डेस्क रिपोर्ट
कानपुर। कानपुर में पिछले 14 वर्षों से कथित आर्थिक ठगी के मामले में न्याय की मांग कर रहे 40 से अधिक परिवारों ने मंगलवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचकर अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से अपने करोड़ों रुपये वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन अब उन्हें ही एक आपराधिक मुकदमे में नामजद कर दिया गया है। उन्होंने इसे न्याय की लड़ाई को कमजोर करने और शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाने की कोशिश बताया। प्रतिनिधिमंडल ने ‘माफिया गजेन्द्र सिंह नेगी मुक्ति मोर्चा’ के बैनर तले पुलिस आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं साक्ष्य आधारित जांच की मांग की। साथ ही कहा कि जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर कराई जाए ताकि निर्दोष लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
14 वर्षों से जारी है कानूनी संघर्ष
पीड़ित परिवारों के अनुसार, वे पिछले करीब 14 वर्षों से कथित आर्थिक ठगी के मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका दावा है कि इस विवाद में लगभग 8.93 करोड़ रुपये की राशि फंसी हुई है, जिसकी वसूली के लिए उन्होंने कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया है। परिवारों का कहना है कि इतने लंबे समय से न्याय की उम्मीद में वे लगातार अदालतों और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। इसके बावजूद अब उनके खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जिससे वे मानसिक और सामाजिक रूप से परेशान हैं।
रावतपुर थाने में दर्ज मुकदमे पर उठाए सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि हाल ही में थाना रावतपुर में दर्ज किया गया मुकदमा तथ्यों पर आधारित नहीं है। उनका कहना है कि मुकदमा दर्ज कराने का उद्देश्य उन्हें न्यायिक प्रक्रिया से पीछे हटने के लिए दबाव बनाना है। ज्ञापन में मांग की गई कि मामले में शामिल सभी शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए जाएं तथा उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
‘निर्दोषों को प्रताड़ित न किया जाए’
पुलिस आयुक्त को दिए गए ज्ञापन में प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद के कारण कई परिवार गंभीर आर्थिक, सामाजिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों की कानूनी लड़ाई ने परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है और मानसिक तनाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील की कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और किसी भी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित न किया जाए।
पुलिस आयुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस आयुक्त से अनुरोध किया कि मामले की जांच किसी भी पूर्वाग्रह से मुक्त होकर कराई जाए। उनका कहना था कि यदि सभी पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने यह भी मांग की कि जांच पूरी होने तक किसी निर्दोष व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कार्रवाई न की जाए और कानून के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया अपनाई जाए।
कई प्रमुख लोग रहे मौजूद
पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोग शामिल थे। इस दौरान डॉ. अमित कटियार, डॉ. साधना सचान, डॉ. अनुभव सचान, आर्किटेक्ट ललित अग्रवाल, डॉ. प्रतिमा गुप्ता, अधिवक्ता शिशिर दीवान, अधिवक्ता आशीष दीवान सहित अन्य प्रभावित परिवारों के सदस्य मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पर उनका विश्वास है और उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय करेगा।
मामला जांच के दायरे में
फिलहाल पुलिस आयुक्त कार्यालय को ज्ञापन सौंपा जा चुका है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। पुलिस की ओर से अभी तक इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सभी पक्षों की बात सुनना, दस्तावेजों का परीक्षण करना और निष्पक्ष जांच कराना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
