सुमेरपुर। सुमेरपुर-बक्सर मार्ग पर मंगलवार सुबह उस समय बड़ा हादसा टल गया, जब स्कूली बच्चों को लेकर जा रही एक बस सामने से आ रहे तेज रफ्तार डंपर से बचने के प्रयास में सड़क किनारे गहरी खंती में उतर गई। बस में करीब 20 से 25 छात्र सवार बताए जा रहे हैं। राहत की बात यह रही कि बस चालक की सूझबूझ और तत्परता के चलते किसी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई और सभी विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना पिताई खेड़ा में चौधरी गैरेज के सामने की बताई जा रही है। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय ग्रामीण और राहगीर तत्काल मौके पर पहुंचे और बस में फंसे बच्चों को बाहर निकालने में मदद की। घटना के बाद सामने से ओवरटेक कर रहे डंपर का चालक वाहन समेत मौके से फरार हो गया।
बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी बस
जानकारी के अनुसार उदय नारायण पब्लिक स्कूल, भगवंत नगर की बस रोज की तरह मंगलवार सुबह बच्चों को लेकर विद्यालय जा रही थी। बस में करीब 20 से 25 छात्र सवार थे। बस को चालक जितेंद्र सिंह चला रहे थे, जबकि परिचालक रोहित भी बस में मौजूद थे। बताया गया कि बस निर्धारित मार्ग से स्कूल की ओर जा रही थी। इसी दौरान रास्ते में एक ट्रक अपनी दिशा में चल रहा था। उसी समय सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार डंपर ने कथित तौर पर गलत दिशा से ओवरटेक करना शुरू कर दिया। सामने से अचानक डंपर को आता देखकर बस चालक के सामने स्थिति बेहद गंभीर हो गई। चालक जितेंद्र सिंह ने तत्काल निर्णय लेते हुए बस को सड़क की बाईं ओर कच्ची पटरी की तरफ मोड़ दिया।
ऐन वक्त पर लिया फैसला, टली टक्कर
बताया जा रहा है कि डंपर को सामने देखकर चालक ने यदि बस को समय रहते नहीं मोड़ा होता तो दोनों वाहनों के बीच सीधी टक्कर की स्थिति बन सकती थी। बस की गति और सड़क किनारे ढलान होने के कारण वाहन अनियंत्रित होकर आधा हिस्सा खंती में उतर गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा भले ही डराने वाला था, लेकिन चालक की तत्परता के कारण बस डंपर से टकराने से बच गई। बस खंती में उतरने के बाद उसमें सवार बच्चों में चीख-पुकार मच गई और कुछ देर के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, बस के खंती में उतरने के बावजूद बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
हादसे की जानकारी मिलते ही आसपास मौजूद ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने बस के दरवाजे और शीशों के रास्ते बच्चों को एक-एक करके बाहर निकालने में मदद की। बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। घटना की सूचना पुलिस को भी दी गई। कुछ ही समय में भगवंत नगर चौकी पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस की मौजूदगी में दुर्घटनाग्रस्त बस को खंती से बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू की गई।
क्रेन और जेसीबी की मदद से निकली बस
बस के सड़क किनारे खंती में उतर जाने के कारण उसे सामान्य तरीके से बाहर निकालना संभव नहीं था। इसके बाद पुलिस की ओर से क्रेन और जेसीबी मशीन बुलवाई गई। काफी मशक्कत के बाद बस को खंती से बाहर निकाला गया। बस को हटाने के दौरान मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। दुर्घटनास्थल के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लगने की बात सामने आई। लगभग पौन घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बस को रास्ते से हटवाकर यातायात व्यवस्था को दोबारा सुचारु कराया।
डंपर चालक मौके से फरार
हादसे के बाद जिस डंपर को लेकर चालक और परिचालक ने ओवरटेक करने की बात बताई, उसका चालक वाहन समेत मौके से फरार हो गया। घटना के बाद ग्रामीणों ने भारी वाहनों की आवाजाही और तेज गति को लेकर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर स्कूली बसों, बाइक सवारों और अन्य छोटे वाहनों की आवाजाही लगातार रहती है। ऐसे में तेज रफ्तार भारी वाहनों से दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
जाजमऊ डायवर्जन के बाद बढ़ा भारी वाहनों का दबाव
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जाजमऊ पुल के डायवर्जन का मुद्दा भी उठाया। सामाजिक चिंतक रवींद्र कुमार (एलआईसी), प्रखर सिंह, पूर्व सभासद चंद्रिका प्रसाद, दीपक नारायण सोनी, उमा शरण सोनी, संजय और अनिल यादव (पूर्व प्रधान, हमीरपुर) समेत अन्य लोगों ने मार्ग पर बढ़े भारी वाहनों के दबाव को लेकर चिंता जताई। ग्रामीणों के मुताबिक जाजमऊ पुल के डायवर्जन के बाद सुमेरपुर-बक्सर मार्ग पर भारी वाहनों की संख्या बढ़ी है। उनका कहना है कि मार्ग पर बड़ी संख्या में ट्रकों की आवाजाही होने के कारण स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस दिशा में प्रभावी यातायात व्यवस्था बनाने की मांग की है।
स्कूल के समय भारी वाहनों पर नियंत्रण की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल आने-जाने के समय भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण लगाया जाए। इसके साथ ही मार्ग पर यातायात पुलिस की निगरानी बढ़ाने और भारी वाहनों के संचालन को व्यवस्थित करने की मांग भी की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूली बसों और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल के समय विशेष यातायात व्यवस्था की आवश्यकता है। यदि भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रह सकती है।
बाल-बाल बचे बच्चे, लेकिन उठे यातायात व्यवस्था पर सवाल
मंगलवार सुबह हुई यह घटना एक बार फिर ग्रामीण मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही और यातायात व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करती है। इस हादसे में करीब 20 से 25 बच्चों की जान जोखिम में पड़ सकती थी, लेकिन चालक की समय पर दिखाई गई सूझबूझ से स्थिति गंभीर होने से बच गई। फिलहाल बच्चों के सुरक्षित होने से अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। वहीं स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन इस मार्ग पर भारी वाहनों की गति, डायवर्जन के कारण बढ़े यातायात दबाव और स्कूल के समय यातायात प्रबंधन की समीक्षा करे। अब देखना होगा कि इस घटना के बाद प्रशासन की ओर से भारी वाहनों के आवागमन और यातायात नियंत्रण को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि भविष्य में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ठोस व्यवस्था की जाए, ताकि किसी संभावित बड़े हादसे को समय रहते रोका जा सके।
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