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Fatehpur News: तेज बारिश में भरभराकर गिरा कच्चा मकान, मलबे में दबी गृहस्थी

प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ न मिलने का पीड़ित ने लगाया आरोप, हादसे के वक्त घर के बाहर था परिवार, बाल-बाल बची जान; घटना के बाद खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर परिवार. दुर्गेश कुमार मिश्रा की रिपोर्ट

खागा/फतेहपुर।

फतेहपुर जिले के धाता विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत उकाथू में गुरुवार रात हुई मूसलाधार बारिश एक गरीब परिवार के लिए बड़ी मुसीबत बन गई। लगातार तेज बारिश के बीच एक कच्चा मकान अचानक भरभराकर धराशायी हो गया। मकान गिरने से घर में रखा अनाज, कपड़े, बर्तन और अन्य घरेलू सामान मलबे में दब गया। गनीमत रही कि जिस समय मकान गिरा, परिवार के सभी सदस्य घर के बाहर बैठे हुए थे। इसी वजह से एक बड़ा हादसा होने से टल गया और परिवार के लोगों की जान बच गई। मकान गिरने की घटना के बाद पीड़ित परिवार के सामने अब रहने की समस्या खड़ी हो गई है। घर का अधिकांश सामान मलबे में दब जाने के कारण परिवार को भारी नुकसान हुआ है। पीड़ित ने प्रशासन से तत्काल आर्थिक मदद के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान उपलब्ध कराने की मांग की है।

तेज बारिश के बीच अचानक गिरा मकान

जानकारी के अनुसार ग्राम उकाथू निवासी रामबाबू सिंह पुत्र गुलाब सिंह का कच्चा मकान गुरुवार देर रात तेज बारिश के दौरान अचानक भरभराकर गिर गया। बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से क्षेत्र में बारिश हो रही थी, जिसके चलते कच्चे मकान की दीवारें और छत कमजोर हो गई थीं। गुरुवार रात बारिश तेज होने के बाद परिवार के सदस्य भोजन करने के पश्चात घर के बाहर बैठे हुए थे। इसी दौरान अचानक मकान की दीवारों में हलचल हुई और देखते ही देखते पूरा कच्चा मकान भरभराकर नीचे आ गिरा। मकान गिरने की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। गनीमत रही कि हादसे के समय परिवार का कोई सदस्य मकान के अंदर मौजूद नहीं था। अगर परिवार के लोग सोने के लिए मकान के अंदर चले गए होते तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।

मलबे में दब गया घरेलू सामान

मकान गिरने के बाद परिवार की गृहस्थी पूरी तरह प्रभावित हो गई। घर के अंदर रखा अनाज, कपड़े, बर्तन और अन्य जरूरी घरेलू सामान मलबे के नीचे दब गया। अचानक हुई इस घटना से परिवार के सामने खाने-पीने के साथ-साथ रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की समस्या खड़ी हो गई है। पीड़ित परिवार का कहना है कि कच्चे मकान की हालत पहले से ही जर्जर थी। बारिश के दौरान उन्हें मकान गिरने का डर बना रहता था। परिवार किसी तरह इसी मकान में रहने को मजबूर था। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों के सामने हमेशा खतरा बना रहता है। ऐसे परिवारों को समय रहते सरकारी योजनाओं का लाभ मिल जाए तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ न मिलने का आरोप

मकान गिरने के बाद पीड़ित रामबाबू सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें आवास का लाभ दिलाने के लिए कई बार अधिकारियों द्वारा आवश्यक दस्तावेज लिए गए, लेकिन इसके बावजूद अब तक उन्हें पक्का मकान उपलब्ध नहीं कराया गया।रामबाबू सिंह के मुताबिक, परिवार लंबे समय से जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर था। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग भी की थी, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। पीड़ित का कहना है कि यदि समय रहते उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल जाता तो शायद आज परिवार को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। हालांकि, आवास योजना को लेकर लगाए गए इन आरोपों पर संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बाल-बाल बचा पूरा परिवार

इस हादसे में सबसे राहत की बात यह रही कि परिवार के सभी सदस्य मकान गिरने से कुछ समय पहले ही घर से बाहर आ गए थे। परिवार के मुताबिक, रात में खाना खाने के बाद सभी लोग घर के बाहर बैठकर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान तेज बारिश के बीच मकान अचानक गिर गया। मकान गिरने की घटना इतनी अचानक हुई कि परिवार को संभलने तक का मौका नहीं मिला। यदि परिवार के सदस्य घर के अंदर होते तो मलबे की चपेट में आने से गंभीर जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। हादसे के बाद परिवार और आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश अभी जारी रही तो क्षेत्र के दूसरे जर्जर और कच्चे मकानों के लिए भी खतरा बढ़ सकता है।

खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर परिवार

मकान गिरने के बाद रामबाबू सिंह का परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। बारिश के मौसम में परिवार की परेशानी और बढ़ गई है। घर का आशियाना छिनने के साथ-साथ गृहस्थी का सामान भी मलबे में दबकर खराब हो गया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उनके पास तत्काल मकान की मरम्मत या नया मकान बनाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। ऐसे में प्रशासन की मदद ही परिवार के लिए सबसे बड़ा सहारा है। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए और रहने के लिए अस्थायी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। साथ ही पात्रता के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए।

ग्रामीणों ने की प्रशासन से मदद की मांग

घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार की स्थिति का जायजा लेने और तत्काल राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के कारण पहले ही गांव में कई जगह जलभराव और कच्चे मकानों को नुकसान का खतरा बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन को क्षेत्र में सर्वे कराकर जर्जर मकानों की स्थिति का जायजा लेना चाहिए, ताकि किसी अन्य परिवार के साथ ऐसी घटनाहो। ग्रामीणों ने मांग की है कि जिन परिवारों के पास रहने के लिए सुरक्षित मकान नहीं है, उन्हें सरकारी आवास योजनाओं से जोड़ा जाए। साथ ही बारिश से हुए नुकसान का आकलन कर प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता दी जाए।

खबर लिखे जाने तक मौके पर नहीं पहुंचा कोई सक्षम अधिकारी

पीड़ित परिवार के अनुसार, मकान गिरने के बाद खबर लिखे जाने तक मौके पर कोई सक्षम अधिकारी नहीं पहुंचा था। इससे परिवार और ग्रामीणों में नाराजगी भी देखने को मिली। अब देखना होगा कि प्रशासन इस घटना को कितनी गंभीरता से लेता है और पीड़ित परिवार को कब तक राहत मिलती है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ को लेकर पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच होती है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल तेज बारिश के बीच मकान गिरने की इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ परिवार की जान बाल-बाल बची, वहीं दूसरी तरफ उनकी वर्षों की गृहस्थी कुछ ही पलों में मलबे में दब गई। अब पीड़ित परिवार को प्रशासन से तत्काल मदद और सुरक्षित आशियाने की उम्मीद है।

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