Home Uttarpradesh कानपुर कोर्ट में सनसनी: 5वीं मंजिल से कूदकर 23 वर्षीय अधिवक्ता ने...

कानपुर कोर्ट में सनसनी: 5वीं मंजिल से कूदकर 23 वर्षीय अधिवक्ता ने दी जान, व्हाट्सएप स्टेटस बना जांच का अहम सुराग

लिखित शिकायत तहरीर दी जाती है, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

डेस्क रिपोर्ट

कानपुर। शहर के कोतवाली क्षेत्र स्थित जिला कोर्ट परिसर में गुरुवार दोपहर एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे न्यायिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया। 23 वर्षीय युवा अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने कोर्ट की पांचवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। इस घटना के बाद कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई और वकीलों, कर्मचारियों व मौजूद लोगों के बीच शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।

मिली जानकारी के अनुसार, घटना दोपहर के समय की है जब कोर्ट परिसर में सामान्य कामकाज चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रियांशु श्रीवास्तव पांचवीं मंजिल पर मौजूद थे और उस दौरान वह मोबाइल फोन पर किसी से बात कर रहे थे। पुलिस को मिले सीसीटीवी फुटेज में भी यह स्पष्ट रूप से देखा गया है कि वह बातचीत करते हुए अचानक रेलिंग के पास पहुंचे और बिना किसी चेतावनी के नीचे कूद गए।

घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में घायल अधिवक्ता को उठाकर उर्सला अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस, एसीपी और डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे परिसर को घेरकर जांच शुरू कर दी गई।

डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि प्रियांशु ने घटना से पहले अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर एक कथित सुसाइड नोट पोस्ट किया था। पुलिस ने जब उनका मोबाइल फोन जांचा तो यह जानकारी सामने आई। कोर्ट परिसर में मौजूद कई अधिवक्ताओं ने उस स्टेटस का स्क्रीनशॉट भी लिया है, जो अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। हालांकि, पुलिस अभी उस नोट की प्रामाणिकता की पुष्टि करने में जुटी है और डिजिटल फॉरेंसिक टीम की मदद ली जा रही है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि प्रियांशु फोन पर किससे बात कर रहे थे और बातचीत का विषय क्या था। कोर्ट परिसर में यह चर्चा जरूर है कि उनका किसी व्यक्ति से विवाद चल रहा था, लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल डेटा की जांच कर रही है ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों को समझा जा सके।

घटना की जानकारी मिलते ही प्रियांशु के परिजनों को सूचित किया गया। पुलिस ने उनके पिता से बातचीत की, लेकिन वह गहरे सदमे में होने के कारण कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं थे। अधिकारियों ने बताया कि यदि परिवार की ओर से कोई लिखित शिकायत तहरीर दी जाती है, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस दुखद घटना के बाद कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं के बीच भारी आक्रोश देखने को मिला। कई वरिष्ठ वकीलों ने कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतनी ऊंची मंजिलों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं और रेलिंग के पास कोई जाली या सुरक्षा अवरोध नहीं लगाया गया है, जिससे इस तरह की घटनाएं संभव हो जाती हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र शर्मा ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले भी एक स्टेनो ने आत्महत्या का प्रयास किया था, जिससे यह साफ होता है कि सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे कोर्ट परिसर में जल्द से जल्द मजबूत जाली ग्रिल लगवाई जाए और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाए।

पुलिस ने मामले की जांच के लिए अलग-अलग टीमें गठित की हैं। सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल डेटा और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस घटना के पीछे कोई मानसिक दबाव, व्यक्तिगत विवाद या अन्य कारण तो नहीं है।

यह घटना न केवल एक युवा अधिवक्ता की असमय मृत्यु है, बल्कि यह न्यायिक परिसरों में सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सवाल खड़े करती है। कोर्ट जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण संस्थान में इस तरह की घटना ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।फिलहाल, पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की असली वजह सामने आ पाएगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here