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प्रेमी जोड़े ने इंटरसिटी के आगे लगाई छलांग, मौके पर मौत

यूपी क्राइम अलर्ट न्यूज़ ब्यूरो

महाराजगंज: यूपी के महाराजगंज जिले में गोरखपुर-नौतनवा रेलखंड पर बुधवार को दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां नईकोट रेलवे स्टेशन के पास एक किशोर और किशोरी ने इंटरसिटी एक्सप्रेस के सामने आकर अपनी जान दे दी। घटना महुआरी गांव के समीप हुई, जहां दोनों नाबालिग ट्रेन के आने का इंतजार कर रहे थे और जैसे ही ट्रेन पहुंची, वे अचानक उसके सामने कूद गए। मौके पर ही दोनों की दर्दनाक मौत हो गई, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई।सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक किशोर कक्षा 10 का छात्र बताया जा रहा है, जबकि किशोरी की पहचान भी हो चुकी है, लेकिन घटना के वक्त उसके परिजन मौके पर नहीं पहुंचे। दोनों के घरों के बीच करीब पांच-छह किलोमीटर की दूरी बताई जा रही है। हादसे की खबर मिलते ही किशोर के परिवार में कोहराम मच गया।प्रारंभिक जांच में मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों के परिवार उनकी शादी के लिए तैयार नहीं थे, जिससे आहत होकर उन्होंने यह कदम उठाया। हालांकि पुलिस ने अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है और परिजनों के बयान व पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

देशभर में किडनी रैकेट का बड़ा खुलासा, 50 से ज्यादा अस्पताल जांच के घेरे में

सवांददाता-सुनील तिवारी

कानपुर में उजागर हुए किडनी रैकेट ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को हिला दिया है। शुरुआती जांच में जहां चार अस्पतालों के नाम सामने आए थे, वहीं अब 50 से ज्यादा निजी अस्पताल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के रडार पर हैं। मामले में लखनऊ और मेरठ के चार डॉक्टरों के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया है। पुलिस की तीन विशेष टीमें उनकी तलाश में अलग-अलग शहरों में दबिश दे रही हैं।इस रैकेट के तार केवल कानपुर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कोलकाता, दिल्ली, बिहार और यहां तक कि साउथ अफ्रीका तक फैले हुए हैं।पुलिस को संदेह है कि यह सिंडिकेट लंबे समय से सक्रिय था और बड़े पैमाने पर अवैध ट्रांसप्लांट करा रहा था। गिरफ्तार डॉक्टरों और अस्पताल संचालकों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगाली जा रही है, जिससे नेटवर्क के और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।29 मार्च की रात आयुष नामक युवक के ऑपरेशन से इस काले धंधे का पर्दाफाश हुआ। इसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने आहूजा हॉस्पिटल, मेड लाइफ और प्रिया हॉस्पिटल में छापेमारी की। यहां किडनी डोनर और रिसीवर दोनों संदिग्ध हालत में मिले।

                             अंगों के सौदे में करोड़ों का खेल, जांच में चौंकाने वाले खुलासे

इस रैकेट का सबसे चौंकाने वाला पहलू इसकी ‘कमीशन चेन’ है। जांच में सामने आया कि डोनर आयुष से महज 6 लाख रुपये में किडनी का सौदा किया गया, जबकि उसे केवल साढ़े तीन लाख रुपये ही दिए गए। दूसरी ओर, मरीज से 60 लाख रुपये तक वसूले गए।दलाल शिवम अग्रवाल इस पूरे नेटवर्क का अहम कड़ी था, जो सोशल मीडिया और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए डोनर तलाशता था। आयुष, जो बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला और देहरादून में एमबीए का छात्र है, को भी इसी तरह फंसाया गया। उसे बड़े-बड़े नामों और उदाहरणों के जरिए मानसिक रूप से तैयार किया गया।पैसों के बंटवारे में भी पूरा सिस्टम सेट था—कुछ रकम अस्पतालों को, कुछ दलालों को और बाकी मास्टरमाइंड तक पहुंचती थी। यही लालच और विवाद इस पूरे रैकेट के खुलासे की वजह बना।पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि डोनर और रिसीवर को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कर उनकी पहचान छिपाई जाती थी और फर्जी मेडिकल कारणों का हवाला दिया जाता था।

                          सिस्टम पर बड़े सवाल, कैसे फैला इंटरनेशनल सिंडिकेट?

इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर गैंग लोगों को कैसे टारगेट करता था? मरीजों और डोनर्स तक पहुंचने का नेटवर्क कितना बड़ा था? और सबसे अहम कानपुर जैसे शहर को इस अवैध कारोबार का केंद्र क्यों बनाया गया?जांच में सामने आया है कि गैंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और डार्कवेब के जरिए अपना नेटवर्क संचालित करता था। बड़े अस्पतालों के बाहर किडनी मरीजों को टारगेट किया जाता था और उन्हें सस्ते इलाज का झांसा देकर जाल में फंसाया जाता था।कानपुर की बेहतर कनेक्टिविटी रेल और एयर नेटवर्क को भी इस रैकेट ने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया। डोनर और रिसीवर को आसानी से एक शहर से दूसरे शहर या विदेश तक पहुंचाया जाता था।फिलहाल पुलिस की टीमें फरार डॉक्टरों की तलाश में जुटी हैं और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी संपर्क किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही इस सिंडिकेट से जुड़े और बड़े नाम सामने आएंगे, जिससे पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जा सकेगा।

ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर, ट्रंप का आज बड़ा संबोधन

यूपी क्राइम अलर्ट न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप ईरान युद्ध को लेकर जल्द बड़ा फैसला ले सकते हैं। व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप बुधवार रात राष्ट्र को संबोधित करेंगे और इस दौरान ईरान को लेकर अहम घोषणा की जा सकती है। यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है, जब ट्रंप हाल ही में कुछ हफ्तों में युद्ध से बाहर निकलने के संकेत दे चुके हैं, जबकि दूसरी ओर हजारों अमेरिकी मरीन्स की तैनाती की खबरें भी सामने आई हैं।व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलीन लैविट ने जानकारी दी कि ट्रंप रात 9 बजे (ईटी) देश को संबोधित करेंगे, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका युद्ध खत्म करने की दिशा में बढ़ रहा है या संघर्ष को और तेज करेगा।ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के लगातार बदलते रुख से अमेरिका के भीतर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

कभी नाटो सहयोगियों से मदद की मांग, फिर उनकी जरूरत से इनकार, तेहरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी और अचानक ऐसे हमलों को रोकने जैसे फैसलों ने स्थिति को और उलझा दिया है। एक सर्वे में 61% अमेरिकी नागरिकों ने ट्रंप की रणनीति पर असहमति जताई है।वहीं, बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि ईरान के खिलाफ अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और इसे जारी रखा जाएगा।दूसरी ओर ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर उसके क्षेत्र में किसी की हत्या होती है, तो वह पश्चिम एशिया में कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के ठिकानों को निशाना बनाएगा। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि ये कंपनियां ईरान के खिलाफ साजिश में शामिल हैं।ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी यह टकराव अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां एक फैसला पूरे क्षेत्र ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।

ईरान की चेतावनी से अमेरिका सतर्क, कंपनियों की सुरक्षा बढ़ी

ईरान की ओर से वैश्विक कंपनियों को निशाना बनाने की खुली धमकी के बाद अमेरिका ने भी कड़ा रुख अपनाया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) द्वारा 18 बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर हमले की चेतावनी दिए जाने के बाद वॉशिंगटन ने साफ कर दिया है कि उसकी सेना किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा है कि अमेरिकी सेना पहले से ही अलर्ट मोड में है और ईरान की ओर से होने वाले किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल या ड्रोन हमले को विफल करने की क्षमता रखती है।

अधिकारी ने दावा किया कि हाल के समय में ऐसे हमलों में 90 प्रतिशत तक कमी आई है, जो अमेरिकी रक्षा तैयारियों का संकेत है।ईरान ने जिन कंपनियों को निशाना बनाने की बात कही है, उनमें गूगल, मेटा, ऐपल, माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल और टेसला जैसी दिग्गज टेक और औद्योगिक कंपनियां शामिल हैं। आईआरजीसी का आरोप है कि ये कंपनियां ईरान के खिलाफ कथित ‘साजिश’ में शामिल हैं।इस बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका अगले दो से तीन सप्ताह में अपने सैन्य अभियान को समेट सकता है। उन्होंने कहा कि ‘हम जल्द ही बाहर निकलेंगे’, जिससे यह संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन युद्ध को लंबा खींचने के मूड में नहीं है।वहीं, मार्को रूबियो ने कहा है कि अमेरिका को इस संघर्ष की ‘फिनिश लाइन’ दिखाई दे रही है और कूटनीतिक स्तर पर ईरान के साथ बातचीत जारी है। हालांकि, दोनों देशों के बीच सीधे संपर्क को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

इस बीच खाड़ी क्षेत्र में भी हलचल तेज हो गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात के संभावित हस्तक्षेप की खबरें हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।कुल मिलाकर, हालात ऐसे मोड़ पर हैं जहां एक तरफ युद्ध के विस्तार का खतरा बना हुआ है, तो दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान की कोशिशें भी तेज हो रही हैं। दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी है।

वेस्ट यूपी में सोशल मीडिया के जरिए आतंकी नेटवर्क का खुलासा

यूपी क्राइम अलर्ट न्यूज़ ब्यूरो

मेरठ: देश में किशोरों का माइंड वॉश कर उन्हें आतंकी गतिविधियों से जोड़ने की साजिश का बड़ा खुलासा हुआ है। वेस्ट यूपी के कई किशोरों को सोशल मीडिया के जरिए संदिग्ध ग्रुप्स में जोड़कर कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने की कोशिश की जा रही थी।खुफिया एजेंसियों और एटीएस को मिले इनपुट के बाद जब जांच शुरू हुई तो इसका नेटवर्क जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद और तेलंगाना तक फैला मिला। जांच में सामने आया कि इन ग्रुप्स को फर्जी आईडी और वर्चुअल नंबर के जरिए संचालित किया जा रहा था।

मेरठ के लिसाड़ी गेट इलाके के एक 17 वर्षीय किशोर को कुछ माह पहले एक संदिग्ध ग्रुप में जोड़ा गया था। शुरुआत में धार्मिक वीडियो साझा किए गए, लेकिन बाद में आईएसआईएस से जुड़े वीडियो और पाक अधिकृत कश्मीर के कंटेंट पोस्ट किए जाने लगे। जांच के दौरान किशोर से पूछताछ की गई और उसके मोबाइल की फॉरेंसिक जांच भी हुई। फिलहाल उसकी सीमित गतिविधियों को देखते हुए उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

इसी तरह सहारनपुर में भी एक किशोर को संदिग्ध व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े होने के कारण ट्रेस किया गया। इससे पहले सहारनपुर के बीडीएस छात्र हारिश को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया जा चुका है, जो सोशल मीडिया के जरिए आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा था।जांच एजेंसियों का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए किशोरों को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेलने की साजिश रची जा रही है।फिलहाल एजेंसियां ऐसे सभी ग्रुप्स और उनके संचालकों की पहचान में जुटी हैं, ताकि इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।

प्रयागराज में नकली नोट फैक्ट्री का पर्दाफाशप्रयागराज में नकली नोट फैक्ट्री का पर्दाफाश

ब्यूरो चीफ -पवन मिश्रा

प्रयागराज: में पुलिस ने नकली नोटों के बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गंगानगर पुलिस की कार्रवाई में आरोपियों के कब्जे से 1,18,300 रुपये के नकली नोट, एक कार, एक बाइक और नोट छापने का पूरा सेटअप बरामद किया गया है।

डीसीपी कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि सरायइनायत थाना, एसओजी और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में सोमवार रात हबूसा मोड़ के पास चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए आरोपियों में भदोही और देवरिया जिलों के युवक शामिल हैं, जो 500 और 100 रुपये के नकली नोट बाजार में खपा रहे थे।पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का नेटवर्क वाराणसी समेत कई जिलों तक फैला हुआ था।

देवरिया में एक किराए के कमरे में लैपटॉप, प्रिंटर और विशेष पेपर की मदद से नकली नोट छापे जाते थे, जिन्हें 40-50 फीसदी कमीशन पर बाजार में सप्लाई किया जाता था।पुलिस के अनुसार, गिरोह का सरगना विवेक यादव है, जो पहले जिला पंचायत चुनाव भी लड़ चुका है और फिलहाल फरार है। उसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

इस कार्रवाई के लिए पुलिस टीम को 15 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की गई है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है, ताकि गिरोह के बाकी सदस्यों को भी जल्द गिरफ्तार किया जा सके।

महंगाई के बीच यूपी के कामगारों को बड़ा तोहफा

संवाददता -महेश कुमार सिंह

खनऊ: उत्तर प्रदेश में संगठित और असंगठित क्षेत्र के लाखों कामगारों के लिए राहत भरी खबर है। बुधवार से श्रम विभाग द्वारा तय नई मजदूरी दरें लागू हो गई हैं, जिससे विभिन्न उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों की आय में इजाफा हुआ है।श्रम विभाग ने महंगाई को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम मजदूरी और परिवर्तनीय महंगाई भत्ते (डीए) में संशोधन किया है। इसके तहत अकुशल, अर्द्ध-कुशल, कुशल और अति कुशल सभी श्रेणियों के कामगारों की मजदूरी में प्रतिदिन करीब 10 से 14 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है।न्यूनतम मजदूरी अधिनियम-1948 के तहत 74 से अधिक उद्योगों जैसे ईंट-भट्ठा, प्लास्टिक, डेयरी, कपड़ा, प्राइवेट अस्पताल, प्रिंटिंग और ताला उद्योग में नई दरें लागू की गई हैं। अन्य उद्योगों में अकुशल श्रमिकों की मासिक मजदूरी 11,021 रुपये से बढ़ाकर 11,313 रुपये, अर्द्धकुशल की 12,123 से बढ़ाकर 12,445 रुपये और कुशल श्रमिकों की मजदूरी 13,850 से बढ़ाकर 13,940 रुपये कर दी गई है।वहीं, कांच की चूड़ी उद्योग में भी मजदूरी में बढ़ोतरी हुई है। अकुशल श्रमिकों को अब करीब 10,096 रुपये मासिक और 388 रुपये प्रतिदिन मिलेंगे, जबकि कुशल श्रमिकों की दैनिक मजदूरी लगभग 492 रुपये तय की गई है।श्रम विभाग हर छह महीने में महंगाई भत्ते की समीक्षा करता है। इस बढ़ोतरी से प्रदेश के लाखों कामगारों को बढ़ती महंगाई के बीच कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

10 दिनों के विवाद का दर्दनाक अंत, परिवार खत्म कर फंदे पर झूला पति

यूपी क्राइम अलर्ट न्यूज़ ब्यूरो

मुजफ्फरनगर: मुजफ्फरनगर से दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां मामूली रकम को लेकर शुरू हुआ विवाद पूरे परिवार के अंत का कारण बन गया। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के सरवट स्थित मदीना कॉलोनी में एक व्यक्ति ने पहले अपनी पत्नी और दो मासूम बच्चों की हत्या कर दी, फिर खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।मृतक इरशाद ने ईद के मौके पर अपनी बहन को 1500 रुपये दिए थे, जिसे लेकर उसकी पत्नी से विवाद शुरू हो गया।मोहल्ले के लोगों के अनुसार, पिछले करीब दस दिनों से दंपति के बीच लगातार झगड़ा चल रहा था और अक्सर घर से कहासुनी की आवाजें आती थीं।बताया जा रहा है कि सोमवार रात विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। पड़ोसियों ने मंगलवार तड़के करीब चार बजे तक झगड़े की आवाजें सुनीं, जिसके बाद अचानक सब शांत हो गया। सुबह जब घर के अंदर चारों के शव मिले तो इलाके में सनसनी फैल गई।सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके की जांच कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।शुरुआती जांच में घरेलू कलह को घटना की वजह माना जा रहा है। वहीं, मृतका के परिजनों ने पति पर लंबे समय से उत्पीड़न और मारपीट के आरोप लगाए हैं।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी है, ताकि घटना के सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके।

एएनटीएफ यूनिट बरेली: तीन करोड़ पचास लाख की अवैध हेरोइन व स्मैक के साथ तीन तस्कर गिरफ्तार

संवाददाता-महेश कुमार

लखनऊ: मादक पदार्थों की सप्लाई करने वाले तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एएनटीएफ यूनिट बरेली ने भमौरा पुलिस व लखनऊ सर्विलांस टीम की मदद से मंगलवार को दिल्ली और यूपी के अलग-अलग जिलों में अवैध हेरोइन व स्मैक की तस्करी करने वाले तीन तस्करों को पकड़ने में कामयाबी हासिल की है। एएनटीएफ टीम को इनके पास से 1.750 किलो ग्राम अवैध हेरोइन व अवैध स्मैक बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल, तीन मोबाइल फोन व 87,520 रुपए की नकदी बरामद हुई है।


एएनटीएफ यूनिट बरेली की टीम ने मंगलवार को मुखबिर की सूचना पर स्थानीय पुलिस और लखनऊ की सर्विलांस टीम की मदद से बरेली जिले के भमौरा थाना क्षेत्र स्थित तख्तपुर गांव के पास से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। एएनटीएफ के उपनिरीक्षक विकास यादव के मुताबिक पकड़े गए तीनों तस्करों ने पूछताछ में अपना नाम परमानन्द, यशवीर व रविन्द्र बताया। उपनिरीक्षक का कहना है कि तीनों आरोपित बदायूं जिले के बिनावर थाना क्षेत्र स्थित भगवानपुर गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि इनके पास से बरामद मादक पदार्थ की की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में तीन करोड़ पचास लाख रुपए बताई जा रही है।

उपनिरीक्षक विकास यादव के अनुसार पकड़े गए तीनों तस्करों ने बताया कि इससे पहले उसके पिता के नाम से अफीम की खेती करने का लाइसेंस था, जिसकी वजह से यह अफीम से क्रूड और क्रूड से स्मैक बनाना सिखने की बात बताया। यह भी बताया कि वर्ष 2012 से इस गोरखधंधे को अंजाम देते चले आ रहे हैं। तस्करों ने एएनटीएफ टीम को बताया कि इनका एक संगठित गिरोह है जो दिल्ली व यूपी के अलग-अलग जिलों अवैध मादक पदार्थों की सप्लाई करते हैं। एएनटीएफ मामले की छानबीन कर रही है।

नम्बर प्लेट ढककर दौड़ रहे वाहन, स्मार्ट सिटी की ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे सवाल

सवांददाता-सुनील तिवारी

कानपुर: स्मार्ट सिटी का तमगा हासिल कर चुके कानपुर में जहां एक ओर यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे और आईटीएमएस (इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) लगाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। शहर की सड़कों पर बड़ी संख्या में ई-रिक्शा,भारी वाहन और ऑटो चालक नम्बर प्लेट छुपाकर खुलेआम नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, और यह प्रवृत्ति अब एक परम्परा का रूप लेती जा रही है।

रामादेवी, नौबस्ता, टाटमिल, बर्रा और जरीब चौकी जैसे प्रमुख चौराहों पर लगे अत्याधुनिक कैमरे पल भर में चालान काटने में सक्षम बताए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद इन वाहनों पर कोई खास असर नहीं दिख रहा। अधिकतर ई-रिक्शा, भारी वाहन और ऑटो चालकों ने अपनी नम्बर प्लेट पर या तो कीचड़ पोत रखा है, या फिर उसे कपड़े, पॉलीथिन या काली टेप से ढक रखा है, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

इस तरह नम्बर प्लेट छुपाकर वाहन चलाना न सिर्फ यातायात नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह शहर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, हिट एंड रन जैसी घटनाओं में ऐसे वाहनों की पहचान करना लगभग असंभव हो जाता है। यही नहीं, अपराधी भी बिना नम्बर प्लेट या छुपे नम्बर वाले वाहनों का इस्तेमाल लूटपाट और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए कर सकते हैं।

नम्बर छुपाने के कारण इन चालकों में नियमों का डर भी खत्म हो चुका है। यही वजह है कि वे बीच सड़क पर वाहन खड़ा करने, रॉन्ग साइड चलने और ट्रैफिक जाम बढ़ाने से भी नहीं हिचकते। उन्हें यह भरोसा रहता है कि उनकी पहचान नहीं हो पाएगी और चालान से बच जाएंगे।

हैरानी की बात यह है कि जिन चौराहों पर यातायात पुलिस और होमगार्ड तैनात रहते हैं, वहीं उनकी आंखों के सामने ये ‘बेनाम’ वाहन गुजरते रहते हैं। इसके बावजूद इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखती, जिससे पुलिस की सक्रियता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

शहरवासियों का कहना है कि अगर स्मार्ट सिटी के कैमरे और आईटीएमएस सिस्टम ऐसे वाहनों की पहचान नहीं कर पा रहे हैं, तो यह तकनीक और प्रशासन दोनों की विफलता को दर्शाता है।

गौरतलब है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत नम्बर प्लेट के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ करना दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद इस नियम की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

ऐसे में आवश्यकता है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए विशेष अभियान चलाए, नम्बर प्लेट छुपाकर चलने वाले वाहनों को जब्त करे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे। तभी स्मार्ट सिटी की परिकल्पना को वास्तविकता में बदला जा सकेगा और शहर की यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

मुख्य बिंदु

. नम्बर प्लेट ढंककर दौड़ रहे वाहन ।
. पुलिस और होमगार्ड की मौजूदगी पर सवाल ।
. CCTV निगरानी व्यवस्था पर प्रश्न ।
. मोटर वाहन अधिनियम का खुला उल्लंघन ।
. सख्त अभियान चलाने की मांग ।

विक्रमपुर में पंचायत चुनाव की सरगर्मियां तेज, ‘फौजी’ अवधेश सिंह चौहान का बढ़ा जनसमर्थन

सवांददाता-सुनील तिवारी/ कानपुर देहात

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर भले ही अभी तक चुनावी तारीख तो तय नहीं की गई है लेकिन जमीनी स्तर पर चुनावी तैयारियां जोरों पर शुरू हो चुकी हैं जिसका नजारा कानपुर देहात के शिवली क्षेत्र के ग्राम विक्रमपुर में देखने को मिल रहा है जहाँ से कई प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमाने के लिए चुनावी मैदान में उतर चुके हैं जिनमे सबसे पहला नाम चर्चा में आता है अवधेश सिंह चौहान उर्फ़ फौजी का जिन्होंने समाजसेवा का इस तरह से जिम्मा उठा रखा है जिसको लेकर ग्राम विक्रमपुर की जनता भी प्रधान प्रत्याशी अवधेश सिंह चौहान को भरपूर समर्थन भी करने में लगी हुई है अभी इतना ही नहीं ग्राम समाज के कुछ लोगों ने अभी से अवधेश सिंह चौहान को अपना प्रधान घोषित कर चुकी है।

माता रानी का कराया विशाल भंडारा

अवधेश सिंह चौहान उर्फ़ फौजी ने अपने बुजुर्गों की परंपरा को आज भी जीवित रखा हुआ है जिसका नजारा शनिवार को उस वक्त देखने को मिला जब नवरात्रि के दसवें दिन अवधेश सिंह चौहान उर्फ़ फौजी ने अपनी ग्राम समाज में माता रानी की पूजा अर्चना के बाद कन्या भोज कराया और फिर कन्या भोज के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें ग्राम समाज के हर वर्ग के श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया इतना ही नहीं इस आयोजन में पास पड़ोस के कई गांव के लोगों ने अपनी उपस्थिति अर्जित कराइ जिसमें बड़े बुजुर्गो के साथ ही युवा वर्ग और महिलाएं भी शामिल रहीं।

जानिए अवधेश सिंह चौहान उर्फ फौजी का परिचय

अवधेश सिंह चौहान उर्फ़ फौजी विक्रमपुर के ही रहने वाले हैं और अपनी पुस्तैनी परम्पराओं को मानते हुए समाजसेवा करने का कार्य करते हैं इसके साथ ही अवधेश सिंह चौहान लोगों की मदद करने के लिए चौबीस घंटे उपलब्ध रहते हैं आपको बताते चलें कि अवधेश सिंह चौहान के नाम के आगे फौजी इस लिए लगाया गया है क्योंकि अवधेश सिंह चौहान राजपुताना रायफल रेजिमेंट से रिटायर्ड हुए थे जिसके बाद से उन्होंने समाज की सेवा और सुरक्षा का बीड़ा उठाया और कोई परिवार किसी भी मुसीबत में हो उसकी मदद करना उन्होंने अपना कर्तव्य बना लिया इसलिए विक्रमपुर ग्राम सभा के निवासियों ने इनके नाम के आगे फौजी लगाकर सम्मानित करने का कार्य किया इसलिए इनका नाम अवधेश सिंह चौहान उर्फ़ फौजी चर्चित हो गया।

विशाल भंडारे में यह लोग रहे शामिल

माता रानी के विशाल भंडारे के आयोजन में कुलदीप भदौरिया, प्रताप सिंह चौहान अतर सिंह चौहान, राम सिंह चौहान, महेश सिंह चौहान, योगेंद्र सिंह चौहान, दिनेश सिंह चौहान, डॉक्टर विजय सिंह राजावत ( हरिवंश राय बच्चन डिग्री कॉलेज, उन्नाव, उत्तर प्रदेश ) के साथ ही समस्त ग्राम समाज के सम्मानित गण मौजूद रहे।

ग्रामीणों में दिख रहा था उत्साह

विशाल भंडारे के आयोजन के दौरान एक तरफ माता रानी की भक्ति का महासंगम देखने को मिल ही रहा था वहीं ग्राम समाज के आए हुए लोगों में चुनावी उत्साह भी देखने को मिल रहा था जिसके चलते सभी की जुबां पर अवधेश सिंह चौहान उर्फ़ फौजी का नाम चर्चा में सुनने को मिल रहा था जिसका सम्मान रखते हुए अवधेश सिंह चौहान उर्फ़ फौजी ने बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर जीवन भर सेवा करने का संकल्प लिया।

https://youtu.be/7tgENnCLS7E
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