कानपुर
कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच में पुलिस को मोबाइल कॉल डिटेल और आरोपी नौकर विशाल की गूगल हिस्ट्री से कई अहम सुराग मिलने की बात सामने आई है। जांच के अनुसार, विशाल ने वारदात से पहले एक नया सिमकार्ड खरीदा था। इस नंबर का इस्तेमाल उसने कथित तौर पर घटना से जुड़े लोगों से बातचीत के लिए किया। जांच में यह भी सामने आया कि उसने हत्या से एक दिन पहले धारदार चाकू से संबंधित जानकारी इंटरनेट पर तलाश की थी। पुलिस जांच के मुताबिक, विशाल ने 3 सितंबर को नया सिमकार्ड खरीदा और उसी दिन पुराने नंबर को बंद कर मोबाइल में नया सिम लगा लिया। बताया जा रहा है कि यह सिम शुभम के नाम से लिया गया था। इसके बाद नए नंबर से उसने शालू को सात बार और कारोबारी के बेटे सुब्रत को छह बार फोन किया। जांच में सामने आए कॉल रिकॉर्ड को पुलिस घटना की कड़ियों से जोड़कर देख रही है। हालांकि, इन कॉल्स में क्या बातचीत हुई और उसका हत्या की योजना से सीधा संबंध था या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
हत्या से एक दिन पहले चाकू की तलाश
पुलिस के अनुसार, आरोपी विशाल के मोबाइल की गूगल हिस्ट्री की जांच के दौरान कुछ ऐसी सर्च सामने आईं, जिनमें धारदार चाकू से जुड़ी जानकारी तलाशने की बात कही गई है। बताया गया कि उसने हत्या से एक दिन पहले यह जानने की कोशिश की थी कि धारदार चाकू कहां मिलता है, उसकी धार कैसी होती है और चाकू कितने प्रकार के होते हैं। जांच एजेंसियां इस सर्च हिस्ट्री को अहम मानकर देख रही हैं। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इंटरनेट पर चाकू से संबंधित जानकारी तलाशने का उद्देश्य क्या था और क्या इसका संबंध कथित हत्याकांड से था। सिर्फ इंटरनेट सर्च के आधार पर किसी व्यक्ति की मंशा या अपराध में भूमिका निश्चित नहीं मानी जा सकती। इसलिए पुलिस कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के साथ इन जानकारियों का मिलान कर रही होगी।
अपार्टमेंट पहुंचने के बाद गार्डन में टहलने लगे
जांच के मुताबिक, कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या करने के लिए विशाल और उसका दोस्त राजकिशोर अपार्टमेंट पहुंचे थे। वहां पहुंचने के बाद दोनों कुछ समय पीछे स्थित गार्डन में टहलते रहे। इस दौरान दोनों के बीच फोन पर कई बार बातचीत हुई। कॉल डिटेल के अनुसार, रात 10:29 बजे करीब 20 सेकेंड, 10:31 बजे लगभग 44 सेकेंड और 10:37 बजे करीब 60 सेकेंड तक दोनों के बीच फोन पर बातचीत हुई। लगातार कुछ अंतराल पर हुई इन बातचीत को पुलिस घटना की टाइमलाइन के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है। जांच में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि फ्लैट में प्रवेश करने से पहले दोनों के बीच किसी तरह की बातचीत या योजना पर चर्चा हुई हो सकती है। हालांकि, इन कॉल्स की वास्तविक बातचीत पुलिस के सामने किस रूप में उपलब्ध है, यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन बातचीत में हत्या की योजना ही बनाई गई थी।
पहले अलग-अलग निगरानी की योजना थी?
पुलिस के अनुमान के मुताबिक, अपार्टमेंट पहुंचने के बाद दोनों के अलग-अलग स्थानों पर रहने की योजना हो सकती थी। आशंका जताई जा रही है कि इनमें से एक व्यक्ति फ्लैट के अंदर जाता और दूसरा बाहर रहकर निगरानी करता। जांचकर्ताओं को आशंका है कि घटनास्थल की परिस्थितियों के कारण कथित योजना में बदलाव हुआ और दोनों ही फ्लैट के अंदर चले गए। यह फिलहाल पुलिस की जांच का हिस्सा है और इसकी पुष्टि अन्य साक्ष्यों के आधार पर होनी बाकी है। इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए पुलिस दोनों आरोपियों की मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और अपार्टमेंट में उनकी गतिविधियों से संबंधित उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान कर रही है।

हत्या के समय को लेकर भी जांच
जांच में पुलिस ने हत्या का संभावित समय रात 11:10 बजे से 11:25 बजे के बीच माना है। इससे पहले 10:29, 10:31 और 10:37 बजे हुई फोन बातचीत को भी टाइमलाइन में शामिल किया जा रहा है। अगर कॉल डिटेल, सीसीटीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एक-दूसरे से मेल खाते हैं, तो घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। पुलिस के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों आरोपी अपार्टमेंट में कब पहुंचे, किस समय किस स्थान पर थे और कथित वारदात के बाद उनकी गतिविधियां कैसी रहीं।
हत्या के बाद भी फोन कॉल्स का सिलसिला
जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि हत्या के बाद विशाल ने सबसे पहले ऑनलाइन टैक्सी बुक कराने के लिए कॉल की। इसके बाद उसने अपने दोस्त नैतिक को पांच बार फोन किया। इस कॉल पैटर्न को भी पुलिस जांच के दायरे में रखा गया है। हत्या के बाद किससे और क्यों संपर्क किया गया, टैक्सी कहां से बुक की गई तथा दोनों आरोपियों की आवाजाही किस दिशा में हुई—इन सवालों के जवाब घटनाक्रम को समझने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। पुलिस मोबाइल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से कथित वारदात से पहले और बाद की पूरी गतिविधियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।
नए सिम से कॉल ने बढ़ाए सवाल
विशाल द्वारा घटना से कुछ समय पहले नया सिम खरीदना भी जांच का एक अहम बिंदु बताया जा रहा है। नए नंबर से अलग-अलग लोगों को कॉल किए जाने के कारण पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नंबर लेने की जरूरत क्यों पड़ी और इसका इस्तेमाल किन लोगों से संपर्क के लिए किया गया। शालू को सात और सुब्रत को छह कॉल किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद इन संपर्कों की टाइमिंग और घटनाक्रम से उनके संबंध की जांच की जा रही है।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य से खुलेगा पूरा राज
विनीत मिनोचा हत्याकांड में अब मोबाइल कॉल डिटेल, गूगल सर्च हिस्ट्री, संभावित सीसीटीवी फुटेज और लोकेशन डेटा को एक साथ रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस घटनास्थल तक पहुंचने से लेकर कथित हत्या और उसके बाद की गतिविधियों की कड़ी जोड़ने का प्रयास कर रही है। फिलहाल सामने आई जानकारियों में कई बातें पुलिस के अनुमान और जांच से जुड़ी हैं। इसलिए चाकू की सर्च, गार्डन में हुई बातचीत, नए सिम का इस्तेमाल और हत्या के संभावित समय जैसे बिंदुओं की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने तथा उपलब्ध साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही मानी जाएगी। कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वारदात से पहले आरोपियों के बीच वास्तव में क्या योजना बनी थी और घटना के बाद उन्होंने किन लोगों से संपर्क किया। मोबाइल रिकॉर्ड और डिजिटल हिस्ट्री से सामने आए ये सुराग जांच को किस निष्कर्ष तक पहुंचाते हैं, यह आगे की पुलिस कार्रवाई और साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।















