Home Blog Page 6

UP News: यूपी बोर्ड का बड़ा फैसला: 70 जिलों के 465 विद्यालयों की मान्यता समाप्त, अभिभावकों और छात्रों के लिए जरूरी सूचना

ब्यूरो चीफ श्रीकीर्ति उपाध्याय

लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने प्रदेश के छात्रों, अभिभावकों और विद्यालय संचालकों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। प्रदेश के 70 जिलों के 465 वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता स्वतः समाप्त कर दी गई है। यह कार्रवाई उन विद्यालयों पर की गई है जिन्होंने लगातार दो वर्षों तक कक्षाओं का संचालन नहीं किया या फिर वर्ष 2025 और 2026 की यूपी बोर्ड परीक्षाओं में एक भी परीक्षार्थी शामिल नहीं कराया। यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह द्वारा जारी सूचना के अनुसार, यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अधिनियम के प्रावधानों के तहत की गई है। बोर्ड ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को निर्देश दिए हैं कि संबंधित विद्यालयों की सूची का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि विद्यार्थी और अभिभावक किसी भी अमान्य विद्यालय में प्रवेश लेने से बच सकें।

465 विद्यालयों की मान्यता स्वतः समाप्त

यूपी बोर्ड के अनुसार, जिन विद्यालयों ने लगातार दो वर्षों तक शैक्षणिक गतिविधियां नहीं चलाईं या बोर्ड परीक्षा में एक भी छात्र-छात्रा को शामिल नहीं कराया, उनकी मान्यता स्वतः समाप्त मानी जाएगी। बोर्ड का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए यह कदम आवश्यक था। बोर्ड का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना और फर्जी या निष्क्रिय विद्यालयों पर रोक लगाना भी है।

जिला विद्यालय निरीक्षकों को दिए गए निर्देश

यूपी बोर्ड सचिव ने सभी जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को निर्देशित किया है कि संबंधित विद्यालयों की सूची सार्वजनिक की जाए। इसके लिए स्कूलों, शिक्षा विभाग की वेबसाइट, नोटिस बोर्ड और अन्य माध्यमों का उपयोग किया जाए ताकि किसी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो।

अभिभावकों और छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि किसी भी विद्यालय में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता की स्थिति अवश्य जांच लें। यदि कोई विद्यालय मान्यता समाप्त होने के बावजूद प्रवेश देता है, तो उससे छात्र का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

अम्बेडकर नगर जिले के जिन विद्यालयों की मान्यता समाप्त हुई

यूपी बोर्ड द्वारा जारी सूची के अनुसार अम्बेडकर नगर जिले के निम्न विद्यालयों की मान्यता समाप्त की गई है—

  • भीम ज्योति बी.एच.एस.एस., इस्मिलपुर
  • राम दुलार इंटर कॉलेज, अंबरपुर
  • एसआरएचएसएस, डी पुर, अम्बेडकर नगर
  • आईबी यूएमवी, राजेसुल्तानपुर
  • जेके मौर्य कन्या इंटर कॉलेज, टांडा
  • श्री राम बालिका इंटर कॉलेज, बसखारी
  • हाई स्कूल, सकरा यूसुफपुर
  • पीएस बालिका इंटर कॉलेज, टांडा
  • अनरुल्लाह हबीबुल निशा इंटर कॉलेज, अम्बेडकर नगर

इसी प्रकार प्रदेश के अन्य 70 जिलों के विद्यालय भी इस सूची में शामिल हैं।

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि निष्क्रिय विद्यालयों की मान्यता समाप्त करने से शिक्षा व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी। इससे केवल वही विद्यालय संचालित रहेंगे जो वास्तव में छात्रों को शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं और बोर्ड के नियमों का पालन कर रहे हैं।

क्या करें यदि आपका विद्यालय सूची में है?

यदि किसी छात्र का विद्यालय इस सूची में शामिल है तो उसे तुरंत जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय या यूपी बोर्ड से संपर्क कर आगे की प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए। अभिभावकों को भी बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मान्यता प्राप्त विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित करना चाहिए।

यूपी बोर्ड का संदेश

यूपी बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई नियमों के अनुसार की गई है और इसका उद्देश्य छात्रों के हितों की रक्षा करना है। बोर्ड ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सूची का व्यापक प्रचार-प्रसार कर विद्यार्थियों और अभिभावकों को समय रहते जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

Ghazipur News: मोहर्रम को लेकर गाजीपुर में हाई अलर्ट, डीएम-एसपी ने किया फ्लैग मार्च; सुरक्षा और व्यवस्थाओं का लिया जायजा

ब्यूरो चीफ- पवन मिश्रा

गाजीपुर। आगामी मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से गाजीपुर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) के नेतृत्व में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस बल के साथ फ्लैग मार्च (रूट मार्च) निकाला गया। फ्लैग मार्च के दौरान प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने प्रमुख मार्गों, संवेदनशील क्षेत्रों तथा मोहर्रम के जुलूस मार्गों का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से संवाद करते हुए शांति, भाईचारा और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की।

मोहर्रम को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क

मोहर्रम पर्व को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। अधिकारियों का कहना है कि पर्व के दौरान किसी भी प्रकार की अफवाह, अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। डीएम और एसपी की अगुवाई में निकले फ्लैग मार्च का उद्देश्य लोगों में सुरक्षा का विश्वास बढ़ाना और असामाजिक तत्वों को स्पष्ट संदेश देना था कि प्रशासन पूरी तरह सक्रिय और सतर्क है।

संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी

प्रशासन द्वारा शहर के उन क्षेत्रों को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है, जिन्हें सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। इन इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, नियमित गश्त और लगातार निगरानी की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा प्रमुख चौराहों, बाजारों और जुलूस मार्गों पर भी सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। पुलिस अधिकारी लगातार क्षेत्र का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं।

रूट मार्च के दौरान तैयारियों का लिया गया जायजा

फ्लैग मार्च के दौरान डीएम और एसपी ने मोहर्रम से जुड़ी तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि पर्व से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर ली जाएं।

निरीक्षण के दौरान निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए—

  • सड़कों एवं जुलूस मार्गों की साफ-सफाई
  • बिजली व्यवस्था सुचारु रखने के निर्देश
  • खुले एवं लटकते बिजली के तारों की जांच
  • जलभराव वाले स्थानों की सफाई
  • बैरिकेडिंग एवं ट्रैफिक प्रबंधन
  • संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती

Ghazipur News: सरकारी कार्य के दौरान लेखपाल पर हमला, ईंट लगने से सिर फूटा; आरोपी के खिलाफ कार्रवाई शुरू

ब्यूरो चीफ- पवन मिश्रा

गाजीपुर। गाजीपुर जनपद के सदर तहसील क्षेत्र अंतर्गत सहेड़ी गांव में सरकारी कार्य के दौरान राजस्व विभाग की टीम पर हुए कथित हमले ने प्रशासनिक अमले में हलचल मचा दी है। तालाब की खुदाई और नाली निर्माण जैसे सार्वजनिक कार्यों की निगरानी के लिए पहुंची टीम के साथ मौजूद लेखपाल अनिल प्रजापति पर गांव के ही एक युवक द्वारा कथित रूप से ईंट-पत्थर से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना में लेखपाल के सिर में गंभीर चोट आई, जिसके बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। फिलहाल पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

सरकारी कार्य के लिए गांव पहुंची थी संयुक्त टीम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सदर तहसील के सहेड़ी गांव में तालाब की खुदाई और नाली निर्माण का कार्य कराया जा रहा था। कार्य की प्रगति और राजस्व संबंधी औपचारिकताओं के लिए राजस्व विभाग की टीम गांव पहुंची थी। टीम के साथ स्थानीय पुलिस और पंचायती राज विभाग के कर्मचारी भी मौजूद थे, ताकि सरकारी कार्य शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जा सके। इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई और आरोप है कि गांव के एक युवक ने टीम में शामिल लेखपाल अनिल प्रजापति पर ईंट-पत्थर से हमला कर दिया।

हमले में सिर पर आई गंभीर चोट

प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, हमले के दौरान लेखपाल के सिर पर ईंट लगने से उन्हें गंभीर चोट लगी। घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया और बाद में उन्हें मेडिकल कॉलेज भेजा गया। डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। फिलहाल उनकी स्थिति पर चिकित्सकीय निगरानी रखी जा रही है।

घटना के बाद मचा हड़कंप

सरकारी अधिकारी पर हमले की सूचना मिलते ही प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल घटना की जानकारी दी गई। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले से जुड़े तथ्यों को एकत्र करना शुरू कर दिया। प्रशासन का कहना है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और सरकारी कर्मचारी पर हमला करने जैसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश

प्रशासन ने आरोपी युवक के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। जांच अधिकारी घटना से जुड़े सभी साक्ष्यों को एकत्र कर रहे हैं ताकि निष्पक्ष तरीके से पूरे मामले की जांच पूरी की जा सके।

सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना के बाद सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। राजस्व विभाग, पंचायती राज विभाग और अन्य सरकारी कर्मचारी अक्सर गांवों में विकास कार्यों, राजस्व संबंधी कार्यवाहियों और सार्वजनिक योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में ड्यूटी के दौरान किसी अधिकारी या कर्मचारी पर हमला होना गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी कार्यों के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि कर्मचारी बिना किसी भय के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।

पुलिस जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि घटना के संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में अभी जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

Kanpur News: निर्जला एकादशी पर मां योग कृपा सेवा समिति ने राहगीरों को पिलाया ठंडा मैंगो शेक, सेवा और मानवता का दिया संदेश

संवाददाता-अरुण कुमार जोशी

कानपुर। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर मां योग कृपा सेवा समिति द्वारा जनसेवा और मानव कल्याण की भावना के साथ एक सराहनीय पहल की गई। गुरुवार को समिति ने पराग डेयरी स्थित हनुमान मंदिर के बाहर राहगीरों, श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रीय नागरिकों के लिए ठंडे और मीठे मैंगो शेक का नि:शुल्क वितरण किया। भीषण गर्मी के बीच आयोजित इस सेवा कार्य ने लोगों को राहत पहुंचाने के साथ-साथ समाज में सेवा, सहयोग और परोपकार का संदेश भी दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे भगवान हनुमान के पूजन-अर्चन के साथ किया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में राहगीरों, मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और आसपास के लोगों को मैंगो शेक वितरित किया गया। समिति के सदस्यों ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ सेवा कार्य को सफल बनाया।

निर्जला एकादशी का महत्व बताया

इस अवसर पर समिति की सचिव सारिका श्रीवास्तव ने कहा कि निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, व्रत, दान-पुण्य और सेवा का विशेष महत्व होता है। उन्होंने बताया कि समिति का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि समाज के जरूरतमंद लोगों तक सेवा पहुंचाना भी है। उन्होंने कहा कि “भीषण गर्मी के इस मौसम में राहगीरों को ठंडा पेय उपलब्ध कराना भी एक प्रकार की मानव सेवा है। सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और हमारी संस्था इसी भावना के साथ पूरे वर्ष विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करती रहती है।”

भीषण गर्मी में लोगों को मिली राहत

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में राहगीर, ऑटो चालक, रिक्शा चालक, मजदूर, छात्र एवं स्थानीय लोग मैंगो शेक ग्रहण करने पहुंचे। लोगों ने समिति की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि तेज धूप और गर्मी में इस प्रकार का सेवा कार्य वास्तव में राहत देने वाला है। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि धार्मिक पर्वों पर इस तरह के सामाजिक आयोजन समाज में भाईचारे और मानवता की भावना को मजबूत करते हैं। लोगों ने समिति के सदस्यों का आभार भी व्यक्त किया।

समिति वर्षभर चलाती है जनसेवा अभियान

समिति की ओर से बताया गया कि मां योग कृपा सेवा समिति लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। संस्था समय-समय पर जरूरतमंद लोगों की सहायता, स्वास्थ्य जागरूकता, शिक्षा सहयोग, खाद्य सामग्री वितरण, पौधारोपण तथा अन्य सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करती रहती है। समिति का लक्ष्य समाज के हर वर्ग तक सहायता और सेवा पहुंचाना है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोग लाभान्वित हो सकें।

19 जुलाई को होगा साइकिल वितरण कार्यक्रम

कार्यक्रम के दौरान समिति की ओर से आगामी सामाजिक योजनाओं की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि 19 जुलाई को संस्था द्वारा जरूरतमंद एवं आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को साइकिल वितरण का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे बच्चों की मदद करना है, जिन्हें विद्यालय आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। संस्था का प्रयास है कि शिक्षा के क्षेत्र में भी जरूरतमंद बच्चों को हरसंभव सहयोग दिया जाए।

नए कार्यालय एवं शिक्षण संस्थान का विस्तार

समिति ने अपने सामाजिक कार्यों के विस्तार के तहत साकेत नगर, रामलीला पार्क के पास नए कार्यालय एवं शिक्षण संस्थान की शुरुआत की है। पदाधिकारियों का कहना है कि नए परिसर से सामाजिक, शैक्षिक और सेवा संबंधी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जाएगा।

इन लोगों की रही सक्रिय भागीदारी

मैंगो शेक वितरण कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष जितेंद्र बाजपेई, उपाध्यक्ष बीना गुप्ता, सचिव सारिका श्रीवास्तव, पुष्पा शुक्ला, सोनाली त्रिवेदी, आशु त्रिवेदी, महिमा सहित संस्था के बच्चों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में पुष्पा शुक्ला का विशेष सहयोग रहा। सभी स्वयंसेवकों ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेवा कार्य को संपन्न कराया।

सेवा कार्यों से समाज को मिल रही नई दिशा

आज के समय में जब सामाजिक जीवन में संवेदनशीलता और सहयोग की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है, ऐसे में मां योग कृपा सेवा समिति जैसे संगठन सेवा कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश दे रहे हैं। निर्जला एकादशी जैसे पावन अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि मानवता, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।

Fatehpur News: भांजी की शादी में शामिल होने आई मामी की करंट लगने से मौत, खुशियां पलभर में मातम में बदलीं

संवाददाता-दुर्गेश कुमार मिश्रा

फतेहपुर/खखरेरू। धाता विकासखंड के अकिलपुर ऐराना गांव में आयोजित एक शादी समारोह उस समय मातम में बदल गया, जब भांजी की शादी में शामिल होने आई एक महिला की करंट लगने से दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे परिवार में कोहराम मच गया और जहां एक ओर शादी की रस्में चल रही थीं, वहीं दूसरी ओर परिजनों की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह रहा था। जानकारी के अनुसार, गांव निवासी लक्ष्मण मौर्य की पुत्री का विवाह 22 जून को निर्धारित था। शादी समारोह में शामिल होने के लिए रिश्तेदार और मेहमान दूर-दूर से पहुंचे हुए थे। दुल्हन की मामी नीलू मौर्य (21 वर्ष) पत्नी शिव प्रसाद, निवासी वार्ड नंबर-1 अंबेडकर नगर कमलाखेर, खागा भी अपनी भांजी की शादी में शामिल होने के लिए आई थीं। परिजनों के अनुसार, विवाह समारोह को रोशनी से सजाने के लिए टेंट हाउस द्वारा घर में बिजली की अस्थायी व्यवस्था की गई थी। आरोप है कि बिजली की एक तार कमरे के अंदर लगी लोहे की खूंटी में लपेट दी गई थी। यह तार पूरी तरह सुरक्षित नहीं थी और उसमें करंट प्रवाहित हो रहा था।

सामान उतारते समय हुआ हादसा

बताया जाता है कि शाम करीब साढ़े आठ बजे बारात के आगमन की तैयारियां चल रही थीं। घर के सभी सदस्य और रिश्तेदार बारातियों के स्वागत में व्यस्त थे। इसी दौरान नीलू मौर्य किसी आवश्यक सामान को लेने के लिए कमरे में गईं। कमरे में लगी लोहे की खूंटी पर कुछ सामान टंगा हुआ था। जैसे ही उन्होंने खूंटी पर टंगा सामान उतारने का प्रयास किया, उनका हाथ खूंटी में लिपटी बिजली की तार के संपर्क में आ गया। करंट लगते ही वह बुरी तरह झुलस गईं और जोर-जोर से चीखने लगीं।

बचाने पहुंची जेठानी भी चपेट में आई

नीलू की चीख सुनकर उनकी जेठानी उन्हें बचाने के लिए दौड़ीं, लेकिन करंट के प्रभाव के कारण वह भी झटके की चपेट में आ गईं। हालांकि अन्य लोगों ने तत्काल बिजली सप्लाई बंद कर दोनों को अलग किया। घटना के बाद शादी समारोह में अफरा-तफरी मच गई। परिजन आनन-फानन में नीलू को गंभीर हालत में इलाज के लिए कौशांबी जनपद के सिराथू स्थित अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों द्वारा मौत की पुष्टि किए जाने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया।

खुशियों के बीच पसरा मातम

जिस घर में शादी की खुशियां मनाई जा रही थीं, वहां अचानक मातम छा गया। मेहमानों और रिश्तेदारों के चेहरों पर मायूसी छा गई। कई लोग बिना भोजन किए ही वापस लौट गए। परिवार के सामने एक ओर बेटी की शादी की जिम्मेदारी थी और दूसरी ओर प्रिय सदस्य की मौत का गहरा दुख। ऐसे में परिजनों ने भारी मन से रात में विवाह की आवश्यक रस्में पूरी कराईं और सुबह करीब पांच बजे दुल्हन की विदाई कर दी।

एक वर्ष पहले हुई थी शादी

जानकारी के अनुसार, नीलू मौर्य मूल रूप से कौशांबी जनपद के भरेठाबाद गांव की रहने वाली थीं। उनकी शादी करीब एक वर्ष पूर्व फतेहपुर जिले के कमलाखेर खागा कस्बे में हुई थी। शादी के बाद यह उनका पहला बड़ा पारिवारिक समारोह था, जिसमें शामिल होने के लिए वह मायके पक्ष के रिश्तेदारों के बीच पहुंची थीं। परिजनों का कहना है कि नीलू बेहद मिलनसार और खुशमिजाज स्वभाव की थीं। उनकी अचानक हुई मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

जांच और कार्रवाई का इंतजार

घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस को भी जानकारी दी गई। हालांकि पुलिस के अनुसार अभी तक परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है।

कोतवाली प्रभारी खागा संजय पांडेय ने बताया कि मामले में अभी तक कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। यदि शिकायत मिलती है तो पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद शादी समारोहों में अस्थायी बिजली व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि टेंट हाउस संचालकों और बिजली व्यवस्था करने वालों को सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए ताकि इस प्रकार की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि थोड़ी सी लापरवाही भी किसी परिवार की खुशियों को पलभर में मातम में बदल सकती है।

लखनऊ अग्निकांड पर महाकाल भक्त मंडल ने जताया गहरा शोक, दिवंगत आत्माओं को दी श्रद्धांजलि

ब्यूरो चीफ-मोहम्मद हिफज़ान 

नजीबाबाद (बिजनौर)। राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस भीषण हादसे में कई छात्र-छात्राओं और नागरिकों की असामयिक मृत्यु की खबर से हर कोई स्तब्ध है। घटना के बाद विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों ने गहरा दुःख व्यक्त किया है। इसी क्रम में महाकाल भक्त मंडल ने शोकसभा आयोजित कर मृतकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। नगर के मोहल्ला मकबरा स्थित गीता भवन मंदिर में आयोजित शोकसभा में महाकाल भक्त मंडल के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने लखनऊ में हुई इस दुखद घटना को अत्यंत हृदयविदारक बताया। वक्ताओं ने कहा कि मासूम विद्यार्थियों की मौत ने पूरे समाज को गहरे दुःख में डाल दिया है और यह घटना सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

मौन रखकर दी श्रद्धांजलि

शोकसभा के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। महाकाल भक्त मंडल ने ईश्वर से प्रार्थना की कि मृतकों को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवारों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें। मंडल के सदस्यों ने कहा कि जिन परिवारों ने इस हादसे में अपने बच्चों और प्रियजनों को खोया है, उनके दुःख की भरपाई कभी नहीं की जा सकती। ऐसे समय में पूरा समाज उनके साथ खड़ा है और उनकी पीड़ा को साझा कर रहा है।

घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना

महाकाल भक्त मंडल ने हादसे में घायल हुए सभी छात्र-छात्राओं और अन्य लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। वक्ताओं ने कहा कि घायल व्यक्तियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और उनके उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

सुरक्षा मानकों के पालन पर दिया जोर

शोकसभा में वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं भविष्य में न हों, इसके लिए सभी शिक्षण संस्थानों, कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए। आग जैसी आपदाओं से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और आपातकालीन निकास की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कहीं भी लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

समाज की जिम्मेदारी भी अहम

महाकाल भक्त मंडल के सदस्यों ने कहा कि केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है कि सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए। बच्चों और युवाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

ये लोग रहे उपस्थित

शोकसभा में पंडित भोला शंकर शास्त्री, सौरभ कुमार, सभासद पवन एडवोकेट, अभिनव अग्रवाल एडवोकेट, देवेंद्र प्रजापति, आशुतोष टॉक, रोहित कुमार, आदित्य, सागर, ऋषभ, आकाश, तरुण, लक्ष्मण और प्रदीप सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अंत में सभी ने दिवंगत आत्माओं को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉक्टर न मिलने पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, पीएचसी पर धरना; एक घंटे तक जाम रहा रक्षपालपुर-अझुवा मार्ग

संवाददाता- दुर्गेश कुमार मिश्रा

खखरेरू/फतेहपुर। धाता विकासखंड के मुबारकपुर गेरिया स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में लंबे समय से चिकित्सक की तैनाती न होने से क्षेत्रीय लोगों का गुस्सा आखिरकार शनिवार को सड़क पर फूट पड़ा। नाराज ग्रामीणों और हिंदू सुरक्षा परिषद के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन करते हुए स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इतना ही नहीं, आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने रक्षपालपुर-अझुवा मार्ग को लगभग एक घंटे तक जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद जाम समाप्त कराया जा सका। हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दो दिन के भीतर अस्पताल में नियमित चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।

डेढ़ लाख आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2022 में स्थापित इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पिछले करीब एक वर्ष से नियमित चिकित्सक की तैनाती नहीं है। इसके कारण क्षेत्र के दर्जनों गांवों की लगभग डेढ़ लाख आबादी को सामान्य उपचार के लिए भी 15 से 20 किलोमीटर दूर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती हैं। कई बार मजबूरी में लोगों को झोलाछाप चिकित्सकों के पास जाना पड़ता है, जो मरीजों की जान के लिए खतरा साबित हो सकता है।

अस्पताल परिसर में जुटे सैकड़ों ग्रामीण

शनिवार सुबह करीब 10 बजे हिंदू सुरक्षा परिषद के कार्यकर्ता और सैकड़ों ग्रामीण अस्पताल परिसर में एकत्र हुए। उन्होंने अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और डॉक्टरों की अनुपस्थिति को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण का उद्देश्य ग्रामीणों को उनके क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में अस्पताल केवल भवन बनकर रह गया है। लोगों ने आरोप लगाया कि मरीज अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन उन्हें डॉक्टर नहीं मिलते।

सड़क जाम कर जताया विरोध

जब प्रदर्शन के बावजूद कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो दोपहर करीब 12:30 बजे प्रदर्शनकारियों ने रक्षपालपुर-अझुवा मार्ग पर जाम लगा दिया। अचानक मार्ग बंद होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना पर पहुंचे थाना प्रभारी सत्यपाल सिंह ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया। उन्होंने धरने का नेतृत्व कर रहे हिंदू सुरक्षा परिषद के विद्यार्थी प्रकोष्ठ के अंशु मिश्रा की एसडीएम खागा से वार्ता कराई। प्रशासन द्वारा समस्या के समाधान का आश्वासन दिए जाने के बाद जाम समाप्त कराया गया।

अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास

धरने की सूचना मिलने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धाता के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि पीएचसी में तैनात चिकित्सक का स्थानांतरण मई 2026 में हुआ है और विभाग द्वारा आगे की प्रक्रिया की जा रही है वहीं दूसरी ओर, केंद्र में तैनात फार्मासिस्ट अनिल कुमार ने दावा किया कि पिछले छह माह से अस्पताल में कोई चिकित्सक तैनात ही नहीं है। दोनों अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास सामने आने के बाद प्रदर्शनकारी और अधिक भड़क गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि चिकित्सक की तैनाती थी तो वह कभी अस्पताल में दिखाई क्यों नहीं दिए। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग वास्तविक स्थिति छिपाने का प्रयास कर रहा है।

बदहाली का शिकार अस्पताल

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने अस्पताल की अव्यवस्थाओं को भी उजागर किया। उनका कहना है कि अस्पताल परिसर में जंगली झाड़ियां उग आई हैं और चारों तरफ गंदगी फैली हुई है। इतना ही नहीं, अस्पताल का हैंडपंप पिछले दो माह से खराब पड़ा है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल में सफाईकर्मी की भी तैनाती नहीं है, जिसके कारण परिसर की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग केवल कागजों में व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखाता है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।

मरीजों को लौटना पड़ रहा खाली हाथ

गौराहार गांव की निवासी शांति देवी ने बताया कि वह पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थीं, लेकिन डॉक्टर के न मिलने पर उन्हें चार दिन बाद आने की सलाह देकर वापस भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि गरीब और ग्रामीण लोग इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल आते हैं, लेकिन यहां डॉक्टर ही नहीं मिलते। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है, जहां इलाज का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल होता है।

निरीक्षण के दावों पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक द्वारा नियमित निरीक्षण किए जाने के दावों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण हो रहा होता तो अस्पताल परिसर में इतनी गंदगी, झाड़ियां और खराब हैंडपंप जैसी समस्याएं नहीं होतीं। लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी केवल कागजों में व्यवस्थाओं को बेहतर दिखाकर क्षेत्रवासियों को गुमराह कर रहे हैं।

उग्र आंदोलन की चेतावनी

हिंदू सुरक्षा परिषद और ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दो दिन के भीतर अस्पताल में नियमित चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई और मूलभूत सुविधाएं बहाल नहीं हुईं तो बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन में हिंदू सुरक्षा परिषद के गौ रक्षा प्रांत अध्यक्ष आशीष शुक्ला, विद्यार्थी प्रकोष्ठ के अंशु मिश्रा, विष्णुकांत तिवारी, अमन सिंह, मनीष गोस्वामी, शिवम, संत सेवक, बिल्लू, सतबीर, लवलेश, अंकुर पाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं उनका अधिकार हैं और जब तक अस्पताल में डॉक्टर तथा आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

सीएचसी स्योहारा के अधीक्षक डॉ. बी.के. स्नेही हुए सम्मानित, उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिलाधिकारी ने किया सम्मान

ब्यूरो चीफ़ -ब्यूरो चीफ़

बिजनौर। जनपद बिजनौर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) स्योहारा के अधीक्षक एवं प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी.के. स्नेही को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए जिलाधिकारी बिजनौर जसजीत कौर द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें 15 जून 2026 को आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक के दौरान प्रदान किया गया। डॉ. बी.के. स्नेही को यह सम्मान ब्लॉक स्योहारा के आठ आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को राष्ट्रीय स्तर के NQAS (नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स) प्रमाणन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए दिया गया। इस उपलब्धि के लिए जिलाधिकारी ने उन्हें प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार का मिला पुरस्कार

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, स्योहारा ब्लॉक में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और मरीजों को उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। डॉ. स्नेही के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विभिन्न मानकों पर कार्य करते हुए आठ आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें NQAS प्रमाणन प्राप्त हुआ। यह प्रमाणन किसी भी स्वास्थ्य केंद्र के लिए गुणवत्ता, स्वच्छता, मरीजों की संतुष्टि, चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता और बेहतर प्रबंधन का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में एक साथ आठ आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित होना पूरे जनपद के लिए गर्व की बात मानी जा रही है।

पूरी टीम की मेहनत का परिणाम : डॉ. स्नेही

सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. बी.के. स्नेही ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. कौशलेंद्र सिंह, अपने वरिष्ठ अधिकारियों, चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों तथा ब्लॉक स्तरीय टीम को दिया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन और कर्मचारियों की मेहनत के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी। डॉ. स्नेही ने कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहता है कि सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ समय पर प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचे और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

जन-जन तक पहुंचा रहे हैं स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी

डॉ. स्नेही ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ वे सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर भी विशेष ध्यान देते हैं। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिए लोगों को स्वास्थ्य योजनाओं, टीकाकरण कार्यक्रमों, आयुष्मान भारत योजना और अन्य सरकारी सुविधाओं की जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाती है। उनका मानना है कि जब तक लोगों को योजनाओं की सही जानकारी नहीं मिलेगी, तब तक वे उनका पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे। इसलिए जागरूकता बढ़ाना भी स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

कर्मचारियों से जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान

सम्मान समारोह के दौरान डॉ. स्नेही ने स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से अपील की कि वे विभाग द्वारा सौंपे गए कार्यों को पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ निभाएं। उन्होंने कहा कि मरीजों की सेवा ही स्वास्थ्य विभाग का सबसे बड़ा धर्म है और प्रत्येक कर्मचारी को इसी भावना के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए वे भविष्य में भी पूरी निष्ठा के साथ कार्य करते रहेंगे।

सीएचसी स्योहारा में खुशी का माहौल

डॉ. बी.के. स्नेही को मिले इस सम्मान के बाद सीएचसी स्योहारा के चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। सभी ने इस उपलब्धि को पूरे संस्थान की मेहनत और समर्पण का परिणाम बताया। स्थानीय लोगों ने भी डॉ. स्नेही और उनकी टीम को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में भी स्योहारा क्षेत्र के लोगों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहेंगी।

स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में प्रेरणादायक उपलब्धि

स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का कहना है कि राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य संस्थानों को विकसित करना आसान कार्य नहीं होता। इसके लिए लगातार निगरानी, बेहतर प्रबंधन, स्वच्छता, प्रशिक्षित स्टाफ और मरीजों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। ऐसे में ब्लॉक स्योहारा के आठ आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का NQAS प्रमाणन प्राप्त करना एक बड़ी उपलब्धि है, जो अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणा का कार्य करेगा।

नौकरानी ने दिया धोखा! कारोबारी को नशीला पदार्थ पिलाकर लाखों के जेवर और नकदी लेकर फरार, आरोपी गिरफ्तार

ब्यूरो चीफ -महोम्मद हिफ़जान खान

नई दिल्ली। अगर आप भी अपने घर में नौकर या नौकरानी रखते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दिल्ली के शाहदरा क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक कारोबारी ने घर पर खाना बनाने के लिए एक महिला को नौकरानी के रूप में काम पर रखा था। शुरुआत के दो दिन तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन तीसरे दिन महिला ने ऐसा कारनामा किया कि पूरे परिवार के होश उड़ गए।

जानकारी के अनुसार, शाहदरा निवासी एक व्यवसायी ने घरेलू कामकाज और खाना बनाने के लिए एक महिला को नियुक्त किया था। महिला ने शुरुआती दिनों में ईमानदारी और मेहनत का प्रदर्शन कर परिवार का विश्वास जीत लिया। लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसने अपने असली इरादों को अंजाम दे दिया।

बताया जा रहा है कि तीसरे दिन आरोपी महिला ने घर के मालिक को कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। नशीला पदार्थ पीने के बाद कारोबारी बेहोश होकर वहीं गिर पड़े। जब उन्हें होश आया तो घर का सामान बिखरा पड़ा था और अलमारी से सोने-चांदी के आभूषण, नकदी तथा अन्य कीमती सामान गायब था।

घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में हड़कंप मच गया। मामले की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। संयोग से पीड़ित कारोबारी के साले दिल्ली पुलिस में वरिष्ठ पद पर तैनात बताए जाते हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित को बिना पुलिस सत्यापन के किसी को काम पर रखने को लेकर सावधान रहने की सलाह दी।

दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों तथा अन्य सुरागों के आधार पर आरोपी महिला और उसके एक साथी की तलाश शुरू कर दी। पुलिस की कई टीमों ने लगातार छापेमारी और निगरानी के बाद आरोपी महिला तथा उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया।

प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों से चोरी किए गए सामान और घटना से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी महिला किसी बड़े गिरोह का हिस्सा तो नहीं है और क्या उसने पहले भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है।

इस घटना ने एक बार फिर घरेलू सहायकों के पुलिस वेरिफिकेशन की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी नौकर, नौकरानी, ड्राइवर या घरेलू सहायक को काम पर रखने से पहले उसका पुलिस सत्यापन अवश्य कराना चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके। पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी हुई है और आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है।

घाटमपुर विधायक प्रतिनिधि समेत दो पक्षों में मारपीट, वीडियो वायरल; दोनों पक्षों ने लगाए गंभीर आरोप

डेस्क रिपोर्ट

घाटमपुर (कानपुर)। थाना क्षेत्र के रार गांव में सड़क पर खड़ी कार हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच जमकर लात-घूंसे चले, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना में एक पक्ष में घाटमपुर विधायक सरोज कुरील के पीआरओ मनीष तिवारी का नाम सामने आया है। वहीं दूसरे पक्ष के प्रतीक मिश्रा ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कार हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार रार गांव में सड़क पर खड़ी एक कार को हटाने को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद कुछ ही देर में इतना बढ़ गया कि दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और मारपीट शुरू हो गई। घटना का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिसके बाद मामला चर्चा का विषय बन गया।

पीआरओ मनीष तिवारी ने लगाए गंभीर आरोप

विधायक प्रतिनिधि एवं पीआरओ मनीष तिवारी का आरोप है कि मारपीट के दौरान उनका हाथ टूट गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी सोने की चेन और अंगूठी छीन ली गई। मनीष तिवारी ने मामले में पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।

दूसरे पक्ष ने भी लगाए पलटवार वाले आरोप

दूसरे पक्ष के प्रतीक मिश्रा ने भी पीआरओ और उनके साथियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रतीक मिश्रा का कहना है कि उनके साथ मारपीट की गई और उनकी सोने की चेन, सोने की अंगूठी तथा हाथ में पहना चांदी का ब्रेसलेट छीन लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन पर कुल्हाड़ी से हमला करने का भी प्रयास किया गया, जिससे उन्हें नाक, हाथ और कंधे में गंभीर चोटें आईं।

सोशल मीडिया पर पुराने विवादों की भी चर्चा

घटना के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर पीआरओ मनीष तिवारी से जुड़े कुछ पुराने विवादों की भी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोगों द्वारा वर्ष 2022 में राहत सामग्री वितरण से संबंधित खबर प्रकाशित होने के बाद हुए कथित विवाद का उल्लेख किया जा रहा है।

रक्षाबंधन से जुड़े पुराने आरोप भी आए चर्चा में

रक्षाबंधन से पहले एक दर्दनाक सड़क हादसे ने तीन बहनों की खुशियां छीन लीं। परिवार का इकलौता बेटा तेज रफ्तार एक्सयूवी की टक्कर का शिकार हो गया और उसकी मौत हो गई। आरोप है कि हादसे के वक्त वाहन चला रहा व्यक्ति नशे में था और खुद को विधायक प्रतिनिधि बताकर प्रभाव का इस्तेमाल कर रहा था। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है और वे दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आखिर क्या है पूरा मामला और हादसे के बाद जांच कहां तक पहुंची?

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

घाटमपुर थाना प्रभारी मनोज सिंह भदोरिया ने बताया कि दोनों पक्षों से तहरीर प्राप्त हुई है। शिकायतों के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। वीडियो में दिखाई दे रही परिस्थितियों और दावों की सत्यता की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।

जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे पर मारपीट, लूट और हमले के आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। क्षेत्र में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

- Advertisement -

Recent Posts