संवाददाता दुर्गेश कुमार मिश्रा
फतेहपुर/खखरेरू। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 26 जून से परिषदीय विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत कर दी गई है। प्रदेशभर के अधिकांश विद्यालयों में पहले दिन बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया और उत्साह के साथ पठन-पाठन शुरू हुआ। लेकिन फतेहपुर जिले के धाता विकासखंड के अकिलपुर ऐराना स्थित प्राथमिक विद्यालय से जो तस्वीर सामने आई, उसने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय में पढ़ने वाले मासूम बच्चे सुबह समय से स्कूल तो पहुंच गए, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक समय पर नहीं पहुंचा। काफी देर तक बच्चे स्कूल परिसर में शिक्षकों का इंतजार करते रहे। इस दौरान न तो कक्षाएं संचालित हुईं और न ही बच्चों की पढ़ाई शुरू हो सकी। घटना का वीडियो और तस्वीरें ग्रामीणों ने अपने मोबाइल फोन में कैद कर लीं।

पहले दिन ही बच्चों को करना पड़ा इंतजार
जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह विद्यालय खुलने के निर्धारित समय पर बच्चे स्कूल पहुंच गए थे। नए सत्र को लेकर बच्चों में उत्साह भी दिखाई दे रहा था, लेकिन विद्यालय में शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण उनका उत्साह निराशा में बदल गया। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में कुल तीन शिक्षकों की तैनाती है, लेकिन निर्धारित समय तक कोई शिक्षक नहीं पहुंचा। बच्चे स्कूल परिसर में इधर-उधर घूमते रहे और पढ़ाई शुरू होने का इंतजार करते रहे।

बच्चों ने भी लगाए आरोप
विद्यालय पहुंचे बच्चों ने बताया कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। उनका कहना है कि कई बार शिक्षक निर्धारित समय से देर से विद्यालय पहुंचते हैं। बच्चों के अनुसार, नए सत्र के पहले दिन भी काफी देर तक दो शिक्षक विद्यालय नहीं पहुंचे, जिससे पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। यदि बच्चों की बात सही है, तो यह मामला शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ग्रामीणों में नाराजगी
घटना के बाद गांव के लोगों में नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों ने विद्यालय परिसर का वीडियो और फोटो बनाकर संबंधित अधिकारियों तक मामला पहुंचाने की बात कही। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन कराने और ड्रॉपआउट रोकने के लिए लगातार अभियान चला रही है। ऐसे में यदि शिक्षक ही समय पर विद्यालय नहीं पहुंचेंगे तो इन प्रयासों का उद्देश्य प्रभावित होगा।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने कहा कि विद्यालयों में बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन यदि शिक्षकों की समयपालन को लेकर निगरानी प्रभावी नहीं होगी, तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजते हैं ताकि उनका भविष्य बेहतर बन सके। लेकिन विद्यालय पहुंचने के बाद यदि शिक्षक ही मौजूद न हों तो बच्चों का मनोबल टूटता है।
कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि शिक्षक निर्धारित समय पर अनुपस्थित पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार तभी संभव है जब सभी शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें और समय पर विद्यालय पहुंचें।
खंड शिक्षा अधिकारी ने दिए जांच के निर्देश
मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) धाता संजय कुमार ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

समयपालन पर जोर जरूरी
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक स्तर पर बच्चों की शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि प्रारंभिक शिक्षा प्रभावित होती है तो उसका असर आगे की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है। इसलिए विद्यालयों में समयपालन, नियमित कक्षाएं और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना आवश्यक है। सरकार भी समय-समय पर विद्यालयों के निरीक्षण और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न दिशा-निर्देश जारी करती रही है। ऐसे में इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
निष्कर्ष
फतेहपुर के अकिलपुर ऐराना प्राथमिक विद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र के पहले ही दिन शिक्षकों के कथित रूप से समय पर न पहुंचने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों और बच्चों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी ने जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई है।















