नई दिल्ली। बाहरी दिल्ली के निहाल विहार थाना क्षेत्र में एक युवती ने अपने परिचित युवक पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने, गर्भवती होने के बाद शादी से इनकार करने और कथित तौर पर गर्भपात की दवा देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। युवती की शिकायत और पुलिस के समक्ष दर्ज बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) और 69 के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू की है।
मामले में पीड़िता का आरोप है कि आरोपी के साथ उसकी मुलाकात वर्ष 2024 में एक इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कंपनी में काम करने के दौरान हुई थी। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और धीरे-धीरे उनका रिश्ता आगे बढ़ा। पीड़िता के मुताबिक, अगस्त 2025 में आरोपी उसके घर आया और उसके जन्मदिन के दिन शादी का प्रस्ताव रखा। युवती का कहना है कि उसने उस समय शादी से इनकार कर दिया था, लेकिन इसके बाद आरोपी लगातार शादी करने का भरोसा दिलाता रहा।
शादी का वादा कर संबंध बनाने का आरोप
पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान में आरोप लगाया कि आरोपी द्वारा शादी का भरोसा दिए जाने के बाद दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। युवती के मुताबिक, आरोपी उसके साथ लिव-इन रिलेशनशिप में भी रहा। इस दौरान आरोपी के परिवार के सदस्यों को भी दोनों के रिश्ते की जानकारी थी।
शिकायत में युवती ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी कई बार शराब के नशे में उसके साथ मारपीट करता था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होनी है।
गर्भवती होने के बाद बढ़ा विवाद
पीड़िता के अनुसार, अप्रैल 2026 में उसे अपनी गर्भावस्था की जानकारी हुई। उसने यह बात आरोपी को बताई। आरोप है कि गर्भावस्था की जानकारी मिलने के बाद आरोपी ने उसे गर्भपात की गोली दी। युवती का कहना है कि दवा लेने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई।
पीड़िता के मुताबिक, इस घटनाक्रम के बाद आरोपी मौके से चला गया और फिर उससे संपर्क नहीं हो सका। युवती ने आरोपी से बातचीत करने और संपर्क स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर उसका संपर्क नहीं हो पाया।
पुलिस तक पहुंची शिकायत
मामले में पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पीड़िता का बयान 13 मई 2026 को BNSS की धारा 183 के तहत दर्ज किया गया था। इसके बाद 25 मई 2026 को युवती ने निहाल विहार थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी।
शिकायत और दर्ज बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज की। मामले की जांच निहाल विहार थाने की महिला उपनिरीक्षक मनीषा यादव को सौंपी गई है। पुलिस रिकॉर्ड में संबंधित दस्तावेज और FIR वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे जाने का भी उल्लेख बताया गया है।
आरोपी की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने की बात
पीड़िता का कहना है कि FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था और उसे जेल भी भेजा गया। हालांकि, अब आरोपी के जेल से बाहर आने के बाद पीड़िता ने उसके खिलाफ एक और गंभीर आरोप लगाया है।
पीड़िता का दावा है कि जेल से बाहर आने के बाद आरोपी स्वयं तथा अपने साथियों के माध्यम से उस पर FIR वापस लेने का दबाव बना रहा है। युवती का आरोप है कि उसे अलग-अलग माध्यमों से धमकियां दी जा रही हैं और आरोपी पक्ष की ओर से मामला वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
जान को खतरा, पीड़िता ने सुरक्षा की मांग की
पीड़िता ने पुलिस के समक्ष अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई है। उसका कहना है कि आरोपी और उसके साथियों से उसे डर है और यदि मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो उसके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है।
पीड़िता की ओर से लगाए गए इन नए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के सामने अब न केवल मूल FIR की जांच बल्कि कथित धमकी और FIR वापस लेने के दबाव के आरोपों की भी जांच का विषय सामने आता है।
पुलिस जांच में सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान पुलिस पीड़िता के बयान, FIR में दर्ज तथ्यों, दोनों पक्षों के बीच हुए कथित संवाद, मेडिकल दस्तावेज, उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य और अन्य संबंधित तथ्यों की जांच कर सकती है।
ऐसे मामलों में आरोपों की पुष्टि केवल FIR दर्ज होने से नहीं होती। FIR किसी शिकायत के आधार पर दर्ज की गई प्रारंभिक कानूनी कार्रवाई होती है। मामले में आरोपी का पक्ष, पुलिस जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों में शादी का झांसा देकर संबंध बनाने, गर्भावस्था के बाद कथित तौर पर गर्भपात की दवा देने, मारपीट करने तथा जेल से बाहर आने के बाद FIR वापस लेने के लिए धमकी देने जैसे गंभीर बिंदु शामिल हैं। वहीं, इन सभी आरोपों की अंतिम सत्यता जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होगी।
मामले की जांच निहाल विहार थाना पुलिस द्वारा की जा रही है। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम में वास्तव में क्या हुआ था और आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य सामने आते हैं।
नोट: इस खबर में लगाए गए आरोप पीड़िता की शिकायत, पुलिस बयान और FIR में दर्ज तथ्यों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र एवं अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी। आरोपी को दोषी सिद्ध होने तक कानून की नजर में निर्दोष माना जाता है।
