कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में एक बेहद दर्दनाक हादसे में आठवीं कक्षा की छात्रा की जान चली गई। नौबस्ता थाना क्षेत्र के राजीव विहार में शनिवार शाम घर में खेलते समय 14 वर्षीय आरुषि त्रिपाठी की गर्दन धोती से बने झूले में फंसकर कस गई। घटना के समय वह अपने तीन साल के छोटे भाई के साथ खेल रही थी। कुछ देर पहले तक घर में सामान्य माहौल था, लेकिन अचानक हुए इस हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं। बताया गया कि आरुषि ने घर में धोती की मदद से झूला बनाया था। खेलते समय उसकी गर्दन कपड़े में फंस गई। मां निहारिका ने जब बेटी को आवाज दी और कोई जवाब नहीं मिला, तो वह कमरे में पहुंचीं। वहां आरुषि को कपड़े में फंसा और बेहोशी की हालत में देखकर उनके होश उड़ गए। परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजन आनन-फानन में छात्रा को अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सक उसकी जान नहीं बचा सके। इस घटना के बाद राजीव विहार इलाके में शोक का माहौल है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस बेटी को माता-पिता ने बड़े अरमानों से पाला था और जिसके भविष्य को लेकर कई सपने संजोए थे, उसकी अचानक मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है।
मां को चाय बनाकर दी, फिर छोटे भाई के साथ खेलने लगी आरुषि
परिजनों के मुताबिक, हादसे से कुछ देर पहले तक सब कुछ सामान्य था। आरुषि ने अपनी मां निहारिका को चाय बनाकर दी थी। इसके बाद मां अपने घरेलू काम में व्यस्त हो गईं और आरुषि अपने तीन साल के छोटे भाई के साथ खेलने लगी। खेलते समय आरुषि घर में धोती से बनाए गए झूले का इस्तेमाल कर रही थी। इसी दौरान कपड़ा उसकी गर्दन में फंस गया और कस गया। आशंका है कि गर्दन पर दबाव पड़ने से वह बेहोश हो गई। कुछ देर बाद मां निहारिका ने बेटी को आवाज लगाई, लेकिन उसकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। इस पर वह कमरे में पहुंचीं। वहां बेटी की हालत देखकर वह घबरा गईं और मदद के लिए आवाज लगाई। परिवार के दूसरे सदस्य भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद बिना देर किए आरुषि को अस्पताल ले जाया गया। परिजनों को उम्मीद थी कि समय पर इलाज मिलने से बेटी की जान बच जाएगी, लेकिन उनकी कोशिशें सफल नहीं हो सकीं। डॉक्टरों ने जांच के बाद आरुषि को मृत घोषित कर दिया। घर में खेलते समय हुआ यह हादसा परिवार के लिए ऐसी त्रासदी बन गया, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी।
माता-पिता की इकलौती बेटी थी आरुषि, परिवार के सपने टूटे
आरुषि अपने माता-पिता की इकलौती बेटी थी। उसके पिता जितेंद्र कुमार त्रिपाठी जनरलगंज स्थित कपड़े की दुकान में काम करते हैं। परिवार की सीमित आमदनी के बावजूद पिता अपनी बेटी को बेहतर शिक्षा दिलाने और उसे आगे बढ़ाने के लिए मेहनत कर रहे थे। परिवार को उम्मीद थी कि आरुषि पढ़-लिखकर अपने जीवन में आगे बढ़ेगी और अपनी उपलब्धियों से माता-पिता का नाम रोशन करेगी। वह उम्र में छोटी थी, लेकिन पढ़ाई और खेलकूद में रुचि रखती थी। परिवार के लिए वह केवल बेटी ही नहीं, बल्कि उनके भविष्य की उम्मीद भी थी। अचानक हुए इस हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। बेटी की मौत के बाद घर में मातम पसरा हुआ है। मां निहारिका के लिए इस दुख को सह पाना बेहद मुश्किल हो रहा है। जिस बेटी को कुछ समय पहले उन्होंने चाय बनाते और छोटे भाई के साथ खेलते देखा था, उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। आरुषि की मौत से आसपास के लोग भी दुखी हैं। परिजनों को सांत्वना देने के लिए लोग पहुंच रहे हैं, लेकिन परिवार के लिए इस अपूरणीय क्षति को स्वीकार करना आसान नहीं है।
कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुकी थी आरुषि
आरुषि पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी रुचि रखती थी। उसने कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल की थी और विभिन्न प्रतियोगिताओं में मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। उसकी उपलब्धियों से परिवार बेहद खुश था। कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल करना उसके अभ्यास, मेहनत और लगन को दर्शाता था। परिवार को उम्मीद थी कि वह भविष्य में भी इसी तरह आगे बढ़ेगी और नई उपलब्धियां हासिल करेगी। उसके पिता अपनी बेटी को सफल होते देखना चाहते थे। लेकिन घर में खेलते समय हुए इस अप्रत्याशित हादसे ने परिवार के सपनों को तोड़ दिया। आरुषि की उपलब्धियों और उसके उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदों के बीच उसकी अचानक मौत ने सभी को गहरे दुख में डाल दिया है।
नौबस्ता पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने की जांच
घटना की सूचना मिलने के बाद नौबस्ता थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई। इसके बाद छात्रा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। नौबस्ता इंस्पेक्टर बहादुर सिंह के मुताबिक, परिजनों ने बताया कि छात्रा घर में खेलते समय धोती से बने झूले में झूल रही थी। इसी दौरान कपड़ा उसकी गर्दन में कस गया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने घटनास्थल की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की है। अधिकारियों के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मौत के कारणों से संबंधित अंतिम निष्कर्ष चिकित्सा रिपोर्ट और जांच के तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होंगे।
घर में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता जरूरी
यह हादसा घर में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। बच्चे खेलते समय कई बार ऐसी वस्तुओं का इस्तेमाल कर लेते हैं, जिनसे अनजाने में दुर्घटना हो सकती है। कपड़े, रस्सी, दुपट्टे या धोती से बने झूले में गर्दन या शरीर का कोई हिस्सा फंसने से दम घुटने का खतरा पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों की सामान्य सुरक्षा सलाह है कि छोटे बच्चों को कपड़े या रस्सी से बने असुरक्षित झूलों पर अकेले न छोड़ें। घर में खेलते समय ऐसी वस्तुओं से दूरी रखनी चाहिए, जिनमें गर्दन या शरीर फंसने की आशंका हो। बच्चों के खेलने की जगह सुरक्षित होनी चाहिए और अभिभावकों को उनकी गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। अगर किसी बच्चे की गर्दन पर दबाव पड़ने या दम घुटने की आशंका हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। ऐसी स्थिति में देरी जानलेवा हो सकती है।
एक हादसे ने छीन ली परिवार की खुशियां
कानपुर के राजीव विहार में 14 वर्षीय आरुषि की मौत से परिवार गहरे सदमे में है। कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल करने वाली और प्रतियोगिताओं में मेडल जीतने वाली छात्रा का भविष्य उज्ज्वल माना जा रहा था। लेकिन घर में खेलते समय हुए हादसे ने उसकी जिंदगी छीन ली। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर बच्चों के खेलने की जगह और घरेलू सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत को सामने ला दिया है।















