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उन्नाव में साइबर अपराध पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 103 मुकदमे दर्ज; 92 लाख रुपये कराए होल्डउन्नाव में साइबर अपराध पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 103 मुकदमे दर्ज; 92 लाख रुपये कराए होल्ड

क जनवरी 2026 से अब तक सोशल मीडिया अपराध के 57 और वित्तीय धोखाधड़ी के 46 मामले दर्ज; 60 लाख रुपये पीड़ितों को वापस दिलाने का दावा, 1210 मोबाइल फोन ब्लॉक. डेस्क रिपोर्ट

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उन्नाव जिले में बढ़ते साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस के अनुसार, एक जनवरी 2026 से अब तक साइबर अपराध से जुड़े 103 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें सोशल मीडिया से जुड़े अपराध के 57 मामले और वित्तीय धोखाधड़ी के 46 मामले शामिल हैं। पुलिस ने इन मामलों में 57 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी है। एसएसपी जयप्रकाश सिंह के मुताबिक, साइबर अपराध के मामलों में पुलिस की ओर से न केवल मुकदमा दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, बल्कि ठगी की रकम को रोकने और पीड़ितों को वापस दिलाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई के चलते बड़ी रकम को होल्ड कराया गया है।

103 मुकदमों में सोशल मीडिया और वित्तीय अपराध शामिल

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष एक जनवरी से अब तक जिले में साइबर अपराध के कुल 103 मुकदमे दर्ज हुए हैं। इनमें 57 मामले सोशल मीडिया से संबंधित अपराधों के हैं, जबकि 46 मामले वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े हुए हैं। सोशल मीडिया के जरिए होने वाले अपराधों में फर्जी प्रोफाइल, ऑनलाइन धमकी, आपत्तिजनक गतिविधियों और अन्य डिजिटल माध्यमों से जुड़े अपराध शामिल हो सकते हैं। वहीं वित्तीय साइबर अपराध में लोगों को अलग-अलग तरीकों से झांसे में लेकर उनके बैंक खातों से रकम निकालने अथवा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कराने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध की शिकायत मिलने के बाद संबंधित मामलों में जांच और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

2.54 करोड़ रुपये की ठगी, 92 लाख कराए होल्ड

वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े 46 मामलों को लेकर पुलिस ने बताया कि इन घटनाओं में कुल 2 करोड़ 54 लाख रुपये की ठगी हुई थी। पुलिस की कार्रवाई के बाद करीब 92 लाख रुपये होल्ड कराए गए। इसके अलावा पुलिस के अनुसार, 60 लाख रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए हैं। साइबर ठगी के मामलों में रकम को जल्द से जल्द होल्ड कराना महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि समय रहते बैंकिंग और संबंधित डिजिटल सिस्टम के स्तर पर कार्रवाई होने से रकम की निकासी को रोका जा सकता है। पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी का शिकार होने के बाद देरी न करने की अपील की है।

साइबर थाना और सभी थानों में हेल्प डेस्क

साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों के लिए जिले में साइबर थाना और सभी थानों में साइबर हेल्प डेस्क बनाई गई हैं। इन हेल्प डेस्क के माध्यम से लोगों की शिकायतों को दर्ज कर संबंधित मामलों में कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का उद्देश्य साइबर अपराध की शिकायतों पर जल्द कार्रवाई करने के साथ-साथ लोगों को डिजिटल धोखाधड़ी के अलग-अलग तरीकों के बारे में जागरूक करना भी है। अधिकारियों के मुताबिक, साइबर अपराध के मामलों में समय पर शिकायत मिलने से रकम को होल्ड कराने और पीड़ित को आर्थिक नुकसान से बचाने की संभावना बढ़ जाती है।

म्यूल खातों के खिलाफ भी कार्रवाई

साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों के खिलाफ भी पुलिस ने कार्रवाई की है। म्यूल खाते ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है जिनका इस्तेमाल ठगी या अवैध रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। पुलिस के अनुसार, म्यूल खातों से संबंधित तीन मुकदमों में कुल आठ आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र भेजा गया है। वहीं एक आरोपी को जेल भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है। पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी के नेटवर्क में केवल मुख्य आरोपी ही नहीं, बल्कि रकम के लेनदेन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले खातों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

1210 मोबाइल फोन ब्लॉक, 347 IMEI स्थायी रूप से बंद

साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के तहत पुलिस ने बड़ी संख्या में मोबाइल फोन को भी ब्लॉक कराया है। पुलिस के अनुसार, साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जा रहे 1210 मोबाइल फोन ब्लॉक कराए गए हैं। इसके अलावा 347 मोबाइल फोन के IMEI नंबर स्थायी रूप से बंद कराए गए हैं। किसी मोबाइल फोन का IMEI नंबर उसके डिवाइस की पहचान से जुड़ा होता है। इसे बंद किए जाने के बाद संबंधित मोबाइल डिवाइस का नेटवर्क पर इस्तेमाल प्रभावित होता है। पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल उपकरणों और संचार माध्यमों पर निगरानी बढ़ाने की दिशा में की गई कार्रवाई के रूप में बताई गई है।

NCRP पोर्टल पर 3202 मामले दर्ज

एसएसपी के मुताबिक, एक जनवरी 2026 से अब तक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर वित्तीय अपराध से संबंधित 3202 मामले दर्ज हुए हैं। इन मामलों में करीब 2 करोड़ 93 लाख रुपये होल्ड कराए जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस द्वारा दर्ज स्थानीय मुकदमों और NCRP पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के आंकड़े अलग-अलग श्रेणियों में हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों में डिजिटल माध्यम से प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।

स्कूल-कॉलेजों में लगातार चल रहा जागरूकता अभियान

साइबर अपराध पर रोकथाम के लिए पुलिस की ओर से हर सप्ताह और हर महीने जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के तहत स्कूल-कॉलेजों के अलावा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी लोगों को साइबर ठगी से बचने के तरीके बताए जा रहे हैं। पुलिसकर्मियों को भी साइबर अपराध की रोकथाम और शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी दी गई है। जागरूकता कार्यक्रमों में लोगों को फर्जी लिंक, संदिग्ध कॉल, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, ऑनलाइन भुगतान और अन्य डिजिटल माध्यमों से होने वाली धोखाधड़ी के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी से रहें सावधान

साइबर अपराध के नए तरीकों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी को लेकर भी पुलिस ने लोगों को सावधान किया है। इस तरह की ठगी में साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, आरबीआई या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराने की कोशिश कर सकते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को डिजिटल तरीके से गिरफ्तार नहीं किया जाता। एसएसपी ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाए और पैसे की मांग करे तो घबराएं नहीं। ऐसे मामलों में किसी अनजान व्यक्ति को पैसे भेजने, बैंक खाते की जानकारी देने या डिजिटल माध्यम से कोई भुगतान करने से पहले संबंधित अधिकारियों से सत्यापन करना जरूरी है।

OTP और अनजान लिंक को लेकर भी सावधानी जरूरी

पुलिस ने लोगों से कहा है कि वे किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और अपना OTP किसी के साथ साझा न करें। साइबर ठग अक्सर लोगों को आकर्षक ऑफर, बैंक खाते से संबंधित समस्या, केवाईसी अपडेट, इनाम, नौकरी, निवेश या सरकारी कार्रवाई का डर दिखाकर जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। पुलिस के मुताबिक, किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा करने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति के साथ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है तो उसे बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। समय रहते शिकायत मिलने पर संबंधित लेनदेन को रोकने और रकम होल्ड कराने की कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है। कुल मिलाकर, उन्नाव पुलिस के अनुसार साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई में मुकदमे दर्ज करने के साथ-साथ ठगी की रकम को होल्ड कराने, पीड़ितों को रकम वापस दिलाने, म्यूल खातों पर कार्रवाई, संदिग्ध मोबाइल फोन ब्लॉक करने और जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस ने लोगों से डिजिटल लेनदेन के दौरान सावधानी बरतने और साइबर ठगी होने की स्थिति में तुरंत शिकायत करने की अपील की है।

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