राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (HKRNL) के माध्यम से सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों और स्वायत्त संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए वेतन बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रस्ताव से करीब 1.20 लाख कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार के स्तर पर वेतन संशोधन से जुड़े प्रस्ताव को वित्त विभाग और मानव संसाधन विभाग की मंजूरी मिलने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी इस प्रस्ताव को पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी दे चुके हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कर्मचारियों के मासिक पारिश्रमिक में 820 रुपये से लेकर 1,540 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, संशोधित वेतन की अंतिम पुष्टि और भुगतान से संबंधित स्थिति आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। जानकारी के मुताबिक, HKRNL के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर से वेतन संशोधन के आदेश जारी किए जाने की संभावना है। इस वेतन संशोधन का उद्देश्य निगम के तहत विभिन्न सरकारी संस्थानों में काम कर रहे कर्मचारियों के पारिश्रमिक में बढ़ोतरी करना है। कर्मचारियों को मिलने वाला नया वेतन उनके कार्य-लेवल, अनुभव और संबंधित जिले की श्रेणी के आधार पर निर्धारित होगा।
एक जुलाई से लागू हो सकता है संशोधित वेतन
प्रस्ताव के अनुसार, संशोधित वेतन एक जुलाई से लागू किया जाना है। नई दरों में कर्मचारियों को उनके अनुभव के अनुसार अलग-अलग वेतन मिलेगा। इसमें पांच साल तक का अनुभव, दस साल तक का अनुभव और दस साल से अधिक अनुभव वाले कर्मचारियों के लिए अलग-अलग पारिश्रमिक निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त हरियाणा के जिलों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी के जिलों में कार्यरत कर्मचारियों की वेतन दरें दूसरी और तीसरी श्रेणी के जिलों की तुलना में अधिक रखी गई हैं। इसी तरह लेवल-1, लेवल-2 और लेवल-3 के कर्मचारियों के लिए अलग-अलग वेतन निर्धारित किया गया है। इसका अर्थ है कि सभी कर्मचारियों को एक समान वेतन नहीं मिलेगा। किसी कर्मचारी का संशोधित वेतन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह किस जिले में कार्यरत है, उसका लेवल क्या है और उसे नौकरी करते हुए कितना समय हो चुका है।
पहली श्रेणी के जिलों में कितना मिलेगा वेतन?
पहली श्रेणी में शामिल जिलों में HKRNL कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित वेतन दरें सबसे अधिक हैं। इस श्रेणी में गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत, दिल्ली और चंडीगढ़ शामिल हैं।
लेवल-1 के कर्मचारियों का वेतन:
- पांच साल तक के अनुभव पर: 21,950 रुपये प्रतिमाह
- दस साल तक के अनुभव पर: 24,150 रुपये प्रतिमाह
- दस साल से अधिक अनुभव पर: 26,340 रुपये प्रतिमाह
लेवल-2 के कर्मचारियों का वेतन:
- पांच साल तक के अनुभव पर: 25,830 रुपये प्रतिमाह
- दस साल तक के अनुभव पर: 28,420 रुपये प्रतिमाह
- दस साल से अधिक अनुभव पर: 31,000 रुपये प्रतिमाह
लेवल-3 के कर्मचारियों का वेतन:
- पांच साल तक के अनुभव पर: 26,570 रुपये प्रतिमाह
- दस साल तक के अनुभव पर: 29,230 रुपये प्रतिमाह
- दस साल से अधिक अनुभव पर: 31,890 रुपये प्रतिमाह
इस श्रेणी में लेवल-3 के दस साल से अधिक अनुभव वाले कर्मचारियों को प्रस्तावित दरों के अनुसार सबसे अधिक 31,890 रुपये मासिक पारिश्रमिक मिलेगा।
दूसरी श्रेणी के जिलों में वेतन की दरें
दूसरी श्रेणी में शामिल जिलों के कर्मचारियों के लिए भी अलग-अलग लेवल और अनुभव के आधार पर संशोधित वेतन प्रस्तावित है। इस श्रेणी में पानीपत, झज्जर, पलवल, करनाल, अंबाला, हिसार, रोहतक, रेवाड़ी, कुरुक्षेत्र, कैथल, यमुनानगर, भिवानी और जींद शामिल हैं।
लेवल-1 के कर्मचारियों का वेतन:
- पांच साल तक के अनुभव पर: 19,380 रुपये प्रतिमाह
- दस साल तक के अनुभव पर: 21,320 रुपये प्रतिमाह
- दस साल से अधिक अनुभव पर: 23,260 रुपये प्रतिमाह
लेवल-2 के कर्मचारियों का वेतन:
- पांच साल तक के अनुभव पर: 23,160 रुपये प्रतिमाह
- दस साल तक के अनुभव पर: 25,480 रुपये प्रतिमाह
- दस साल से अधिक अनुभव पर: 27,800 रुपये प्रतिमाह
लेवल-3 के कर्मचारियों का वेतन:
- पांच साल तक के अनुभव पर: 23,940 रुपये प्रतिमाह
- दस साल तक के अनुभव पर: 26,340 रुपये प्रतिमाह
- दस साल से अधिक अनुभव पर: 28,730 रुपये प्रतिमाह
दूसरी श्रेणी के जिलों में भी अनुभव बढ़ने के साथ वेतन में अंतर देखने को मिलेगा। इससे कर्मचारियों को अपनी सेवा अवधि के आधार पर निर्धारित पारिश्रमिक मिलने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
तीसरी श्रेणी के जिलों में कर्मचारियों को कितना वेतन मिलेगा?
तीसरी श्रेणी में शामिल जिलों के लिए प्रस्तावित वेतन दरें पहली और दूसरी श्रेणी की तुलना में अलग हैं। इस श्रेणी में महेंद्रगढ़, फतेहाबाद, सिरसा, नूंह और चरखी दादरी शामिल हैं।
लेवल-1 के कर्मचारियों का वेतन:
- पांच साल तक के अनुभव पर: 17,910 रुपये प्रतिमाह
- दस साल तक के अनुभव पर: 19,700 रुपये प्रतिमाह
- दस साल से अधिक अनुभव पर: 21,500 रुपये प्रतिमाह
लेवल-2 के कर्मचारियों का वेतन:
- पांच साल तक के अनुभव पर: 21,840 रुपये प्रतिमाह
- दस साल तक के अनुभव पर: 24,000 रुपये प्रतिमाह
- दस साल से अधिक अनुभव पर: 26,210 रुपये प्रतिमाह
लेवल-3 के कर्मचारियों का वेतन:
- पांच साल तक के अनुभव पर: 22,530 रुपये प्रतिमाह
- दस साल तक के अनुभव पर: 24,790 रुपये प्रतिमाह
- दस साल से अधिक अनुभव पर: 27,040 रुपये प्रतिमाह
इस तरह तीसरी श्रेणी के जिलों में भी लेवल और अनुभव के अनुसार वेतन में अंतर रहेगा। कर्मचारियों को अपने संशोधित पारिश्रमिक की जानकारी के लिए अपने कार्यस्थल, नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों और जारी होने वाले आधिकारिक आदेशों को देखना होगा।
तीन श्रेणियों में बांटे गए जिले
HKRNL कर्मचारियों के वेतन निर्धारण के लिए जिलों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
पहली श्रेणी: गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत, दिल्ली और चंडीगढ़।
दूसरी श्रेणी: पानीपत, झज्जर, पलवल, करनाल, अंबाला, हिसार, रोहतक, रेवाड़ी, कुरुक्षेत्र, कैथल, यमुनानगर, भिवानी और जींद।
तीसरी श्रेणी: महेंद्रगढ़, फतेहाबाद, सिरसा, नूंह और चरखी दादरी।
जिले की श्रेणी के साथ कर्मचारी का लेवल और अनुभव वेतन तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसलिए एक ही लेवल पर काम करने वाले दो कर्मचारियों का वेतन अलग हो सकता है, यदि उनका अनुभव या कार्यस्थल अलग श्रेणी के जिले में है।
आधिकारिक आदेश के बाद स्पष्ट होगी अंतिम स्थिति
हरियाणा में HKRNL के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों की वेतन बढ़ोतरी का प्रस्ताव हजारों परिवारों की मासिक आय से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। प्रस्तावित संशोधन के तहत कर्मचारियों को हर महीने अतिरिक्त राशि मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वेतन वृद्धि की वास्तविक तारीख, पात्र कर्मचारियों की अंतिम सूची और भुगतान की प्रक्रिया की पुष्टि संबंधित आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक मंजूरी और संबंधित विभागों की स्वीकृति के बाद अब HKRNL के आदेशों का इंतजार है। आदेश जारी होने पर कर्मचारियों को यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनके लेवल, अनुभव और जिले के आधार पर कितना संशोधित वेतन देय होगा।
महत्वपूर्ण: यहां दिए गए वेतन आंकड़े उपलब्ध प्रस्ताव संबंधी जानकारी पर आधारित हैं। अंतिम वेतन और लागू होने की तारीख के लिए HKRNL के आधिकारिक आदेश को ही मान्य माना जाना चाहिए।















