कानपुर में गंगा मेले का आगाज, डीएम ने किया झंडारोहण

संवाददाता -सुनील तिवारी

कानपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान बने गंगा मेले का शुभारंभ इस वर्ष भी पूरे उत्साह और भव्यता के साथ हुआ। शहर के प्रसिद्ध रज्जन बाबू पार्क, हटिया में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने झंडारोहण कर गंगा मेले का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने शहरवासियों को गंगा मेले की शुभकामनाएं देते हुए इसे आपसी भाईचारे, प्रेम और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक बताया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई। झंडारोहण के बाद ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजों की धुन पर मेले की टोलियां निकाली गईं। रंग-बिरंगे ठेलों और सजे हुए रथों के साथ कलाकारों और श्रद्धालुओं की टोलियां पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ती नजर आईं। चारों ओर रंग-गुलाल की बौछार और उत्सव का माहौल दिखाई दे रहा था। लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर गंगा मेले की बधाई देते हुए दिखाई दिए।

गंगा मेला कानपुर की एक पुरानी और गौरवशाली परंपरा है, जिसे शहरवासी वर्षों से बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते आ रहे हैं। यह मेला केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है। होली के कुछ दिन बाद आयोजित होने वाला यह मेला पूरे शहर को एक सूत्र में बांधने का काम करता है। इस अवसर पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि गंगा मेला कानपुर की सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश देता है। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि इस ऐतिहासिक परंपरा को बनाए रखने के लिए सभी लोग मिलकर गंगा मेले को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाएं।

जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन की ओर से गंगा मेले को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से आयोजित कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ यातायात, सफाई और अन्य सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है ताकि मेले में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। कार्यक्रम में शहर के कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर एमएलसी सलिल विश्नोई, विधायक अमिताभ बाजपेई और प्रसिद्ध हास्य कलाकार अनु अवस्थी समेत कई सामाजिक और सांस्कृतिक हस्तियां मौजूद रहीं। सभी ने गंगा मेले के आयोजन की सराहना करते हुए इसे शहर की गौरवशाली परंपरा बताया।

कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में शहरवासी, व्यापारी, सामाजिक संगठन और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में मेले को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनमें कलाकारों ने लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों का मनोरंजन किया। गंगा मेले के दौरान शहर की सड़कों पर विशेष चहल-पहल देखने को मिली। विभिन्न क्षेत्रों से आई टोलियां अपने-अपने अंदाज में मेले की शोभा बढ़ा रही थीं। कई लोग पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए और ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते-गाते हुए आगे बढ़ते दिखाई दिए।

मेले के आयोजन को लेकर प्रशासन और नगर निगम की ओर से भी विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए कई स्थानों पर सफाईकर्मियों की तैनाती की गई थी। साथ ही पुलिस और प्रशासन की टीम भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह मुस्तैद नजर आई। गंगा मेला केवल एक त्योहार नहीं बल्कि कानपुर की पहचान बन चुका है। हर साल इस आयोजन का शहरवासियों को बेसब्री से इंतजार रहता है। इस अवसर पर लोग अपने मित्रों, रिश्तेदारों और परिचितों के साथ मिलकर रंग-गुलाल लगाते हैं और खुशियां साझा करते हैं। इस बार भी गंगा मेले में लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। रज्जन बाबू पार्क से शुरू हुए इस आयोजन में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए और पूरे उत्साह के साथ इस ऐतिहासिक परंपरा का हिस्सा बने। कुल मिलाकर कहा जाए तो रज्जन बाबू पार्क से शुरू हुआ गंगा मेला एक बार फिर शहर की सांस्कृतिक एकता और भाईचारे का प्रतीक बनकर सामने आया। रंगों, संगीत और उत्साह से भरे इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि गंगा मेला केवल एक उत्सव नहीं बल्कि कानपुर की आत्मा से जुड़ी परंपरा है, जिसे शहरवासी पूरे गर्व और उल्लास के साथ निभाते आ रहे हैं।

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