खखरेरू/फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के खखरेरू थाना क्षेत्र में बिना अनुमति सागौन के चार प्रतिबंधित पेड़ काटे जाने और उनकी लकड़ी गायब करने का मामला सामने आया है। घटना छोटी नहर के ट्यूबवेल के पास की बताई जा रही है। वन विभाग की जांच के दौरान मौके पर पेड़ों के ठूंठ मिले, जबकि काटे गए पेड़ों की लकड़ी वहां मौजूद नहीं थी। मामले में वन दरोगा की तहरीर के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वन विभाग की शिकायत के मुताबिक, क्षेत्र में अवैध पेड़ कटान की सूचना मिलने के बाद वन कर्मियों की टीम मौके पर पहुंची थी। जांच के दौरान सागौन के चार पेड़ों के कटे हुए ठूंठ पाए गए। मौके पर लकड़ी नहीं मिलने के कारण उसके हटाए जाने और संभावित बिक्री को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, पेड़ों को किसने काटा, लकड़ी कहां ले जाई गई और इसमें कौन-कौन शामिल है, इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
25 अक्टूबर को मिली थी अवैध कटान की सूचना
खखरेरू रेंज में तैनात वन दरोगा ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि 25 अक्टूबर 2026 को क्षेत्र में अवैध पेड़ कटान की सूचना मिली थी। सूचना मिलने पर वह वन विभाग के अन्य कर्मचारियों के साथ संबंधित स्थान पर पहुंचे और मौके का निरीक्षण किया। जांच के दौरान छोटी नहर के ट्यूबवेल के पास सागौन के चार पेड़ों के ठूंठ मिले। इससे पेड़ों को काटे जाने की बात सामने आई। वन विभाग की टीम ने जब मौके का निरीक्षण किया, तो वहां काटे गए पेड़ों की लकड़ी नहीं मिली। इसके बाद वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को शिकायत दी। वन विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पेड़ों को काटने के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लिए जाने का कोई विवरण सामने नहीं आया। इसी आधार पर अवैध कटान की आशंका जताते हुए मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
पेड़ों के ठूंठ मिले, लकड़ी का पता नहीं
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि सागौन के चार पेड़ों को काटने के बाद उनकी लकड़ी कहां गई। वन विभाग के निरीक्षण में मौके पर केवल ठूंठ मिलने और लकड़ी गायब होने की बात कही गई है। ऐसे में जांच के दौरान यह पता लगाना जरूरी होगा कि लकड़ी को मौके से कब हटाया गया और उसे कहीं बेचा गया या किसी अन्य स्थान पर ले जाया गया। वन दरोगा की तहरीर के अनुसार, जांच और स्थानीय लोगों से पूछताछ के दौरान पेड़ों की कटाई तथा बिक्री से जुड़े कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, संबंधित लोगों की भूमिका और आरोपों की सत्यता की पुष्टि अभी पुलिस जांच का विषय है। किसी व्यक्ति की संलिप्तता को जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निर्धारित किया जा सकता है। वन विभाग की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के पेड़ों को काटा गया और उनकी लकड़ी गायब कर दी गई। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि कटान किस परिस्थिति में हुआ और लकड़ी के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं।
उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई
वन विभाग ने मामले को उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 की संबंधित धाराओं के तहत अपराध बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। इस अधिनियम का उद्देश्य निर्धारित क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई को नियंत्रित करना और नियमों के अनुसार वृक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, किसी मामले में कौन-सी धाराएं लागू होंगी, यह संबंधित तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर तय किया जाता है। वन विभाग की तहरीर मिलने के बाद खखरेरू पुलिस ने सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों और पेड़ों की कटाई से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी। जरूरत के अनुसार मौके का निरीक्षण, संबंधित लोगों से पूछताछ और अन्य साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पुलिस की ओर से मामले में किसी गिरफ्तारी या लकड़ी की बरामदगी की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। जांच के आगे बढ़ने के साथ ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पेड़ों की कटाई किसने की और लकड़ी को कहां ले जाया गया।
थाना प्रभारी ने दी मुकदमा दर्ज होने की जानकारी
खखरेरू थाना प्रभारी सतपाल सिंह ने बताया कि वन दरोगा की तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के अनुसार, शिकायत में बताए गए तथ्यों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा कि पेड़ों की कटाई बिना अनुमति की गई थी या नहीं और गायब लकड़ी के संबंध में क्या जानकारी सामने आती है।
अवैध पेड़ कटान से पर्यावरण को नुकसान
सागौन जैसे उपयोगी वृक्षों की कटाई से जुड़े मामलों में वन विभाग की निगरानी और समय पर कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जाती है। पेड़ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, मिट्टी के संरक्षण और स्थानीय जैव विविधता के लिए अहम भूमिका निभाते हैं। यदि किसी क्षेत्र में नियमों के विरुद्ध पेड़ काटे जाते हैं, तो इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के साथ वन संरक्षण संबंधी नियमों के उल्लंघन का मामला भी बन सकता है। खखरेरू क्षेत्र में सामने आए इस मामले में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के दौरान पेड़ों की कटाई के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान हो पाती है या नहीं। साथ ही, गायब लकड़ी के संबंध में क्या जानकारी मिलती है और वन विभाग की शिकायत के आधार पर पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है। फिलहाल वन दरोगा की तहरीर पर मुकदमा दर्ज होने के बाद मामले की जांच जारी है। पेड़ों की कटाई, लकड़ी के गायब होने और संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
नोट: यह समाचार उपलब्ध विवरण और वन विभाग की शिकायत पर आधारित है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।















