Home Uttarpradesh कानपुर में पुलिस शिकायत के बाद बढ़ा विवाद, पूर्व सांसद प्रत्याशी को...

कानपुर में पुलिस शिकायत के बाद बढ़ा विवाद, पूर्व सांसद प्रत्याशी को धमकी देने का आरोप

गली में कथित नशाखोरी, गाली-गलौज और अभद्रता से परेशान स्थानीय लोगों ने उठाई आवाज; पुलिस में शिकायत के बाद शिकायतकर्ता के घर के बाहर हंगामा और धमकी देने के आरोप, CCTV कैमरे तोड़ने की चेतावनी का भी दावा. डिजटल डेस्क रिपोर्ट

कानपुर में गली में कथित तौर पर नशाखोरी, गाली-गलौज और राहगीरों के साथ अभद्रता को लेकर विवाद बढ़ने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में कुछ लोग आए दिन सड़क पर वाहन खड़ा कर रास्ते में अव्यवस्था पैदा करते हैं और घर के बाहर बैठकर कथित रूप से नशा करने के साथ अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करते हैं। इससे आसपास रहने वाले लोगों, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूल जाने वाले बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मामले को लेकर पूर्व सांसद प्रत्याशी योगेश जायसवाल द्वारा स्थानीय पुलिस प्रशासन से शिकायत किए जाने के बाद विवाद और बढ़ने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि पुलिस में शिकायत किए जाने की जानकारी मिलने के बाद ऑटो चालक विनय गौतम अपने साथियों और परिवार के कुछ सदस्यों के साथ योगेश जायसवाल के घर के बाहर पहुंचा और वहां जमकर हंगामा किया। शिकायतकर्ता पक्ष ने इस दौरान गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और घर पर लगे CCTV कैमरों को तोड़ने की चेतावनी दिए जाने के आरोप लगाए हैं।

गली में नशाखोरी और गाली-गलौज का आरोप

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, क्षेत्र में विनय गौतम और उसके कुछ साथियों पर आए दिन घर के बाहर बैठकर कथित रूप से नशा करने और गाली-गलौज करने के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि विनय अपनी ऑटो को भी कई बार सड़क पर बेतरतीब तरीके से खड़ा कर देता है, जिससे आने-जाने वाले लोगों को परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक रास्ते पर इस तरह की गतिविधियों से माहौल खराब हो रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों को रास्ते से निकलने में असहजता महसूस होने तथा बच्चों के आवागमन पर भी असर पड़ने का दावा किया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब पहले कुछ लोगों ने विनय गौतम और उसके साथियों को समझाने का प्रयास किया तो विवाद शांत होने के बजाय कथित तौर पर और बढ़ गया। आरोप है कि समझाने वाले लोगों के साथ भी गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाओं में वास्तव में क्या हुआ और कौन-कौन लोग इसमें शामिल थे।

जनहित में पुलिस से शिकायत का दावा

स्थानीय लोगों की परेशानी को देखते हुए पूर्व सांसद प्रत्याशी योगेश जायसवाल ने मामले की शिकायत पुलिस प्रशासन से की। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, पुलिस से संपर्क करने का उद्देश्य क्षेत्र में कथित नशाखोरी, गाली-गलौज और सार्वजनिक रास्ते में हो रही परेशानी पर रोक लगवाना था। लेकिन आरोप है कि शिकायत की जानकारी सामने आने के बाद विवाद ने नया रूप ले लिया। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि विनय गौतम, उसके भाई संजय गौतम, बहन लक्ष्मी गौतम और कुछ अन्य लोग योगेश जायसवाल के घर के बाहर पहुंचे। आरोप है कि वहां खड़े होकर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया गया और काफी देर तक हंगामा किया गया।

जान से मारने की धमकी देने का आरोप

मामले में सबसे गंभीर आरोप जान से मारने की धमकी का है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि जब पुलिस में शिकायत करने को लेकर सवाल उठाया गया तो कथित रूप से योगेश जायसवाल को जान से मारने की धमकी दी गई। इसके अलावा घर पर लगे CCTV कैमरों को तोड़ने की चेतावनी देने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि CCTV कैमरे घटना के महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं और इसी वजह से उन्हें नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से यह भी आरोप लगाया गया है कि मौके पर कुछ लोग डंडे लिए हुए थे। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि इससे उन्हें किसी अप्रिय घटना की आशंका हुई और परिवार के लोगों में डर का माहौल बन गया।

झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी का भी आरोप

शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता पक्ष के मुताबिक, लक्ष्मी गौतम ने पुलिस को मामले में शामिल करने पर कथित रूप से झूठे मामलों और मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। इन आरोपों को लेकर भी पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि पुलिस को कोई वीडियो रिकॉर्डिंग, CCTV फुटेज या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिलते हैं तो घटना की वास्तविक स्थिति सामने आने में मदद मिल सकती है।

इलाके के लोगों में डर और नाराजगी

घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में डर और नाराजगी का माहौल होने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सार्वजनिक स्थानों पर कथित नशाखोरी, गाली-गलौज और धमकी जैसी घटनाओं पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए। निवासियों का कहना है कि गली और सार्वजनिक रास्ते पर हर व्यक्ति को सुरक्षित तरीके से आने-जाने का अधिकार है। किसी भी व्यक्ति द्वारा कथित रूप से रास्ता बाधित करने, लोगों के साथ अभद्र व्यवहार करने या धमकी देने की शिकायत सामने आती है तो पुलिस को उसकी गंभीरता से जांच करनी चाहिए।

CCTV फुटेज से सामने आ सकती है सच्चाई

पूरे विवाद में CCTV फुटेज अहम भूमिका निभा सकती है। शिकायतकर्ता पक्ष के घर के बाहर लगे कैमरों में यदि घटना रिकॉर्ड हुई है तो पुलिस उसकी जांच कर सकती है। फुटेज से यह पता चल सकता है कि घटना के समय कौन-कौन लोग मौके पर मौजूद थे, कितनी देर तक विवाद हुआ और वहां किस प्रकार की गतिविधियां हुईं। इसके साथ ही मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मोबाइल वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

पुलिस की जांच पर टिकी निगाहें

अब इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस शिकायतकर्ता और आरोपित दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर निष्पक्ष जांच करेगी? क्या CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच की जाएगी? और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी? फिलहाल शिकायतकर्ता पक्ष ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा और सख्त कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष और पुलिस की आधिकारिक जांच सामने आना अभी बाकी है। मामला केवल पड़ोसियों के बीच विवाद का नहीं, बल्कि सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में जरूरी है कि पुलिस पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच करे और जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

महत्वपूर्ण नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और लगाए गए आरोपों के आधार पर तैयार किया गया है। विनय गौतम, संजय गौतम और लक्ष्मी गौतम पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समय नहीं हुई है। आरोपित पक्ष का आधिकारिक बयान और पुलिस की जांच रिपोर्ट सामने आने पर खबर में उनका पक्ष भी शामिल किया जाना चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here