खखरेरू/फतेहपुर
खखरेरू थाना क्षेत्र के गढ़वा और रारी गांव के बीच बहने वाली ससुर खदेरी नदी इन दिनों उफान पर है। लगातार बारिश के चलते नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। दोनों गांवों के बीच आवागमन का प्रमुख साधन रहा पक्का बांध करीब तीन-चार महीने पहले टूट गया था। बांध टूटने के बाद ग्रामीणों के सामने आवागमन की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कुछ ग्रामीणों ने नदी पार करने के लिए गन्ने का रस उबालकर गुड़ बनाने में इस्तेमाल होने वाले बड़े लोहे के कड़ाह को ही सहारे का साधन बना लिया है। ग्रामीण नदी के दोनों किनारों पर रस्सी बांधकर कड़ाह के सहारे नदी पार करने का जोखिम उठा रहे हैं। उफनाती नदी के बीच इस तरह आवागमन करना बेहद खतरनाक है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों के अनुसार गढ़वा और रारी गांव के बीच बना बांध दोनों गांवों के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। बांध के जरिए ग्रामीण कुछ ही मिनटों में एक-दूसरे गांव तक पहुंच जाते थे। बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों, किसानों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों के लिए यह रास्ता काफी सुविधाजनक था। लेकिन बांध टूट जाने के बाद दोनों गांवों के बीच सीधा संपर्क लगभग बाधित हो गया है।
12 से 13 किलोमीटर का लगाना पड़ रहा चक्कर
ग्रामीणों का कहना है कि बांध टूटने के बाद उन्हें सड़क मार्ग से आने-जाने के लिए करीब 12 से 13 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। खासकर रारी गांव के लोगों को खरीदारी और अन्य जरूरी कार्यों के लिए पौली बाजार जाना होता है। पहले नदी के रास्ते यह दूरी लगभग चार से पांच किलोमीटर में पूरी हो जाती थी, लेकिन अब सड़क मार्ग से काफी लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। लंबी दूरी और समय की बचत के लिए कुछ ग्रामीणों ने नदी को पार करने का जोखिम उठाना शुरू कर दिया। बताया गया कि नदी के दोनों किनारों पर रस्सी बांधकर उसके सहारे लोहे के कड़ाह को खींचते हुए लोग दूसरी तरफ पहुंचने का प्रयास करते हैं। हालांकि, नदी के तेज बहाव के बीच यह तरीका किसी भी लिहाज से सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
वायरल वीडियो के बाद सामने आया मामला
उफनाती ससुर खदेरी नदी को कड़ाह के सहारे पार करते ग्रामीणों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वीडियो सामने आने के बाद मौके की स्थिति की पड़ताल की गई। मौके पर पहुंचने पर कड़ाह तो दिखाई नहीं दिया, लेकिन नदी किनारे मौजूद ग्रामीणों और बच्चों ने कैमरे के सामने बताया कि बांध टूटने के बाद लोगों ने नदी पार करने के लिए इस तरह के अस्थायी साधन का इस्तेमाल शुरू किया है। ग्रामीणों ने बताया कि मजबूरी में कुछ लोग नदी के तेज बहाव के बीच कड़ाह के सहारे नदी पार करते हैं। उनका कहना है कि यह कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं है, लेकिन लंबा चक्कर बचाने और जरूरी काम से बाजार पहुंचने के लिए लोग जोखिम उठाने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों में हादसे की आशंका
नदी के बढ़े जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए ग्रामीणों में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रस्सी टूट गई या कड़ाह नदी के तेज बहाव में असंतुलित हो गया तो व्यक्ति सीधे गहरे पानी में जा सकता है। ऐसे में जान बचाना मुश्किल हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि टूटे हुए बांध की जल्द से जल्द मरम्मत कराई जाए या फिलहाल सुरक्षित आवागमन के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
रोजमर्रा की जरूरतों पर भी असर
गढ़वा और रारी के बीच आवागमन बाधित होने का असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ रहा है। बाजार, स्वास्थ्य सेवाओं, जरूरी सामान और अन्य कार्यों के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। किसानों और मजदूरों को भी आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बांध टूटने के बाद से कई बार अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन अब मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई करेगा।
प्रशासन ने कार्रवाई का दिया भरोसा
मामले को लेकर उपजिलाधिकारी अश्वनी पांडेय ने बताया कि संबंधित अधिकारी को मौके पर भेजकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस बयान के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी समस्या का जल्द समाधान निकलेगा और उफनाती नदी के बीच जोखिम भरे आवागमन से उन्हें राहत मिलेगी। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को केवल बांध की मरम्मत तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तब तक कोई सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, जब तक बांध पूरी तरह दुरुस्त न हो जाए। खासकर बारिश के मौसम में नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।
सुरक्षित रास्ते की मांग
गढ़वा और रारी गांव के ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग अब सुरक्षित और स्थायी आवागमन की व्यवस्था है। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों के बीच संपर्क मार्ग टूट जाने के कारण उन्हें अपनी जान जोखिम में डालने की नौबत आ गई है। महज कुछ किलोमीटर की दूरी के लिए 12 से 13 किलोमीटर का चक्कर लगाना हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द मौके का निरीक्षण कराया जाए और टूटे बांध की मरम्मत का कार्य शुरू कराया जाए। साथ ही जब तक बांध की मरम्मत पूरी नहीं होती, तब तक ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था की जाए जिससे ग्रामीणों को नदी पार करने के लिए कड़ाह और रस्सी जैसे असुरक्षित साधनों का इस्तेमाल न करना पड़े। फिलहाल, ससुर खदेरी नदी के उफान और टूटे बांध के कारण गढ़वा-रारी के ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने इस समस्या को सामने ला दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कितनी जल्दी कर पाता है और कब तक दोनों गांवों के बीच सुरक्षित आवागमन बहाल हो पाता है।
















