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महानगर पार्क में किशोरों के नशे के सेवन की शिकायत, नियमित गश्त की मांग

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के महानगर क्षेत्र स्थित सार्वजनिक महानगर पार्क में कम उम्र के कुछ किशोर-किशोरियों द्वारा कथित रूप से नशीले पदार्थों का सेवन किए जाने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पार्क में कभी-कभी किशोर उम्र के लड़के-लड़कियां सिगरेट और शराब का सेवन करते दिखाई देते हैं। कुछ किशोरियों के नशे की हालत में झूमने का दावा भी स्थानीय लोगों की ओर से किया गया है। सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की गतिविधियों को लेकर नागरिकों में चिंता बनी हुई है। महानगर पार्क आसपास के लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थान है। यहां आसपास की दुकानों और प्रतिष्ठानों में काम करने वाले लोग दोपहर के समय भोजन करने और कुछ देर आराम करने के लिए आते हैं। इसके अलावा महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और अन्य नागरिक भी पार्क में समय बिताते हैं। ऐसे में यदि सार्वजनिक स्थान पर कम उम्र के बच्चों या किशोरों द्वारा नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है, तो इससे पार्क का माहौल प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पार्क जैसे सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों और परिवारों की आवाजाही रहती है। इसलिए वहां ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए नियमित निगरानी जरूरी है। लोगों का मानना है कि पुलिस और संबंधित विभागों की सक्रिय मौजूदगी से असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।

पार्क में दोपहर के समय भी रहती है लोगों की आवाजाही

महानगर पार्क में दिन के समय भी काफी संख्या में लोग आते-जाते हैं। आसपास की दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारी दोपहर में भोजन करने या कुछ समय आराम करने के लिए पार्क का इस्तेमाल करते हैं। स्थानीय महिलाएं अपने बच्चों के साथ यहां पहुंचती हैं, जबकि अन्य नागरिक भी कुछ समय शांति से बिताने के लिए पार्क में आते हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्क सार्वजनिक उपयोग का स्थान होने के कारण यहां आने वाले हर व्यक्ति को सुरक्षित और सहज वातावरण मिलना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति खुले तौर पर नशीले पदार्थों का सेवन करता है या अन्य लोगों के लिए असहज स्थिति पैदा करता है, तो ऐसी गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई की जानी चाहिए। नागरिकों के मुताबिक, किशोर उम्र में नशे की आदत पड़ना चिंता का विषय हो सकता है। उनका कहना है कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जागरूकता और परिवार तथा समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

पुलिस चौकी की मौजूदगी के बावजूद गश्त बढ़ाने की मांग

स्थानीय नागरिकों के अनुसार महानगर पार्क से कुछ ही कदम की दूरी पर पुलिस चौकी भी स्थित है। इसके बावजूद पार्क में कथित रूप से नशे के सेवन जैसी गतिविधियां दिखाई देने की शिकायत सामने आना पुलिस निगरानी को लेकर सवाल खड़े करता है। नागरिकों का कहना है कि यदि पुलिसकर्मी नियमित अंतराल पर पार्क में गश्त करें और दिन में दो-तीन बार औचक निरीक्षण किया जाए तो ऐसी गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। लोगों का सुझाव है कि खासकर दोपहर और उन समयों में निगरानी बढ़ाई जाए, जब पार्क में कम भीड़ होने के कारण ऐसी गतिविधियों की आशंका अधिक रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की नियमित मौजूदगी से न केवल नशे का सेवन करने वालों पर कार्रवाई संभव होगी, बल्कि अन्य असामाजिक गतिविधियों पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।

बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता

महानगर पार्क में महिलाओं और बच्चों की भी आवाजाही रहती है। ऐसे में सार्वजनिक स्थान पर कथित रूप से शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन किए जाने की शिकायत से अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों की चिंता बढ़ सकती है। लोगों का कहना है कि पार्क में आने वाले परिवारों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे बिना किसी असहजता के समय बिता सकें। यदि किसी को नशे की हालत में सार्वजनिक स्थान पर देखा जाता है तो उससे विवाद या अप्रिय स्थिति उत्पन्न होने की आशंका भी बनी रहती है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि पार्क में पर्याप्त निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जरूरत पड़ने पर नियमित पुलिस गश्त के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाए, ताकि किशोरों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी जा सके।

नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता भी जरूरी

स्थानीय लोगों का मानना है कि किशोरों के बीच नशे की किसी भी संभावित प्रवृत्ति को केवल पुलिस कार्रवाई के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए परिवार, स्कूल, सामाजिक संगठनों और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। यदि कम उम्र के बच्चों में नशे की आदत विकसित हो रही है तो अभिभावकों को भी उनकी गतिविधियों और संगति पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही युवाओं के लिए खेल, शिक्षा और अन्य सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने से उन्हें गलत संगत से दूर रखने में मदद मिल सकती है।नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक पार्कों में नशे से संबंधित गतिविधियों की शिकायत मिलने पर संबंधित विभागों को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। इससे एक ओर जहां पार्क का वातावरण बेहतर रहेगा, वहीं दूसरी ओर किशोरों को भी ऐसी गतिविधियों से दूर रखने का प्रयास किया जा सकेगा।

स्थानीय लोगों ने की नियमित निगरानी की मांग

महानगर पार्क को लेकर स्थानीय नागरिकों की मुख्य मांग है कि पुलिस नियमित रूप से पार्क का निरीक्षण करे। लोगों के अनुसार दिन में दो-तीन बार पुलिस गश्त और अचानक जांच होने से सार्वजनिक स्थान पर नशे के सेवन की शिकायतों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। लोगों ने यह भी मांग की है कि यदि जांच के दौरान कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर कानून का उल्लंघन करता पाया जाता है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। वहीं यदि किशोर नशे की स्थिति में पाए जाते हैं तो उनके मामले में कानून के अनुरूप आवश्यक कदम उठाने के साथ उनके परिवारों को भी जानकारी दी जानी चाहिए। फिलहाल महानगर पार्क में किशोर-किशोरियों द्वारा कथित नशे के सेवन को लेकर स्थानीय लोगों की शिकायत और चिंता सामने आई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस की ओर से आधिकारिक कार्रवाई या जांच का विवरण सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि पुलिस पार्क में निगरानी बढ़ाएगी और सार्वजनिक स्थान को परिवारों तथा बच्चों के लिए सुरक्षित बनाए रखने की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगी।

शादी का झांसा देकर पांच लाख की ठगी, जहरीला पदार्थ पिलाने का आरोप

खखरेरू/फतेहपुर। थाना क्षेत्र में एक किन्नर ने एक युवक पर शादी का झांसा देकर करीब पांच लाख रुपये ठगने, जबरन अप्राकृतिक संबंध बनाने और विरोध करने पर कोल्डड्रिंक में कथित रूप से जहरीला पदार्थ मिलाकर पिलाने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित के मुताबिक, कथित घटना के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और वह बेहोशी की अवस्था में गांव के बाहर पड़ा मिला। ग्रामीणों की सूचना के बाद परिजन मौके पर पहुंचे और उसे उपचार के लिए कौशांबी जिला अस्पताल में भर्ती कराया। पीड़ित ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि करीब चार वर्ष पहले उसकी कौशांबी जनपद के कड़ा धाम स्थित एक मंदिर में उक्त युवक से शादी हुई थी। पीड़ित के अनुसार शादी के बाद युवक ने उसके साथ रहने और भविष्य में विधिवत रूप से वैवाहिक जीवन बिताने का भरोसा दिया। इसी भरोसे के आधार पर युवक ने उसके साथ कई बार अप्राकृतिक संबंध बनाए। पीड़ित का आरोप है कि समय बीतने के बाद भी युवक अपने वादे के मुताबिक शादी करके साथ रहने के लिए तैयार नहीं हुआ। इस दौरान दोनों के बीच संबंध बने रहे। पीड़ित के मुताबिक, करीब छह माह पहले युवक के कहने पर दिल्ली स्थित एक अस्पताल में उसका जेंडर परिवर्तन भी कराया गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया के बाद भी युवक ने शादी करने और साथ जीवन बिताने का भरोसा दिया, लेकिन बाद में अपने वादे से पीछे हटने लगा।

घर बनवाने के नाम पर पांच लाख रुपये लेने का आरोप

पीड़ित ने युवक पर आर्थिक ठगी का भी आरोप लगाया है। उसके मुताबिक, युवक ने घर बनवाने के नाम पर उससे अलग-अलग समय में करीब पांच लाख रुपये लिए। पीड़ित का कहना है कि उसने यह रकम युवक पर भरोसा करते हुए दी थी। उसे उम्मीद थी कि दोनों जल्द ही साथ रहकर अपना जीवन शुरू करेंगे। पीड़ित के अनुसार, जब उसने युवक से शादी के बाद उसके साथ रहने और अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने की बात कही तो युवक कथित रूप से टालमटोल करने लगा। इसी दौरान दोनों के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई।

कोल्डड्रिंक में जहरीला पदार्थ मिलाकर पिलाने का आरोप

पीड़ित ने अपनी तहरीर में आरोप लगाया है कि 14 अगस्त को युवक उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। आरोप है कि इसी दौरान युवक ने कोल्डड्रिंक में कथित रूप से कोई जहरीला पदार्थ मिलाकर उसे पिला दिया। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया। पीड़ित के मुताबिक, बेहोशी की हालत में वह गांव के किनारे पड़ा रहा। काफी देर बाद ग्रामीणों की नजर उस पर पड़ी। ग्रामीणों ने इसकी सूचना उसके परिजनों को दी। सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे उपचार के लिए कौशांबी जिला अस्पताल ले गए। अस्पताल में उसका इलाज कराया गया।पीड़ित ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते ग्रामीणों को उसके बारे में जानकारी नहीं मिलती तो उसकी जान भी जा सकती थी। हालांकि, जहरीला पदार्थ वास्तव में क्या था और उसे किस तरह पिलाया गया, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

तीन दिन पहले थाने में दी गई तहरीर

पीड़ित का कहना है कि मामले की शिकायत को लेकर तीन दिन पूर्व स्थानीय थाने में तहरीर दी गई थी। तहरीर में युवक पर शादी का झांसा देकर रकम लेने, अप्राकृतिक संबंध बनाने और कथित रूप से जहरीला पदार्थ पिलाने समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित का आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद अभी तक आरोपी के खिलाफ कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई है। उसने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोपी के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। इसके साथ ही पीड़ित ने युवक के परिजनों पर उसे और उसके भाई को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि घटना के बाद से वह और उसका परिवार भयभीत है। उसने पुलिस से अपनी और अपने भाई की सुरक्षा की भी मांग की है।

पुलिस ने शुरू की आरोपी की तलाश

मामले को लेकर कार्यवाहक थाना प्रभारी श्याम सुंदर गिरी ने बताया कि पीड़ित की ओर से तहरीर प्राप्त हुई है। तहरीर में लगाए गए आरोपों के आधार पर आरोपी युवक की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार, शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की जांच जरूरी है। जांच के दौरान पीड़ित के बयान, चिकित्सकीय दस्तावेज, कथित लेन-देन से संबंधित साक्ष्य तथा घटना से जुड़े अन्य तथ्यों को भी देखा जा सकता है। इसके बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई

फिलहाल इस मामले में पुलिस ने आरोपी युवक की तलाश शुरू कर दी है। वहीं पीड़ित की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पांच लाख रुपये के कथित लेन-देन, शादी के आश्वासन, अप्राकृतिक संबंध और कोल्डड्रिंक में जहरीला पदार्थ मिलाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़ित ने पुलिस से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

नोट: इस खबर में शादी, रकम की ठगी, अप्राकृतिक संबंध और जहरीला पदार्थ पिलाने से जुड़े सभी आरोप पीड़ित की तहरीर और उसके बताए घटनाक्रम पर आधारित हैं। आरोपी पक्ष का बयान सामने नहीं आया है। पुलिस जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

मुंबई में फर्जी डॉक्टरों पर क्राइम ब्रांच का शिकंजा, गोवंडी और बांद्रा में बिना वैध लाइसेंस चल रहे थे क्लीनिक

डिजिटल डेस्क। मुंबई में मरीजों की जान के साथ कथित तौर पर खिलवाड़ करने वाले फर्जी और अपात्र डॉक्टरों के खिलाफ मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है। क्राइम ब्रांच की यूनिट 6 और 8 ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चिकित्सा अधिकारियों के साथ मिलकर गोवंडी, देवनार और बांद्रा पूर्व इलाके में चल रहे पांच क्लीनिकों पर छापेमारी की। पुलिस के मुताबिक, इन क्लीनिकों में ऐसे लोग मरीजों का इलाज कर रहे थे, जिनके पास एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में प्रैक्टिस करने के लिए आवश्यक वैध योग्यता या लाइसेंस नहीं था। पुलिस की कार्रवाई के दौरान करीब 1,19,324 रुपये कीमत की एलोपैथिक दवाइयां और मेडिकल उपकरण जब्त किए गए। बरामद सामान में इंजेक्शन, सिरिंज, एंटीबायोटिक दवाएं, बीपी मॉनिटर, स्टेथोस्कोप, शुगर जांच मशीन और नेब्युलाइजर समेत कई चिकित्सा सामग्री शामिल बताई गई है।

गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई

मिली जानकारी के अनुसार, मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सूचना मिल रही थी कि शहर के कुछ इलाकों में ऐसे लोग क्लीनिक चला रहे हैं, जो आवश्यक मेडिकल योग्यता या वैध लाइसेंस के बिना मरीजों का इलाज कर रहे हैं। सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच ने BMC के चिकित्सा अधिकारियों के साथ मिलकर इन क्लीनिकों की जांच शुरू की। जांच के बाद गोवंडी, देवनार और बांद्रा पूर्व के इलाकों में कार्रवाई की गई। पुलिस ने कुल पांच क्लीनिकों को निशाने पर लिया। इनमें से चार क्लीनिक देवनार के जाकिर हुसैन नगर और गोवंडी इलाके में बताए गए हैं, जबकि एक क्लीनिक बांद्रा पूर्व के नौपाड़ा इलाके में चल रहा था। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों के पास होम्योपैथी से जुड़ी योग्यता होने की बात सामने आई, लेकिन वे कथित तौर पर एलोपैथिक दवाओं से मरीजों का उपचार कर रहे थे। वहीं, कुछ आरोपियों के पास किसी भी तरह की मान्य मेडिकल योग्यता नहीं मिलने की बात कही गई है।

पांच क्लीनिकों पर कार्रवाई

क्राइम ब्रांच की कार्रवाई में पांच लोगों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, इनमें कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो लोगों को नोटिस देकर छोड़ा गया। पुलिस की कार्रवाई में सगीर अहमद अब्दुल माजिद हाशमी (39) को कथित तौर पर बिना वैध लाइसेंस प्रैक्टिस करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। वह डॉ. सगीर क्लीनिक चला रहा था। इसी तरह केशव प्रसाद कुद्दूर पटेल (56) के खिलाफ भी बिना वैध लाइसेंस चिकित्सा प्रैक्टिस करने के आरोप में कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी की गई। बांद्रा पूर्व स्थित आफताब खान क्लीनिक के संचालक मोहम्मद आफताब शौकत खान (56) को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, उसके पास डॉक्टर के रूप में मरीजों का इलाज करने के लिए आवश्यक मेडिकल डिग्री नहीं थी। वहीं, अखिलेश कुमार देवेंद्र कुमार दुबे (47) और मेहमूद आलम मोहम्मद शरीफ शेख (36) के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। दोनों के क्लीनिक के बोर्ड पर BHMS और रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज होने की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान दोनों ने कैमरे पर अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी, जिसके बाद उन्हें नोटिस देकर छोड़ा गया।

बांद्रा के क्लीनिक में इलाज के लिए बैठे थे चार मरीज

पूरी कार्रवाई में बांद्रा पूर्व स्थित क्लीनिक का मामला पुलिस के लिए खास तौर पर गंभीर बताया गया। पुलिस जब मोहम्मद आफताब शौकत खान के क्लीनिक पहुंची, उस समय वहां कथित तौर पर चार मरीज इलाज कराने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि उसने केवल 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और उसके पास डॉक्टर बनने की कोई मेडिकल डिग्री नहीं है। इसके बावजूद वह क्लीनिक चलाकर मरीजों का इलाज कर रहा था। पुलिस को पूछताछ के दौरान कुछ मेडिकल प्रमाणपत्र भी दिखाए गए। आरोपी की ओर से इन प्रमाणपत्रों को महाराष्ट्र काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन और ऑल इंडिया आयुर्वेद विद्यापीठ से जारी होने का दावा किया गया। हालांकि, पुलिस को इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर संदेह है और उनकी जांच की जा रही है।

क्लीनिक से मिलीं दवाइयां और मेडिकल उपकरण

छापेमारी के दौरान पुलिस और BMC अधिकारियों ने क्लीनिकों से बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयां और मेडिकल उपकरण बरामद किए। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 1.19 लाख रुपये बताई गई है। इसमें इंजेक्शन, सिरिंज, एंटीबायोटिक टैबलेट, ब्लड प्रेशर जांचने की मशीन, स्टेथोस्कोप, ब्लड शुगर जांचने वाली मशीन और नेब्युलाइजर जैसे उपकरण शामिल हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन दवाओं का इस्तेमाल किन मरीजों के इलाज में किया जाता था और आरोपी इन दवाओं की खरीद कहां से करते थे। साथ ही, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि संबंधित लोगों ने कितने समय से क्लीनिक संचालित किए और अब तक कितने मरीजों का इलाज किया।

मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस कार्रवाई ने शहर में अनधिकृत चिकित्सा प्रैक्टिस को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉक्टर के पास उचित मेडिकल डिग्री, रजिस्ट्रेशन और संबंधित चिकित्सा पद्धति में प्रैक्टिस की वैध अनुमति होना मरीजों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति बिना आवश्यक योग्यता के मरीजों का इलाज करता है, तो गलत दवा या गलत उपचार से मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। खास तौर पर इंजेक्शन, एंटीबायोटिक और अन्य एलोपैथिक दवाओं का इस्तेमाल विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह के बिना किया जाए तो मरीज के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। यही वजह है कि क्राइम ब्रांच और BMC की संयुक्त कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्रवाई के बाद अब यह भी सवाल है कि ऐसे और कितने क्लीनिक शहर के अलग-अलग हिस्सों में संचालित हो रहे हैं।

आगे भी जारी रह सकती है जांच

मुंबई पुलिस और BMC की ओर से की गई इस कार्रवाई के बाद आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि आरोपियों ने मरीजों को किस तरह की दवाइयां दीं, उनके पास मौजूद प्रमाणपत्र वास्तविक हैं या नहीं और क्लीनिकों को चलाने के लिए किसी प्रकार की अनुमति ली गई थी या नहीं। साथ ही, यदि जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाते हैं या बिना वैध अनुमति चिकित्सा प्रैक्टिस की पुष्टि होती है, तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

बाहर के लोगों को न्योता, बंगाल के बेटे का अपमान? मिथुन चक्रवर्ती का छलका दर्द, बोले- मुझे छोटा एक्टर समझा जाता है

कोलकाता। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज और बयान को लेकर चर्चा में हैं। कोलकाता में आयोजित एक बैठक के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान अभिनेता ने बंगाल और भारतीय सिनेमा के साथ अपने दशकों पुराने रिश्ते का जिक्र करते हुए फिल्मी आयोजनों में अपनी उपेक्षा को लेकर नाराजगी जाहिर की। उनके बयान के बाद बंगाल के सांस्कृतिक और फिल्मी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। मिथुन चक्रवर्ती के बयान का सबसे चर्चित हिस्सा वह टिप्पणी रही, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर यह सवाल उठाया कि क्या बंगाल में उन्हें अब एक छोटे कलाकार के रूप में देखा जाता है। उनका कहना था कि अगर ऐसा नहीं है तो फिर उन्हें अपने ही राज्य में होने वाले महत्वपूर्ण फिल्म समारोह से दूर क्यों रखा गया, जबकि दूसरे राज्यों या देश के अन्य हिस्सों से जुड़े कलाकारों को कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता है।

 

अपने ही घर में सम्मान को लेकर उठाया सवाल

मिथुन चक्रवर्ती का फिल्मी सफर पांच दशक से भी ज्यादा लंबा रहा है। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ बंगाली सिनेमा में भी उल्लेखनीय काम किया है। ऐसे में कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव यानी KIFF जैसे बड़े आयोजन से जुड़े किसी कार्यक्रम में आमंत्रण न मिलने की बात सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों के बीच भी सवाल उठने लगे हैं। मिथुन ने अपने बयान में अपने फिल्मी सफर और बंगाल से अपने रिश्ते को महत्व देते हुए कहा कि उनकी पहचान केवल हिंदी फिल्मों के अभिनेता के तौर पर नहीं है। उन्होंने बंगाली सिनेमा में भी काम किया है और अपने करियर के महत्वपूर्ण दौर में बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। अभिनेता की नाराजगी का केंद्र यही सवाल नजर आया कि जब बाहरी कलाकारों और फिल्मी हस्तियों को बंगाल के बड़े आयोजनों में जगह मिलती है, तो लंबे समय से बंगाली सिनेमा का हिस्सा रहे कलाकार को क्यों नजरअंदाज किया जाता है?

बाहर से लोगों को बुलाया जाता है, लेकिन

मिथुन चक्रवर्ती के बयान के अनुसार, उन्हें इस बात पर आपत्ति है कि बंगाल से सीधा संबंध न रखने वाले कई कलाकारों और हस्तियों को कार्यक्रमों में बुलाया जाता है, जबकि बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री और संस्कृति से लंबे समय से जुड़े कलाकारों को अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता। हालांकि, इस पूरे मामले में फिल्म महोत्सव के आयोजकों की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया है, यह स्पष्ट होना अभी बाकी है। इसलिए अभिनेता के बयान और उनकी नाराजगी को फिलहाल उनके व्यक्तिगत अनुभव और टिप्पणी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। मिथुन के इस बयान ने सोशल मीडिया और फिल्मी चर्चा के बीच एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या फिल्म समारोहों और सांस्कृतिक आयोजनों में कलाकारों का चयन किसी खास सोच या प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है?

मॉस्को फिल्म फेस्टिवल का मिला न्योता, बंगाल में क्यों नजरअंदाज?

मीडिया से बातचीत के दौरान मिथुन ने अपने आगामी मॉस्को दौरे का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, उन्हें मॉस्को फिल्म महोत्सव से निमंत्रण मिला है, लेकिन अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि रहे बंगाल में उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी। यही तुलना उनके बयान को और अधिक चर्चा में ले आई। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर के फिल्म समारोह से न्योता और दूसरी तरफ अपने ही शहर में आयोजित होने वाले प्रमुख फिल्म आयोजन में कथित तौर पर आमंत्रण न मिलना—मिथुन के लिए यह स्थिति भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण नजर आई। मिथुन चक्रवर्ती ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए हैं। ‘मृगया’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाले मिथुन ने बाद में ‘डिस्को डांसर’, ‘डांस डांस’, ‘कमांडो’ सहित कई फिल्मों के जरिए देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई। ‘मृगया’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था। PTI की पुरानी रिपोर्टों के अनुसार, अभिनेता ने अपने करियर और अभिनय को लेकर हमेशा प्रतिभा और ईमानदारी को महत्वपूर्ण बताया है।

बंगाली फिल्मों से भी रहा गहरा रिश्ता

मिथुन चक्रवर्ती का रिश्ता सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कई बंगाली फिल्मों में भी काम किया और बंगाली दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। यही वजह है कि बंगाल में उनके प्रशंसक उन्हें केवल हिंदी फिल्मों के सुपरस्टार के तौर पर नहीं देखते, बल्कि बंगाली सिनेमा के भी महत्वपूर्ण कलाकारों में गिनते हैं। उनकी बंगाली फिल्मों में काम करने की लंबी सूची रही है। उन्होंने अलग-अलग दौर में बंगाली सिनेमा के प्रमुख कलाकारों और निर्देशकों के साथ काम किया। 2023 में आई ‘काबुलीवाला’ में भी उन्होंने बंगाली सिनेमा में प्रमुख भूमिका निभाई थी। उस समय उन्होंने बताया था कि यह भूमिका उनके लिए चुनौतीपूर्ण थी और उन्होंने निर्देशक-निर्माता से ऑडिशन देने की इच्छा भी जताई थी।

सम्मान और पहचान को लेकर फिर चर्चा

मिथुन चक्रवर्ती का ताजा बयान ऐसे समय में सामने आया है जब फिल्मी दुनिया में वरिष्ठ कलाकारों के सम्मान और फिल्म समारोहों में उनकी भागीदारी को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है। एक कलाकार के लिए पुरस्कार और लोकप्रियता जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतना ही महत्वपूर्ण अपने काम और योगदान के लिए सम्मान मिलना भी माना जाता है। मिथुन का बयान इसी भावनात्मक पहलू को सामने लाता है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि किसी फिल्म महोत्सव में किसी कलाकार को आमंत्रित किए जाने या नहीं किए जाने के पीछे कई प्रशासनिक, कार्यक्रम संबंधी या चयन संबंधी कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल निमंत्रण न मिलने के आधार पर किसी संस्था या आयोजक पर पक्षपात का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

बंगाल की राजनीति और सिनेमा में भी चर्चा

मिथुन चक्रवर्ती का नाम पिछले कुछ वर्षों में केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहा है। वे सार्वजनिक जीवन और राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनके किसी भी बयान को फिल्मी दुनिया के साथ-साथ राजनीतिक नजरिए से भी देखा जाता है। उनका ताजा बयान भी इसी वजह से चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे एक वरिष्ठ कलाकार की व्यक्तिगत नाराजगी मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे बंगाल की सांस्कृतिक राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के आयोजक मिथुन चक्रवर्ती के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं या नहीं।

आगे क्या होगा?

मिथुन चक्रवर्ती के बयान ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि किसी कलाकार के योगदान का मूल्यांकन किस आधार पर होना चाहिए। क्या लंबे समय तक किसी क्षेत्र की फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले कलाकार को स्थानीय आयोजनों में विशेष सम्मान मिलना चाहिए? या फिर हर फिल्म समारोह को अपनी स्वतंत्र चयन प्रक्रिया के आधार पर अतिथियों का चयन करना चाहिए? इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में आयोजकों की प्रतिक्रिया से और स्पष्ट हो सकता है। फिलहाल मिथुन चक्रवर्ती का दर्द और उनकी नाराजगी चर्चा में है। पांच दशक से अधिक लंबे फिल्मी सफर वाले इस दिग्गज अभिनेता ने अपने बयान के जरिए इतना जरूर स्पष्ट किया है कि अपने ही राज्य में सम्मान और पहचान को लेकर उनके मन में सवाल हैं।

नोट: इस खबर में विवादित/असत्यापित हिस्सों को अभिनेता के कथित बयान और उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। संबंधित आयोजकों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।

गर्भवती प्रेमिका को छोड़कर भागा प्रेमी, FIR दर्ज; जेल से बाहर आने के बाद धमकी देने का आरोप

नई दिल्ली। बाहरी दिल्ली के निहाल विहार थाना क्षेत्र में एक युवती ने अपने परिचित युवक पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने, गर्भवती होने के बाद शादी से इनकार करने और कथित तौर पर गर्भपात की दवा देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। युवती की शिकायत और पुलिस के समक्ष दर्ज बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) और 69 के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू की है।

मामले में पीड़िता का आरोप है कि आरोपी के साथ उसकी मुलाकात वर्ष 2024 में एक इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कंपनी में काम करने के दौरान हुई थी। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और धीरे-धीरे उनका रिश्ता आगे बढ़ा। पीड़िता के मुताबिक, अगस्त 2025 में आरोपी उसके घर आया और उसके जन्मदिन के दिन शादी का प्रस्ताव रखा। युवती का कहना है कि उसने उस समय शादी से इनकार कर दिया था, लेकिन इसके बाद आरोपी लगातार शादी करने का भरोसा दिलाता रहा।

शादी का वादा कर संबंध बनाने का आरोप

पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान में आरोप लगाया कि आरोपी द्वारा शादी का भरोसा दिए जाने के बाद दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। युवती के मुताबिक, आरोपी उसके साथ लिव-इन रिलेशनशिप में भी रहा। इस दौरान आरोपी के परिवार के सदस्यों को भी दोनों के रिश्ते की जानकारी थी।

शिकायत में युवती ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी कई बार शराब के नशे में उसके साथ मारपीट करता था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होनी है।

गर्भवती होने के बाद बढ़ा विवाद

पीड़िता के अनुसार, अप्रैल 2026 में उसे अपनी गर्भावस्था की जानकारी हुई। उसने यह बात आरोपी को बताई। आरोप है कि गर्भावस्था की जानकारी मिलने के बाद आरोपी ने उसे गर्भपात की गोली दी। युवती का कहना है कि दवा लेने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई।

पीड़िता के मुताबिक, इस घटनाक्रम के बाद आरोपी मौके से चला गया और फिर उससे संपर्क नहीं हो सका। युवती ने आरोपी से बातचीत करने और संपर्क स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर उसका संपर्क नहीं हो पाया।

पुलिस तक पहुंची शिकायत

मामले में पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पीड़िता का बयान 13 मई 2026 को BNSS की धारा 183 के तहत दर्ज किया गया था। इसके बाद 25 मई 2026 को युवती ने निहाल विहार थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी।

शिकायत और दर्ज बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज की। मामले की जांच निहाल विहार थाने की महिला उपनिरीक्षक मनीषा यादव को सौंपी गई है। पुलिस रिकॉर्ड में संबंधित दस्तावेज और FIR वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे जाने का भी उल्लेख बताया गया है।

आरोपी की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने की बात

पीड़िता का कहना है कि FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था और उसे जेल भी भेजा गया। हालांकि, अब आरोपी के जेल से बाहर आने के बाद पीड़िता ने उसके खिलाफ एक और गंभीर आरोप लगाया है।

पीड़िता का दावा है कि जेल से बाहर आने के बाद आरोपी स्वयं तथा अपने साथियों के माध्यम से उस पर FIR वापस लेने का दबाव बना रहा है। युवती का आरोप है कि उसे अलग-अलग माध्यमों से धमकियां दी जा रही हैं और आरोपी पक्ष की ओर से मामला वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

जान को खतरा, पीड़िता ने सुरक्षा की मांग की

पीड़िता ने पुलिस के समक्ष अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई है। उसका कहना है कि आरोपी और उसके साथियों से उसे डर है और यदि मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो उसके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है।

पीड़िता की ओर से लगाए गए इन नए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के सामने अब न केवल मूल FIR की जांच बल्कि कथित धमकी और FIR वापस लेने के दबाव के आरोपों की भी जांच का विषय सामने आता है।

पुलिस जांच में सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान पुलिस पीड़िता के बयान, FIR में दर्ज तथ्यों, दोनों पक्षों के बीच हुए कथित संवाद, मेडिकल दस्तावेज, उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य और अन्य संबंधित तथ्यों की जांच कर सकती है।

ऐसे मामलों में आरोपों की पुष्टि केवल FIR दर्ज होने से नहीं होती। FIR किसी शिकायत के आधार पर दर्ज की गई प्रारंभिक कानूनी कार्रवाई होती है। मामले में आरोपी का पक्ष, पुलिस जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों में शादी का झांसा देकर संबंध बनाने, गर्भावस्था के बाद कथित तौर पर गर्भपात की दवा देने, मारपीट करने तथा जेल से बाहर आने के बाद FIR वापस लेने के लिए धमकी देने जैसे गंभीर बिंदु शामिल हैं। वहीं, इन सभी आरोपों की अंतिम सत्यता जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होगी।

मामले की जांच निहाल विहार थाना पुलिस द्वारा की जा रही है। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम में वास्तव में क्या हुआ था और आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य सामने आते हैं।

नोट: इस खबर में लगाए गए आरोप पीड़िता की शिकायत, पुलिस बयान और FIR में दर्ज तथ्यों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र एवं अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी। आरोपी को दोषी सिद्ध होने तक कानून की नजर में निर्दोष माना जाता है।

Ghazipur News: गाजीपुर में 50 हजार का इनामी बदमाश पुलिस मुठभेड़ में घायल, गिरफ्तार

गाजीपुर। सैदपुर थाना क्षेत्र में पुलिस और 50 हजार रुपये के इनामी बदमाश के बीच मुठभेड़ का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, अहिरौली गांव के पास हुई इस मुठभेड़ में पैर में गोली लगने से इनामी बदमाश घायल हो गया। घायल बदमाश की पहचान संजय बिंद उर्फ बुझारत बिंद के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे मौके से गिरफ्तार कर उपचार के लिए अस्पताल भेजा है। पुलिस का कहना है कि आरोपी नाबालिग बच्चियों के अपहरण के मामले में वांछित चल रहा था और उसके खिलाफ करीब 15 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

पुलिस के अनुसार, सैदपुर पुलिस को सूचना मिली थी कि 50 हजार रुपये का इनामी अभियुक्त संजय बिंद सादात की तरफ से गाजीपुर की ओर आने वाला है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अहिरौली गांव के आसपास घेराबंदी शुरू कर दी। पुलिस टीम संदिग्ध की गतिविधियों पर नजर रख रही थी।

बताया गया कि कुछ समय बाद पुलिस को संदिग्ध बदमाश बाइक से आता हुआ दिखाई दिया। पुलिस टीम ने उसे रोकने का प्रयास किया। पुलिस के मुताबिक, पुलिस को देखते ही बदमाश ने भागने की कोशिश की। इसी दौरान उसकी बाइक अनियंत्रित होकर फिसल गई और वह सड़क पर गिर पड़ा।

पुलिस का दावा है कि खुद को घिरता हुआ देखकर बदमाश ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने करीब 5 से 6 राउंड फायरिंग की। इसके बाद पुलिस टीम ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। जवाबी कार्रवाई के दौरान बदमाश के पैर में गोली लग गई, जिससे वह घायल होकर मौके पर गिर पड़ा।

मुठभेड़ के बाद पुलिस टीम ने तत्काल घायल बदमाश को अपने कब्जे में लिया। इसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद आरोपी के पास से आपराधिक वारदात में इस्तेमाल किया जाने वाला सामान भी बरामद किया गया है।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 315 बोर का एक तमंचा, एक जिंदा कारतूस और दो खोखा कारतूस बरामद करने की बात कही है। इसके अलावा पुलिस को आरोपी के पास से दो मोटरसाइकिल और 1,300 रुपये नकद भी मिले हैं। पुलिस बरामद सामान की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दोनों मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल किन घटनाओं में किया गया था।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किया गया संजय बिंद उर्फ बुझारत बिंद आपराधिक गतिविधियों में पहले से संलिप्त रहा है। उसके खिलाफ अलग-अलग मामलों में करीब 15 मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं। इनमें नाबालिग बच्चियों के अपहरण से जुड़े मामले भी शामिल हैं। इसी आपराधिक रिकॉर्ड और वांछित होने के चलते उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

पुलिस की कार्रवाई के बाद अब आरोपी से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उसके साथ इस तरह की आपराधिक गतिविधियों में और कौन लोग जुड़े हुए हैं। साथ ही पुलिस आरोपी के पुराने आपराधिक मामलों और उसके संपर्क में रहने वाले लोगों की भी जानकारी जुटा रही है।

इस मुठभेड़ के बाद सैदपुर थाना क्षेत्र में पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराध और वांछित आरोपियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। पुलिस टीमों को इलाके में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि नाबालिग बच्चियों के अपहरण जैसे गंभीर मामलों में वांछित आरोपी की गिरफ्तारी को पुलिस के लिए महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। पुलिस अब आरोपी के खिलाफ दर्ज पुराने मुकदमों की भी जानकारी खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किन-किन घटनाओं में शामिल रहा है।

मुठभेड़ के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर पुलिस की ओर से बताया गया है कि टीम ने पहले आरोपी को रोकने का प्रयास किया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी की ओर से फायरिंग किए जाने के बाद ही जवाबी कार्रवाई की गई। घायल आरोपी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उपचार के बाद उसे संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके कब्जे से हथियार, कारतूस, मोटरसाइकिल और नकदी बरामद होने की बात कही है। मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी के पास मौजूद हथियार कहां से आया और बरामद दोनों मोटरसाइकिलों का आपराधिक घटनाओं से कोई संबंध है या नहीं।

सैदपुर के अहिरौली गांव में हुई इस मुठभेड़ ने एक बार फिर इलाके में सक्रिय अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, मुठभेड़ और बरामदगी से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होगी।

बिधनू में विवाहिता की संदिग्ध मौत से हड़कंप! तीन पन्नों के कथित सुसाइड नोट ने खोले घरेलू विवाद के राज, मायके वालों ने लगाया हत्या का आरोप

कानपुर। बिधनू थाना क्षेत्र में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। मृतका की पहचान 29 वर्षीय सुमन उर्फ गुड़िया के रूप में हुई है। महिला का शव घर के अंदर फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले में पुलिस को मृतका के पास से तीन पन्नों का कथित सुसाइड नोट मिला है। इसमें महिला ने लंबे समय से चल रहे घरेलू विवाद, कथित मारपीट, गाली-गलौज, पैसों और जेवरात को लेकर विवाद तथा अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता का जिक्र किया है। हालांकि, कथित सुसाइड नोट में लिखी बातों और उसमें लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

मायके वालों ने आत्महत्या मानने से किया इनकार

घटना की जानकारी मिलने के बाद सुमन के मायके वाले मौके पर पहुंचे। परिजनों ने महिला की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए उसके पति और ससुराल पक्ष पर हत्या का आरोप लगाया। परिजनों का कहना है कि सुमन के साथ लंबे समय से कथित तौर पर मारपीट और प्रताड़ना की जा रही थी। हंगामे की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और मामले की जांच शुरू की। परिजनों ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

करीब नौ साल पहले हुई थी शादी

मृतका के पिता नवाब सिंह कानपुर देहात के शिवली क्षेत्र के रैपालपुर गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी सुमन की शादी करीब नौ साल पहले बिधनू के गुरु का पुरवा निवासी इंद्रजीत से हुई थी। इंद्रजीत बस चालक बताया जा रहा है। दंपती के दो बच्चे हैं। इनमें करीब सात साल का बेटा और चार साल की बेटी है। पिता का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष की ओर से प्लॉट खरीदने के लिए 10 लाख रुपये की मांग की जाने लगी। मांग पूरी न होने पर बेटी के साथ कथित रूप से मारपीट की जाती थी। परिजनों के अनुसार, शादी के करीब दो साल बाद भी दहेज को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि उस दौरान सुमन के साथ मारपीट की गई और उसे नहर में फेंकने की कोशिश की गई। बाद में रिश्तेदारों के हस्तक्षेप से दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया था।

19 मई को भी मारपीट का आरोप

परिजनों का कहना है कि पिछले कुछ समय से सुमन के ससुराल में विवाद फिर बढ़ गया था। 19 मई को भी उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी। जानकारी मिलने पर मायके वाले सुमन और उसके दोनों बच्चों को अपने साथ ले गए थे। बाद में पति की ओर से दोबारा मारपीट नहीं करने का भरोसा दिए जाने के बाद 28 जुलाई को सुमन को वापस ससुराल भेज दिया गया। परिजनों का कहना है कि उन्हें भरोसा था कि अब बेटी के साथ किसी तरह का विवाद नहीं होगा, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसकी मौत की खबर ने परिवार को झकझोर दिया।

बच्चों के सामने मारपीट का दावा

परिजनों के मुताबिक, घटना वाले दिन पड़ोसियों ने फोन कर सुमन के फंदे पर लटके होने की जानकारी दी। परिवार के लोग जब घर पहुंचे तो दोनों बच्चे भी वहां मौजूद थे। मृतका के पिता का दावा है कि बच्चों ने बताया कि सुबह स्कूल जाने से पहले उनके पिता ने मां के साथ कथित तौर पर मारपीट की थी। स्कूल से वापस आने पर बच्चों ने मां को फंदे से लटका हुआ देखा। हालांकि, बच्चों द्वारा बताई गई बातों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस मामले के प्रत्येक पहलू की जांच कर रही है।

फटे कपड़े देखकर हत्या की आशंका

मौके पर सुमन के कपड़े फटे होने की बात सामने आने के बाद मायके वालों ने हत्या की आशंका जताई। उनका आरोप है कि सुमन की हत्या करने के बाद शव को फंदे से लटकाकर घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और वहां से आवश्यक साक्ष्य जुटाए। इसी दौरान पुलिस को तीन पन्नों का कथित सुसाइड नोट मिला। बताया जा रहा है कि नोट के कुछ हिस्से फटे हुए थे। पुलिस ने कथित सुसाइड नोट को जांच का हिस्सा बनाया है। इसके अलावा घटनास्थल की परिस्थितियों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी जांच में शामिल किया जाएगा।

जेवर और पैसों का भी कथित रूप से उल्लेख

कथित सुसाइड नोट में सुमन ने जेवरात और पैसों को लेकर चल रहे विवाद का भी उल्लेख किया है। नोट में चेन, हार, कंगन और मंगलसूत्र सहित अन्य सामान का जिक्र होने की बात सामने आई है। महिला ने कथित तौर पर अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जताई और उनका पैसा व सामान उन्हें वापस दिलाने की अपील की। नोट में जमीन से जुड़े लेनदेन और अलग-अलग लोगों को दी गई रकम का भी उल्लेख होने की बात कही जा रही है। सुमन ने कथित तौर पर संबंधित लोगों से बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनके लिए जमीन या अन्य सहायता उपलब्ध कराने की अपील की।

नौ साल से सब कुछ सह रही थी

कथित सुसाइड नोट के अंतिम हिस्से में सुमन ने अपनी परेशानी का जिक्र करते हुए करीब नौ साल से सब कुछ सहने की बात लिखी है। उसने कथित तौर पर कहा कि अब वह और सहन करने की स्थिति में नहीं थी। नोट में पति को शराब पिलाकर उसके साथ मारपीट कराने और ससुराल में शराब-सिगरेट को लेकर होने वाले विवाद का भी उल्लेख बताया जा रहा है। महिला ने कथित तौर पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और कहा कि ऐसा दंड मिले, जिससे भविष्य में किसी दूसरी महिला के साथ ऐसी घटना न हो।

पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी मौत की वजह

घटना के बाद पति समेत कुछ ससुरालीजनों के मौके से फरार होने की बात भी परिजनों ने कही है। पुलिस उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। कथित सुसाइड नोट, घटनास्थल की परिस्थितियां, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के आरोपों को जांच का आधार बनाया गया है। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सुमन की मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। फिलहाल मामले में पुलिस की जांच जारी है और परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है।

वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश, वैदिक भारत उत्थान संगठन ने पौधों की देखभाल का लिया संकल्प

अंबेडकर नगर/टांडा। पर्यावरण संरक्षण और समाज में प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वैदिक भारत उत्थान संगठन के तत्वावधान में रविवार को पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन विद्युतनगर टांडा स्थित विवेकानंद शिशुकुंज सीनियर सेकेंडरी स्कूल परिसर में किया गया। इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ विद्यालय के प्रधानाचार्य, उपप्रधानाचार्य, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक तथा एनटीपीसी परियोजना के पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गए। पौधारोपण के बाद उपस्थित लोगों ने लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और उनके संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना भी रहा।

पौधारोपण के साथ संरक्षण का लिया संकल्प

कार्यक्रम में मौजूद संगठन के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संतुलन बनाए रखना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। लगातार बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरण असंतुलन को देखते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पौधारोपण तभी सार्थक होगा, जब लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। वक्ताओं ने कहा कि पेड़-पौधे केवल पर्यावरण को हरा-भरा बनाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वातावरण और सुरक्षित भविष्य की नींव भी हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हुए यह संदेश दिया गया कि पौधारोपण को किसी एक दिन या कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसके लिए लगातार जनजागरूकता अभियान चलाने और समाज के अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने की जरूरत है।

संगठन के पदाधिकारियों ने रखे विचार

पौधारोपण कार्यक्रम में निर्देशक अम्बर पांडे, प्रवक्ता विजय नारायण पांडे, संचालनकर्ता विजय कुमार ओझा, संरक्षक विजय कुमार मिश्रा, लेखपाल अधिकारी संतोष दुबे, सतर्कता अधिकारी अमरदीप मिश्रा, मीडिया प्रभारी श्रीमनी त्रिपाठी तथा लोक सेवक विवेक उपाध्याय सहित संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। जिस तेजी से प्रदूषण और पर्यावरण असंतुलन की समस्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि पौधारोपण के साथ-साथ लोगों को पौधों की देखभाल और संरक्षण के लिए भी प्रेरित करना जरूरी है। वक्ताओं के अनुसार, प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण केवल किसी संस्था या संगठन की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। यदि लोग अपने आसपास अधिक से अधिक पौधे लगाएं और उनकी नियमित देखभाल करें तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

जनजागरूकता अभियान चलाने पर जोर

कार्यक्रम में शामिल अतिथियों और संगठन के पदाधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर निरंतर जनजागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश घर-घर तक पहुंचाने की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक लोग पौधारोपण और पौधों के संरक्षण के महत्व को समझ सकें। इस दौरान विद्यालय परिसर में लगाए गए पौधों की देखभाल के लिए भी संकल्प लिया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है, जितना पौधा लगाना। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार की सहभागिता भी रही। विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों और समाज के बीच पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया।

समाजहित के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में वैदिक भारत उत्थान संगठन के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद तिवारी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कीर्ति उपाध्याय तथा कार्यकारिणी अध्यक्ष विश्वनाथ तिवारी ने कार्यक्रम में सहयोग करने वाले सभी अतिथियों, पदाधिकारियों और सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि संस्था का उद्देश्य समाजहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाना है। इसके लिए भविष्य में भी जनहित और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में छोटे-छोटे प्रयास भी भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी निभाए, तो आने वाली पीढ़ियों को बेहतर और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने और समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने का संदेश दिया। इस तरह पौधारोपण कार्यक्रम ने प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया।

UPI पेमेंट रहेगा फ्री , फिर भी क्यों छिड़ी बहस? जानिए MDR और नए नियमों का पूरा मामला

नई दिल्ली। भारत में डिजिटल भुगतान की पहचान बन चुके UPI (Unified Payments Interface) को लेकर इन दिनों एक नई बहस छिड़ी हुई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम यूज़र्स के लिए UPI से Person-to-Person (P2P) भुगतान पर कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगाया जाएगा। साथ ही सरकार का कहना है कि UPI के अधिकांश मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी बिना शुल्क के जारी रहेंगे। इसके बावजूद संसद में पेश किए गए कानूनी बदलावों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर UPI को लेकर चर्चा क्यों तेज हो गई है। दरअसल, विवाद का केंद्र Merchant Discount Rate यानी MDR है। MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले मर्चेंट से भुगतान प्रक्रिया में शामिल संस्थाओं को दिया जाता है। सरकार की मौजूदा स्थिति यह है कि यदि भविष्य में UPI पर MDR लागू करने का फैसला लिया भी जाता है, तो इसका दायरा चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन तक सीमित रखा जा सकता है और आम उपभोक्ताओं को सीधे इसका भुगतान नहीं करना होगा।

सरकार ने क्या स्पष्ट किया?

सरकार की ओर से जारी स्पष्टीकरण के मुताबिक Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया जाने वाला UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को UPI के जरिए पैसे भेजता है, तो उसके लिए कोई ट्रांजैक्शन चार्ज लगाने की बात नहीं है। सरकार ने यह भी कहा है कि भविष्य में यदि मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने का निर्णय लिया जाता है, तो यह सभी भुगतान पर एक समान तरीके से नहीं लगाया जाएगा। इसके लिए कुछ निर्धारित श्रेणियां और सीमा तय की जा सकती हैं। यानी फिलहाल बहस को इस रूप में समझना जरूरी है कि “UPI पर आम आदमी से शुल्क लगेगा” और “कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर भविष्य में MDR लगाने की कानूनी गुंजाइश बनेगी”—ये दोनों अलग बातें हैं।

MDR क्या होता है और इसकी जरूरत क्यों पड़ रही है?

MDR यानी Merchant Discount Rate डिजिटल भुगतान के दौरान मर्चेंट से लिया जाने वाला शुल्क है। क्रेडिट और डेबिट कार्ड के मामलों में इस तरह की फीस पहले से मौजूद रही है। UPI के बड़े पैमाने पर विस्तार के साथ लंबे समय से यह सवाल भी उठता रहा है कि इतनी बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली की लागत आखिर किस तरह पूरी होगी। UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसके साथ साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने, तकनीकी ढांचे, सर्वर क्षमता और भुगतान प्रणाली को लगातार अपग्रेड करने की जरूरत भी बढ़ती है। सरकार का तर्क है कि डिजिटल भुगतान का विस्तार जारी रखने के लिए ऐसा आर्थिक मॉडल जरूरी है जो लंबे समय तक टिकाऊ हो।

कानूनी बदलाव से क्यों बढ़ी चिंता?

इस बहस की शुरुआत Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 में किए गए प्रस्तावित बदलावों से हुई। इसमें Payment and Settlement Systems Act, 2007 के प्रावधानों में बदलाव का रास्ता बनाया गया है, जिससे भविष्य में निर्धारित डिजिटल भुगतान लेनदेन पर शुल्क की व्यवस्था के लिए कानूनी आधार तैयार हो सके। लोकसभा ने इस बिल को अगस्त 2026 में पारित किया। रिपोर्टों के मुताबिक बिल को लोकसभा में बिना विस्तृत बहस के पारित किया गया, जिसके बाद UPI शुल्क को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा और तेज हुई। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि कानूनी प्रावधान बनने और वास्तव में किसी विशेष UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होने के बीच अंतर है। शुल्क की वास्तविक दर, सीमा और किन लेनदेन पर यह लागू होगा, इसके लिए आगे नियामकीय निर्णय और व्यवस्था जरूरी होगी।

क्या आम आदमी को UPI इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने होंगे?

सरकार का वर्तमान स्पष्टीकरण है कि आम यूज़र के UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। खास तौर पर P2P ट्रांजैक्शन को मुफ्त रखने की बात स्पष्ट रूप से कही गई है। यही वजह है कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में चल रही उन बातों को सावधानी से देखने की जरूरत है जिनमें यह दावा किया जा रहा है कि अब हर UPI भुगतान पर यूज़र से अलग से पैसा लिया जाएगा। ऐसा कोई सार्वभौमिक चार्ज फिलहाल घोषित नहीं किया गया है।

फिर मर्चेंट को लेकर क्या चर्चा है?

असल बहस मर्चेंट ट्रांजैक्शन को लेकर है। यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है, तो सरकार के मुताबिक इसे कुछ चुनिंदा लेनदेन तक सीमित रखा जा सकता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, नीति विकल्पों में एक ऐसा मॉडल चर्चा में रहा है जिसमें एक निश्चित सीमा से ऊपर के बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जा सकता है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट है कि अंतिम शुल्क संरचना अभी तय नहीं हुई है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि हर दुकान, हर व्यापारी या हर UPI भुगतान पर निश्चित प्रतिशत शुल्क लगना शुरू हो गया है।

UPI को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की चुनौती

UPI ने भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र को तेजी से बदला है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक, QR कोड के जरिए भुगतान लेना आम हो चुका है। ग्राहक के लिए यह सुविधा बेहद सरल है—मोबाइल उठाइए, QR स्कैन कीजिए और भुगतान पूरा। लेकिन इस पूरी व्यवस्था के पीछे बैंक, पेमेंट ऐप, सर्वर, साइबर सुरक्षा प्रणाली और तकनीकी नेटवर्क लगातार काम करते हैं। जैसे-जैसे लेनदेन बढ़ते हैं, इन व्यवस्थाओं पर खर्च भी बढ़ता है। सरकार का तर्क है कि UPI के विकास को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जिसमें केवल सरकारी सहायता या सब्सिडी पर निर्भरता न हो। इससे डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे में निजी क्षेत्र की भागीदारी और निवेश को भी बढ़ावा देने की उम्मीद की जा रही है।

क्या इससे दुकानदारों पर बोझ बढ़ेगा?

यही वह सवाल है जिस पर सबसे ज्यादा बहस हो रही है। यदि भविष्य में कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होता है, तो शुल्क का सीधा भुगतान मर्चेंट या भुगतान व्यवस्था में शामिल पक्षों की ओर से होगा। लेकिन अर्थव्यवस्था में किसी भी कारोबारी लागत का असर अंततः कीमतों पर पड़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञों और कारोबारियों के बीच यह चर्चा भी हो सकती है कि यदि किसी भुगतान माध्यम की लागत बढ़ती है, तो उसका असर ग्राहक तक किस हद तक पहुंच सकता है। दूसरी ओर, सरकार का जोर इस बात पर है कि आम UPI यूज़र से सीधे शुल्क नहीं लिया जाएगा और अधिकांश छोटे तथा सामान्य लेनदेन को शुल्क से बाहर रखने की व्यवस्था की जा सकती है।

साइबर सुरक्षा भी बड़ा कारण

UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर अपराधों से निपटना भी बड़ी चुनौती है। फर्जी QR कोड, सोशल इंजीनियरिंग, OTP से जुड़े धोखे और अन्य साइबर अपराधों को रोकने के लिए लगातार तकनीकी निवेश की जरूरत पड़ती है। सरकार का कहना है कि UPI के बढ़ते वॉल्यूम के साथ साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड प्रिवेंशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जारी रखना जरूरी है। इस दृष्टि से MDR को लेकर होने वाली चर्चा केवल शुल्क लगाने या न लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी जुड़ा है कि दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणालियों में से एक को आर्थिक रूप से लंबे समय तक कैसे मजबूत रखा जाए।

आम यूज़र के लिए अभी क्या समझना जरूरी है?

सबसे जरूरी बात यह है कि अभी UPI को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने साफ किया है कि P2P भुगतान मुफ्त रहेगा। भविष्य में किसी मर्चेंट श्रेणी पर MDR लागू होता है या नहीं, कितना होता है और किन लेनदेन पर लागू होता है—इन सवालों का अंतिम जवाब संबंधित नियामकीय निर्णयों के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए अब हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा” जैसी सीधी धारणा फिलहाल सही तस्वीर नहीं दिखाती।

निष्कर्ष

UPI को लेकर मौजूदा विवाद का केंद्र आम यूज़र पर शुल्क लगाने का फैसला नहीं, बल्कि भविष्य में चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR की संभावित व्यवस्था है। सरकार इसे डिजिटल भुगतान प्रणाली को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने और तकनीकी ढांचे में निवेश बढ़ाने की दिशा में देख रही है। वहीं, आलोचकों और कारोबारियों की चिंता यह है कि किसी भी नई लागत का अप्रत्यक्ष असर व्यापार और अंततः उपभोक्ता तक पहुंच सकता है। फिलहाल आम लोगों के लिए संदेश स्पष्ट है—UPI भुगतान जारी रहेगा और सरकार के अनुसार P2P लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। आगे MDR की दर, सीमा और लागू होने वाली श्रेणियों पर होने वाले निर्णय ही तय करेंगे कि इस बदलाव का वास्तविक असर कितना होगा।

सावन में बाबा जागेश्वर का दिव्य श्रृंगार, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर

कानपुर। सावन के पावन महीने में नवाबगंज स्थित करीब 300 वर्ष पुराने बाबा जागेश्वर मंदिर में भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। भगवान शिव के विशेष श्रृंगार, रुद्राभिषेक, महाआरती और विशाल भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। बाबा जागेश्वर के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर भक्त भावविभोर नजर आए और पूरे मंदिर परिसर में लगातार “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयकारे गूंजते रहे। सावन के अवसर पर बाबा जागेश्वर के शिवलिंग का विशेष फूलों से श्रृंगार किया गया। शिवलिंग को नीले अपराजिता, गुलाबी कमल, सफेद मोगरा-चमेली और गेंदे के फूलों से सजाया गया। इसके साथ ही रुद्राक्ष और मोतियों की मालाओं से बाबा का श्रृंगार किया गया, जिससे गर्भगृह का वातावरण बेहद मनोहारी नजर आया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। भक्तों ने बाबा के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। दिनभर मंदिर परिसर में भक्तों की आवाजाही बनी रही।

रुद्राभिषेक के बाद हुई भव्य महाआरती

विशेष श्रृंगार के बाद बाबा जागेश्वर का विधिवत रुद्राभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जल, दूध और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद बाबा को देशी घी से तैयार लड्डुओं का विशेष भोग अर्पित किया गया। रुद्राभिषेक और भोग के बाद मंदिर परिसर में भव्य महाआरती का आयोजन हुआ। ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि के बीच जैसे ही आरती शुरू हुई, श्रद्धालुओं ने जोरदार तरीके से “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयकारे लगाए। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर शिवभक्ति में डूबा नजर आया। महाआरती में महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कई श्रद्धालु परिवार के साथ मंदिर पहुंचे और काफी देर तक पूजा-अर्चना एवं भक्ति में लीन रहे।

विशाल भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

धार्मिक आयोजन के बाद मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में पूड़ी, सब्जी और हलवा समेत विभिन्न प्रकार के प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन को व्यवस्थित रखने के लिए स्वयंसेवकों ने प्रसाद वितरण, पेयजल और श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था संभाली। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। पूरे दिन मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा। एक तरफ बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही, वहीं दूसरी ओर भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते रहे।

करीब 300 वर्ष पुराना बताया जाता है मंदिर

नवाबगंज थाना क्षेत्र में स्थित बाबा जागेश्वर मंदिर का इतिहास भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का विषय है। मंदिर समिति के संयोजक जितेंद्र पांडेय के अनुसार, मंदिर करीब 300 वर्ष पुराना बताया जाता है। उनके अनुसार, जिस स्थान पर आज बाबा जागेश्वर का मंदिर स्थित है, वहां कई वर्ष पहले चारों तरफ गंगा नदी का प्रवाह हुआ करता था। यह स्थान टीलेनुमा था और आसपास निषाद परिवारों का निवास था। मंदिर की स्थापना को लेकर स्थानीय स्तर पर एक प्रचलित मान्यता भी है। बताया जाता है कि उस समय जागे नाम के एक निषाद की गाय रोजाना टीले के एक विशेष स्थान पर जाकर दूध देती थी। काफी समय तक यह क्रम चलता रहा। जब लोगों का ध्यान इस ओर गया तो उस स्थान की खुदाई कराई गई। मान्यता के अनुसार, खुदाई के दौरान वहां एक शिवलिंग मिला। इसके बाद उसी स्थान पर बाबा जागेश्वर की स्थापना की गई। धीरे-धीरे यह स्थान शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।

शिवलिंग के तीन बार रंग बदलने की मान्यता

बाबा जागेश्वर मंदिर के शिवलिंग को लेकर एक और अनूठी मान्यता श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित है। मंदिर समिति के संयोजक जितेंद्र पांडेय के अनुसार, मान्यता है कि शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है। उनके अनुसार, सुबह मंगला आरती के समय शिवलिंग का रंग स्लेटी, भोग के समय भूरा और रात करीब 11:30 बजे से मध्यरात्रि के बीच गहरे काले रंग का दिखाई देने की मान्यता है। हालांकि यह स्थानीय धार्मिक मान्यता है और इसके संबंध में कोई वैज्ञानिक पुष्टि प्रस्तुत नहीं की गई है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के बीच इस मान्यता को लेकर विशेष आकर्षण बना हुआ है। सावन के अतिरिक्त वर्षभर भी बड़ी संख्या में भक्त बाबा जागेश्वर के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

धर्म के साथ सेवा और भाईचारे का संदेश

रुद्राभिषेक, विशेष श्रृंगार और विशाल भंडारे का आयोजन जेके समूह के वाइस प्रेसिडेंट एवं समाजसेवी संजय दुबे की ओर से कराया गया। संजय दुबे ने कहा कि सावन भगवान शिव की आराधना और भक्ति का पवित्र महीना है। ऐसे अवसर पर श्रद्धालुओं की सेवा करना और उन्हें प्रसाद उपलब्ध कराना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनके माध्यम से समाज में आपसी भाईचारे, सहयोग और सेवा की भावना को भी मजबूत किया जा सकता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं।

दिनभर गूंजता रहा ‘हर-हर महादेव’

सावन के चलते बाबा जागेश्वर मंदिर में दिनभर भक्तों की भीड़ बनी रही। मंदिर परिसर में लगातार “हर-हर महादेव”, “बम-बम भोले” और “जय बाबा जागेश्वर” के जयकारे गूंजते रहे। फूलों से सजा गर्भगृह और बाबा जागेश्वर का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। भक्तों ने दर्शन और पूजन के बाद प्रसाद ग्रहण किया तथा भगवान शिव से अपने परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना की।

ये प्रमुख लोग रहे मौजूद

धार्मिक आयोजन में सांसद रमेश अवस्थी, विधायक महेश त्रिवेदी, विधायक सुरेंद्र मैथानी, विधायक नीलिमा कटियार, पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी, पूर्व विधायक सतीश निगम, जर्नलिस्ट क्लब के महामंत्री एवं वरिष्ठ पत्रकार अभय त्रिपाठी, कुमार त्रिपाठी, सर्वेश शुक्ला ‘बम-बम’, ऋषभ दुबे समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य लोग मौजूद रहे। सावन के इस धार्मिक आयोजन ने बाबा जागेश्वर मंदिर में आस्था, भक्ति और सेवा का ऐसा माहौल बनाया, जिसमें श्रद्धालु दिनभर शिवभक्ति में सराबोर नजर आए।

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