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सावन में बाबा जागेश्वर का दिव्य श्रृंगार, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर

रुद्राभिषेक और महाआरती के बाद हुआ विशाल भंडारा, फूलों और रुद्राक्ष की मालाओं से सजे बाबा के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर हुए श्रद्धालु.सुनील कुमर तिवारी की रिपोर्ट

कानपुर। सावन के पावन महीने में नवाबगंज स्थित करीब 300 वर्ष पुराने बाबा जागेश्वर मंदिर में भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। भगवान शिव के विशेष श्रृंगार, रुद्राभिषेक, महाआरती और विशाल भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। बाबा जागेश्वर के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर भक्त भावविभोर नजर आए और पूरे मंदिर परिसर में लगातार “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयकारे गूंजते रहे। सावन के अवसर पर बाबा जागेश्वर के शिवलिंग का विशेष फूलों से श्रृंगार किया गया। शिवलिंग को नीले अपराजिता, गुलाबी कमल, सफेद मोगरा-चमेली और गेंदे के फूलों से सजाया गया। इसके साथ ही रुद्राक्ष और मोतियों की मालाओं से बाबा का श्रृंगार किया गया, जिससे गर्भगृह का वातावरण बेहद मनोहारी नजर आया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। भक्तों ने बाबा के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। दिनभर मंदिर परिसर में भक्तों की आवाजाही बनी रही।

रुद्राभिषेक के बाद हुई भव्य महाआरती

विशेष श्रृंगार के बाद बाबा जागेश्वर का विधिवत रुद्राभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जल, दूध और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद बाबा को देशी घी से तैयार लड्डुओं का विशेष भोग अर्पित किया गया। रुद्राभिषेक और भोग के बाद मंदिर परिसर में भव्य महाआरती का आयोजन हुआ। ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि के बीच जैसे ही आरती शुरू हुई, श्रद्धालुओं ने जोरदार तरीके से “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयकारे लगाए। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर शिवभक्ति में डूबा नजर आया। महाआरती में महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कई श्रद्धालु परिवार के साथ मंदिर पहुंचे और काफी देर तक पूजा-अर्चना एवं भक्ति में लीन रहे।

विशाल भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

धार्मिक आयोजन के बाद मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में पूड़ी, सब्जी और हलवा समेत विभिन्न प्रकार के प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन को व्यवस्थित रखने के लिए स्वयंसेवकों ने प्रसाद वितरण, पेयजल और श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था संभाली। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। पूरे दिन मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा। एक तरफ बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही, वहीं दूसरी ओर भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते रहे।

करीब 300 वर्ष पुराना बताया जाता है मंदिर

नवाबगंज थाना क्षेत्र में स्थित बाबा जागेश्वर मंदिर का इतिहास भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का विषय है। मंदिर समिति के संयोजक जितेंद्र पांडेय के अनुसार, मंदिर करीब 300 वर्ष पुराना बताया जाता है। उनके अनुसार, जिस स्थान पर आज बाबा जागेश्वर का मंदिर स्थित है, वहां कई वर्ष पहले चारों तरफ गंगा नदी का प्रवाह हुआ करता था। यह स्थान टीलेनुमा था और आसपास निषाद परिवारों का निवास था। मंदिर की स्थापना को लेकर स्थानीय स्तर पर एक प्रचलित मान्यता भी है। बताया जाता है कि उस समय जागे नाम के एक निषाद की गाय रोजाना टीले के एक विशेष स्थान पर जाकर दूध देती थी। काफी समय तक यह क्रम चलता रहा। जब लोगों का ध्यान इस ओर गया तो उस स्थान की खुदाई कराई गई। मान्यता के अनुसार, खुदाई के दौरान वहां एक शिवलिंग मिला। इसके बाद उसी स्थान पर बाबा जागेश्वर की स्थापना की गई। धीरे-धीरे यह स्थान शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।

शिवलिंग के तीन बार रंग बदलने की मान्यता

बाबा जागेश्वर मंदिर के शिवलिंग को लेकर एक और अनूठी मान्यता श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित है। मंदिर समिति के संयोजक जितेंद्र पांडेय के अनुसार, मान्यता है कि शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है। उनके अनुसार, सुबह मंगला आरती के समय शिवलिंग का रंग स्लेटी, भोग के समय भूरा और रात करीब 11:30 बजे से मध्यरात्रि के बीच गहरे काले रंग का दिखाई देने की मान्यता है। हालांकि यह स्थानीय धार्मिक मान्यता है और इसके संबंध में कोई वैज्ञानिक पुष्टि प्रस्तुत नहीं की गई है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के बीच इस मान्यता को लेकर विशेष आकर्षण बना हुआ है। सावन के अतिरिक्त वर्षभर भी बड़ी संख्या में भक्त बाबा जागेश्वर के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

धर्म के साथ सेवा और भाईचारे का संदेश

रुद्राभिषेक, विशेष श्रृंगार और विशाल भंडारे का आयोजन जेके समूह के वाइस प्रेसिडेंट एवं समाजसेवी संजय दुबे की ओर से कराया गया। संजय दुबे ने कहा कि सावन भगवान शिव की आराधना और भक्ति का पवित्र महीना है। ऐसे अवसर पर श्रद्धालुओं की सेवा करना और उन्हें प्रसाद उपलब्ध कराना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनके माध्यम से समाज में आपसी भाईचारे, सहयोग और सेवा की भावना को भी मजबूत किया जा सकता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं।

दिनभर गूंजता रहा ‘हर-हर महादेव’

सावन के चलते बाबा जागेश्वर मंदिर में दिनभर भक्तों की भीड़ बनी रही। मंदिर परिसर में लगातार “हर-हर महादेव”, “बम-बम भोले” और “जय बाबा जागेश्वर” के जयकारे गूंजते रहे। फूलों से सजा गर्भगृह और बाबा जागेश्वर का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। भक्तों ने दर्शन और पूजन के बाद प्रसाद ग्रहण किया तथा भगवान शिव से अपने परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना की।

ये प्रमुख लोग रहे मौजूद

धार्मिक आयोजन में सांसद रमेश अवस्थी, विधायक महेश त्रिवेदी, विधायक सुरेंद्र मैथानी, विधायक नीलिमा कटियार, पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी, पूर्व विधायक सतीश निगम, जर्नलिस्ट क्लब के महामंत्री एवं वरिष्ठ पत्रकार अभय त्रिपाठी, कुमार त्रिपाठी, सर्वेश शुक्ला ‘बम-बम’, ऋषभ दुबे समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य लोग मौजूद रहे। सावन के इस धार्मिक आयोजन ने बाबा जागेश्वर मंदिर में आस्था, भक्ति और सेवा का ऐसा माहौल बनाया, जिसमें श्रद्धालु दिनभर शिवभक्ति में सराबोर नजर आए।

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