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होर्मुज में तनाव के बीच पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान की मुलाकात, क्षेत्रीय हालात समेत इन मुद्दों पर चर्चा

SCO शिखर सम्मेलन के दौरान बिश्केक में हुई मोदी-पेजेशकियान की अहम मुलाकात; पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की संभावना, आर्मेनिया के पीएम निकोल पाशिन्यान से भी मिले प्रधानमंत्री

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। इसी क्रम में उनकी मुलाकात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से भी हुई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज क्षेत्र को लेकर बनी संवेदनशील स्थिति के बीच दोनों नेताओं की यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फरवरी में मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान की यह पहली आमने-सामने की महत्वपूर्ण मुलाकात बताई जा रही है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। ऐसे में मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बीच दोनों नेताओं की बातचीत को भारत और ईरान के रिश्तों के साथ-साथ पश्चिम एशिया की स्थिति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

बिश्केक में हुई मोदी-पेजेशकियान की मुलाकात

SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच बैठक हुई। हालांकि, बैठक में किन-किन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसकी पूरी आधिकारिक जानकारी तत्काल सामने नहीं आई है। इसके बावजूद मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों को देखते हुए माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया में जारी तनाव, क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई होगी। होर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण भारत समेत कई देशों की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का लंबा तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे समय में भारत और ईरान के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ईरानी दूतावास ने साझा की जानकारी

भारत में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दोनों नेताओं की मुलाकात की जानकारी साझा की। दूतावास की ओर से बताया गया कि ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियान ने SCO शिखर सम्मेलन और शंघाई प्लस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने तथा उसे संबोधित करने के लिए किर्गिस्तान की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और बातचीत की। इस मुलाकात से दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क की निरंतरता भी सामने आती है। भारत और ईरान के संबंधों में व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दे लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं।

युद्ध नहीं चाहता ईरान: पेजेशकियान

किर्गिस्तान पहुंचने से पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने क्षेत्र में जारी तनाव को लेकर ईरान का रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी आक्रामकता का जवाब शक्ति और दृढ़ संकल्प के साथ देगा। ईरानी राष्ट्रपति ने क्षेत्र में अस्थिरता को सभी देशों के लिए नुकसानदायक बताया। उन्होंने आर्थिक और सुरक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए देशों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दियापेजेशकियान के इस बयान को पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान की कूटनीतिक स्थिति के तौर पर देखा जा रहा हैऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकात को क्षेत्रीय घटनाक्रम के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा हैहोर्मुज संकट पर भारत की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक हैखाड़ी क्षेत्र से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति के लिए इसका रणनीतिक महत्व बेहद ज्यादा हैइस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से तेल और गैस की आपूर्ति तथा वैश्विक व्यापार पर असर पड़ने की आशंका रहती है।m भारत की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए पश्चिम एशिया में स्थिरता भारत के लिए महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि भारत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संवाद की आवश्यकता पर लगातार जोर देता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियान के बीच हुई बातचीत में यदि होर्मुज और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई है, तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण विषय माना जाएगा। हालांकि, बैठक के दौरान इस मुद्दे पर क्या बातचीत हुई, इसका आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

भारत-ईरान संबंधों में कनेक्टिविटी भी अहम मुद्दा

भारत और ईरान के बीच संबंध केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। ईरान भारत के लिए मध्य एशिया और उससे आगे के क्षेत्रों तक पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच परिवहन और व्यापारिक संपर्क बढ़ाने से जुड़े मुद्दे भी द्विपक्षीय बातचीत का हिस्सा रहे हैं। पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव के बीच भारत के लिए यह जरूरी है कि वह अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता को भी ध्यान में रखे। प्रधानमंत्री मोदी और पेजेशकियान की मुलाकात इसी व्यापक कूटनीतिक संदर्भ में देखी जा रही है।

आर्मेनिया के प्रधानमंत्री से भी मिले पीएम मोदी

SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में भारत और आर्मेनिया के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। इस दौरान रक्षा, अर्थव्यवस्था, फार्मा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के मुद्दे सामने आए। दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को विस्तार देने पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया की स्थिति सहित प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की।

द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्मेनिया के साथ भारत के संबंधों को और गहरा एवं व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत और आर्मेनिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर भी संपर्क बढ़ा है। मोदी-पाशिन्यान बैठक में आर्थिक और तकनीकी सहयोग के साथ-साथ शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों की संभावनाओं पर बातचीत को भारत की बहुआयामी विदेश नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

SCO सम्मेलन के दौरान बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता

SCO शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए विभिन्न देशों के नेताओं से बातचीत का महत्वपूर्ण मंच बना। सम्मेलन के दौरान भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और वैश्विक चुनौतियों से जुड़े मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण को सामने रखने का अवसर हासिल किया। एक तरफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ बैठक में पश्चिम एशिया के तनाव और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बातचीत हुई, वहीं दूसरी तरफ आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान के साथ रक्षा, अर्थव्यवस्था, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। पश्चिम एशिया में तेजी से बदलती परिस्थितियों और वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इन बैठकों के परिणाम और दोनों देशों के साथ भारत के सहयोग की दिशा पर नजर रहेगी।

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