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Kirtpur News: गुरु पूर्णिमा पर श्री देवाशंकर सरस्वती विद्या मंदिर कन्या इंटर कॉलेज में श्रद्धा और सम्मान का अद्भुत संगम

प्रधानाचार्य श्री श्रवण कुमार ने गुरु के महत्व पर डाला प्रकाश, विद्यार्थियों को दिया संस्कारों का संदेश।

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ब्यूरो चीफ- मोहम्मद हिफजान

किरतपुर। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री देवाशंकर सरस्वती विद्या मंदिर कन्या इंटर कॉलेज, किरतपुर में श्रद्धा, भक्ति और सम्मान के वातावरण के बीच भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के सभी आचार्य, छात्राएं तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य उपस्थित रहे। पूरे विद्यालय परिसर में गुरु वंदना, वैदिक परंपराओं और भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुरु के महत्व से अवगत कराना और भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रेरित करना था।

 कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री श्रवण कुमार जी द्वारा महर्षि वेदव्यास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित एवं माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर सभी उपस्थित आचार्यों एवं छात्राओं ने गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उन्हें नमन किया। विद्यालय परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और गुरु वंदना के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

इसके बाद विद्यालय की छात्राओं ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। छात्राओं ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु हमें ज्ञान, संस्कार और नैतिक मूल्यों का पाठ पढ़ाकर एक जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं। गुरु का स्थान माता-पिता के बाद सबसे ऊंचा माना गया है और गुरु के आशीर्वाद से ही जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के आचार्य श्री अनिल कुमार जी एवं शिशु मंदिर के प्रभारी श्री राकेश कुमार जी ने मधुर स्वर में गुरु वंदन गीत प्रस्तुत किए। उनके गीतों ने पूरे वातावरण को श्रद्धामय बना दिया। उपस्थित छात्राओं और शिक्षकों ने भी गुरु वंदना में सहभागिता कर भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

अपने प्रेरणादायी संबोधन में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री श्रवण कुमार जी ने गुरु के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु वह दीपक है जो स्वयं तपकर और जलकर अपने शिष्यों के जीवन को प्रकाशमय बनाता है। एक शिक्षक अपने सुख-दुख की परवाह किए बिना अपने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर प्रयास करता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अपने गुरुजनों का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है। गुरु का मार्गदर्शन ही व्यक्ति को सही दिशा देता है और उसे समाज का जिम्मेदार नागरिक बनने में सहायता करता है। उन्होंने सभी छात्राओं से अपेक्षा की कि वे अपने गुरुजनों का सदैव सम्मान करें, उनके बताए मार्ग पर चलें और अपने जीवन में अनुशासन, परिश्रम तथा संस्कारों को अपनाएं।

प्रधानाचार्य ने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान के समान दर्जा दिया गया है। गुरु ही वह शक्ति हैं जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु के आशीर्वाद के बिना शिक्षा अधूरी मानी जाती है। इसलिए गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं बल्कि गुरु के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने का श्रेष्ठ अवसर है।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी आचार्यों ने भी छात्राओं को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है। विद्यार्थी यदि अपने गुरुजनों का सम्मान करेंगे तो निश्चित रूप से वे जीवन में उच्च स्थान प्राप्त करेंगे।

विद्यालय की छात्राओं ने भी पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। गुरु वंदना, भाषण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और उत्साह का विशेष वातावरण देखने को मिला।

कार्यक्रम का सफल संचालन श्री राकेश कुमार जी ने किया। उन्होंने कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करते हुए गुरु पूर्णिमा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। अंत में सभी ने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।

इस अवसर पर विद्यालय का समस्त आचार्य परिवार उपस्थित रहा। सभी शिक्षकों ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और नैतिक मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया। गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन में गुरु के महत्व को समझाने वाला प्रेरणादायी कार्यक्रम भी साबित हुआ।

विद्यालय प्रशासन ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जाएगा, ताकि छात्राओं में भारतीय संस्कृति, नैतिक शिक्षा और गुरुजनों के प्रति सम्मान की भावना और अधिक मजबूत हो सके।

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