खखरेरू/फतेहपुर। कनपुरवा नहर मोड़ के पास बुधवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। कुल्ली मजरा मानुपुर मोड़ के समीप मातादीन एस्ल कॉन्वेंट स्कूल की बस ट्रैक्टर को साइड देने के दौरान अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे करीब 15 फीट गहरी खंती में पलट गई। हादसे के समय बस में करीब 20 बच्चे सवार बताए जा रहे हैं। बस के खंती में पलटते ही बच्चों में चीख-पुकार मच गई। हादसे में 11 बच्चों के घायल होने की सूचना है। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों और राहगीरों ने तत्काल राहत कार्य शुरू करते हुए बस में फंसे बच्चों को बाहर निकाला। सभी घायल बच्चों को उपचार के लिए निजी अस्पताल भेजा गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें परिजनों के साथ घर भेज दिया गया।
ट्रैक्टर को साइड देते समय हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक मातादीन एस्ल कॉन्वेंट स्कूल की बस बुधवार को बच्चों को लेकर जा रही थी। कुल्ली मजरा मानुपुर मोड़ के पास सड़क पर एक ट्रैक्टर आने के बाद बस चालक उसे साइड देने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान बस का स्टेयरिंग फेल हो गया। चालक के नियंत्रण खोते ही बस सड़क से नीचे उतर गई और देखते ही देखते करीब 15 फीट गहरी खंती में पलट गई। बस के पलटते ही उसमें सवार बच्चों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ बच्चे बस के अंदर फंस गए। हादसे की आवाज सुनकर आसपास मौजूद राहगीर और खेतों में धान की कटाई कर रहे किसान तत्काल घटनास्थल की ओर दौड़े। ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए बस में फंसे बच्चों को बाहर निकालना शुरू किया।
ग्रामीणों ने दिखाई तत्परता, बच्चों को सुरक्षित निकाला
हादसे के बाद मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। बस की स्थिति देखकर ग्रामीणों ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। बस में फंसे बच्चों को एक-एक करके बाहर निकाला गया। इस दौरान बच्चों के परिजनों और ग्रामीणों में भी चिंता का माहौल रहा। घायल बच्चों को ग्रामीणों और अन्य लोगों की मदद से निजी अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार सभी घायल बच्चों का उपचार कराया गया और उपचार के बाद उनकी हालत सामान्य होने पर उन्हें उनके परिजनों के साथ घर भेज दिया गया। हादसे में बस चालक भी बाल-बाल बच गया। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले की जानकारी ली और हादसे के कारणों की जांच शुरू की।
स्कूल बस की फिटनेस पर उठे सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों ने स्कूल बस की फिटनेस और रखरखाव को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बस काफी समय से खराब हालत में चल रही थी। उनके मुताबिक बस चलते समय पीछे की ओर से तेज आवाजें आने की शिकायत भी पहले की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि बस की स्थिति को लेकर चालक और स्कूल संचालक को कथित तौर पर जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद बस की समय से सर्विस और फिटनेस नहीं कराई गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। हादसे के बाद स्कूल वाहनों की सुरक्षा और उनकी नियमित फिटनेस जांच को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाली बसों की तकनीकी स्थिति पूरी तरह दुरुस्त रहनी चाहिए, क्योंकि छोटी सी तकनीकी खराबी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
11 बच्चों के घायल होने की सूचना
हादसे में घायल बच्चों में कुल्ली मजरा मानुपुर निवासी माही सिंह (7 वर्ष), आयुष सिंह, पीयूष सिंह, खुशबू सिंह (10 वर्ष), अन्नू (7 वर्ष) और शिवम सिंह (7 वर्ष) शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा कोट मजरा दौलतपुर निवासी हर्ष सिंह (7 वर्ष), अयान सिंह (6 वर्ष) और श्रीन्स (7 वर्ष) सहित कुल 11 बच्चों के घायल होने की सूचना है। सभी घायल बच्चों को निजी अस्पताल ले जाकर उपचार कराया गया। पुलिस के अनुसार उपचार के बाद बच्चों को उनके परिजनों के साथ घर भेज दिया गया। फिलहाल किसी बच्चे की गंभीर स्थिति की जानकारी सामने नहीं आई है।
पुलिस ने शुरू की हादसे की जांच
थाना प्रभारी सत्यपाल सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हादसा बस का स्टेयरिंग फेल होने के कारण होना सामने आया है। उन्होंने बताया कि दुर्घटना के बाद सभी घायल बच्चों को उपचार के लिए निजी अस्पताल भेजा गया था। उपचार के बाद सभी बच्चे अपने परिजनों के साथ घर चले गए। थाना प्रभारी के मुताबिक घटना की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यदि स्कूल प्रबंधन या किसी अन्य की लापरवाही सामने आती है तो उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि बस की वास्तविक तकनीकी स्थिति क्या थी और क्या वह बच्चों को ले जाने के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप थी। हादसे के बाद बस की फिटनेस, रखरखाव और चालक की भूमिका समेत अन्य पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।
बड़ा हादसा टला, उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
गनीमत रही कि हादसे में किसी बच्चे की जान नहीं गई। करीब 15 फीट गहरी खंती में बस पलटने के बावजूद ग्रामीणों की तत्परता से बच्चों को जल्द बाहर निकाल लिया गया और घायलों को समय रहते अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि इस घटना ने स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाले वाहनों की नियमित तकनीकी जांच, समय पर सर्विस और फिटनेस प्रमाणपत्र की स्थिति को लेकर अब अभिभावक भी जवाब चाहते हैं। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि बस में पहले से तकनीकी खराबी थी और उसके चलते आवाज आने की शिकायत भी की गई थी, तो समय रहते उसकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई। फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस की जांच और स्कूल प्रबंधन की ओर से सामने आने वाले पक्ष के बाद यह स्पष्ट होगा कि हादसा केवल अचानक हुई तकनीकी खराबी के कारण हुआ या बस के रखरखाव में किसी तरह की लापरवाही भी सामने आती है।



















