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गाजीपुर में बाढ़ के बीच फंसीं 2 हजार भेड़ें, रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन; ड्रोन से मिली लोकेशन

जमानियां क्षेत्र में गंगा का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ प्रभावित इलाके में फंसे थे भेड़ पालक और करीब 2000 भेड़ें, डायल-112 पर मिली सूचना के बाद पुलिस-प्रशासन ने चलाया अभियान, छह घंटे की मशक्कत के बाद सभी को सुरक्षित निकाला गया. ब्यूरो चीफ- पवन मिश्रा

गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के बीच बाढ़ प्रभावित इलाकों में जनजीवन प्रभावित हो रहा है। इसी दौरान जमानियां क्षेत्र में करीब 2000 भेड़ें और उनके पालक बाढ़ के पानी के बीच फंस गए। रात के समय चारों तरफ पानी फैलने और सुरक्षित रास्ता नहीं मिलने से परेशान भेड़ पालकों ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने डायल-112 पर सूचना देकर अपनी और अपने पशुओं की जान बचाने की अपील की। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। मौके की स्थिति गंभीर होने के कारण वरिष्ठ अधिकारियों ने रेस्क्यू अभियान की निगरानी शुरू की। बाढ़ का पानी करीब ढाई से तीन किलोमीटर के बड़े क्षेत्र में फैला होने के कारण फंसी हुई भेड़ों की सही लोकेशन पता करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया था।

डायल-112 पर मिली मदद की पुकार

बताया गया कि रात के समय बाढ़ प्रभावित इलाके में बड़ी संख्या में भेड़ें और उनके पालक फंस गए थे। पानी लगातार बढ़ रहा था और अंधेरा होने के कारण उनके लिए सुरक्षित स्थान तक पहुंचना मुश्किल था। ऐसे में भेड़ पालकों ने डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीमों को सक्रिय किया। पुलिस और प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ लोगों को निकालने की नहीं थी, बल्कि हजारों पशुओं को भी सुरक्षित बाहर निकालना था। इतनी बड़ी संख्या में भेड़ों को बाढ़ के बीच से निकालने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की जरूरत थी।

एसपी के नेतृत्व में मौके पर पहुंची टीम

मामले की जानकारी मिलने के बाद एसपी गाजीपुर डॉ. ईरज राजा के नेतृत्व में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। उनके साथ सदर एसडीएम, सीओ सिटी, सदर कोतवाल समेत पुलिस बल मौजूद रहा। अधिकारियों ने मौके की स्थिति का जायजा लिया। बाढ़ का पानी करीब ढाई से तीन किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ था। ऐसे में जमीन से पूरे इलाके की निगरानी करना आसान नहीं था। भेड़ों का झुंड और उनके पालक पानी से घिरे इलाके में कहां फंसे हैं, इसकी सटीक जानकारी जुटाना जरूरी था। इसके लिए प्रशासन ने तकनीक का सहारा लिया।

ड्रोन से तलाश की गई भेड़ों की लोकेशन

रेस्क्यू अभियान के दौरान पुलिस और प्रशासन ने ड्रोन की मदद से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की निगरानी शुरू की। ड्रोन के जरिए पूरे इलाके को ऊपर से देखा गया और फंसी हुई भेड़ों के झुंड की लोकेशन चिन्हित करने का प्रयास किया गया। ड्रोन से लोकेशन मिलने के बाद रेस्क्यू टीमों को संबंधित स्थान तक पहुंचने की दिशा तय करने में मदद मिली। इसके बाद बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि रात के समय पानी से घिरे विशाल क्षेत्र में भेड़ों के झुंड को तलाशना बेहद मुश्किल था।

NDRF और SDRF समेत चार टीमें जुटीं

लोकेशन चिन्हित होने के बाद रेस्क्यू अभियान को तेज किया गया। प्रशासन ने NDRF, SDRF, नाविक और गोताखोरों की चार टीमों को अभियान में लगाया। टीमों ने रात में ही बाढ़ के पानी के बीच पहुंचकर भेड़ों और उनके पालकों को सुरक्षित निकालने का काम शुरू किया। पानी की गहराई और अंधेरे के कारण बचाव अभियान आसान नहीं था। रेस्क्यू टीमों को एक साथ बड़ी संख्या में पशुओं और लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की चुनौती का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद टीमों ने लगातार अभियान जारी रखा।

रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक चला ऑपरेशन

पुलिस के अनुसार, रेस्क्यू अभियान रात करीब 12 बजे शुरू हुआ और सुबह करीब 6 बजे तक चला। लगभग छह घंटे तक पुलिस, प्रशासन, NDRF, SDRF, नाविकों और गोताखोरों की टीमें लगातार काम करती रहीं। अभियान के दौरान बाढ़ के पानी में फंसे करीब 2000 भेड़ों और उनके पालकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रेस्क्यू पूरा होने के बाद प्रशासन और भेड़ पालकों ने राहत की सांस ली। इतने बड़े पशु झुंड को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित निकालना अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

एसपी ने की रेस्क्यू की पुष्टि

एसपी गाजीपुर डॉ. ईरज राजा ने रेस्क्यू अभियान की पुष्टि करते हुए बताया कि बाढ़ के पानी में फंसी करीब 2000 भेड़ों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिलने के बाद तेजी से कार्रवाई की गई और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए भेड़ों और उनके पालकों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। इस रेस्क्यू अभियान में पुलिस और प्रशासन के साथ-साथ आपदा राहत से जुड़ी टीमों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

गंगा का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात

गाजीपुर में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। नदी के आसपास रहने वाले लोगों और पशुपालकों को लगातार सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ के पानी के फैलाव के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आने-जाने के रास्ते प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाई जा रही है। बाढ़ चौकियों के जरिए स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

जोरलोगों के साथ पशुओं की सुरक्षा पर भी

बाढ़ जैसी आपदा में पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी चिंता उनके पशुओं को सुरक्षित रखने की होती है। कई परिवारों की आजीविका पशुओं पर निर्भर होती है। ऐसे में पशुओं का सुरक्षित रहना उनके लिए आर्थिक और भावनात्मक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। गाजीपुर में प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था के साथ-साथ पशुओं के चारे की व्यवस्था भी की जा रही है। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने पशुओं के लिए भोजन की समस्या न खड़ी हो।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

गंगा का जलस्तर बढ़ने के मद्देनजर प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रहा है। बाढ़ चौकियों और आश्रय स्थलों को सक्रिय रखा गया है। अधिकारियों की कोशिश है कि किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित लोगों तक तत्काल मदद पहुंचाई जा सके। साथ ही पशुपालकों को भी बाढ़ के पानी से दूर सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी जा रही है। जमानियां क्षेत्र में हुआ यह रेस्क्यू अभियान बताता है कि समय पर सूचना मिलने और विभिन्न राहत एजेंसियों के बीच समन्वय से बड़ी संख्या में लोगों और पशुओं को सुरक्षित बचाया जा सकता है।

निष्कर्ष

गाजीपुर में गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच जमानियां क्षेत्र में फंसी करीब 2000 भेड़ों और उनके पालकों का छह घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन राहत की बड़ी खबर है। डायल-112 पर मिली सूचना के बाद पुलिस और प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई की। ड्रोन से फंसे हुए झुंड की लोकेशन तलाशने के बाद NDRF, SDRF, नाविक और गोताखोरों की चार टीमों ने अभियान चलाया। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक चले अभियान के बाद सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। फिलहाल गाजीपुर में बाढ़ के हालात को देखते हुए प्रशासन की निगरानी जारी है और प्रभावित लोगों के साथ पशुओं के लिए भी जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

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