खखरेरू/फतेहपुर। थाना क्षेत्र के चकिया गांव में कथित तौर पर ‘स्पेशल गुड़’ तैयार करने के नाम पर संचालित हो रही भट्ठियां ग्रामीणों के सवालों के घेरे में आ गई हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इन भट्ठियों में ताजे गन्ने के रस से गुड़ तैयार करने के बजाय बाजार से कम कीमत पर पुराना और कथित तौर पर सड़ा-गला गुड़ खरीदकर उसे दोबारा गलाया जा रहा है। इसके बाद उसमें कथित रूप से रसायन और अन्य पदार्थ मिलाकर नया गुड़ तैयार किया जाता है, जिसे ‘स्पेशल गुड़’ के नाम से बाजार में भेजे जाने का आरोप है। ग्रामीणों के इन आरोपों ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लोगों की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि गुड़ में वास्तव में किसी प्रतिबंधित या हानिकारक पदार्थ की मिलावट हो रही है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी। खाद्य सुरक्षा विभाग ने मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है।
चार-पांच महीने से चल रही भट्ठियों का दावा
ग्रामीणों के मुताबिक चकिया गांव में कथित रूप से गुड़ तैयार करने वाली ये भट्ठियां पिछले करीब चार-पांच महीने से संचालित हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में अभी गन्ने की फसल तैयार नहीं हुई है। इसके बावजूद भट्ठियों में लगातार बड़ी मात्रा में गुड़ तैयार किए जाने से उन्हें संदेह हुआ। ग्रामीणों का दावा है कि आसपास के बाजारों से पुराने गुड़ को लगभग 10 से 15 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जाता है। इसके बाद इस गुड़ को भट्ठियों तक पहुंचाया जाता है और बड़े कड़ाहों में गर्म करके गलाया जाता है। आरोप है कि गलाने की प्रक्रिया के दौरान उसमें कुछ अन्य पदार्थ और कथित रसायन मिलाए जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में ताजा गन्ने का रस उपलब्ध नहीं है तो इतनी मात्रा में गुड़ तैयार किए जाने का स्रोत भी जांच का विषय होना चाहिए।
स्पेशल गुड़’ के नाम पर पैकिंग का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि भट्ठियों में तैयार किए गए गुड़ को सामान्य रूप से खुले में बेचने के बजाय कथित तौर पर ‘स्पेशल गुड़’ लिखे गत्तों में पैक किया जाता है। इसके बाद इसे आसपास के बाजारों और दूसरे क्षेत्रों में भेजे जाने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, कथित रूप से आसपास के जनपदों के कुछ व्यापारियों के निर्देश पर गुड़ की पैकिंग और सप्लाई की जाती है। हालांकि इस पूरे नेटवर्क की वास्तविकता क्या है और तैयार गुड़ कहां-कहां भेजा जा रहा है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। यदि जांच में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन या किसी प्रतिबंधित पदार्थ के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो यह मामला गंभीर रूप ले सकता है।

भट्ठियों के आसपास साफ-सफाई को लेकर भी सवाल
ग्रामीणों ने भट्ठियों के आसपास साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गुड़ जैसे खाद्य पदार्थ को तैयार करने वाले स्थान पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, लेकिन कथित तौर पर यहां परिस्थितियां इसके विपरीत हैं। ग्रामीणों का दावा है कि कई बार देर रात तक भट्ठियों में काम चलता है। इसी दौरान गुड़ को गलाने और तैयार करने की प्रक्रिया जारी रहती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर भट्ठियों का निरीक्षण करे और वहां मौजूद कच्चे माल, तैयार गुड़ तथा इस्तेमाल किए जा रहे पदार्थों की जांच करे।
पुराने गुड़ और कथित रसायनों के नमूने लेने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि मौके पर पुराना गुड़ या किसी प्रकार का रसायन मौजूद है तो उसके नमूने लिए जाने चाहिए। इसके साथ ही तैयार ‘स्पेशल गुड़’ का भी नमूना लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में जांच कराई जानी चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि जांच केवल मौके के निरीक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि तैयार उत्पाद की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच भी कराई जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि गुड़ में किसी प्रकार की मिलावट की गई है या नहीं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और खाद्य सुरक्षा विभाग से मामले में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
विभाग की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कथित तौर पर पिछले चार-पांच महीने से भट्ठियों में गुड़ तैयार किया जा रहा है तो संबंधित विभागों की नजर अब तक इन गतिविधियों पर क्यों नहीं पड़ी। ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि क्षेत्र में संचालित ऐसी सभी भट्ठियों का निरीक्षण कराया जाए और यह देखा जाए कि वहां खाद्य पदार्थ तैयार करने के लिए निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं। उनका कहना है कि खाद्य पदार्थों में किसी भी प्रकार की मिलावट आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसलिए शिकायत को केवल आरोप मानकर छोड़ने के बजाय इसकी वैज्ञानिक जांच जरूरी है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने दिया जांच का भरोसा
मामले को लेकर मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार दीक्षित से संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि सिंथेटिक गुड़ बनाए जाने की शिकायत के मामले में जल्द ही भट्ठी पर कार्रवाई करते हुए जांच की जाएगी। अधिकारी के अनुसार, मौके पर जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गुड़ किस तरीके से तैयार किया जा रहा है और उसमें किसी प्रकार की मिलावट या प्रतिबंधित पदार्थ का इस्तेमाल किया जा रहा है या नहीं। विभाग की ओर से जांच की बात सामने आने के बाद अब ग्रामीणों की नजर कार्रवाई पर टिकी है। यदि जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
चकिया में ‘स्पेशल गुड़’ के नाम पर लगाए गए आरोपों ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के दावे कितने सही हैं और भट्ठियों में वास्तव में किस तरह गुड़ तैयार किया जा रहा है, इसका फैसला जांच रिपोर्ट के बाद ही होगा। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग मौके पर पहुंचकर भट्ठियों का निरीक्षण करे, कच्चे और तैयार माल के नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक जांच कराए और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए और यदि खाद्य पदार्थ में मिलावट या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल ‘स्पेशल गुड़’ के नाम पर चल रही कथित गतिविधियों की असली सच्चाई खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के बाद ही सामने आएगी।















