उन्नाव। जनपद उन्नाव में बाल संरक्षण से जुड़े मामलों को लेकर पुलिस प्रशासन ने संवेदनशीलता और प्रभावी कार्रवाई पर जोर दिया है। इसी क्रम में 22 सितंबर 2026 को उन्नाव पुलिस लाइन स्थित सभागार में बाल कल्याण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी श्री शैलेन्द्र लाल ने की। बैठक में जनपद के विभिन्न थानों से अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य बालकों से जुड़े मामलों में कानून के प्रावधानों का सही तरीके से पालन सुनिश्चित करना, बच्चों के हितों को प्राथमिकता देना और बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में पुलिस तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा।

बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के निर्देश

बैठक के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी शैलेन्द्र लाल ने उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया कि बालकों से संबंधित प्रत्येक मामले में विधिक प्रावधानों का पूर्ण पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों की प्रकृति संवेदनशील होती है, इसलिए ऐसे प्रकरणों में पुलिस को मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी बालक से संबंधित प्रकरण में उसकी सुरक्षा और हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। साथ ही मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित की जाए।

बाल कल्याण समिति से बेहतर समन्वय पर जोर

बैठक में बाल कल्याण समिति और पुलिस के बीच समन्वय को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में संबंधित समिति और अन्य विभागों के साथ आवश्यक तालमेल बनाए रखा जाए। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बच्चों से संबंधित मामलों में केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित न रहते हुए उनके पुनर्वास, सुरक्षा और आवश्यक सहायता की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके लिए संबंधित विभागों के साथ प्रभावी समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया।

गुमशुदा और निराश्रित बच्चों के पुनर्वास पर चर्चा

बैठक के दौरान गुमशुदा एवं निराश्रित बच्चों से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की गई। ऐसे बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और आवश्यकता के अनुसार उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि गुमशुदा बच्चों से संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई में देरी न हो। बच्चों की पहचान, सुरक्षा और उनके परिवार तक पहुंचाने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया जाए। वहीं निराश्रित बच्चों के मामलों में उनके संरक्षण और पुनर्वास के लिए संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।

बाल श्रम और बाल विवाह के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई

बैठक में बाल श्रम और बाल विवाह जैसे सामाजिक मुद्दों को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि ऐसे मामलों में कानून के तहत प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए भी आवश्यक प्रयास किए जाएं। बाल श्रम के मामलों में बच्चों के अधिकारों और उनके संरक्षण को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभागों के साथ मिलकर कार्रवाई करने की आवश्यकता पर चर्चा की गई। इसी तरह बाल विवाह की रोकथाम के लिए भी पुलिस और संबंधित विभागों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय बाल संरक्षण से जुड़े विषयों पर समाज में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास भी किए जाने चाहिए।

बाल उत्पीड़न के मामलों में त्वरित कार्रवाई पर जोर

बाल उत्पीड़न से जुड़े मामलों को लेकर भी बैठक में गंभीरता से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के उत्पीड़न की शिकायत मिलने पर मामले को संवेदनशीलता के साथ लिया जाए और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए। अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी ने अधिकारियों से कहा कि ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चे की सुरक्षा और हितों को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही संबंधित प्रकरण में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और अभिलेखीकरण को भी ठीक तरीके से पूरा किया जाए।

अभिलेखीकरण को लेकर दिए निर्देश

बैठक में समुचित अभिलेखीकरण पर भी विशेष जोर दिया गया। बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में कार्रवाई के दौरान आवश्यक दस्तावेजों और अभिलेखों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुरक्षित रखने और अद्यतन करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को बताया गया कि किसी भी मामले में कार्रवाई के साथ उसका सही रिकॉर्ड होना भी जरूरी है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित प्रकरण की पूरी जानकारी उपलब्ध हो सके और बच्चे को समयबद्ध तरीके से आवश्यक सहायता मिल सके।

विभागों के बीच समन्वय जरूरी

बैठक के दौरान यह बात सामने रखी गई कि बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में पुलिस के साथ-साथ अन्य संबंधित विभागों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में सभी संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया जाना आवश्यक है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बालकों से जुड़े मामलों में आवश्यकता के अनुसार संबंधित विभागों और बाल कल्याण समिति के साथ संपर्क बनाए रखा जाए। इससे बच्चों को आवश्यक सहायता, संरक्षण और पुनर्वास संबंधी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

समयबद्ध न्याय और सहायता उपलब्ध कराने पर जोर

अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी ने बैठक में कहा कि बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई और समयबद्ध सहायता सुनिश्चित की जानी चाहिए। किसी भी बच्चे को आवश्यक सहायता के लिए अनावश्यक रूप से इंतजार न करना पड़े, इसके लिए अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बालकों से जुड़े प्रकरणों में संवेदनशीलता, कानूनी प्रक्रिया और विभागीय समन्वय—इन तीनों पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।

बाल संरक्षण को लेकर पुलिस प्रशासन की तैयारी

उन्नाव पुलिस लाइन में आयोजित यह बैठक बाल संरक्षण से जुड़े मामलों को लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली में समन्वय और संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण रही। बैठक में गुमशुदा एवं निराश्रित बच्चों के पुनर्वास से लेकर बाल श्रम, बाल विवाह और बाल उत्पीड़न जैसे मामलों तक विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया कि बच्चों से संबंधित किसी भी मामले में कानूनी प्रावधानों का पालन, मानवीय व्यवहार, उचित अभिलेखीकरण और संबंधित विभागों के साथ समन्वय सुनिश्चित किया जाए। अब देखने वाली बात होगी कि बैठक में दिए गए निर्देशों को जमीनी स्तर पर किस प्रकार लागू किया जाता है और बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में पुलिस एवं संबंधित विभागों के बीच समन्वय कितना प्रभावी साबित होता है। फिलहाल बैठक के माध्यम से बच्चों की सुरक्षा और उनके हितों को प्राथमिकता देने पर प्रशासनिक स्तर से जोर दिया गया है।

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