Home Blog

Khakheru News: हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से दो बंदरों की मौत, बिजली विभाग की लापरवाही पर ग्रामीणों में आक्रोश

खखरेरू/फतेहपुर। थाना क्षेत्र के कनपुरवा गांव के आलमपुर गेरिया इलाके में बिजली विभाग की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से दो बंदरों की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद ग्रामीणों में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों और बजरंग दल हिंद के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि खेत के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन काफी नीचे झूल रही है, जिसके चलते हादसा हुआ। बताया गया कि घटना उस समय हुई जब दो बंदर आपस में लड़ते हुए खेत के ऊपर से गुजर रही बिजली की लाइन के संपर्क में आ गए। ग्रामीणों के अनुसार तार जमीन से काफी कम ऊंचाई पर लटक रहे थे। हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने के बाद दोनों बंदरों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। हादसे का मंजर देखकर ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। लोगों ने बिजली विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते झूलते तारों को ठीक करा दिया जाता तो हादसा टाला जा सकता था।

छह महीने से शिकायत का दावा

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इलाके में हाईटेंशन लाइन काफी नीचे झूल रही है और इस संबंध में पिछले करीब छह महीने से बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को जानकारी दी जा रही थी। ग्रामीणों के मुताबिक, खेतों के ऊपर से गुजर रही लाइन को ऊंचा कराने और तारों को ठीक तरीके से कसने की मांग लगातार की गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि हाईटेंशन लाइन केवल बंदरों के लिए ही खतरा नहीं है, बल्कि खेतों में काम करने वाले किसानों और आसपास के लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर जोखिम बनी हुई है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते तारों को ठीक नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। हालांकि, बिजली विभाग की ओर से शिकायतों और कार्रवाई में देरी के संबंध में कोई आधिकारिक बयान इस खबर के तैयार होने तक सामने नहीं आया है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी है।

हादसे के बाद मौके पर पहुंची भीड़

दो बंदरों की मौत की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। घटना को लेकर लोगों में आक्रोश था। ग्रामीणों ने बिजली विभाग से मांग की कि क्षेत्र में झूल रही हाईटेंशन लाइन का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और उसे सुरक्षित ऊंचाई पर किया जाए। ग्रामीणों का कहना था कि बिजली के तार खेतों के ऊपर से गुजरते हैं और किसान खेती-किसानी के काम से अक्सर इन्हीं स्थानों पर आते-जाते हैं। ऐसे में नीचे झूल रही हाईटेंशन लाइन कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। लोगों ने विभाग से यह भी मांग की कि क्षेत्र में बिजली के पोल और तारों की स्थिति की जांच कराकर जहां भी तार मानक से कम ऊंचाई पर हैं, उन्हें तत्काल दुरुस्त कराया जाए।

बजरंग दल हिंद के पदाधिकारी पहुंचे

घटना की सूचना मिलने के बाद बजरंग दल हिंद के पदाधिकारी आशीष शुक्ला भी समर्थकों और ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटना पर नाराजगी जताते हुए बिजली विभाग से तारों को तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की। बताया गया कि मृत बंदरों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार भी कराया गया। इस दौरान मौजूद लोगों ने मृत बेजुबान जीवों के प्रति संवेदना व्यक्त की और बिजली विभाग से भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। आशीष शुक्ला ने आरोप लगाया कि यदि बिजली विभाग ने ग्रामीणों की शिकायतों को समय रहते गंभीरता से लिया होता तो यह घटना टाली जा सकती थी। उन्होंने कहा कि बिजली के हाईटेंशन तारों को सुरक्षित ऊंचाई पर रखना विभाग की जिम्मेदारी है।

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

घटना के बाद ग्रामीणों और बजरंग दल हिंद के कार्यकर्ताओं ने बिजली विभाग के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी। उनका कहना है कि यदि हाईटेंशन लाइन को तत्काल ठीक नहीं कराया गया तो वे विभाग के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि वर्तमान घटना में दो बेजुबान जानवरों की जान गई है, लेकिन यदि तारों की स्थिति नहीं सुधारी गई तो भविष्य में किसी किसान या राहगीर के साथ भी गंभीर हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने बिजली विभाग के अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करने और समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।

सुरक्षा को लेकर उठे सवाल

हाईटेंशन लाइन के जमीन के नजदीक होने की शिकायत के बाद अब बिजली व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार खेती वाले क्षेत्र में बिजली की 11 हजार वोल्ट की लाइन का कम ऊंचाई पर होना गंभीर जोखिम है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खेतों में किसान ट्रैक्टर, कृषि उपकरण और अन्य साधनों के साथ काम करते हैं। ऐसे में यदि बिजली के तार पर्याप्त ऊंचाई पर नहीं हैं तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने विभाग से केवल घटना वाले स्थान पर ही नहीं, बल्कि आसपास के पूरे क्षेत्र में हाईटेंशन लाइनों का निरीक्षण कराने की मांग की है।

विभागीय कार्रवाई का इंतजार

दो बंदरों की मौत के बाद अब ग्रामीण बिजली विभाग की ओर से कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। लोगों की मांग है कि मौके का निरीक्षण कर तारों को सुरक्षित ऊंचाई पर किया जाए और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। फिलहाल घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है और बिजली विभाग की कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बेजुबान जानवरों की मौत को चेतावनी के रूप में लेते हुए विभाग को अब तत्काल कदम उठाना चाहिए। मामले में बिजली विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हाईटेंशन लाइन की वास्तविक ऊंचाई कितनी थी, क्या पूर्व में कोई शिकायत दर्ज कराई गई थी और तारों को दुरुस्त करने के लिए विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की गई।

संदिग्ध परिस्थितियों में घर के अंदर मिला 65 वर्षीय बुजुर्ग का शव, पुलिस जांच में जुटी

खखरेरू/फतेहपुर। थाना क्षेत्र के पौली गांव में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक 65 वर्षीय बुजुर्ग का शव संदिग्ध परिस्थितियों में उनके घर के अंदर मिला। मृतक की पहचान पौली गांव निवासी मोहम्मद साबिर (65) पुत्र अब्दुल रहमान के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जुट गई। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटना से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर जांच शुरू कर दी है। मौत की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों की स्थिति साफ हो सकेगी। वहीं घटना के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, पुलिस ने किसी भी तरह की चर्चा या आशंका की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

रोजाना पड़ोसियों के साथ नमाज के लिए जाते थे

ग्रामीणों के मुताबिक मोहम्मद साबिर प्रतिदिन सुबह करीब चार बजे पड़ोसियों के साथ नमाज के लिए जाया करते थे। रविवार सुबह जब वह अपने साथियों के साथ नमाज के लिए नहीं पहुंचे तो पड़ोसियों को चिंता हुई। साथी उन्हें बुलाने के लिए उनके घर पहुंचे। काफी आवाज देने के बावजूद जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो पड़ोसियों ने घर के अंदर जाकर देखा। वहां आंगन में जाल से बंधी रस्सी के सहारे मोहम्मद साबिर का शव लटका हुआ मिला। शव देखते ही पड़ोसी हैरान रह गए और घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। घटना की जानकारी कुछ ही देर में पूरे गांव में फैल गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। पुलिस के पहुंचने के बाद शव को नीचे उतारकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई।

पत्नी रिश्तेदारी में गई थी

परिजनों के अनुसार मृतक की पत्नी शनिवार को रिश्तेदारी में रामपुर गई हुई थीं। घटना के समय घर में मोहम्मद साबिर के साथ उनकी बड़ी बहू गुलफ्शा बानो मौजूद थीं।मृतक के परिवार के अन्य सदस्य भी घटना के समय घर पर मौजूद नहीं थे। मृतक का बड़ा बेटा शाहिद रोजी-रोटी के सिलसिले में सऊदी अरब में रहता है, जबकि उनके दो अन्य बेटे कासिम और राशिद अपने परिवार के साथ गुजरात के सूरत शहर में रहते हैं। पिता की मौत की जानकारी मिलने के बाद दोनों बेटे सूरत से अपने गांव के लिए रवाना हो गए। वहीं विदेश में रह रहे बड़े बेटे को भी घटना की जानकारी दे दी गई है।

घटना के बाद ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चा

बुजुर्ग की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद गांव में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ ग्रामीणों ने पारिवारिक विवाद की आशंका को लेकर सवाल उठाए। वहीं मृतक के मोबाइल फोन से डाटा डिलीट होने की चर्चा भी सामने आई। हालांकि, इन चर्चाओं की पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले घटना के सभी पहलुओं की जांच जरूरी है। मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या है, यह फिलहाल जांच का विषय है। पुलिस घटनास्थल से संबंधित जानकारी जुटाने के साथ-साथ परिजनों और आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की उम्मीद है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और मृतक की मौत से पहले क्या परिस्थितियां थीं। घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध जानकारी को जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

परिवार में मचा कोहराम

मोहम्मद साबिर की मौत की खबर मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। सूरत में रह रहे उनके दोनों बेटे पिता की मौत की सूचना मिलते ही घर के लिए रवाना हो गए। वहीं विदेश में रह रहे बड़े बेटे को भी घटना की जानकारी दी गई है। ग्रामीणों के अनुसार मोहम्मद साबिर रोजाना की तरह सुबह नमाज के लिए जाने वाले थे, लेकिन रविवार को उनके नमाज के लिए नहीं पहुंचने के बाद पड़ोसियों को शक हुआ। यदि पड़ोसी उन्हें बुलाने के लिए घर नहीं पहुंचते तो घटना की जानकारी मिलने में और समय लग सकता था। घटना के बाद गांव में भी लोग स्तब्ध हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बुजुर्ग की मौत की परिस्थितियां स्पष्ट होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर सामने आएगी।

पुलिस कर रही हर पहलू की जांच

थाना प्रभारी सतपाल सिंह ने बताया कि मोहम्मद साबिर का शव घर के अंदर मिला है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की जांच-पड़ताल की जा रही है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल मौत के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस द्वारा मामले की जांच किए जाने के बीच ग्रामीणों की निगाहें अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 65 वर्षीय मोहम्मद साबिर की मौत किन परिस्थितियों में हुई। फिलहाल पुलिस ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और परिजनों तथा ग्रामीणों से जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में किसी भी प्रकार की पुष्टि या निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

Khakheru Breaking News: शौच के लिए घर से निकली 16 वर्षीय किशोरी लापता, तलाश में जुटी पुलिस

खखरेरू/फतेहपुर। थाना क्षेत्र के हरदासपुर सराफन गांव में 16 वर्षीय किशोरी के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने का मामला सामने आया है। किशोरी के अचानक लापता होने के बाद परिजनों में चिंता का माहौल है। परिवार वालों ने अपने स्तर से काफी खोजबीन की, लेकिन किशोरी का कोई सुराग नहीं मिल सका। इसके बाद पिता ने खखरेरू थाने पहुंचकर पुलिस को तहरीर दी और अपनी बेटी की सकुशल बरामदगी की गुहार लगाई। पुलिस ने पिता की तहरीर के आधार पर किशोरी की गुमशुदगी दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ संभावित स्थानों पर भी किशोरी के बारे में जानकारी जुटा रही है।

शौच के लिए घर से निकली थी किशोरी

हरदासपुर सराफन गांव निवासी बरमदीन पुत्र स्व. सहदेव ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उनकी 16 वर्षीय पुत्री वर्षा देवी बीती 21 अगस्त की रात करीब नौ बजे शौच के लिए घर से निकली थी। परिजनों के मुताबिक, किशोरी के कुछ देर में वापस आने की उम्मीद थी, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी वह घर नहीं लौटी। किशोरी के वापस न आने पर परिवार के लोगों को चिंता हुई। परिजनों ने पहले घर के आसपास उसकी तलाश की। इसके बाद गांव और आसपास के इलाकों में भी खोजबीन की गई। परिवार के लोगों ने संभावित स्थानों और रिश्तेदारियों में भी जानकारी की, लेकिन कहीं से किशोरी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

काफी खोजबीन के बाद भी नहीं मिला सुराग

परिजनों के अनुसार, किशोरी के लापता होने के बाद उन्होंने अपने स्तर से हरसंभव स्थान पर उसकी तलाश की। गांव में लोगों से पूछताछ करने के साथ ही आसपास के गांवों और रिश्तेदारों से भी संपर्क किया गया। इसके बावजूद किशोरी का पता नहीं चल पाया। लगातार तलाश के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला तो परिवार ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। किशोरी के पिता ने स्थानीय थाने पहुंचकर पुलिस को लिखित प्रार्थना पत्र दिया और बेटी को तलाश कर सकुशल घर वापस लाने की मांग की। परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गुमशुदगी दर्ज की और किशोरी की तलाश शुरू कर दी।

पुलिस ने शुरू की जांच

थाना प्रभारी सतपाल सिंह ने बताया कि किशोरी के पिता की तहरीर के आधार पर गुमशुदगी दर्ज कर ली गई है। पुलिस टीम किशोरी की तलाश में जुटी हुई है। संभावित स्थानों पर जानकारी जुटाई जा रही है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि किशोरी की तलाश के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। परिवार से भी किशोरी से संबंधित जरूरी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि उसकी तलाश को आगे बढ़ाया जा सके।

परिजनों में चिंता का माहौल

किशोरी के अचानक लापता होने के बाद उसके परिजन काफी परेशान हैं। परिवार के लोगों को उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता सता रही है। परिजनों ने पुलिस से जल्द से जल्द किशोरी का पता लगाने और उसे सकुशल बरामद करने की अपील की है। गांव में भी किशोरी के लापता होने की घटना को लेकर चर्चा है। हालांकि, किशोरी के लापता होने के पीछे क्या वजह है, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस की जांच और किशोरी के बरामद होने के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

कई बिंदुओं पर पुलिस कर रही पड़ताल

पुलिस किशोरी के लापता होने की परिस्थितियों को समझने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी जुटा रही है। जिस समय किशोरी घर से निकली थी, उस दौरान वह कहां गई, उसके बाद किन लोगों से संपर्क हुआ और वह किस दिशा में गई इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर तलाश की जा रही है। परिजनों और आसपास के लोगों से भी जानकारी ली जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि किशोरी के बारे में किसी व्यक्ति को कोई जानकारी तो नहीं है। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता किशोरी को जल्द से जल्द सुरक्षित बरामद करना है। मामले में आगे की कार्रवाई किशोरी की बरामदगी और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

परिजनों ने की सकुशल बरामदगी की मांग

किशोरी के पिता ने पुलिस प्रशासन से उनकी बेटी को जल्द से जल्द खोजकर सकुशल घर लाने की मांग की है। परिवार का कहना है कि वह लगातार उसकी तलाश कर रहे हैं और पुलिस से पूरी मदद की उम्मीद है। पुलिस ने भी परिजनों को भरोसा दिलाया है कि किशोरी की तलाश के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। थाना प्रभारी के अनुसार गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस टीम मामले की जांच में जुटी है। फिलहाल 16 वर्षीय वर्षा देवी के लापता होने का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। किशोरी कहां गई और उसके लापता होने की वास्तविक वजह क्या है, इसका जवाब पुलिस जांच पूरी होने और किशोरी के मिलने के बाद ही सामने आएगा।

Fatehpur News: मायके गई महिला के बंद घर में नकब, लाखों के जेवर व नकदी चोरी

खखरेरू/फतेहपुर। खखरेरू थाना क्षेत्र के किशनपुर चिराई गांव में एक महिला के बंद मकान को अज्ञात चोरों ने निशाना बना लिया। बताया जा रहा है कि महिला अपने पति के साथ मायके गई हुई थी। इसी दौरान चोरों ने घर के पीछे की दीवार में नकब लगाकर अंदर प्रवेश किया और बक्से में रखे जेवरात व नकदी चोरी कर फरार हो गए। महिला जब 21 अगस्त को अपने घर वापस लौटी तो पीछे की दीवार कटी देखकर चोरी की घटना का पता चला। इसके बाद परिवार में हड़कंप मच गया। पीड़िता ने घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस को देते हुए अज्ञात चोरों के खिलाफ तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने और मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। चोरी की घटना के बाद गांव में भी लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

16 अगस्त को पति के साथ गई थी मायके

किशनपुर चिराई गांव निवासी रीता देवी पत्नी शारदा प्रसाद के मुताबिक वह 16 अगस्त को अपने पति के साथ घर में ताला लगाकर मायके चली गई थीं। उनका मायका खागा थाना क्षेत्र के सवंत गांव में बताया गया है। घर बंद होने की जानकारी चोरों को कैसे मिली और उन्होंने किस समय वारदात को अंजाम दिया, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है। पीड़िता के अनुसार, वह 21 अगस्त को पति के साथ वापस अपने घर पहुंचीं। घर पहुंचने के बाद जब उन्होंने पीछे की तरफ देखा तो मकान की दीवार कटी हुई थी। दीवार में नकब लगा देखकर उन्हें अनहोनी की आशंका हुई। इसके बाद जब पति-पत्नी घर के अंदर पहुंचे और कमरों की जांच की तो सामान अस्त-व्यस्त मिला। बक्से को खोलकर देखा गया तो उसमें रखे जेवरात और नकदी गायब थी। इसके बाद चोरी की जानकारी आसपास के लोगों को दी गई और पुलिस को सूचना दी गई।

लाखों के जेवरात चोरी होने का दावा

पीड़िता ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि चोर घर से करीब ढाई सौ ग्राम वजन की कमरपेटी, पायल, बेटी की पायल और पांच हजार रुपये नकद चोरी कर ले गए। पीड़िता के अनुसार चोरी गए जेवरात की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। घर में रखे जेवरात और नकदी गायब मिलने के बाद परिवार के लोग काफी परेशान हैं। पीड़िता का कहना है कि चोरों ने घर की पीछे की दीवार काटकर अंदर प्रवेश किया और बक्से में रखे सामान को निशाना बनाया। वारदात के बाद चोर किस रास्ते से फरार हुए, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

बंद मकान को बनाया निशाना

घटना को लेकर आशंका जताई जा रही है कि चोरों ने पहले घर की रेकी की होगी और परिवार के बाहर जाने के बाद वारदात को अंजाम दिया। हालांकि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना में कितने लोग शामिल थे और चोरी की वारदात किस तरह की गई। पीड़िता के अनुसार, चोरों ने घर के पीछे की दीवार को काटा और उसी रास्ते से अंदर प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने बक्से में रखे जेवरात और नकदी निकाल ली। घटना में घर के मुख्य दरवाजे के बजाय पीछे की दीवार को निशाना बनाया गया, जिससे चोरों ने चोरी को अंजाम देने के लिए अलग रास्ता अपनाया।

घर लौटने पर सामने आया मामला

रीता देवी जब 21 अगस्त को अपने पति के साथ घर पहुंचीं तो उन्हें मकान की स्थिति देखकर संदेह हुआ। पीछे की दीवार कटी होने के बाद उन्होंने घर के अंदर जाकर सामान की जांच की। बक्से में रखे जेवरात और नकदी गायब मिलने के बाद चोरी की पुष्टि हुई। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने घर के आसपास का जायजा लिया और पुलिस को सूचना देने की सलाह दी। इसके बाद पीड़िता ने थाना खखरेरू में पहुंचकर लिखित तहरीर दी।

पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

पीड़िता ने अज्ञात चोरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस से मामले की जांच करने की अपील की है। अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि बंद मकान में चोरी करने वाले कौन लोग थे और वारदात में किस तरह प्रवेश किया गया। पुलिस आसपास के क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटा सकती है और घटना के संबंध में स्थानीय लोगों से पूछताछ कर सकती है। साथ ही चोरी गए सामान और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। फिलहाल पीड़िता की ओर से लगाए गए चोरी के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। चोरी गए जेवरात की वास्तविक कीमत और बरामदगी के संबंध में भी पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

थाना प्रभारी ने पति-पत्नी के विवाद का भी किया जिक्र

घटना के संबंध में थाना प्रभारी सत्यपाल सिंह ने बताया कि पति-पत्नी के बीच विवाद को लेकर पूर्व में भी आरोप-प्रत्यारोप सामने आते रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जाएगी। थाना प्रभारी के बयान के बाद मामले में केवल चोरी की घटना ही नहीं, बल्कि परिवार के आपसी विवाद से जुड़े पहलुओं की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि चोरी की घटना के संबंध में पीड़िता ने अज्ञात चोरों के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता

किशनपुर चिराई गांव में बंद मकान में नकब लगाकर चोरी की घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि घर बंद रहने के दौरान चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए। ग्रामीणों ने पुलिस से मांग की है कि घटना की गंभीरता से जांच कर चोरी करने वालों का पता लगाया जाए और यदि आरोपी सामने आते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही ग्रामीणों ने क्षेत्र में रात्रि गश्त बढ़ाने की मांग भी की है। फिलहाल पुलिस को दी गई तहरीर के बाद मामले की जांच का इंतजार है। पीड़िता और उसके परिवार को उम्मीद है कि पुलिस जल्द ही घटना का खुलासा कर चोरी गए जेवरात और नकदी की बरामदगी कराएगी। वहीं पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वारदात के पीछे कौन लोग शामिल थे और बंद मकान में नकब लगाने की घटना को किस तरह अंजाम दिया गया।

Fatehpur News: पौली में पुलिस चौकी के लिए जमीन चिह्नित, जल्द शुरू होगा संचालन

खखरेरू/फतेहपुर। थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने तथा ग्रामीणों को बेहतर पुलिस सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पौली गांव में प्रस्तावित पुलिस चौकी के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। शनिवार को एसडीएम खागा राहुल कश्यप और क्षेत्राधिकारी खागा रवि प्रकाश सिंह ने राजस्व टीम के साथ पौली गांव पहुंचकर प्रस्तावित पुलिस चौकी के लिए भूमि का निरीक्षण किया और स्थल का चिह्नीकरण कराया। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में जल्द पुलिस चौकी शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। अधिकारियों ने मौके पर उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ ही चौकी के संचालन को लेकर संबंधित लोगों को आवश्यक निर्देश दिए।

सड़क किनारे खाली मकान को किया गया चिह्नित

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पौली गांव निवासी यासीन अंसारी के सड़क किनारे स्थित खाली पड़े मकान को अस्थायी रूप से पुलिस चौकी संचालित करने के लिए चिह्नित किया। अधिकारियों का मानना है कि सड़क किनारे स्थित होने के कारण यहां से पुलिस गतिविधियों को संचालित करने में सुविधा होगी और आसपास के गांवों तक पुलिस की पहुंच भी बेहतर रहेगी। एसडीएम और सीओ ने संबंधित लोगों को मकान की साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने कहा कि आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कराकर अस्थायी रूप से पुलिस चौकी का संचालन जल्द शुरू कराया जाए, जिससे ग्रामीणों को पुलिस सुविधा का लाभ मिल सके।

अपराध नियंत्रण में मिलेगी मदद

पौली और आसपास के गांवों में पुलिस चौकी स्थापित होने से अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर छोटी-बड़ी घटनाओं, विवादों और अन्य पुलिस संबंधी मामलों के लिए लोगों को थाना स्तर तक जाना पड़ता है। चौकी शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों को प्राथमिक स्तर पर पुलिस सहायता उपलब्ध हो सकेगी। पुलिस की नियमित मौजूदगी से क्षेत्र में असामाजिक गतिविधियों पर भी नजर रखने में मदद मिलेगी। अधिकारियों के मुताबिक किसी भी आपात स्थिति में पुलिस के मौके पर जल्द पहुंचने की संभावना बढ़ेगी। इससे न केवल अपराधियों में कानून का भय कायम होगा, बल्कि ग्रामीणों के बीच सुरक्षा की भावना भी मजबूत होगी।

आधा दर्जन से अधिक गांवों को मिलेगा लाभ

प्रस्तावित पुलिस चौकी का लाभ केवल पौली गांव तक सीमित नहीं रहेगा। आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को भी इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। चौकी स्थापित होने के बाद इन गांवों में पुलिस की गश्त और सक्रियता बढ़ाई जा सकेगी। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पुलिस की स्थायी मौजूदगी लंबे समय से जरूरी महसूस की जा रही थी। कई बार घटना या विवाद की सूचना मिलने के बाद पुलिस के पहुंचने में समय लग जाता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर पुलिस चौकी होने से शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की उम्मीद है।

अस्थायी चौकी के बाद स्थायी व्यवस्था की उम्मीद

प्रशासन की ओर से फिलहाल खाली मकान में अस्थायी रूप से पुलिस चौकी शुरू कराने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने मकान की साफ-सफाई और जरूरी व्यवस्थाओं को जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद पुलिस चौकी का संचालन शुरू किए जाने की संभावना है। अस्थायी व्यवस्था शुरू होने के बाद पुलिस की मौजूदगी और क्षेत्र की जरूरतों का आकलन करते हुए आगे की व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जा सकता है। चौकी के लिए जमीन का चिह्नीकरण प्रशासन की ओर से उठाया गया अहम कदम माना जा रहा है।

अधिकारियों ने किया मौके का निरीक्षण

शनिवार को एसडीएम खागा राहुल कश्यप और क्षेत्राधिकारी खागा रवि प्रकाश सिंह राजस्व टीम के साथ पौली गांव पहुंचे। अधिकारियों ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया और चौकी के संचालन के लिए उपलब्ध जगह तथा आसपास के क्षेत्र की स्थिति देखी। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और पुलिस चौकी के संचालन से जुड़ी आवश्यकताओं को लेकर भी जानकारी ली। संबंधित लोगों को निर्देश दिया गया कि साफ-सफाई सहित जरूरी व्यवस्थाएं जल्द पूरी की जाएं, ताकि चौकी शुरू करने में किसी तरह की देरी न हो।

ग्रामीणों में खुशी का माहौल

पौली गांव में पुलिस चौकी स्थापित किए जाने की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन और पुलिस विभाग के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पुलिस चौकी खुलने से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी और अपराध की घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि चौकी शुरू होने के बाद पुलिस की नियमित गश्त बढ़ेगी और संदिग्ध गतिविधियों पर भी प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी। इसके साथ ही किसी घटना की स्थिति में पुलिस को सूचना देने और सहायता प्राप्त करने में भी आसानी होगी।

पुलिस की बढ़ेगी सक्रियता

प्रस्तावित चौकी को क्षेत्र की कानून-व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस की स्थानीय स्तर पर मौजूदगी से न केवल अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी, बल्कि ग्रामीणों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित हो सकेगा। प्रशासन का प्रयास है कि अस्थायी रूप से चिन्हित मकान में जल्द से जल्द पुलिस चौकी का संचालन शुरू हो। इससे पौली सहित आसपास के गांवों में पुलिस की पहुंच बढ़ेगी और लोगों को अपनी शिकायतों के लिए दूर स्थित थाना जाने की आवश्यकता कम होगी।फिलहाल जमीन चिह्नित होने के बाद चौकी शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। अब ग्रामीणों को इंतजार है कि प्रशासन के निर्देश के अनुसार आवश्यक तैयारियां पूरी कर पुलिस चौकी का संचालन कब तक शुरू किया जाता है। यदि चौकी जल्द शुरू होती है तो क्षेत्र में पुलिस की सक्रियता बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीणों को त्वरित पुलिस सहायता मिलने की उम्मीद है।

बेटी के शादी के जेवर और बेटे की दुकान की नकदी ले उड़े चोर,फतेहपुर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

खखरेरू/फतेहपुर। खखरेरू थाना क्षेत्र में चोरों के हौसले लगातार बुलंद होते नजर आ रहे हैं। बिछियावां गांव में बीती रात अज्ञात चोरों ने एक मकान को निशाना बनाते हुए पीछे की दीवार में नकब लगाकर करीब 10 लाख रुपये कीमत के जेवरात और 10 हजार रुपये नकद चोरी कर लिए। वारदात को अंजाम देने के बाद चोर घर से दो बक्से और एक सूटकेस भी उठा ले गए। इसके बाद चोर करीब 200 मीटर दूर स्थित ट्यूबवेल के पास पहुंचे, जहां उन्होंने बक्सों और सूटकेस के ताले तोड़कर कीमती सामान और नकदी पार कर दी। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों में चोरी की वारदात को लेकर दहशत का माहौल है। खास बात यह है कि जिस स्थान पर चोरी की घटना हुई, वहां से करीब 400 मीटर की दूरी पर पुलिस चेक प्वाइंट भी बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि चेक प्वाइंट पर अक्सर पुलिसकर्मी मौजूद नहीं रहते और यह स्थान अधिकांश समय वीरान पड़ा रहता है। ऐसे में पुलिस की गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

खेत की रखवाली करने गया था परिवार का मुखिया

बिछियावां गांव निवासी महेंद्र पाल उर्फ मुन्नू पाल ने बताया कि वह रात में खेतों की रखवाली करने के लिए चले गए थे। घर पर उनकी पत्नी और बेटा कमरे के बाहर टीन के नीचे सो रहे थे। इसी दौरान अज्ञात चोरों ने मकान के पीछे की दीवार को काटकर कमरे में प्रवेश किया। चोरों ने कमरे के अंदर रखे दो बक्से और एक सूटकेस अपने कब्जे में ले लिए। इसके बाद वे सामान लेकर घर से करीब 200 मीटर दूर अनिल सिंह के ट्यूबवेल के पास पहुंचे। बताया जा रहा है कि चोरों ने वहीं बक्सों और सूटकेस के ताले तोड़े और उनमें रखे जेवरात तथा नकदी निकाल ली। चोरी के बाद चोर बक्सों और अन्य सामान को वहीं छोड़कर फरार हो गए। घटना के दौरान घर के बाहर सो रहे परिजनों को इसकी भनक तक नहीं लगी। सुबह जब परिवार के लोग कमरे के अंदर पहुंचे तो चोरी की घटना का पता चला।

 

बेटी की शादी के जेवर भी थे बक्से में

पीड़ित परिवार के लिए चोरी की यह घटना इसलिए भी बेहद पीड़ादायक है क्योंकि चोरों के हाथ बेटी की शादी के जेवरात भी लग गए। पीड़ित परिवार के अनुसार उनकी पुत्री पुष्पा देवी की शादी 9 मार्च 2026 को पचमई गांव निवासी किशनपाल से हुई थी। शादी के बाद पुष्पा देवी अपने पति के साथ दिल्ली के रोहिणी चली गई थीं और अपने शादी के अधिकांश जेवर मायके में ही रख गई थीं। परिजनों के मुताबिक चोरी हुए सामान में पुत्री के दो सेट झुमके, अंगूठियां, मंगलसूत्र, तीन लॉकेट और पायल शामिल हैं। इसके अलावा पीड़ित की पत्नी के भी कई आभूषण चोरी हुए हैं। इनमें मंगलसूत्र, टॉप्स, छागल, हाफ पेटी और पायल बताए गए हैं। परिवार का कहना है कि लंबे समय से संभालकर रखे गए इन जेवरात के चोरी हो जाने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। अनुमान के मुताबिक चोरी गए जेवरात की कुल कीमत करीब 13 लाख रुपये बताई जा रही है।

 

बेटे की दुकान की 10 हजार रुपये नकदी भी चोरी

चोरों ने केवल जेवरात पर ही हाथ साफ नहीं किया, बल्कि बक्से में रखी बेटे की दुकान की करीब 10 हजार रुपये की नकदी भी चोरी कर ली। पीड़ित परिवार के मुताबिक यह रकम दुकान के कारोबार से संबंधित थी और उसे बक्से में सुरक्षित रखा गया था। चोरों ने कमरे में रखे सामान को खंगालने के बाद बक्से और सूटकेस घर से बाहर निकाले और करीब 200 मीटर दूर ले जाकर उनके ताले तोड़ दिए। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि चोरों ने वारदात को पूरी तैयारी के साथ अंजाम दिया।

सुबह कमरे में पहुंची पत्नी तो खुला चोरी का राज

पीड़ित परिवार के अनुसार सुबह करीब पांच बजे महेंद्र पाल की पत्नी चारपाई रखने के लिए कमरे के अंदर गईं। कमरे में पहुंचते ही उन्हें सामान अस्त-व्यस्त दिखाई दिया। जब उन्होंने पीछे की ओर देखा तो मकान की दीवार कटी हुई थी। दीवार में नकब लगा देखकर उन्हें चोरी की आशंका हुई। इसके बाद परिजनों ने बक्से और सूटकेस की तलाश शुरू की। घर से करीब 200 मीटर दूर ट्यूबवेल के पास सामान बिखरा हुआ मिला। बक्सों और सूटकेस के ताले टूटे हुए थे और उसमें रखे जेवर तथा नकदी गायब थी। घटना की जानकारी तत्काल डायल 112 और स्थानीय पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने मकान के पीछे की दीवार, कमरे और आसपास के क्षेत्र का जायजा लिया। इसके साथ ही ट्यूबवेल के पास पड़े कपड़े, बक्से और अन्य सामान को एकत्र कराकर पीड़ित के घर पहुंचवाया गया।

पुलिस चेक प्वाइंट की मौजूदगी के बावजूद चोरी

घटना के बाद ग्रामीणों ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पहले भी चोरी और नकबजनी की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसके बावजूद प्रभावी पुलिस गश्त नहीं होने से चोरों के हौसले बढ़े हुए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक चोरी वाले मकान से करीब 400 मीटर की दूरी पर पुलिस चेक प्वाइंट बनाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां अक्सर पुलिसकर्मी मौजूद नहीं रहते और रात के समय चेक प्वाइंट वीरान पड़ा रहता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पुलिस चेक प्वाइंट के इतने करीब इतनी बड़ी चोरी की घटना को चोरों ने कैसे अंजाम दे दिया। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से क्षेत्र में रात्रि गश्त बढ़ाने, चेक प्वाइंट पर पुलिसकर्मियों की नियमित तैनाती सुनिश्चित करने और चोरी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की है।

जांच में जुटी पुलिस

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास के क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों और संभावित सुरागों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वारदात में कितने लोग शामिल थे और चोर किस रास्ते से मौके पर पहुंचे तथा वारदात के बाद किस दिशा में फरार हुए। इस संबंध में थाना प्रभारी सतपाल सिंह ने बताया कि चोरी की सूचना प्राप्त हुई है। मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल पीड़ित परिवार की शिकायत और पुलिस जांच के बाद ही चोरी की घटना में शामिल आरोपियों का पता चल सकेगा। करीब 13 लाख रुपये के जेवरात और 10 हजार रुपये नकद की चोरी ने गांव में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब ग्रामीणों की नजर पुलिस की जांच और चोरों की गिरफ्तारी पर टिकी है।

Lucknow News: लखनऊ में बैंककर्मी महिला की गोली मारकर हत्या, पति पर आरोप

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के गोमती नगर थाना क्षेत्र में गुरुवार दोपहर एक बैंककर्मी महिला की गोली मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। वारदात आईसीआईसीआई बैंक के बाहर हुई, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू कर दी। मृतका की पहचान दिव्या मिश्रा के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दिव्या मिश्रा और उनके पति के बीच पारिवारिक विवाद चल रहा था। आरोप है कि गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे पति ने महिला को बैंक के बाहर बुलाया और वहां गोली चला दी। घटना में महिला को दो गोलियां लगने की बात सामने आई है। गंभीर रूप से घायल महिला की मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए पांच टीमें गठित की हैं। इसके साथ ही घटनास्थल और आसपास के इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि घटना से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए जा सकें।

बैंक के बाहर हुई वारदात से मचा हड़कंप

गोमती नगर जैसे व्यस्त इलाके में बैंक के बाहर दिनदहाड़े गोली चलने की घटना से लोगों में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों और आसपास मौजूद लोगों के बीच कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। घटना की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर आसपास के लोगों से जानकारी जुटाने का प्रयास किया। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी और आरोपी की तलाश शुरू कर दी। मृतका के संबंध में सामने आई जानकारी के अनुसार वह बैंक में कार्यरत थीं। परिवार से जुड़े लोगों के मुताबिक, दिव्या मिश्रा का अपने पति के साथ पारिवारिक विवाद चल रहा था। हालांकि, विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और घटना से पहले दोनों के बीच क्या बातचीत हुई, इसकी जानकारी पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

पति पर गोली मारने का आरोप

प्रारंभिक जांच में पति पर महिला को गोली मारने का आरोप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने महिला को बैंक के बाहर बुलाया था। इसके बाद कथित तौर पर दोनों के बीच बातचीत हुई और फिर गोली चलने की घटना हुई। महिला को दो गोलियां लगने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गोली किस हथियार से चलाई गई, आरोपी के पास हथियार कहां से आया और घटना के समय वहां कौन-कौन लोग मौजूद थे। पुलिस घटना के हर पहलू की जांच कर रही है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में वारदात की वजह और घटनाक्रम से जुड़े कई सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।

सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

घटना की जांच में सीसीटीवी फुटेज को अहम माना जा रहा है। पुलिस ने बैंक के आसपास और घटनास्थल के नजदीक लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगालनी शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी किस रास्ते से घटनास्थल तक पहुंचा और वारदात के बाद किस दिशा में गया। इसके अलावा पुलिस आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है। घटना के समय बैंक के आसपास मौजूद लोगों से मिली जानकारी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है। पुलिस की टीमें आरोपी के संभावित ठिकानों पर भी तलाश कर रही हैं। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पांच अलग-अलग टीमों के गठन की जानकारी सामने आई है।

पारिवारिक विवाद की बात सामने आई

पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में पति-पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद की बात सामने आई है। हालांकि पुलिस अभी हत्या की वास्तविक वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। पारिवारिक विवाद किस मुद्दे को लेकर था, क्या पहले भी दोनों के बीच विवाद हुआ था और घटना से पहले आरोपी ने महिला को बैंक के बाहर क्यों बुलाया था, इन सभी सवालों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही हत्या के पीछे की वास्तविक वजह और पूरी परिस्थितियां स्पष्ट हो पाएंगी।

पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा की बहन थीं दिव्या

मृतका दिव्या मिश्रा को लेकर यह जानकारी भी सामने आई है कि वह पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा की बहन थीं। घटना की जानकारी सामने आने के बाद परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है। परिवार के लिए यह घटना बेहद दुखद और अचानक हुई है। पुलिस अब घटना से जुड़े सभी तथ्यों को जुटाकर मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

घटनास्थल पर पहुंची पुलिस की टीमें

वारदात की सूचना मिलने के बाद गोमती नगर पुलिस के साथ अन्य पुलिस टीमें भी मौके पर पहुंचीं। घटनास्थल को सुरक्षित कर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में भी निगरानी बढ़ाई है। जांच टीमों की ओर से घटनास्थल का निरीक्षण किया जा रहा है। इसके साथ ही सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है। पुलिस आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

हत्या की वजह जांच के बाद होगी स्पष्ट

फिलहाल पुलिस की शुरुआती जांच में पारिवारिक विवाद को घटना की संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन हत्या के पीछे की वास्तविक वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के साथ अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम को जोड़ने का प्रयास करेगी। मामले में यह भी जांच की जा रही है कि महिला और आरोपी के बीच पहले से किसी प्रकार का विवाद था या नहीं। पुलिस परिवार के सदस्यों और परिचितों से भी जानकारी जुटा सकती है, ताकि विवाद की पृष्ठभूमि सामने आ सके।

आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पांच टीमें गठित

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पांच टीमें गठित की हैं। इन टीमों को अलग-अलग संभावित स्थानों पर भेजे जाने की बात सामने आई है। पुलिस आरोपी के मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी मदद ले सकती है। फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान आरोपी को पकड़ने और हत्या के कारणों का पता लगाने पर है। गोमती नगर थाना क्षेत्र में बैंक के बाहर दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, घटना की पूरी तस्वीर पुलिस जांच पूरी होने और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपी की तलाश जारी है। हत्या से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

सिंगापुर में भारतीय कारोबारी दिवालिया घोषित, 407 प्रवासी श्रमिकों की सैलरी बकाया

सिंगापुर में एक भारतीय मूल के कारोबारी और कई कंपनियों के निदेशक के खिलाफ दिवालियापन की कार्रवाई की गई है। कारोबारी रामू पलानी वेलु पर 400 से अधिक प्रवासी श्रमिकों का वेतन बकाया होने का मामला सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुल 407 श्रमिकों ने बकाया वेतन के लिए दावे दायर किए हैं। इनमें भारतीय नागरिकों समेत विभिन्न प्रवासी श्रमिक शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रामू पलानी वेलु सिंगापुर के स्थायी निवासी हैं और सात स्थानीय कंपनियों के निदेशक हैं। ये कंपनियां एयर-कंडीशनिंग, प्लंबिंग और निर्माण सेवाओं से जुड़ी हुई हैं। इनमें केपीए इंजीनियरिंग, एसके इंडस्ट्रीज और वीवीआर प्लांट इंजीनियरिंग समेत अन्य कंपनियां शामिल हैं। मामला उस समय गंभीर हो गया, जब बड़ी संख्या में श्रमिकों ने कई सप्ताह से वेतन नहीं मिलने की शिकायत की। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें दो महीने से अधिक समय तक वेतन नहीं मिला था। वेतन नहीं मिलने के कारण प्रवासी श्रमिकों को रोजमर्रा के खर्च, आवास और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में परेशानी का सामना करना पड़ा।

407 श्रमिकों ने बकाया वेतन के दावे किए

मिली जानकारी के मुताबिक, कुल 407 कर्मचारियों ने अपने बकाया वेतन को लेकर दावे दायर किए हैं। इनमें बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक शामिल हैं। कई कर्मचारियों के लिए वेतन ही उनके परिवार की आय का प्रमुख स्रोत होता है। ऐसे में लंबे समय तक वेतन नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होने की बात सामने आई है। कुछ श्रमिकों को कथित तौर पर दो महीने से भी अधिक समय से वेतन नहीं मिला था। लगातार भुगतान नहीं होने के बाद श्रमिकों ने संबंधित अधिकारियों से मदद मांगनी शुरू की। 22 जून को 100 से अधिक श्रमिकों के मानव संसाधन मंत्रालय के कार्यालय पहुंचने के बाद मामला और सामने आया। श्रमिकों ने वहां अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं और बकाया वेतन दिलाने में मदद की मांग की।

डॉरमेटरी खाली करने के नोटिस से भी बढ़ी परेशानी

रिपोर्ट के अनुसार, मानव संसाधन अधिकारियों को कंपनी के कर्मचारियों के बकाया वेतन से जुड़ी समस्या की जानकारी पहले से थी। 8 जून को जारी किए गए डॉरमेटरी निष्कासन नोटिस से प्रभावित केपीए इंजीनियरिंग के कर्मचारियों से अधिकारियों ने बातचीत की थी। वेतन बकाया होने के साथ आवास से संबंधित परेशानी ने श्रमिकों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। प्रवासी श्रमिकों के लिए नौकरी और आवास दोनों महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में डॉरमेटरी से जुड़े नोटिस और वेतन भुगतान में देरी ने स्थिति को गंभीर बना दिया। अधिकारियों ने श्रमिकों के सामूहिक रूप से मानव संसाधन कार्यालय पहुंचने से पहले ही कंपनी के निदेशकों से संपर्क करने का प्रयास किया था। इसका उद्देश्य बकाया वेतन से जुड़े मामले को सुलझाने और श्रमिकों की शिकायतों पर कार्रवाई करना था।

बकाया वेतन का मामला सामने आने के बाद विदेश में थे रामू

जब बकाया वेतन का मामला सार्वजनिक रूप से सामने आया तो यह जानकारी सामने आई कि रामू पलानी वेलु उस समय सिंगापुर से बाहर थे। रिपोर्ट के मुताबिक, वह 26 जून को वापस सिंगापुर लौटे और मानव संसाधन कार्यालय की जांच में सहयोग किया। मामले की जांच और श्रमिकों के दावों के बीच अधिकारियों की ओर से कंपनी के निदेशकों से संपर्क करने की कोशिश की गई। इसके बाद कारोबारी की वापसी और जांच में सहयोग की जानकारी सामने आई।

9 जुलाई को दिवालियापन के लिए किया आवेदन

कानून मंत्रालय के दिवालियापन कार्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार, रामू पलानी वेलु ने 9 जुलाई को दिवालियापन के लिए आवेदन किया था। इसके बाद उनके खिलाफ 13 अगस्त को दिवालियापन आदेश जारी किया गया। दिवालियापन की प्रक्रिया किसी व्यक्ति की वित्तीय स्थिति और उसके बकाया दायित्वों से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया होती है। इस मामले में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के वेतन दावे सामने आने के कारण श्रमिकों के बकाया भुगतान का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, दिवालियापन आदेश जारी होने का मतलब यह अपने आप नहीं है कि सभी आरोपों में व्यक्तिगत दोष साबित हो गया है। श्रमिकों के दावों और संबंधित कंपनियों की वित्तीय स्थिति से जुड़े मामलों पर कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत आगे निर्णय लिया जाएगा।

वेतन नहीं देने पर सिंगापुर में कड़े प्रावधान

सिंगापुर में कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं करना गंभीर श्रम कानून उल्लंघन माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वेतन का भुगतान नहीं करने वाले नियोक्ताओं को प्रत्येक आरोप पर 3,000 से 15,000 सिंगापुर डॉलर तक का जुर्माना और छह महीने तक की जेल का सामना करना पड़ सकता है। इस प्रावधान का उद्देश्य कर्मचारियों के वेतन और उनके श्रम अधिकारों की सुरक्षा करना है। प्रवासी श्रमिकों के मामलों में संबंधित अधिकारी बकाया वेतन के दावों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करते हैं।

प्रवासी श्रमिकों के सामने आई आर्थिक चुनौती

इस मामले ने सिंगापुर में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों के सामने आने वाली आर्थिक चुनौतियों को भी उजागर किया है। विदेश में काम करने वाले कर्मचारी नियमित वेतन पर निर्भर रहते हैं। वेतन में देरी होने पर उनके लिए भोजन, आवास, परिवहन और परिवार को भेजी जाने वाली रकम का इंतजाम करना मुश्किल हो सकता है। कई प्रवासी श्रमिक अपने परिवारों की आर्थिक जिम्मेदारी भी संभालते हैं। ऐसे में कई महीनों का वेतन अटकने से उनकी स्थिति गंभीर हो सकती है। इस मामले में भी 407 श्रमिकों के बकाया वेतन के दावे सामने आने के बाद अधिकारियों का ध्यान इस ओर गया।

कंपनियों और कर्मचारियों के दावों पर आगे की प्रक्रिया

रामू पलानी वेलु से जुड़ी सात कंपनियां एयर-कंडीशनिंग, प्लंबिंग और निर्माण क्षेत्र में काम करती हैं। इन कंपनियों में बड़ी संख्या में श्रमिक कार्यरत थे। बकाया वेतन के दावों के बाद अब संबंधित कंपनियों की वित्तीय स्थिति और कर्मचारियों के दावों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। दिवालियापन आदेश के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उपलब्ध संपत्तियों और देनदारियों का आकलन किया जा सकता है। कर्मचारियों के बकाया वेतन से जुड़े दावों का निपटारा संबंधित नियमों के अनुसार किया जाएगा। फिलहाल मामले में 407 श्रमिकों के दावे, कंपनियों की वित्तीय स्थिति और बकाया वेतन की वास्तविक राशि से जुड़े सभी विवरण संबंधित प्रक्रिया के तहत स्पष्ट होंगे।

श्रमिकों को भुगतान का इंतजार

सिंगापुर में सामने आए इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन 407 श्रमिकों का वेतन कथित रूप से बकाया है, उन्हें उनका पैसा कब और किस प्रक्रिया के तहत मिलेगा। श्रमिकों ने अधिकारियों से मदद की मांग की है और मामले में प्रशासनिक तथा कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। रामू पलानी वेलु के खिलाफ 13 अगस्त को दिवालियापन आदेश जारी होने के बाद अब संबंधित रिकॉर्ड और श्रमिकों के दावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया चलेगी। वहीं, वेतन भुगतान से जुड़े कानूनों के तहत नियोक्ताओं की जिम्मेदारी और संभावित कार्रवाई का मुद्दा भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। फिलहाल यह मामला सिंगापुर में प्रवासी श्रमिकों के बकाया वेतन से जुड़ी बड़ी कार्रवाई के रूप में सामने आया है। 407 श्रमिकों के वेतन दावों और सात कंपनियों से जुड़े इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।

Khakhreru News: कोट पीएचसी में डॉक्टर नदारद, लैब टेक्नीशियन के भरोसे मरीजों का इलाज

खखरेरू/फतेहपुर। धाता विकासखंड के यमुना तटवर्ती कोट गांव में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल में तैनात चिकित्सक के नियमित रूप से मौजूद न रहने के कारण मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उनका कहना है कि डॉक्टर की गैरमौजूदगी में मरीजों को कभी फार्मासिस्ट तो कभी लैब टेक्नीशियन देखने को मजबूर हैं। कोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र है। ग्रामीणों के अनुसार करीब पांच हजार से अधिक आबादी इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है। सामान्य बीमारी से लेकर बुखार, सर्दी-जुकाम और मच्छरजनित बीमारियों से पीड़ित लोग यहां इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। लेकिन डॉक्टर के उपलब्ध न होने पर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।

डॉक्टर नहीं मिलतीं तो लौट जाते हैं मरीज

ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाले मरीजों को सबसे बड़ी समस्या डॉक्टर की उपलब्धता को लेकर होती है। कई बार मरीज सुबह से अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन चिकित्सक के नहीं मिलने पर उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक, कोट गांव से दूसरा अस्पताल करीब 10 से 12 किलोमीटर दूर है। ऐसे में बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को दूसरे अस्पताल तक ले जाना आसान नहीं है। बरसात के मौसम में रास्तों की स्थिति और खराब होने के कारण समस्या और बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नियमित रूप से उपलब्ध रहें तो ग्रामीणों को छोटी-छोटी बीमारियों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।

लैब टेक्नीशियन के मरीज देखने का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में मरीजों को देखने की जिम्मेदारी कभी फार्मासिस्ट तो कभी लैब टेक्नीशियन संभालते नजर आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मरीज बीमारी बताकर उपचार और दवा की उम्मीद करते हैं, लेकिन डॉक्टर की गैरमौजूदगी में उन्हें दूसरे कर्मचारियों पर निर्भर रहना पड़ता है। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती है तो उनकी नियमित उपस्थिति भी सुनिश्चित होनी चाहिए। ग्रामीणों के मुताबिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन निर्धारित व्यवस्था के अनुसार होना चाहिए, ताकि मरीजों को सही समय पर चिकित्सकीय सलाह मिल सके। हालांकि, डॉक्टर की अनुपस्थिति और अन्य कर्मचारियों द्वारा मरीजों को देखने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

स्वास्थ्य मेले में भी डॉक्टर के नहीं मिलने की शिकायत

ग्रामीणों ने रविवार को आयोजित होने वाले स्वास्थ्य मेले को लेकर भी शिकायत की है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य मेले जैसे महत्वपूर्ण आयोजन का उद्देश्य ग्रामीणों को उनके क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि इस दौरान भी डॉक्टर मौजूद न रहें तो आयोजन का उद्देश्य प्रभावित होता है। ग्रामीणों ने मालती देवी, नियाज, मोतहा, ऐनम, पलक खान, अबू रहमान, अब्दुल वाजिद, खलीफा और रामसवारे समेत कई मरीजों की परेशानी का हवाला देते हुए अस्पताल की व्यवस्था सुधारने की मांग की। लोगों का कहना है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को यह भरोसा होना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर उन्हें डॉक्टर उपलब्ध मिलेंगे।

दवाइयों के रखरखाव को लेकर भी सवाल

स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने केवल डॉक्टर की अनुपस्थिति ही नहीं, बल्कि दवाइयों के रखरखाव पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार अस्पताल में कुछ दवाइयां व्यवस्थित तरीके से रखी हुई नजर नहीं आतीं और खिड़कियों समेत अन्य स्थानों पर दवाइयां बिखरी दिखाई देती हैं। लोगों ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों के स्टॉक और रखरखाव की जांच कराए। ग्रामीणों का कहना है कि दवाइयों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखा जाना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को आसानी से दवा उपलब्ध हो सके।

परिसर में उगी झाड़ियों से सफाई व्यवस्था पर सवाल

ग्रामीणों के मुताबिक स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में भी साफ-सफाई का पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अस्पताल परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगने की बात कही गई है। बरसात के मौसम में झाड़ियों और गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका भी रहती है। ग्रामीणों ने कहा कि जिस स्वास्थ्य केंद्र में लोग बीमारी का इलाज कराने आते हैं, वहां स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। अस्पताल परिसर की नियमित सफाई और झाड़ियों की कटाई कराई जानी चाहिए।

कागजों में स्टाफ, जमीन पर व्यवस्था कमजोर होने का आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और सहायक समेत स्टाफ की तैनाती है, लेकिन अस्पताल में पूरा स्टाफ नियमित रूप से मौजूद नहीं दिखाई देता। ग्रामीणों का आरोप है कि कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से कर्मचारियों की उपस्थिति की नियमित जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि कर्मचारियों की ड्यूटी और उपस्थिति की निगरानी नियमित रूप से की जाए तो अस्पताल की व्यवस्था में काफी सुधार हो सकता है।

निजी अस्पतालों का खर्च उठाने को मजबूर ग्रामीण

सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर उपलब्ध नहीं मिलने की स्थिति में ग्रामीणों को निजी अस्पतालों और चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निजी इलाज का खर्च उठाना मुश्किल होता है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी कहा कि मजबूरी में लोग स्थानीय स्तर पर इलाज कराने चले जाते हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर अतिरिक्त जोखिम हो सकता है। ग्रामीणों की मांग है कि सरकारी अस्पताल में ही पर्याप्त और नियमित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।

ग्रामीणों ने की नियमित निरीक्षण की मांग

स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से कोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नियमित निरीक्षण कराने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि अस्पताल में डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों की उपस्थिति की जांच हो, दवाइयों के रखरखाव को देखा जाए और परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि केवल कागजों पर स्टाफ की तैनाती पर्याप्त नहीं है। मरीजों को वास्तविक रूप से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलना चाहिए।

सीएमओ ने जांच का दिया आश्वासन

मामले में सीएमओ उदय सिंह ने कहा कि शिकायत की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सीएमओ के बयान के बाद अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच कर कोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं में सुधार कराएगा। फिलहाल ग्रामीणों की शिकायतों और आरोपों की विभागीय जांच होना बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि डॉक्टर की अनुपस्थिति, कर्मचारियों की कार्यप्रणाली, दवाइयों के रखरखाव और साफ-सफाई को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग यही है कि कोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर नियमित रूप से उपलब्ध रहें, ताकि पांच हजार से अधिक ग्रामीणों को इलाज के लिए 10 से 12 किलोमीटर दूर दूसरे अस्पतालों का रुख न करना पड़े।

सोशल मीडिया पर पत्रकारों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वालों पर मुकदमा

खखरेरू/फतेहपुर। सोशल मीडिया पर पत्रकारों के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के मामले में खखरेरू थाना पुलिस ने संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से पत्रकारों की कार्यप्रणाली और उनकी प्रतिष्ठा को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तहरीर के आधार पर कार्रवाई शुरू की है। जानकारी के अनुसार, बीते दिनों नगर पंचायत कार्यालय में दैनिक जागरण से जुड़े पत्रकार अशोक सिंह को क्षेत्रीय पत्रकार संघ का अध्यक्ष चुना गया था। अध्यक्ष चुने जाने की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की गई थी। इसी पोस्ट को लेकर बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर कथित तौर पर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने का मामला सामने आया। आरोप है कि ‘खखरेरू की आवाज’ नामक फेसबुक आईडी से पत्रकारों को लेकर ऐसी टिप्पणी की गई, जिसमें उनकी निष्पक्षता और नगर पंचायत से कथित संबंधों को लेकर आपत्तिजनक बातें लिखी गई थीं। इस पोस्ट के सामने आने के बाद पत्रकारों के बीच नाराजगी जताई गई और मामले को क्षेत्रीय पत्रकार संघ के पदाधिकारियों के संज्ञान में लाया गया।

पोस्ट री-पोस्ट करने का भी आरोप

मामले में आरोप लगाया गया है कि सोहनलाल उर्फ चइना मिस्त्री ने कथित फेसबुक पोस्ट को री-पोस्ट किया। शिकायतकर्ता के अनुसार, पोस्ट को दोबारा साझा किए जाने से संबंधित टिप्पणी अधिक लोगों तक पहुंची और इससे पत्रकारों की सामाजिक एवं पेशेवर प्रतिष्ठा प्रभावित होने की आशंका बनी। वहीं, निरंजन केशरवानी पुत्र स्वर्गीय छोटे लाल केशरवानी पर भी उक्त पोस्ट पर टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के मुताबिक, उनकी ओर से पत्रकारों के लिए कथित रूप से आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया गया। मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

क्षेत्रीय पत्रकार संघ के अध्यक्ष ने दी तहरीर

मामले को क्षेत्रीय पत्रकार संघ के अध्यक्ष अशोक सिंह ने गंभीरता से लेते हुए खखरेरू थाने में लिखित तहरीर दी। तहरीर में संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट से की गई कथित आपत्तिजनक पोस्ट और उस पर टिप्पणी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। शिकायतकर्ता की ओर से पुलिस को सोशल मीडिया पोस्ट से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है। पुलिस से मांग की गई कि सोशल मीडिया पर पत्रकारों के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक और आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। पत्रकारों का कहना है कि सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन किसी व्यक्ति या पेशे से जुड़े लोगों के खिलाफ अपमानजनक अथवा तथ्यहीन टिप्पणी करने से विवाद पैदा हो सकता है। उनका कहना है कि किसी भी पत्रकार के कामकाज को लेकर यदि किसी व्यक्ति को आपत्ति है तो वह उचित माध्यम से शिकायत कर सकता है, लेकिन सोशल मीडिया पर कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है।

थाना प्रभारी ने मामले को लिया गंभीरता से

मामले की तहरीर मिलने के बाद खखरेरू थाना प्रभारी सतपाल सिंह ने प्रकरण को गंभीरता से लिया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित आरोपितों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। इसके साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब सोशल मीडिया पर कथित रूप से की गई पोस्ट, उसे री-पोस्ट किए जाने और पोस्ट पर की गई टिप्पणियों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। जांच के दौरान संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट, पोस्ट की उपलब्धता, पोस्ट करने वाले व्यक्ति और टिप्पणी करने वालों की भूमिका सहित अन्य पहलुओं को देखा जा सकता है। पुलिस के स्तर से यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री किस खाते से अपलोड की गई थी और उसमें किन लोगों की भूमिका थी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बढ़ी सतर्कता

यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर सावधानी की जरूरत को सामने लाता है। फेसबुक समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी व्यक्ति, संस्था या पेशे से जुड़े लोगों के बारे में टिप्पणी करते समय भाषा और तथ्यों का ध्यान रखना जरूरी है। सोशल मीडिया पर की गई कोई भी टिप्पणी तेजी से लोगों तक पहुंच सकती है और उसका प्रभाव भी व्यापक हो सकता है। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि पत्रकारों को लेकर आलोचना या किसी खबर पर असहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत अपमान या कथित रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल अलग विषय है। पत्रकारों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में जिन लोगों के नाम शिकायत में सामने आए हैं, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी जांच के स्तर पर होनी है। आरोपी पक्ष की ओर से इस मामले में कोई अलग पक्ष सामने नहीं आया है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पोस्ट और टिप्पणियों से जुड़े साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर पत्रकारों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े इस मामले को लेकर स्थानीय पत्रकारों में भी चर्चा है। पत्रकार संगठन से जुड़े लोगों ने उम्मीद जताई है कि पुलिस मामले की निष्पक्षता से जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएगी। वहीं पुलिस की कार्रवाई के बाद अब सभी की नजर जांच के अगले चरण और उसके निष्कर्ष पर बनी हुई है।

- Advertisement -

Recent Posts