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बाहर के लोगों को न्योता, बंगाल के बेटे का अपमान? मिथुन चक्रवर्ती का छलका दर्द, बोले- मुझे छोटा एक्टर समझा जाता है

KIFF में न्योता न मिलने पर मिथुन चक्रवर्ती ने जताई नाराजगी, बोले- बंगाल में मुझे ‘छोटा कलाकार’ समझा जाता है; बाहर के कलाकारों को बुलाने पर उठाए सवाल

कोलकाता। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज और बयान को लेकर चर्चा में हैं। कोलकाता में आयोजित एक बैठक के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान अभिनेता ने बंगाल और भारतीय सिनेमा के साथ अपने दशकों पुराने रिश्ते का जिक्र करते हुए फिल्मी आयोजनों में अपनी उपेक्षा को लेकर नाराजगी जाहिर की। उनके बयान के बाद बंगाल के सांस्कृतिक और फिल्मी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। मिथुन चक्रवर्ती के बयान का सबसे चर्चित हिस्सा वह टिप्पणी रही, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर यह सवाल उठाया कि क्या बंगाल में उन्हें अब एक छोटे कलाकार के रूप में देखा जाता है। उनका कहना था कि अगर ऐसा नहीं है तो फिर उन्हें अपने ही राज्य में होने वाले महत्वपूर्ण फिल्म समारोह से दूर क्यों रखा गया, जबकि दूसरे राज्यों या देश के अन्य हिस्सों से जुड़े कलाकारों को कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता है।

 

अपने ही घर में सम्मान को लेकर उठाया सवाल

मिथुन चक्रवर्ती का फिल्मी सफर पांच दशक से भी ज्यादा लंबा रहा है। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ बंगाली सिनेमा में भी उल्लेखनीय काम किया है। ऐसे में कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव यानी KIFF जैसे बड़े आयोजन से जुड़े किसी कार्यक्रम में आमंत्रण न मिलने की बात सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों के बीच भी सवाल उठने लगे हैं। मिथुन ने अपने बयान में अपने फिल्मी सफर और बंगाल से अपने रिश्ते को महत्व देते हुए कहा कि उनकी पहचान केवल हिंदी फिल्मों के अभिनेता के तौर पर नहीं है। उन्होंने बंगाली सिनेमा में भी काम किया है और अपने करियर के महत्वपूर्ण दौर में बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। अभिनेता की नाराजगी का केंद्र यही सवाल नजर आया कि जब बाहरी कलाकारों और फिल्मी हस्तियों को बंगाल के बड़े आयोजनों में जगह मिलती है, तो लंबे समय से बंगाली सिनेमा का हिस्सा रहे कलाकार को क्यों नजरअंदाज किया जाता है?

बाहर से लोगों को बुलाया जाता है, लेकिन

मिथुन चक्रवर्ती के बयान के अनुसार, उन्हें इस बात पर आपत्ति है कि बंगाल से सीधा संबंध न रखने वाले कई कलाकारों और हस्तियों को कार्यक्रमों में बुलाया जाता है, जबकि बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री और संस्कृति से लंबे समय से जुड़े कलाकारों को अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता। हालांकि, इस पूरे मामले में फिल्म महोत्सव के आयोजकों की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया है, यह स्पष्ट होना अभी बाकी है। इसलिए अभिनेता के बयान और उनकी नाराजगी को फिलहाल उनके व्यक्तिगत अनुभव और टिप्पणी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। मिथुन के इस बयान ने सोशल मीडिया और फिल्मी चर्चा के बीच एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या फिल्म समारोहों और सांस्कृतिक आयोजनों में कलाकारों का चयन किसी खास सोच या प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है?

मॉस्को फिल्म फेस्टिवल का मिला न्योता, बंगाल में क्यों नजरअंदाज?

मीडिया से बातचीत के दौरान मिथुन ने अपने आगामी मॉस्को दौरे का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, उन्हें मॉस्को फिल्म महोत्सव से निमंत्रण मिला है, लेकिन अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि रहे बंगाल में उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी। यही तुलना उनके बयान को और अधिक चर्चा में ले आई। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर के फिल्म समारोह से न्योता और दूसरी तरफ अपने ही शहर में आयोजित होने वाले प्रमुख फिल्म आयोजन में कथित तौर पर आमंत्रण न मिलना—मिथुन के लिए यह स्थिति भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण नजर आई। मिथुन चक्रवर्ती ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए हैं। ‘मृगया’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाले मिथुन ने बाद में ‘डिस्को डांसर’, ‘डांस डांस’, ‘कमांडो’ सहित कई फिल्मों के जरिए देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई। ‘मृगया’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था। PTI की पुरानी रिपोर्टों के अनुसार, अभिनेता ने अपने करियर और अभिनय को लेकर हमेशा प्रतिभा और ईमानदारी को महत्वपूर्ण बताया है।

बंगाली फिल्मों से भी रहा गहरा रिश्ता

मिथुन चक्रवर्ती का रिश्ता सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कई बंगाली फिल्मों में भी काम किया और बंगाली दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। यही वजह है कि बंगाल में उनके प्रशंसक उन्हें केवल हिंदी फिल्मों के सुपरस्टार के तौर पर नहीं देखते, बल्कि बंगाली सिनेमा के भी महत्वपूर्ण कलाकारों में गिनते हैं। उनकी बंगाली फिल्मों में काम करने की लंबी सूची रही है। उन्होंने अलग-अलग दौर में बंगाली सिनेमा के प्रमुख कलाकारों और निर्देशकों के साथ काम किया। 2023 में आई ‘काबुलीवाला’ में भी उन्होंने बंगाली सिनेमा में प्रमुख भूमिका निभाई थी। उस समय उन्होंने बताया था कि यह भूमिका उनके लिए चुनौतीपूर्ण थी और उन्होंने निर्देशक-निर्माता से ऑडिशन देने की इच्छा भी जताई थी।

सम्मान और पहचान को लेकर फिर चर्चा

मिथुन चक्रवर्ती का ताजा बयान ऐसे समय में सामने आया है जब फिल्मी दुनिया में वरिष्ठ कलाकारों के सम्मान और फिल्म समारोहों में उनकी भागीदारी को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है। एक कलाकार के लिए पुरस्कार और लोकप्रियता जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतना ही महत्वपूर्ण अपने काम और योगदान के लिए सम्मान मिलना भी माना जाता है। मिथुन का बयान इसी भावनात्मक पहलू को सामने लाता है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि किसी फिल्म महोत्सव में किसी कलाकार को आमंत्रित किए जाने या नहीं किए जाने के पीछे कई प्रशासनिक, कार्यक्रम संबंधी या चयन संबंधी कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल निमंत्रण न मिलने के आधार पर किसी संस्था या आयोजक पर पक्षपात का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

बंगाल की राजनीति और सिनेमा में भी चर्चा

मिथुन चक्रवर्ती का नाम पिछले कुछ वर्षों में केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहा है। वे सार्वजनिक जीवन और राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनके किसी भी बयान को फिल्मी दुनिया के साथ-साथ राजनीतिक नजरिए से भी देखा जाता है। उनका ताजा बयान भी इसी वजह से चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे एक वरिष्ठ कलाकार की व्यक्तिगत नाराजगी मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे बंगाल की सांस्कृतिक राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के आयोजक मिथुन चक्रवर्ती के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं या नहीं।

आगे क्या होगा?

मिथुन चक्रवर्ती के बयान ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि किसी कलाकार के योगदान का मूल्यांकन किस आधार पर होना चाहिए। क्या लंबे समय तक किसी क्षेत्र की फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले कलाकार को स्थानीय आयोजनों में विशेष सम्मान मिलना चाहिए? या फिर हर फिल्म समारोह को अपनी स्वतंत्र चयन प्रक्रिया के आधार पर अतिथियों का चयन करना चाहिए? इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में आयोजकों की प्रतिक्रिया से और स्पष्ट हो सकता है। फिलहाल मिथुन चक्रवर्ती का दर्द और उनकी नाराजगी चर्चा में है। पांच दशक से अधिक लंबे फिल्मी सफर वाले इस दिग्गज अभिनेता ने अपने बयान के जरिए इतना जरूर स्पष्ट किया है कि अपने ही राज्य में सम्मान और पहचान को लेकर उनके मन में सवाल हैं।

नोट: इस खबर में विवादित/असत्यापित हिस्सों को अभिनेता के कथित बयान और उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। संबंधित आयोजकों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।

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