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इंजेक्शन के बाद बिगड़ी चार वर्षीय बच्ची की हालत, लखनऊ PGI में मौत; परिजनों ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप

फतेहपुर के विजयीपुर स्थित सतगुरु क्लिनिक में उपचार के बाद बच्ची की हालत बिगड़ने का दावा; हरदोई, फतेहपुर और कानपुर के बाद लखनऊ PGI रेफर, इलाज के दौरान मौत. दुर्गेश कुमार मिश्रा की रिपोर्ट

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खखरेरू/ फतेहपुर

विजयीपुर कस्बे स्थित सतगुरु क्लिनिक में उपचार के बाद चार वर्षीय बच्ची अशी देवी की हालत बिगड़ने और बाद में लखनऊ स्थित पीजीआई में इलाज के दौरान मौत होने का मामला सामने आया है। बच्ची के परिजनों ने क्लिनिक में उपचार के दौरान कथित लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि बुखार आने पर बच्ची को इंजेक्शन लगाया गया था, जिसके बाद उसकी कमर में सूजन हो गई। कुछ समय बाद सूजन कथित तौर पर फोड़े में बदल गई और बच्ची की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों के मुताबिक, बच्ची को बेहतर इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में ले जाया गया। हरदोई, फतेहपुर और कानपुर के बाद उसे गंभीर हालत में लखनऊ के पीजीआई रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। हालांकि, बच्ची की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था और क्या उपचार के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी, इसकी पुष्टि अभी जांच और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही हो सकेगी। फिलहाल परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

25 अगस्त को आया था बुखार

बच्ची के पिता सर्वेश कुमार और मां मनीषा देवी के अनुसार, 25 अगस्त को उनकी चार वर्षीय बेटी अशी देवी को बुखार आया था। परिजन उसे उपचार के लिए विजयीपुर कस्बे में स्थित सतगुरु क्लिनिक ले गए। परिजनों का आरोप है कि क्लिनिक में डॉक्टर ने बच्ची को बुखार का इंजेक्शन कमर में लगाया। उनका कहना है कि इंजेक्शन लगने के बाद बच्ची की कमर में सूजन दिखाई देने लगी। परिवार के मुताबिक शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य समस्या समझा, लेकिन बाद में सूजन बढ़ती गई। परिजनों का दावा है कि कुछ दिनों के भीतर सूजन फोड़े का रूप लेने लगी और बच्ची की परेशानी बढ़ती चली गई। इसके बाद परिवार ने बच्ची को दोबारा क्लिनिक में दिखाया।

9 सितंबर को फोड़े का ऑपरेशन

परिजनों के अनुसार, 9 सितंबर को सतगुरु क्लिनिक में डॉक्टर बृजेश कुमार ने बच्ची की कमर में बने फोड़े का ऑपरेशन किया। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद भी बच्ची की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। परिजनों के मुताबिक बच्ची की तबीयत बिगड़ती गई और संक्रमण बढ़ने की आशंका जताई गई। हालत गंभीर होने पर परिवार को बच्ची को किसी बड़े अस्पताल में उपचार कराने की सलाह दी गई। यहीं से परिवार ने बच्ची को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग अस्पतालों का रुख किया।

हरदोई से फतेहपुर और फिर कानपुर रेफर

परिजनों के अनुसार बच्ची को गंभीर हालत में हरदोई ले जाया गया। वहां उपचार के बाद उसकी स्थिति को देखते हुए उसे फतेहपुर सदर अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद बच्ची को हैलेट अस्पताल, कानपुर रेफर किए जाने की बात परिजनों ने बताई। कानपुर में चिकित्सकों ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आगे के उपचार के लिए लखनऊ पीजीआई रेफर कर दिया। परिवार के अनुसार बच्ची की हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। परिजन उसे लेकर लखनऊ पहुंचे और पीजीआई में इलाज शुरू कराया गया।

पीजीआई में इलाज के दौरान मौत

परिजनों का कहना है कि लखनऊ पीजीआई में चिकित्सकों ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाज शुरू किया। परिवार के अनुसार डॉक्टरों ने संक्रमण के शरीर में फैलने की बात बताई। गुरुवार सुबह करीब छह बजे इलाज के दौरान चार वर्षीय अशी देवी ने दम तोड़ दिया। बच्ची की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। चार साल की मासूम बच्ची की मौत से माता-पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि उन्होंने बच्ची को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया और उसे कई अस्पतालों में लेकर गए, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

तीन बहनों में सबसे बड़ी थी अशी

अशी देवी अपने परिवार में तीन बहनों में सबसे बड़ी थी। उसकी उम्र महज चार वर्ष थी। उसके बाद ढाई वर्षीय मानसी और सात माह की प्रिया हैं। अशी की मौत से परिवार के सामने दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का कहना है कि छोटी बच्ची के अचानक चले जाने से पूरा परिवार सदमे में है। माता-पिता का आरोप है कि यदि शुरुआती उपचार के दौरान सही चिकित्सकीय व्यवस्था और उपचार मिला होता तो शायद स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। हालांकि, यह परिजनों की धारणा और आरोप है। बच्ची की मौत के कारणों की चिकित्सकीय पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।

क्लिनिक बंद कर डॉक्टर के चले जाने का आरोप

बच्ची के परिवार और कुछ स्थानीय लोगों की ओर से सतगुरु क्लिनिक के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि क्लिनिक में संचालन से संबंधित पंजीकरण या चिकित्सकीय मान्यता की स्पष्ट जानकारी प्रदर्शित नहीं थी। परिजनों और स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि बच्ची की लखनऊ पीजीआई में मौत की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित डॉक्टर क्लिनिक बंद कर वहां से चले गए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। क्लिनिक की वैधता, पंजीकरण और वहां उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं की वास्तविक स्थिति संबंधित स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

जांच से स्पष्ट होगा मौत का वास्तविक कारण

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल बच्ची की हालत बिगड़ने और मौत के वास्तविक कारण को लेकर है। परिजनों ने उपचार के दौरान कथित लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि चिकित्सकीय तौर पर यह निर्धारित करने के लिए बच्ची के उपचार से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट, दवाइयों का विवरण और अस्पतालों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होंगी। यदि परिवार की ओर से शिकायत की जाती है तो स्वास्थ्य विभाग या संबंधित प्रशासनिक अधिकारी क्लिनिक के संचालन, उपचार की प्रक्रिया और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय विशेषज्ञों की राय भी ली जा सकती है। ऐसी स्थिति में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच रिपोर्ट और मेडिकल साक्ष्यों को देखना जरूरी होगा।

परिवार ने कार्रवाई की मांग की

बच्ची के परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी बेटी के उपचार से जुड़े सभी दस्तावेजों और मेडिकल रिपोर्ट की जांच कराई जाए। परिवार चाहता है कि यदि जांच में किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही स्थानीय स्तर पर संचालित निजी क्लिनिकों की जांच कराने की मांग भी उठाई गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वहां आवश्यक चिकित्सकीय मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। फिलहाल बच्ची की मौत के बाद मामला गंभीर हो गया है। अब स्वास्थ्य विभाग की जांच, मेडिकल रिकॉर्ड और संबंधित अस्पतालों की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि बच्ची की हालत किन परिस्थितियों में बिगड़ी और उसकी मौत का चिकित्सकीय कारण क्या था।

निष्कर्ष

चार वर्षीय अशी देवी की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों ने सतगुरु क्लिनिक में उपचार के दौरान कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है। इंजेक्शन के बाद सूजन, फोड़ा, ऑपरेशन और उसके बाद लगातार बिगड़ती हालत से लेकर लखनऊ पीजीआई में मौत तक की पूरी घटनाक्रम की जांच आवश्यक है। मेडिकल रिकॉर्ड और विशेषज्ञ जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि बच्ची की मौत के पीछे संक्रमण का कारण क्या था और उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं।

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