सुनील तिवारी
कानपुर: शहर में एक अवैध निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पीड़ित परिवार ने कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के उपाध्यक्ष को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि भूमाफिया और उसके सहयोगियों ने तमंचे के बल पर जबरन बिल्डर एग्रीमेंट कराकर अवैध निर्माण कराया और अब ध्वस्तीकरण आदेश के बावजूद इमारत पर कब्जा जमाए हुए हैं। पीड़ित ने अवैध भवन को तत्काल जमीदोज कराने और कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की हैं। शिकायत के अनुसार मकान स्वामिनी सवा असलम की संपत्ति पर कथित रूप से वसीम खान ने बच्चों को हथियार के बल पर धमकाकर बिल्डर एग्रीमेंट कराया। इसके बाद मानकों के विपरीत बहुमंजिला निर्माण कराया गया। शिकायतों के आधार पर केडीए ने भवन को सील किया था और निगरानी की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस को सौंपी गई थी। आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत से सील भवन के भीतर निर्माण कार्य जारी रखा गया। बाद में केडीए ने भवन ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया, जिसे आयुक्त स्तर पर दायर अपील भी खारिज होने के बाद बरकरार रखा गया। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि इसके बावजूद कुछ दबंगों ने भवन पर अवैध कब्जा कर लिया है और खाली करने से इनकार कर रहे हैं। साथ ही धमकी दी जा रही है कि यदि भवन में आग, भूकंप या अन्य किसी कारण से कोई हादसा हुआ तो उसका जिम्मेदार केडीए या भूमाफिया और उसके सहयोगियों होगे प्रार्थना पत्र में केडीए से अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त कराने तथा कब्जाधारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई हैं।
2022 का आदेश अबतक धरातल से विहीन
कानपुर विकास प्राधिकरण केडीए ने 23 फरवरी 2022 को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था, वह आज भी जस की तस खड़ी है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि भवन का स्वीकृत नक्शा तक नहीं है, इसके बावजूद पांच खंड की इमारत अब भी मौजूद है। इससे केडीए की कार्यप्रणाली और आदेशों के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के आगे प्रशासनिक मशीनरी बेबस नजर आई और अवैध निर्माण को हटाने की बजाय उसे संरक्षण मिलता रहा। इस मामले में केडीए के अधिकारियों की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि भवन का नक्शा स्वीकृत नहीं था और ध्वस्तीकरण का आदेश भी जारी हो चुका था, तो आखिर आज तक इमारत क्यों नहीं गिराई गई। उनका आरोप है कि केडीए कार्यालय में जारी आदेश केवल कागजों तक सीमित रह गया और धरातल पर उसका पालन नहीं हुआ। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ध्वस्तीकरण आदेश का तत्काल पालन कराया जाए तथा यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।
पीड़ित के प्रमुख आरोप
- तमंचे के बल पर जबरन बिल्डर एग्रीमेंट कराया गया।
- मानकों के विपरीत बहुमंजिला अवैध निर्माण कराया गया।
- केडीए ने सील किया, फिर भी निर्माण कार्य जारी रहा।
- ध्वस्तीकरण आदेश के बावजूद दबंगों ने कब्जा कर रखा है।
- धमकी दी जा रही है और जिम्मेदारी पीड़ित पर डाली जा रही है।
पीड़ित की मांग
- अवैध इमारत को तत्काल ध्वस्त किया जाए
- कब्जाधारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए















