Home Uncategorized ईरान पर हमला ‘जरूरी’ – ट्रंप का बड़ा दावा, परमाणु खतरा खत्म

ईरान पर हमला ‘जरूरी’ – ट्रंप का बड़ा दावा, परमाणु खतरा खत्म

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव, सहयोगियों से युद्धपोत भेजने की अपील

यूपी क्राइम अलर्ट न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली‌: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हुए हमले को लेकर सफाई देते हुए कहा है कि यह कार्रवाई बेहद जरूरी थी और इससे ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के बाद ईरान अब परमाणु हथियारों के बारे में सोच भी नहीं पाएगा और उसकी सैन्य ताकत काफी कमजोर हो चुकी है।ट्रंप ने कहा कि वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि उन्हें युद्ध पसंद नहीं है, लेकिन ईरानी सरकार ने गंभीर अपराध किए हैं। ट्रंप के मुताबिक, हाल के सप्ताहों में ईरान में हजारों प्रदर्शनकारियों की हत्या की गई, जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है।अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह अभियान केवल अमेरिका के हित में नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता को ध्यान में रखकर चलाया गया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि कई पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रखने के पक्ष में रहे हैं।ट्रंप ने उम्मीद जताई कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देश भी क्षेत्र में अपने युद्धपोत भेजकर होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित और खुला रखने में सहयोग करेंगे।इस बीच यूरोपीय देशों ने भी इस मुद्दे पर चर्चा शुरू कर दी है। जोहान वाडेफुल ने कहा कि अमेरिका और इजराइल को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य कब तक हासिल हो सकेगा, ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके।

ईरान-जंग में नया खुलासा, क्या सऊदी दे रहा है साथ?

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। एक ओर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा तेहरान पर हमले तेज किए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर ईरान भी खाड़ी क्षेत्र के देशों को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इसी बीच एक नई रिपोर्ट ने इस संघर्ष को लेकर कूटनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है।न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार मोहम्मद बिन सलमान ने कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ और अधिक कठोर सैन्य कार्रवाई करने की अपील की है। रिपोर्ट में व्हाइट हाउस अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष के पिछले तीन हफ्तों में सऊदी क्राउन प्रिंस और ट्रंप के बीच कई बार बातचीत हुई है। बताया गया कि यह रुख सऊदी अरब की लंबे समय से चली आ रही रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले सऊदी अरब के दिवंगत राजा किंग अब्दुल्ला भी अमेरिका से ईरान की शक्ति को पूरी तरह खत्म करने की मांग कर चुके थे।इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया भी देखने को मिली है। अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल की बमबारी में अब तक सैकड़ों ईरानी नागरिक मारे जा चुके हैं, जिनमें 200 से अधिक बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के कुछ पड़ोसी देश अमेरिका को अपनी जमीन से हमले की अनुमति देकर इस संघर्ष को बढ़ावा दे रहे हैं और ऐसे देशों को इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय देशों की प्रत्यक्ष या परोक्ष भागीदारी के आरोप और बढ़ते हैं, तो यह संघर्ष केवल अमेरिका-ईरान तक सीमित न रहकर पूरे खाड़ी क्षेत्र में बड़े भू-राजनीतिक संकट का रूप ले सकता है।

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