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कानपुर में सजेती पुलिस की बड़ी कामयाबी: 4 शातिर चोर गिरफ्तार, 51.720 किलो तांबे का तार और दो बाइक बरामद

कानपुर नगर(डेस्क रिपोर्ट):
कानपुर नगर के सजेती थाना क्षेत्र में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत सजेती पुलिस ने चेकिंग के दौरान चार शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से करीब 51.720 किलो तांबे का चोरी किया गया तार और दो मोटरसाइकिल बरामद की हैं। इस कार्रवाई से क्षेत्र में चोरी की घटनाओं पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुनील कुमार, नवाज शरीफ, सोनू और सुशील कुमार के रूप में हुई है। सभी आरोपी सजेती थाना क्षेत्र के ही निवासी बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये सभी एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे थे और इलाके में बिजली के तारों की चोरी जैसी वारदातों को अंजाम देते थे।

चेकिंग अभियान में मिली सफलता
सजेती थाना पुलिस द्वारा क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान पुलिस को चार संदिग्ध युवक दो मोटरसाइकिलों के साथ आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रोककर पूछताछ की, लेकिन वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। शक के आधार पर जब उनकी तलाशी ली गई, तो उनके पास से भारी मात्रा में तांबे का तार बरामद हुआ। तांबे के तार की मात्रा करीब 51.720 किलोग्राम बताई जा रही है, जिसकी बाजार में अच्छी-खासी कीमत है। पुलिस को आशंका है कि यह तार किसी विद्युत लाइन या औद्योगिक क्षेत्र से चोरी किया गया है। बरामद दोनों मोटरसाइकिलों के बारे में भी जांच की जा रही है कि वे चोरी की हैं या नहीं।

पहले भी रहे हैं आपराधिक मामलों में शामिल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार चारों आरोपी पहले भी विभिन्न आपराधिक मामलों में शामिल रह चुके हैं। इनके खिलाफ चोरी और अन्य अपराधों से जुड़े कई मुकदमे दर्ज हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि ये पेशेवर अपराधी हैं और लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में लिप्त थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के दौरान उनके अन्य साथियों और गिरोह के नेटवर्क के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। संभावना है कि इस गिरोह के और भी सदस्य हो सकते हैं, जो अभी फरार हैं।

तांबे के तार की चोरी क्यों होती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, तांबा एक महंगी धातु है और स्क्रैप मार्केट में इसकी अच्छी कीमत मिलती है। इसी वजह से चोर अक्सर बिजली के तारों, ट्रांसफार्मर और औद्योगिक इकाइयों से तांबे की चोरी करते हैं। इससे न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि बिजली आपूर्ति भी बाधित होती है, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सजेती क्षेत्र में भी पिछले कुछ समय से इस तरह की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही थी, जिसके बाद पुलिस ने विशेष अभियान शुरू किया था।

पुलिस की आगे की कार्रवाई
सजेती थाना पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और उन्हें न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी का यह तार कहां से लाया गया था और क्या इसमें किसी कबाड़ी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता है। इसके अलावा, बरामद मोटरसाइकिलों के दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। यदि ये वाहन चोरी के पाए जाते हैं, तो आरोपियों पर अतिरिक्त धाराएं भी लगाई जाएंगी।

स्थानीय लोगों में खुशी
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि लंबे समय से चोरी की घटनाओं से वे परेशान थे। खासकर बिजली के तारों की चोरी से बार-बार बिजली बाधित हो जाती थी, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित होता था। लोगों ने सजेती पुलिस की तत्परता और सक्रियता की सराहना करते हुए उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी और अपराधियों पर सख्त अंकुश लगाया जाएगा।

अपराध नियंत्रण की दिशा में अहम कदम
कानपुर पुलिस द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान अपराध नियंत्रण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। लगातार चेकिंग और सघन निगरानी के कारण अपराधियों में भय का माहौल बन रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आगे भी इस तरह के अभियान जारी रहेंगे और किसी भी कीमत पर अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा।

निष्कर्ष
सजेती थाना पुलिस की इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि यदि पुलिस सतर्क और सक्रिय रहे, तो अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। चार शातिर चोरों की गिरफ्तारी और भारी मात्रा में चोरी के तांबे के तार की बरामदगी न केवल एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह अन्य अपराधियों के लिए भी एक सख्त संदेश है। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों का भी पर्दाफाश किया जाएगा।

कानपुर में टीएसआई का बड़ा आरोप: कथित पत्रकार पर वसूली, फर्जी ट्वीट और कॉल के जरिए दबाव बनाने का मामला

कानपुर (डेस्क रिपोर्ट):
कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र स्थित रामादेवी चौराहे पर तैनात ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर राजेंद्र तिवारी द्वारा एक कथित पत्रकार के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों ने पुलिस महकमे और स्थानीय प्रशासन में हलचल पैदा कर दी है। टीएसआई ने आरोप लगाया है कि एक युवक, जिसने खुद को पत्रकार बताया, न केवल उनसे खर्चा मांगने का प्रयास किया बल्कि मना करने पर लगातार मानसिक दबाव बनाने के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग, भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट और फर्जी कॉल्स का सहारा लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए टीएसआई ने चकेरी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर पुलिस जांच में जुट गई है। यह मामला पत्रकारिता की आड़ में कथित रूप से अवैध वसूली और दबाव बनाने की कोशिश जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी उजागर करता है।

क्या है पूरा मामला?
टीएसआई राजेंद्र तिवारी के अनुसार, 20 अप्रैल को एक युवक उनके ड्यूटी बूथ पर पहुंचा। उसने अपना नाम रजत शर्मा बताते हुए खुद को पत्रकार बताया। आरोप है कि बातचीत के दौरान युवक ने उनसे खर्चा देने की मांग की। जब टीएसआई ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया, तो युवक ने मौके पर वीडियो बनाना शुरू कर दिया। अगले ही दिन, यानी 21 अप्रैल को, वही युवक दोबारा चौराहे पर पहुंचा और फिर से वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगा। टीएसआई का आरोप है कि यह सब उन्हें दबाव में लेने और बदनाम करने की नीयत से किया जा रहा था। इसके बाद युवक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चौराहे पर भारी जाम होने का ट्वीट कर दिया, जबकि टीएसआई के मुताबिक उस समय वहां ट्रैफिक सामान्य था और कोई जाम की स्थिति नहीं थी।

फर्जी कॉल्स से बढ़ा दबाव
टीएसआई ने आगे बताया कि 22 अप्रैल को उन्हें एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉलर आईडी पर गोविंद कुशवाहा नाम प्रदर्शित हो रहा था। फोन करने वाले ने खुद को किसी मीडिया संस्थान से जुड़ा बताते हुए टीएसआई पर एक चालक से एक हजार रुपये लेने का आरोप लगाया। इस पर टीएसआई ने कॉलर को चुनौती देते हुए कहा कि वह संबंधित चालक को सामने लाए, ताकि सच्चाई की जांच की जा सके। साथ ही उन्होंने कहा कि पूरे मामले की फुटेज भी चेक कराई जा सकती है और उच्च अधिकारियों से शिकायत की जा सकती है। लेकिन कॉलर इस पर टालमटोल करता रहा और कोई ठोस जानकारी नहीं दे सका। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति, जिसने अपना नाम भारत सिंह बताया, का भी फोन आया। टीएसआई ने संदेह जताया है कि ये सभी कॉल उसी कथित पत्रकार द्वारा करवाए गए, ताकि उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा सके और दबाव बनाया जा सके।

पुलिस जांच में जुटी
मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट, कॉल डिटेल्स और उपलब्ध वीडियो फुटेज की भी जांच कर रही है।

पत्रकारिता पर उठे सवाल
यह मामला सामने आने के बाद एक बार फिर पत्रकारिता की आड़ में गलत गतिविधियों को अंजाम देने के आरोपों पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि जांच पूरी होने तक किसी भी पक्ष को दोषी करार न दिया जाए। लेकिन अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन होगा बल्कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाएगा।

टीएसआई का पक्ष
टीएसआई राजेंद्र तिवारी का कहना है कि उन्होंने हमेशा ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाई है और उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई उनके खिलाफ गलत तरीके से दबाव बनाने की कोशिश करता है, तो वह कानूनी रास्ता अपनाएंगे।

सोशल मीडिया की भूमिका
इस पूरे मामले में सोशल मीडिया की भूमिका भी अहम रही है। एक कथित फर्जी ट्वीट के जरिए स्थिति को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश की गई, जिससे आम जनता में भ्रम फैल सकता था। यह घटना इस बात का भी संकेत देती है कि सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी के साथ किया जाना कितना जरूरी है।

आगे क्या?
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। कॉल रिकॉर्ड्स, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि मीडिया की साख और जिम्मेदारी से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में सभी की नजर अब पुलिस जांच और उसके निष्कर्ष पर टिकी हुई है।

लखनऊ (ब्यूरो चीफ- महेश कुमार):
उत्तर प्रदेश सरकार ने आम जनता, खासकर नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत देते हुए प्रॉपर्टी रजिस्ट्री को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब राज्य के प्रमुख शहरों में रविवार को भी रजिस्ट्री कार्यालय खुले रहेंगे, जिससे लोग बिना कामकाजी दिनों में छुट्टी लिए अपनी संपत्ति से जुड़े जरूरी कार्य आसानी से निपटा सकेंगे। सरकार की इस नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के नौ प्रमुख शहरों लखनऊ, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, कानपुर नगर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर (नोएडा), सहारनपुर और वाराणसी में प्रत्येक रविवार को एक-एक रजिस्ट्री कार्यालय संचालित किया जाएगा। यह कदम तेजी से बदलती जीवनशैली और लोगों की बढ़ती व्यस्तता को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।


रोटेशन सिस्टम से चलेगा काम

सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन जिलों में दो या उससे अधिक उप-निबंधक कार्यालय हैं, वहां रोटेशन के आधार पर हर रविवार एक कार्यालय खोला जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यवस्था सुचारू रूप से चले और कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ भी न पड़े। इस नई व्यवस्था से उन लोगों को विशेष लाभ मिलेगा जो सप्ताह के छह दिन नौकरी या व्यवसाय में व्यस्त रहते हैं और कार्यदिवसों में रजिस्ट्री कराने के लिए समय नहीं निकाल पाते।


पहले दिन कम रही रजिस्ट्रियां

रविवार को इस नई व्यवस्था की शुरुआत के पहले दिन अपेक्षाकृत कम संख्या में रजिस्ट्रियां दर्ज की गईं। मेरठ में 27, अलीगढ़ के खैर क्षेत्र में 6 और अन्य शहरों में भी सीमित संख्या में बैनामे हुए। अधिकारियों का मानना है कि इसका मुख्य कारण लोगों में इस नई सुविधा को लेकर जागरूकता की कमी और शुरुआती तकनीकी दिक्कतें रही हैं।


तकनीकी समस्याएं बनीं बाधा

मेरठ में पहले दिन सॉफ्टवेयर अपडेट न होने के कारण दोपहर तक टोकन जारी नहीं हो सके, जिससे कामकाज प्रभावित हुआ। हालांकि बाद में तकनीकी समस्या को दूर कर दिया गया और रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू कराई गई। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती दौर में इस तरह की समस्याएं आना सामान्य है, लेकिन जल्द ही पूरी व्यवस्था सुचारू हो जाएगी।


आने वाले दिनों में बढ़ेगी संख्या

प्रशासन को उम्मीद है कि जैसे-जैसे लोगों को इस सुविधा की जानकारी मिलेगी, रविवार को रजिस्ट्री कराने वालों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होगी। सरकार इस पहल को लेकर आशावादी है और मानती है कि यह कदम आम जनता के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा।


राजस्व में भी होगी बढ़ोतरी

इस नई व्यवस्था से न केवल लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होने की संभावना है। अधिक रजिस्ट्रियां होने से स्टांप और रजिस्ट्री शुल्क के रूप में आय बढ़ेगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।


डिजिटल युग की जरूरतों के अनुरूप कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल डिजिटल युग और बदलती जीवनशैली के अनुरूप एक सकारात्मक कदम है। आज के समय में अधिकांश लोग सप्ताह के दिनों में व्यस्त रहते हैं, ऐसे में रविवार को सरकारी सेवाओं का उपलब्ध होना उन्हें बड़ी राहत देता है।


आम लोगों की प्रतिक्रिया

कई लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है। नौकरीपेशा वर्ग का कहना है कि अब उन्हें रजिस्ट्री के लिए छुट्टी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनका समय और काम दोनों प्रभावित नहीं होंगे।


निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल आम जनता के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आई है। रविवार को रजिस्ट्री कार्यालय खुलने से जहां लोगों को सुविधा मिलेगी, वहीं सरकारी कामकाज में भी तेजी आएगी। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद यह व्यवस्था भविष्य में और अधिक प्रभावी साबित हो सकती है।

कानपुर में महिलाओं का उग्र विरोध प्रदर्शन: शराब ठेके के खिलाफ सड़क पर उतरीं सैकड़ों महिलाएं

कानपुर के बर्रा थाना क्षेत्र में स्थित गुलाबी बिल्डिंग के पास चल रहे देसी और अंग्रेजी शराब के ठेके को लेकर क्षेत्रीय महिलाओं का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर फूट पड़ा। मंगलवार को बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचीं और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महिलाओं का आरोप है कि इस ठेके के कारण इलाके का माहौल लगातार खराब हो रहा है और आए दिन असामाजिक गतिविधियों में बढ़ोतरी हो रही है।

प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि शराब ठेके के आसपास नशे में धुत लोगों की भीड़ लगी रहती है, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खासकर स्कूली छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को यहां से गुजरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं ने बताया कि कई बार नशे में धुत लोग राह चलती लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़खानी करते हैं, जिससे पूरे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

स्थानीय निवासी सरोज देवी ने कहा, “हम लोग कई महीनों से इस ठेके को हटाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है। हमारी बेटियां यहां से निकलने में डरती हैं। क्या हमें अपनी सुरक्षा के लिए भी सड़क पर उतरना पड़ेगा?” इसी तरह अन्य महिलाओं ने भी प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

बताया जा रहा है कि यह पहली बार नहीं है जब महिलाओं ने इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई हो। इससे पहले भी कई बार धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। महिलाओं ने जिलाधिकारी (डीएम) से मिलकर अपनी समस्याएं रखी थीं। उस दौरान डीएम ने आश्वासन दिया था कि 31 मार्च तक इस शराब के ठेके को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो महिलाओं का आक्रोश और बढ़ गया।

मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और ठेके को तत्काल बंद करने की मांग की। प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि मौके पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने महिलाओं को समझाने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना है कि यह सिर्फ शराब ठेके का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा और सम्मान का सवाल है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगी। कुछ महिलाओं ने यह भी चेतावनी दी कि वे सड़क जाम और भूख हड़ताल जैसे कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगी।

स्थानीय लोगों का भी इस मुद्दे पर समर्थन देखने को मिला। कई पुरुषों ने भी महिलाओं के साथ खड़े होकर इस ठेके को हटाने की मांग की। उनका कहना है कि क्षेत्र में लगातार बढ़ रही आपराधिक गतिविधियों के पीछे इस शराब ठेके की बड़ी भूमिका है। लोगों का मानना है कि ठेके के कारण न केवल कानून-व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि बच्चों के भविष्य पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।

वहीं, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पर्याप्त बल तैनात किया गया है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और संबंधित विभागों से चर्चा की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इससे जनाक्रोश बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या आम नागरिकों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं। जब महिलाएं अपनी बुनियादी सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएं, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

 

फिलहाल, बर्रा क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। सभी की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है। अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

महिलाओं की एक ही मांग है—शराब के इस ठेके को तुरंत बंद किया जाए या इसे किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सम्मान का माहौल बहाल हो सके।

खर्च नहीं उठा सकते तो शादी न करें इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, भरण-पोषण से नहीं बच सकता पति

प्रयागराज (ब्यूरो चीफ-पवन मिश्रा):
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भरण-पोषण से जुड़े एक अहम मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी पति अपनी आर्थिक कमजोरी का हवाला देकर पत्नी और बच्चों की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति विवाह के बाद आने वाली जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम नहीं है, तो उसे शुरुआत में ही शादी नहीं करनी चाहिए थी। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। मामला तेज बहादुर नामक व्यक्ति द्वारा दाखिल याचिका से जुड़ा था, जिसमें उसने परिवार न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे अपनी पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण के रूप में हर महीने 4,000 रुपये देने का निर्देश दिया गया था।

क्या था मामला?

दरअसल, परिवार न्यायालय ने पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पति तेज बहादुर को निर्देश दिया था कि वह अपनी पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण के रूप में प्रति माह 4,000 रुपये दे। पति ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि उसकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और वह इतनी राशि देने में सक्षम नहीं है। उसने अदालत से आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की। हालांकि, पत्नी की ओर से इस दलील का कड़ा विरोध किया गया। पत्नी ने अदालत को बताया कि उसके पास कोई स्वतंत्र आय का स्रोत नहीं है और वह बच्चों की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी अकेले उठा रही है। ऐसे में भरण-पोषण की राशि उसके और बच्चों के जीवन-यापन के लिए बेहद जरूरी है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाह केवल सामाजिक बंधन नहीं बल्कि एक कानूनी जिम्मेदारी भी है। अदालत ने कहा कि पति का यह कर्तव्य है कि वह अपनी पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करे। आर्थिक तंगी को इस जिम्मेदारी से बचने का आधार नहीं बनाया जा सकता। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा,
यदि कोई व्यक्ति यह महसूस करता है कि वह शादी के बाद उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को वहन नहीं कर पाएगा, तो उसे विवाह ही नहीं करना चाहिए था। यह टिप्पणी समाज में विवाह और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर एक स्पष्ट संदेश देती है कि आर्थिक जिम्मेदारी से बचना स्वीकार्य नहीं है।

परिवार न्यायालय के आदेश को ठहराया सही

हाईकोर्ट ने पाया कि परिवार न्यायालय ने मामले के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए ही भरण-पोषण की राशि तय की थी। अदालत ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए 4,000 रुपये की राशि को अधिक नहीं माना जा सकता। इस आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए पति की याचिका को खारिज कर दिया।

महत्वपूर्ण कानूनी संदेश

यह फैसला न केवल इस मामले के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज के लिए भी एक व्यापक संदेश देता है। अदालत ने साफ कर दिया है कि विवाह के बाद पति-पत्नी के बीच जिम्मेदारियों का निर्वहन अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या बहाना कानून के दायरे में स्वीकार्य नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। यह उन मामलों में एक मिसाल बन सकता है, जहां पति आर्थिक तंगी का हवाला देकर भरण-पोषण से बचने की कोशिश करते हैं।

महिलाओं के अधिकारों को मजबूती

इस फैसले से यह भी स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को लेकर गंभीर है। यदि पत्नी के पास आय का कोई साधन नहीं है और वह बच्चों की जिम्मेदारी उठा रही है, तो पति का कर्तव्य है कि वह आर्थिक सहयोग करे। यह निर्णय उन महिलाओं के लिए भी राहत का संदेश है, जो भरण-पोषण के मामलों में न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं।

समाज के लिए सीख

हाईकोर्ट की यह टिप्पणी केवल कानूनी निर्णय नहीं बल्कि एक सामाजिक संदेश भी है। विवाह से पहले जिम्मेदारियों का आकलन करना जरूरी है। केवल सामाजिक दबाव या व्यक्तिगत इच्छा के आधार पर शादी करना और बाद में जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करना न तो नैतिक रूप से सही है और न ही कानूनी रूप से।


निष्कर्ष
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला एक अहम नजीर के रूप में सामने आया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि आर्थिक तंगी का बहाना बनाकर कोई भी पति अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हट सकता। पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करना उसकी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है, जिसे हर हाल में निभाना होगा।

नई दिल्ली:
पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी नौसेना द्वारा एक ईरानी जहाज को रोके जाने की घटना ने न केवल अमेरिका और ईरान के बीच टकराव को बढ़ा दिया है, बल्कि चीन की भूमिका को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। इस घटनाक्रम के साथ-साथ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े एक कथित ‘परमाणु हमले’ के दावे ने वैश्विक स्तर पर चिंता और चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

सबसे पहले बात करते हैं उस जहाज की, जिसने इस पूरे विवाद को जन्म दिया। जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने ओमान की खाड़ी के पास ईरान के झंडे वाले कंटेनर जहाज ‘तूस्का’ को रोक लिया। यह जहाज इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइंस IRISLसमूह से जुड़ा बताया जा रहा है, जो पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में है। अमेरिकी केंद्रीय कमान CENTCOM का कहना है कि शुरुआती जांच में जहाज में मौजूद सामग्री ‘डुअल-यूज’ यानी दोहरे उपयोग वाली हो सकती है जिसका इस्तेमाल औद्योगिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

इन्हीं आरोपों के बीच अमेरिकी रिपब्लिकन नेता निक्की हैले ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह जहाज चीन से ईरान की ओर जा रहा था और इसमें मिसाइल निर्माण से जुड़े रसायन लदे हुए थे। हैले के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना ने जहाज को कई बार चेतावनी दी, लेकिन वह नहीं रुका, जिसके बाद उसे रोकना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चीन, ईरान को युद्ध जैसी स्थिति में मदद कर रहा है और यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है।

हालांकि, इन दावों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘डुअल-यूज’ सामग्री का मतलब यह नहीं होता कि उसका इस्तेमाल निश्चित रूप से सैन्य उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा। धातु, पाइप और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे सामान आमतौर पर कई उद्योगों में उपयोग किए जाते हैं, लेकिन कुछ परिस्थितियों में इन्हें मिसाइल या रक्षा कार्यक्रमों में भी शामिल किया जा सकता है।

दूसरी ओर, ईरान ने इस कार्रवाई को ‘समुद्री लूट’ करार देते हुए कड़ा विरोध जताया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रहा है और जानबूझकर क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है। ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि जब तक अमेरिका उस पर लगाए गए प्रतिबंधों और ‘नाकेबंदी’ को नहीं हटाता, तब तक वह किसी भी प्रस्तावित शांति वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा।

यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक बना हुआ है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य या राजनीतिक तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकता है।

इसी बीच एक और दावा सामने आया है, जिसने इस पूरे तनाव को और जटिल बना दिया है। पूर्व सीआईए विश्लेषक लारी जॉनसन ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक टकराव के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर परमाणु हमले पर विचार किया था। जॉनसन के अनुसार, एक आपात बैठक में ट्रंप बेहद गुस्से में थे और उन्होंने ईरान के खिलाफ परमाणु विकल्प पर चर्चा की। हालांकि, अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ ने इसका विरोध किया और इसे बेहद खतरनाक कदम बताते हुए रोक दिया।

इस दावे ने राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न तो अमेरिकी प्रशासन और न ही किसी विश्वसनीय स्वतंत्र स्रोत ने इस तरह की किसी बैठक या निर्णय की पुष्टि की है। ऐसे में विशेषज्ञ इस दावे को लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

दरअसल, अमेरिका में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का अंतिम अधिकार राष्ट्रपति के पास जरूर होता है, लेकिन इसके साथ कई स्तरों की प्रक्रियाएं, सलाह-मशविरा और सुरक्षा जांच जुड़ी होती हैं। किसी एक बैठक में अचानक परमाणु हमले का फैसला लेना व्यावहारिक रूप से बेहद जटिल और असंभव माना जाता है। यही वजह है कि कई विश्लेषक इस दावे को राजनीतिक बयानबाजी या व्यक्तिगत राय का हिस्सा मान रहे हैं।

फिर भी, इस तरह के दावे अंतरराष्ट्रीय माहौल को प्रभावित करते हैं। जब दुनिया पहले से ही कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रही हो, तब परमाणु हथियारों से जुड़े किसी भी बयान या संकेत से तनाव और बढ़ सकता है। खासकर पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्र में, जहां छोटे-छोटे घटनाक्रम भी बड़े संघर्ष का रूप ले सकते हैं।

चीन का नाम इस पूरे विवाद में आना भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। अमेरिका लंबे समय से चीन पर आरोप लगाता रहा है कि वह अप्रत्यक्ष रूप से ईरान का समर्थन करता है, जबकि चीन इन आरोपों को खारिज करता आया है। यदि जहाज में वाकई चीन से भेजी गई कोई संवेदनशील सामग्री पाई जाती है, तो यह अमेरिका-चीन संबंधों में भी नई खटास पैदा कर सकता है।

कुल मिलाकर, होर्मुज में जहाज की जब्ती, निक्की हैले के आरोप, ईरान की प्रतिक्रिया और ट्रंप से जुड़े परमाणु दावे—ये सभी घटनाएं मिलकर एक ऐसे जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य को सामने लाती हैं, जहां तथ्य, आरोप और आशंकाएं एक-दूसरे में उलझी हुई हैं।

जब तक इन दावों की पुष्टि ठोस और विश्वसनीय स्रोतों से नहीं होती, तब तक इन्हें सावधानी के साथ ही देखना जरूरी है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है, जिसका असर आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

कानपुर कोर्ट में सनसनी: 5वीं मंजिल से कूदकर 23 वर्षीय अधिवक्ता ने दी जान, व्हाट्सएप स्टेटस बना जांच का अहम सुराग

डेस्क रिपोर्ट

कानपुर। शहर के कोतवाली क्षेत्र स्थित जिला कोर्ट परिसर में गुरुवार दोपहर एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे न्यायिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया। 23 वर्षीय युवा अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने कोर्ट की पांचवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। इस घटना के बाद कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई और वकीलों, कर्मचारियों व मौजूद लोगों के बीच शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।

मिली जानकारी के अनुसार, घटना दोपहर के समय की है जब कोर्ट परिसर में सामान्य कामकाज चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रियांशु श्रीवास्तव पांचवीं मंजिल पर मौजूद थे और उस दौरान वह मोबाइल फोन पर किसी से बात कर रहे थे। पुलिस को मिले सीसीटीवी फुटेज में भी यह स्पष्ट रूप से देखा गया है कि वह बातचीत करते हुए अचानक रेलिंग के पास पहुंचे और बिना किसी चेतावनी के नीचे कूद गए।

घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में घायल अधिवक्ता को उठाकर उर्सला अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस, एसीपी और डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे परिसर को घेरकर जांच शुरू कर दी गई।

डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि प्रियांशु ने घटना से पहले अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर एक कथित सुसाइड नोट पोस्ट किया था। पुलिस ने जब उनका मोबाइल फोन जांचा तो यह जानकारी सामने आई। कोर्ट परिसर में मौजूद कई अधिवक्ताओं ने उस स्टेटस का स्क्रीनशॉट भी लिया है, जो अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। हालांकि, पुलिस अभी उस नोट की प्रामाणिकता की पुष्टि करने में जुटी है और डिजिटल फॉरेंसिक टीम की मदद ली जा रही है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि प्रियांशु फोन पर किससे बात कर रहे थे और बातचीत का विषय क्या था। कोर्ट परिसर में यह चर्चा जरूर है कि उनका किसी व्यक्ति से विवाद चल रहा था, लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल डेटा की जांच कर रही है ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों को समझा जा सके।

घटना की जानकारी मिलते ही प्रियांशु के परिजनों को सूचित किया गया। पुलिस ने उनके पिता से बातचीत की, लेकिन वह गहरे सदमे में होने के कारण कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं थे। अधिकारियों ने बताया कि यदि परिवार की ओर से कोई लिखित शिकायत तहरीर दी जाती है, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस दुखद घटना के बाद कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं के बीच भारी आक्रोश देखने को मिला। कई वरिष्ठ वकीलों ने कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतनी ऊंची मंजिलों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं और रेलिंग के पास कोई जाली या सुरक्षा अवरोध नहीं लगाया गया है, जिससे इस तरह की घटनाएं संभव हो जाती हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र शर्मा ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले भी एक स्टेनो ने आत्महत्या का प्रयास किया था, जिससे यह साफ होता है कि सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे कोर्ट परिसर में जल्द से जल्द मजबूत जाली ग्रिल लगवाई जाए और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाए।

पुलिस ने मामले की जांच के लिए अलग-अलग टीमें गठित की हैं। सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल डेटा और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस घटना के पीछे कोई मानसिक दबाव, व्यक्तिगत विवाद या अन्य कारण तो नहीं है।

यह घटना न केवल एक युवा अधिवक्ता की असमय मृत्यु है, बल्कि यह न्यायिक परिसरों में सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सवाल खड़े करती है। कोर्ट जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण संस्थान में इस तरह की घटना ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।फिलहाल, पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की असली वजह सामने आ पाएगी।

कानपुर में दर्दनाक हादसा: तेज रफ्तार डंपर ने स्कूटी सवार युवती को कुचला, मौके पर मौत

डेस्क रिपोर्ट

कानपुर नगर में एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला, जहां एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्कूटी सवार युवती की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा नौबस्ता थाना क्षेत्र के व्यस्त नौबस्ता चौराहे पर हुआ, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए।

मिली जानकारी के अनुसार, नौबस्ता थाना क्षेत्र के देवकी नगर निवासी इशरत खान स्कूटी से किसी जरूरी काम से नौबस्ता चौराहे की ओर जा रही थीं। प्रत्यक्षदर्शियों और चौराहे पर तैनात पुलिसकर्मियों के मुताबिक, युवती ने हेलमेट पहना नहीं था बल्कि उसे स्कूटी पर टांग रखा था और कानों में ईयरफोन लगाए हुए थी। इसी दौरान रामादेवी एलिवेटेड रोड की ओर से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने अचानक अपनी रफ्तार और दिशा पर नियंत्रण खो दिया और स्कूटी सवार युवती को अपनी चपेट में ले लिया।

बताया जा रहा है कि डंपर के तेज झोंके से युवती का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क पर गिर पड़ी। इससे पहले कि वह खुद को संभाल पाती, डंपर का पिछला पहिया उसके ऊपर से गुजर गया। हादसा इतना भीषण था कि युवती ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सड़क पर पड़ा शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया, जिसे देखकर राहगीरों के रोंगटे खड़े हो गए।

घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने डंपर को रोकने की कोशिश की। कुछ लोगों ने वाहन का पीछा भी किया, लेकिन चारों ओर से घिरता देख डंपर चालक ने बीच सड़क पर गाड़ी रोक दी और खिड़की खोलकर मौके से फरार हो गया। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों में आक्रोश भी देखा गया।

हादसे की सूचना मिलते ही चौराहे पर तैनात ट्रैफिक पुलिस कर्मियों टीएसआई उपेंद्र यादव और अशोक कुमार सिंह ने तुरंत कंट्रोल रूम को सूचना दी। सूचना मिलते ही नौबस्ता और हनुमंत विहार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को संभाला। पुलिस ने डंपर को अपने कब्जे में ले लिया है और चालक की तलाश शुरू कर दी है।

मौके का मंजर इतना भयावह था कि पुलिस को शव को उठाने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। वहीं, घटना की सूचना मिलते ही मृतका के परिजन भी मौके पर पहुंच गए। अपनी बहन का शव देखकर उसका भाई बिलख-बिलख कर रो पड़ा। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने किसी तरह उसे संभाला और शांत कराया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे के समय युवती ने हेलमेट नहीं पहना था और ईयरफोन लगाए होने के कारण वह आसपास के ट्रैफिक की आवाज को नहीं सुन पाई। हालांकि, पुलिस का कहना है कि हादसे के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।

नौबस्ता थाना प्रभारी बहादुर सिंह ने बताया कि डंपर को कब्जे में लेकर उसके मालिक और चालक की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा कि मृतका के परिजनों की ओर से तहरीर मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

यह हादसा एक बार फिर शहर में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और यातायात नियमों की अनदेखी की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हेलमेट का सही तरीके से उपयोग और वाहन चलाते समय सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। साथ ही, भारी वाहनों की तेज रफ्तार पर नियंत्रण और सख्त कार्रवाई भी जरूरी है, ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नौबस्ता चौराहे पर ट्रैफिक व्यवस्था को और बेहतर किया जाए तथा तेज रफ्तार वाहनों पर सख्ती से कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की भी जरूरत बताई गई है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और फरार चालक की तलाश जारी है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और मृतका के परिवार में मातम पसरा हुआ है।

कानपुर में शराबियों का आतंक: महिलाओं ने DM से लगाई गुहार, ठेका बंद कराने की मांग तेज

डेस्क रिपोर्ट

कानपुर शहर में शराब ठेकों के खिलाफ महिलाओं का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। ताजा मामला किदवई नगर क्षेत्र का है, जहां स्थानीय महिलाओं ने शराबियों की बढ़ती अराजकता से तंग आकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। महिलाओं का आरोप है कि कंपोजिट शराब ठेके के आसपास का माहौल पूरी तरह असुरक्षित हो चुका है, जिससे क्षेत्र की महिलाएं और परिवार दहशत में जीने को मजबूर हैं।

जानकारी के अनुसार, शहर के अलग-अलग इलाकों में पिछले कुछ दिनों से शराब ठेकों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। इससे पहले कर्रही सब्जी मंडी स्थित शराब ठेके के बाहर भी महिलाओं ने जमकर प्रदर्शन किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि वहां आने वाले शराबी आए दिन हंगामा करते हैं और क्षेत्र का माहौल खराब करते हैं।

इसी कड़ी में अब किदवई नगर स्थित कंपोजिट शराब ठेका विवादों के केंद्र में आ गया है। बगाही निवासी राधा सहित कई महिलाओं ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि उनके घर के ठीक बगल में गली से जुड़ा अंग्रेजी शराब का ठेका है। यहां शराब खरीदने आने वाले लोग सड़क पर ही खुलेआम शराब पीते हैं, जिससे पूरे इलाके में असामाजिक गतिविधियों का माहौल बन गया है।

महिलाओं का कहना है कि स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि गली से गुजरना तक मुश्किल हो गया है। शराब के नशे में धुत लोग राह चलती महिलाओं के सामने अभद्र व्यवहार करते हैं, यहां तक कि कई बार सार्वजनिक स्थानों पर लघुशंका करते हुए भी देखे जाते हैं। जब इसका विरोध किया जाता है, तो वे झगड़े पर उतारू हो जाते हैं और महिलाओं को डराने-धमकाने की कोशिश करते हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि यह शराब ठेका धार्मिक स्थलों के बेहद करीब स्थित है। महिलाओं ने बताया कि ठेके से महज 50 कदम की दूरी पर सैयद बाबा की मजार है, घर के पीछे मस्जिद स्थित है और सामने ब्रह्मदेव बाबा का स्थान है। ऐसे में यहां इस तरह की गतिविधियां धार्मिक भावनाओं को भी आहत कर रही हैं।

महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि ठेका संचालक नियमों की खुलकर अनदेखी कर रहा है। आबकारी विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा के बाद भी देर रात तक अतिरिक्त पैसे लेकर शराब बेची जाती है। इस संबंध में कई बार वीडियो भी बनाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे ठेका संचालक के हौसले और बढ़ गए हैं।

इस समस्या से परेशान होकर मोहल्ले के करीब 30 लोगों ने सामूहिक रूप से शिकायती पत्र पर हस्ताक्षर कर जिलाधिकारी से ठेके के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। महिलाओं का कहना है कि अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगी।

जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं महिलाओं की मुलाकात उस समय सीधे डीएम से नहीं हो सकी, क्योंकि वे कार्यालय में मौजूद नहीं थे। इसके बाद महिलाओं ने एसडीएम को अपना प्रार्थना पत्र सौंपा। एसडीएम ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

महिलाओं का कहना है कि यह केवल एक इलाके की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे शहर में कई जगहों पर शराब ठेकों के कारण इसी तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे ठेकों को आबादी और धार्मिक स्थलों से दूर स्थानांतरित किया जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।

यह मामला शहर की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है। एक ओर जहां सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं जमीनी हकीकत को उजागर करती हैं।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या महिलाओं को इस समस्या से निजात मिल पाती है या नहीं।

कानपुर में दिल दहला देने वाली वारदात: पिता ने जुड़वा बेटियों की हत्या, पुलिस जांच में जुटी

डेस्क रिपोर्ट

कानपुर के नौबस्ता थाना क्षेत्र स्थित किदवई नगर के त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में रविवार तड़के एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया। यहां एक पिता पर अपनी ही 11 वर्षीय जुड़वा बेटियों की हत्या करने का आरोप है। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है। पुलिस के अनुसार, आरोपी शशि रंजन मिश्रा, जो पेशे से मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (MR) है, अपने परिवार के साथ अपार्टमेंट के ग्राउंड फ्लोर स्थित फ्लैट में रहता था। परिवार में उसकी पत्नी रेशमा छेत्री, 11 साल की जुड़वा बेटियां रिद्धि और सिद्धि, और 6 साल का बेटा शामिल हैं।

सुबह 4:30 बजे मिली सूचना

रविवार सुबह करीब 4:30 बजे यूपी-112 पर एक कॉल आई, जिसमें सूचना दी गई कि घर में गंभीर घटना हुई है। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो फ्लैट के अंदर का दृश्य बेहद विचलित करने वाला था। दोनों बच्चियां फर्श पर पड़ी थीं और कमरे में अफरा-तफरी का माहौल था। आरोपी पिता वहीं मौजूद मिला, जिसे पुलिस ने तुरंत हिरासत में ले लिया।

पुलिस की शुरुआती कार्रवाई

डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी के मुताबिक, आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की गहन जांच की जा रही है। फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने दोनों बच्चियों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

परिवार में तनाव की आशंका

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी को अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह था। बताया जा रहा है कि इसी कारण परिवार में अक्सर विवाद होता था। हालांकि, पुलिस का कहना है कि हत्या के पीछे की असली वजह का खुलासा विस्तृत जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा।

घर में लगे थे CCTV कैमरे

यह भी सामने आया है कि घर के भीतर एंट्री गेट, हॉल, किचन और कमरों सहित कुल 6 CCTV कैमरे लगे हुए थे। पुलिस इन कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि घटना की पूरी टाइमलाइन स्पष्ट हो सके।

पत्नी का बयान

घटना के बाद पत्नी रेशमा छेत्री का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि उनकी शादी 2014 में लव मैरिज के रूप में हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद ही पति का व्यवहार बदल गया। रेशमा के अनुसार, आरोपी अक्सर शराब के नशे में रहता था और उनके साथ मारपीट करता था। उन्होंने यह भी बताया कि घर में हर जगह कैमरे लगाए गए थे और उन्हें कई बार कमरों में आने-जाने तक से रोका जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी कई बार कह चुका था कि वह बेटियों को अपने पास रखेगा और उन्हें बेटे के साथ कहीं और जाने को कहता था।

घटना से पहले की स्थिति

पत्नी के मुताबिक, घटना वाली रात सब कुछ सामान्य लग रहा था। परिवार ने साथ में खाना खाया, जिसके बाद आरोपी बेटियों को अपने कमरे में ले गया। देर रात तक वह फोन पर बात करता रहा। बताया जा रहा है कि रात करीब 2:30 बजे तक घर में कोई असामान्य हलचल नहीं दिखी। इसके बाद क्या हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी फिलहाल जांच के बाद ही सामने आएगी।

पुलिस जांच जारी

पुलिस अब इस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है और घटनास्थल से जुटाए गए सबूतों का विश्लेषण किया जा रहा है। साथ ही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और CCTV फुटेज के आधार पर घटना की सटीक परिस्थितियों का पता लगाया जाएगा।

इलाके में शोक का माहौल

इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है। स्थानीय लोग इस घटना से बेहद आहत हैं और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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