भीतर भी जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया।

पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई

दीपेंद्र नाथ चौधरी की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि वे केवल आम लोगों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि पुलिस विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटते। कानपुर में भूमि कब्ज़ा प्रकरण में जब पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठे तो उन्होंने दो उपनिरीक्षकों को निलंबित करने की कार्रवाई कराई। इस फैसले ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि यदि कोई पुलिसकर्मी भी नियमों का उल्लंघन करेगा तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होगी।

चर्चित मामलों में प्रभावी कार्रवाई

डीसीपी दक्षिण के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान कई चर्चित मामलों में पुलिस ने सफलता हासिल की। इन्हीं में एक मामला शातिर अपराधी लाला उर्फ शमशेर की गिरफ्तारी का रहा। पुलिस मुठभेड़ के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ दस से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज बताए गए थे। इसके अलावा शराब विक्रेता हत्याकांड के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी भी पुलिस के लिए बड़ी सफलता रही। आरोपी को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया और पूरी कार्रवाई की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर की गई। हालांकि सार्वजनिक रिकॉर्ड में उनके पूरे सेवा काल के सभी प्रमुख मामलों की आधिकारिक सूची उपलब्ध नहीं है, लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार इन मामलों में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही है।

जनता के प्रति संवेदनशील, अपराधियों पर सख्ती

दीपेंद्र नाथ चौधरी की कार्यशैली तीन प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित मानी जाती है—

  • अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई।
  • पीड़ितों की शिकायतों पर त्वरित सुनवाई।
  • पुलिस विभाग में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करना।

उनका मानना है कि पुलिस की असली ताकत जनता का विश्वास है। इसलिए किसी भी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई और निष्पक्ष जांच उनकी प्राथमिकता रहती है।

सम्मान और उपलब्धि

दीर्घकालीन उत्कृष्ट सेवाओं के लिए वर्ष 2026 में उन्हें राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त Meritorious Service Medal (MSM) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन पुलिस अधिकारियों को दिया जाता है जिन्होंने लंबे समय तक उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय सेवा प्रदान की हो।

अनुभव बना सबसे बड़ी ताकत

करीब तीन दशक की सेवा के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कानून-व्यवस्था संभाली। लंबे अनुभव ने उन्हें प्रशासनिक निर्णय लेने, संकट की परिस्थितियों से निपटने और पुलिस बल का प्रभावी नेतृत्व करने में दक्ष बनाया। उनकी कार्यशैली में सख्ती के साथ संयम और अनुशासन का संतुलन देखने को मिलता है। यही कारण है कि अधीनस्थ अधिकारी भी उन्हें एक अनुशासित और मार्गदर्शक अधिकारी के रूप में देखते हैं।

प्रेरणा का स्रोत

राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा तक पहुंचने का उनका सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कड़ी मेहनत और ईमानदारी के बल पर प्रशासनिक सेवाओं में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उन्होंने यह साबित किया कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और निष्पक्ष सेवा के दम पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

निष्कर्ष

कुछ अधिकारी अपने पद से पहचाने जाते हैं, जबकि कुछ अपने कार्यों से। डीसीपी दीपेंद्र नाथ चौधरी उन अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने अपनी निष्पक्ष पुलिसिंग, सख्त कानून व्यवस्था, अनुशासन और जनसेवा के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके लिए वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और जिम्मेदारी का दायित्व है। अपराध के खिलाफ सख्ती और आम नागरिक के प्रति संवेदनशीलता उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है।

(नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों और विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। जहां आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, वहां किसी अतिरिक्त दावे का उल्लेख नहीं किया गया है।)

मुख्य बिंदु

  • वर्दी नहीं, जिम्मेदारी की पहचान: जानिए DCP दीपेंद्र नाथ चौधरी का प्रेरणादायक सफर
  • 26 साल की ईमानदार सेवा के बाद बने IPS, अब कानपुर की कानून व्यवस्था की कमान
  • सख्त कार्रवाई, निष्पक्ष पुलिसिंग और अनुशासन: ऐसे हैं DCP दीपेंद्र नाथ चौधरी
  • अपराधियों पर सख्ती, जनता के प्रति संवेदनशीलता: DCP दीपेंद्र नाथ चौधरी की सफलता की कहानी
  • SPS से IPS तक: संघर्ष, समर्पण और ईमानदारी की मिसाल हैं दीपेंद्र नाथ चौधरी
  • कानपुर दक्षिण के DCP दीपेंद्र नाथ चौधरी: जिनके फैसले से अपराधियों में खौफ
  • वर्दी सिर्फ नहीं पहनी, जिम्मेदारी भी निभाई: DCP दीपेंद्र नाथ चौधरी की प्रेरक कहानी
  • राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित IPS दीपेंद्र नाथ चौधरी, जानिए उनके संघर्ष और सफलता की कहानी
  • ईमानदारी, अनुशासन और सख्त पुलिसिंग का दूसरा नाम: DCP दीपेंद्र नाथ चौधरी
  • जनता का भरोसा, अपराधियों में खौफ: DCP दीपेंद्र नाथ चौधरी की पुलिसिंग की पूरी कहानी

Latest Fatehpur News: प्राथमिक विद्यालय में पहले ही दिन दिखी लापरवाही, शिक्षक रहे नदारद; घंटों इंतजार करते रहे बच्चे

संवाददाता दुर्गेश कुमार मिश्रा

फतेहपुर/खखरेरू। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 26 जून से परिषदीय विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत कर दी गई है। प्रदेशभर के अधिकांश विद्यालयों में पहले दिन बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया और उत्साह के साथ पठन-पाठन शुरू हुआ। लेकिन फतेहपुर जिले के धाता विकासखंड के अकिलपुर ऐराना स्थित प्राथमिक विद्यालय से जो तस्वीर सामने आई, उसने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय में पढ़ने वाले मासूम बच्चे सुबह समय से स्कूल तो पहुंच गए, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक समय पर नहीं पहुंचा। काफी देर तक बच्चे स्कूल परिसर में शिक्षकों का इंतजार करते रहे। इस दौरान न तो कक्षाएं संचालित हुईं और न ही बच्चों की पढ़ाई शुरू हो सकी। घटना का वीडियो और तस्वीरें ग्रामीणों ने अपने मोबाइल फोन में कैद कर लीं।

पहले दिन ही बच्चों को करना पड़ा इंतजार

जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह विद्यालय खुलने के निर्धारित समय पर बच्चे स्कूल पहुंच गए थे। नए सत्र को लेकर बच्चों में उत्साह भी दिखाई दे रहा था, लेकिन विद्यालय में शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण उनका उत्साह निराशा में बदल गया। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में कुल तीन शिक्षकों की तैनाती है, लेकिन निर्धारित समय तक कोई शिक्षक नहीं पहुंचा। बच्चे स्कूल परिसर में इधर-उधर घूमते रहे और पढ़ाई शुरू होने का इंतजार करते रहे।

बच्चों ने भी लगाए आरोप

विद्यालय पहुंचे बच्चों ने बताया कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। उनका कहना है कि कई बार शिक्षक निर्धारित समय से देर से विद्यालय पहुंचते हैं। बच्चों के अनुसार, नए सत्र के पहले दिन भी काफी देर तक दो शिक्षक विद्यालय नहीं पहुंचे, जिससे पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। यदि बच्चों की बात सही है, तो यह मामला शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

ग्रामीणों में नाराजगी

घटना के बाद गांव के लोगों में नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों ने विद्यालय परिसर का वीडियो और फोटो बनाकर संबंधित अधिकारियों तक मामला पहुंचाने की बात कही। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन कराने और ड्रॉपआउट रोकने के लिए लगातार अभियान चला रही है। ऐसे में यदि शिक्षक ही समय पर विद्यालय नहीं पहुंचेंगे तो इन प्रयासों का उद्देश्य प्रभावित होगा।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने कहा कि विद्यालयों में बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन यदि शिक्षकों की समयपालन को लेकर निगरानी प्रभावी नहीं होगी, तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजते हैं ताकि उनका भविष्य बेहतर बन सके। लेकिन विद्यालय पहुंचने के बाद यदि शिक्षक ही मौजूद न हों तो बच्चों का मनोबल टूटता है।

कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि शिक्षक निर्धारित समय पर अनुपस्थित पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार तभी संभव है जब सभी शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें और समय पर विद्यालय पहुंचें।

खंड शिक्षा अधिकारी ने दिए जांच के निर्देश

मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) धाता संजय कुमार ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

समयपालन पर जोर जरूरी

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक स्तर पर बच्चों की शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि प्रारंभिक शिक्षा प्रभावित होती है तो उसका असर आगे की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है। इसलिए विद्यालयों में समयपालन, नियमित कक्षाएं और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना आवश्यक है। सरकार भी समय-समय पर विद्यालयों के निरीक्षण और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न दिशा-निर्देश जारी करती रही है। ऐसे में इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

निष्कर्ष

फतेहपुर के अकिलपुर ऐराना प्राथमिक विद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र के पहले ही दिन शिक्षकों के कथित रूप से समय पर न पहुंचने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों और बच्चों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी ने जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई है।

Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़: सिंधी सभा ने की एसआईटी जांच की मांग, दावों की निष्पक्ष जांच पर दिया जोर

डेस्क रिपोर्ट

कानपुर/अयोध्या। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और चांदी की शिलाओं के विवाद ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। इस बार सिंधी सभा ने पूरे मामले की विशेष जांच दल (SIT) से निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। सिंधी सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक अंशवानी ने मामले में दावा करने वाले राजू मनवानी के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की गहन और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि तथ्य सामने आ सकें। हाल के दिनों में राम मंदिर निर्माण, चढ़ावे और चांदी की कथित शिलाओं को लेकर कई तरह के दावे सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। इन दावों के बाद देशभर में चर्चा तेज हुई है। इसी बीच सिंधी सभा ने भी अपना पक्ष रखते हुए जांच की मांग की है।

राजू मनवानी के दावों पर उठाए सवाल

सिंधी सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक अंशवानी ने कहा कि राजू मनवानी द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर 200 चांदी की शिलाओं की चोरी की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राजू मनवानी पहले विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं तथा उन पर कई आपराधिक मामले दर्ज होने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

एसआईटी जांच की उठाई मांग

अंशवानी ने कहा कि पूरे मामले में लगातार अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिससे आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। ऐसे में राज्य सरकार या संबंधित सक्षम प्राधिकारी को एसआईटी गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कराई जाती है तो सभी पक्षों के दावों की वस्तुस्थिति स्पष्ट हो सकेगी और जनता के सामने वास्तविक तथ्य आ पाएंगे।

राम मंदिर ट्रस्ट की छवि धूमिल करने का आरोप

अशोक अंशवानी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की छवि खराब करने के उद्देश्य से भ्रामक प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए, न कि केवल सार्वजनिक आरोप लगाए जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

चंदे का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग

सिंधी सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश और विदेश से प्राप्त चंदे का पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। उनका मानना है कि पारदर्शिता से लोगों का विश्वास और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता हुई है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। वहीं यदि सभी आरोप निराधार साबित होते हैं तो इससे अनावश्यक विवाद भी समाप्त हो जाएगा।

धार्मिक आस्था का भी जुड़ा है मामला

अंशवानी ने कहा कि यह केवल वित्तीय या प्रशासनिक मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से भी जुड़ा विषय है। इसलिए किसी भी प्रकार के आरोप या दावे तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज चाहता है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, ताकि समाज में किसी प्रकार का भ्रम न रहे और जो भी सत्य हो वह जनता के सामने आए।

मामले पर लगातार बढ़ रही चर्चा

गौरतलब है कि राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा, चांदी की शिलाओं और अन्य मुद्दों को लेकर पिछले कुछ समय से विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और अन्य लोगों की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। हालांकि इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान और किसी सक्षम जांच एजेंसी की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

निष्कर्ष

राम मंदिर से जुड़े इस विवाद में सिंधी सभा द्वारा एसआईटी जांच की मांग किए जाने के बाद मामला एक नए चरण में पहुंच गया है। एक ओर आरोप लगाए जा रहे हैं तो दूसरी ओर उन आरोपों पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच ही इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने ला सकती है। जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी दावे को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।

🔴 Highlights

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद में सिंधी सभा ने SIT जांच की मांग उठाई।
  • राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक अंशवानी ने राजू मनवानी के दावों पर सवाल खड़े किए।
  • 200 चांदी की शिलाओं की चोरी के दावे को बताया तथ्यात्मक रूप से अपुष्ट।
  • पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की गई।

Kaushambi News: कौशांबी में LPG टैंकर ब्लास्ट से मचा हड़कंप, कोखराज टोल प्लाजा पर भीषण हादसा; 10 झुलसे, 5 की हालत गंभीर

कौशांबी। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जनपद में शुक्रवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। कोखराज टोल प्लाजा के पास एलपीजी (LPG) गैस से भरे एक टैंकर में अचानक विस्फोट (ब्लास्ट) हो गया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में करीब 10 लोग झुलस गए, जिनमें से 5 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। गंभीर रूप से घायल लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए प्रयागराज के अस्पताल रेफर किया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इतना भीषण था कि विस्फोट की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी। टैंकर में आग लगने के बाद ऊंची-ऊंची लपटें और धुएं का गुबार आसमान में दिखाई देने लगा। आसपास मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई और कई वाहन चालक अपनी जान बचाने के लिए मौके से दूर भागने लगे।

सुबह-सुबह हुआ हादसा, मच गई अफरा-तफरी

जानकारी के अनुसार, यह हादसा शुक्रवार सुबह उस समय हुआ जब कोखराज टोल प्लाजा पर सामान्य रूप से वाहनों की आवाजाही जारी थी। इसी दौरान एलपीजी गैस से भरे टैंकर में अचानक तेज धमाका हुआ और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। विस्फोट के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। आग की चपेट में आने से कई लोग झुलस गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का प्रयास किया।

फायर ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास शुरू किए। आग की तीव्रता को देखते हुए अतिरिक्त संसाधनों को भी मौके पर बुलाया गया। फायर ब्रिगेड की टीम ने काफी मशक्कत के बाद आग को नियंत्रित करने का प्रयास किया ताकि हादसा और न बढ़े तथा आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित किया जा सके।

घायलों को तत्काल अस्पताल भेजा गया

हादसे में झुलसे लोगों को स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मदद से तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद 5 गंभीर घायलों को प्रयागराज रेफर कर दिया गया, जहां उनका उपचार जारी है। डॉक्टरों की टीम घायलों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रशासन ने अस्पतालों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

टोल प्लाजा प्रबंधन का बयान

कोखराज टोल प्लाजा के मैनेजर अनूप पाण्डेय ने बताया कि हादसा सुबह हुआ और सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। उन्होंने कहा कि घायलों को बिना देरी किए अस्पताल भेजा गया तथा प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

हाईवे पर लगा लंबा जाम

हादसे के बाद नेशनल हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सुरक्षा कारणों से पुलिस ने कुछ समय के लिए यातायात रोक दिया, जिससे कई किलोमीटर तक जाम की स्थिति बन गई। कोखराज पुलिस और यातायात पुलिस ने वैकल्पिक मार्गों से वाहनों को निकालने का प्रयास किया। प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और पुलिस द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

पुलिस और प्रशासन राहत कार्य में जुटा

घटना की सूचना मिलते ही कोखराज थाना पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य राहत एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित करते हुए राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया। प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार टैंकर में गैस होने के कारण विस्फोट का प्रभाव काफी व्यापक रहा, हालांकि ब्लास्ट के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

हादसे के कारणों की होगी जांच

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी। विशेषज्ञ टीम यह पता लगाएगी कि विस्फोट तकनीकी खराबी, रिसाव या किसी अन्य कारण से हुआ। जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों में दहशत

भीषण धमाके और आग की लपटों को देखकर आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। कई दुकानदारों ने एहतियातन अपनी दुकानें बंद कर दीं। स्थानीय नागरिकों ने राहत कार्य में प्रशासन का सहयोग भी किया।

निष्कर्ष

कौशांबी के कोखराज टोल प्लाजा पर हुआ यह एलपीजी टैंकर ब्लास्ट एक गंभीर हादसा है, जिसमें कई लोग घायल हुए हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है तथा प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है। घायलों के बेहतर उपचार और यातायात व्यवस्था को सामान्य करने के लिए पुलिस एवं प्रशासन लगातार प्रयासरत हैं।

Uttar Pradesh News: सरकार का बड़ा फैसला: 1 जुलाई से महंगा होगा पासपोर्ट, नई फीस लागू

नई दिल्ली:  केंद्र सरकार ने देशभर के नागरिकों के लिए पासपोर्ट बनवाने और दोबारा जारी कराने की फीस में बढ़ोतरी का फैसला किया है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होंगे। नई व्यवस्था के तहत सामान्य और तत्काल (Tatkaal) दोनों श्रेणियों में पासपोर्ट शुल्क बढ़ा दिया गया है। सरकार के इस निर्णय के बाद अब नया पासपोर्ट बनवाने या पुराने पासपोर्ट का नवीनीकरण (Re-issue) कराने के लिए नागरिकों को पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा। विदेश मंत्रालय का कहना है कि संशोधित शुल्क 1 जुलाई से लागू होगा और उसी के अनुसार आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

36 पेज वाले पासपोर्ट की नई फीस

नई अधिसूचना के अनुसार 36 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट या उसके पुनः जारी (Re-issue) कराने के लिए अब ₹2,500 शुल्क देना होगा। जबकि तत्काल सेवा के तहत यही पासपोर्ट बनवाने पर ₹5,000 का शुल्क लिया जाएगा।वर्तमान में 36 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट की फीस ₹1,500 है। यानी नई व्यवस्था लागू होने के बाद इसमें ₹1,000 की बढ़ोतरी हो जाएगी।

60 पेज वाले पासपोर्ट की फीस भी बढ़ी

विदेश मंत्रालय ने 60 पेज वाले पासपोर्ट की फीस में भी बढ़ोतरी की है। नई व्यवस्था के तहत 60 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट या उसके पुनः जारी कराने के लिए ₹3,500 शुल्क देना होगा। वहीं तत्काल सेवा के माध्यम से आवेदन करने पर ₹6,000 का भुगतान करना होगा। अभी तक 60 पेज वाले पासपोर्ट की फीस ₹2,000 है। नई दर लागू होने के बाद इसमें ₹1,500 की वृद्धि होगी।

तत्काल सेवा होगी और महंगी

जो लोग आपात स्थिति में पासपोर्ट जल्दी बनवाना चाहते हैं, उन्हें अब पहले से अधिक खर्च करना पड़ेगा। सरकार ने तत्काल सेवा के शुल्क में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है।

नई दरों के अनुसार:

  • 36 पेज पासपोर्ट (Tatkaal): ₹5,000
  • 60 पेज पासपोर्ट (Tatkaal): ₹6,000

1 जुलाई से लागू होंगे नए नियम

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 1 जुलाई से प्रभावी होंगे। इसके बाद किए जाने वाले सभी नए आवेदन और पुनः जारी (Re-issue) के मामलों में नई फीस लागू होगी। यदि किसी व्यक्ति ने 1 जुलाई से पहले आवेदन कर दिया है, तो उस पर पुरानी शुल्क व्यवस्था लागू हो सकती है। हालांकि अंतिम प्रक्रिया संबंधित पासपोर्ट सेवा केंद्र के नियमों के अनुसार होगी।

क्यों बढ़ाई गई फीस?

अधिसूचना में शुल्क बढ़ाने के कारणों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि समय-समय पर प्रशासनिक खर्च, डिजिटल सेवाओं के विस्तार, सुरक्षा मानकों और दस्तावेजों की गुणवत्ता में सुधार को देखते हुए शुल्क में संशोधन किया जाता रहा है।

आवेदकों पर क्या होगा असर?

फीस बढ़ने से उन लोगों पर सीधा आर्थिक प्रभाव पड़ेगा जो नया पासपोर्ट बनवाने या पुराने पासपोर्ट का नवीनीकरण कराने की योजना बना रहे हैं। विशेष रूप से तत्काल सेवा लेने वाले आवेदकों को अब पहले से अधिक राशि खर्च करनी होगी।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति का पासपोर्ट जल्द समाप्त होने वाला है और वह पुरानी शुल्क व्यवस्था का लाभ लेना चाहता है, तो उसे 1 जुलाई से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करने पर विचार करना चाहिए, यदि यह नियमों के अनुरूप संभव हो।

निष्कर्ष

सरकार द्वारा पासपोर्ट शुल्क में की गई यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2026 से लागू होगी। नई दरों के अनुसार सामान्य और तत्काल दोनों श्रेणियों में पासपोर्ट बनवाना पहले की तुलना में महंगा हो जाएगा। विदेश मंत्रालय ने नागरिकों से नई शुल्क व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आवेदन करने की अपील की है।

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