खखरेरू/फतेहपुर। थाना क्षेत्र के बसवा गांव में बुधवार सुबह लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा हो गया। बारिश और जलभराव के कारण परेशान होकर सड़क किनारे बैठाई गई भेड़ें अचानक पास स्थित एक ईंट-भट्ठे के चैंबर में चली गईं। इसी दौरान चैंबर अचानक भरभराकर ढह गया। चैंबर के मलबे में करीब 23 भेड़ें दब गईं। हादसे में 15 भेड़ों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सात भेड़ें गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे की जानकारी मिलते ही चरवाहों में अफरातफरी मच गई। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना मलबा हटाकर भेड़ों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। चरवाहों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही है। मूसलाधार बारिश के कारण इलाके में जगह-जगह जलभराव हो गया था। सड़क और आसपास के क्षेत्रों में पानी भरने की वजह से भेड़ों को सुरक्षित स्थान पर बैठाना चरवाहों के लिए मुश्किल हो रहा था। इसी के चलते मंगलवार की शाम उन्होंने अपनी भेड़ों को सड़क किनारे बैठा दिया था। बताया गया कि बुधवार सुबह करीब पांच बजे सड़क पर एक वाहन आया। वाहन को देखकर भेड़ें घबरा गईं और इधर-उधर भागने लगीं। इसी दौरान बड़ी संख्या में भेड़ें सड़क के पास स्थित ईंट-भट्ठे के चैंबर के अंदर चली गईं। चरवाहे कुछ समझ पाते, उससे पहले ही अचानक चैंबर भरभराकर गिर पड़ा। देखते ही देखते वहां मलबे का ढेर लग गया और करीब 23 भेड़ें उसके नीचे दब गईं।
मलबा हटाकर भेड़ों को निकालने में जुटे चरवाहे
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार और अफरातफरी का माहौल बन गया। अपनी भेड़ों को मलबे में दबा देखकर चरवाहे परेशान हो गए। उन्होंने तत्काल मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया। सीमित संसाधनों के बावजूद चरवाहों ने काफी मेहनत और मशक्कत के बाद मलबे में फंसी भेड़ों को बाहर निकालना शुरू किया। काफी प्रयास के बाद सात भेड़ों को घायल अवस्था में बाहर निकाला गया, लेकिन 15 भेड़ों को बचाया नहीं जा सका। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद मृत भेड़ों को देखकर चरवाहों की आंखों में आंसू आ गए। उनके लिए ये भेड़ें केवल पशु नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन थीं।

इन चरवाहों की भेड़ें हुईं हादसे का शिकार
हादसे में जिन चरवाहों की भेड़ों की मौत हुई है, उनमें अखिलेश पुत्र रामनारायण की पांच भेड़ें, कुंवारे पुत्र शिवनारायण की छह भेड़ें, पौली निवासी धर्मपाल पुत्र जगनमोहन की दो भेड़ें और केशव पाल की दो भेड़ें शामिल हैं। चरवाहों के मुताबिक भेड़ों की मौत से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि भेड़ पालन ही उनके परिवारों की आय का प्रमुख साधन है। अचानक इतनी बड़ी संख्या में भेड़ों की मौत होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। चरवाहों ने प्रशासन से नुकसान का उचित आकलन कर नियमानुसार आर्थिक सहायता और मुआवजा दिलाने की मांग की है।
पशु चिकित्सकों ने किया उपचार और पोस्टमार्टम
घटना की सूचना मिलने के बाद पशु चिकित्सा विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। पशु चिकित्सक डॉ. प्रवीण कुमार और डॉ. विकास गुप्ता ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। चिकित्सकों ने मृत भेड़ों का पोस्टमार्टम किया, जबकि हादसे में घायल सात भेड़ों का उपचार किया गया। घायल भेड़ों की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उनके इलाज की आवश्यक प्रक्रिया पूरी की। हादसे में घायल पशुओं को समय पर उपचार मिलने से उन्हें बचाने का प्रयास किया गया।
लेखपाल ने किया नुकसान का आकलन
घटना की जानकारी प्रशासन तक पहुंचने के बाद क्षेत्रीय लेखपाल अनुज कुमार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और हादसे में हुए नुकसान का आकलन किया। लेखपाल ने मृत और घायल भेड़ों की जानकारी जुटाने के साथ ही पीड़ित चरवाहों से भी घटना के संबंध में जानकारी ली। नुकसान का आकलन करने के बाद रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को भेज दी गई है। लेखपाल ने पीड़ित चरवाहों को भरोसा दिलाया कि नियमानुसार उन्हें हरसंभव सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

बारिश बनी हादसे की बड़ी वजह
चरवाहों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण पूरे क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बनी हुई थी। पानी से बचने और भेड़ों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें सड़क किनारे बैठाया गया था। सुबह वाहन आने के बाद भेड़ों के अचानक घबराकर भागने और ईंट-भट्ठे के चैंबर में पहुंचने के बाद यह हादसा हुआ। लगातार बारिश के कारण ईंट-भट्ठे के चैंबर की स्थिति कमजोर होने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि चैंबर किस वजह से ढहा, इसकी वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
लाखों रुपये के नुकसान से चरवाहों के सामने संकट
एक साथ 15 भेड़ों की मौत से प्रभावित चरवाहों को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है। पशुपालन से अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले इन लोगों के लिए यह हादसा बड़ा आर्थिक झटका है। चरवाहों का कहना है कि भेड़ों को पालने में लंबे समय से मेहनत और पैसा लगाया जाता है। अचानक इतनी संख्या में पशुओं की मौत होने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी। अब पीड़ित चरवाहों की नजर प्रशासन की ओर है। उनका कहना है कि नुकसान का सही आकलन कर उन्हें जल्द से जल्द सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि उनके परिवारों की आजीविका पर पड़े इस संकट को कुछ कम किया जा सके। फिलहाल पशु चिकित्सा विभाग द्वारा घायल भेड़ों का उपचार किया गया है और राजस्व विभाग ने नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी है। प्रशासन की ओर से आगे क्या सहायता दी जाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।






