नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में देरी को लेकर कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा बार-बार ‘अस्पष्ट और अप्रासंगिक’ कारणों के साथ याचिका दायर करने पर नाराजगी जताई और स्पष्ट कहा कि इस तरह की प्रवृत्ति अब बंद होनी चाहिए।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत में बेवजह के कारणों के साथ आने की आदत खत्म होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को तेज करने के लिए अदालत को अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करना पड़ा और झारखंड व ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों की तैनाती करानी पड़ी। न्यायिक प्रक्रिया में दखल के आरोप खारिज सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारी न्यायिक अधिकारियों को दस्तावेजों पर प्रशिक्षण दे रहे हैं, जो अदालत के निर्देशों के खिलाफ है।
हालांकि, पीठ ने इस दलील को खारिज करते हुए साफ किया कि दस्तावेजों की वैधता पर अंतिम फैसला केवल न्यायिक अधिकारी ही लेंगे।न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रशिक्षण देना आवश्यक है। अदालत ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वे समन्वय बनाकर एसआईआर प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करें और अनावश्यक देरी से बचें।











