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Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़: सिंधी सभा ने की एसआईटी जांच की मांग, दावों की निष्पक्ष जांच पर दिया जोर

डेस्क रिपोर्ट

कानपुर/अयोध्या। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और चांदी की शिलाओं के विवाद ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। इस बार सिंधी सभा ने पूरे मामले की विशेष जांच दल (SIT) से निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। सिंधी सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक अंशवानी ने मामले में दावा करने वाले राजू मनवानी के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की गहन और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि तथ्य सामने आ सकें। हाल के दिनों में राम मंदिर निर्माण, चढ़ावे और चांदी की कथित शिलाओं को लेकर कई तरह के दावे सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। इन दावों के बाद देशभर में चर्चा तेज हुई है। इसी बीच सिंधी सभा ने भी अपना पक्ष रखते हुए जांच की मांग की है।

राजू मनवानी के दावों पर उठाए सवाल

सिंधी सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक अंशवानी ने कहा कि राजू मनवानी द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर 200 चांदी की शिलाओं की चोरी की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राजू मनवानी पहले विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं तथा उन पर कई आपराधिक मामले दर्ज होने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

एसआईटी जांच की उठाई मांग

अंशवानी ने कहा कि पूरे मामले में लगातार अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिससे आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। ऐसे में राज्य सरकार या संबंधित सक्षम प्राधिकारी को एसआईटी गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कराई जाती है तो सभी पक्षों के दावों की वस्तुस्थिति स्पष्ट हो सकेगी और जनता के सामने वास्तविक तथ्य आ पाएंगे।

राम मंदिर ट्रस्ट की छवि धूमिल करने का आरोप

अशोक अंशवानी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की छवि खराब करने के उद्देश्य से भ्रामक प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए, न कि केवल सार्वजनिक आरोप लगाए जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

चंदे का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग

सिंधी सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश और विदेश से प्राप्त चंदे का पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। उनका मानना है कि पारदर्शिता से लोगों का विश्वास और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता हुई है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। वहीं यदि सभी आरोप निराधार साबित होते हैं तो इससे अनावश्यक विवाद भी समाप्त हो जाएगा।

धार्मिक आस्था का भी जुड़ा है मामला

अंशवानी ने कहा कि यह केवल वित्तीय या प्रशासनिक मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से भी जुड़ा विषय है। इसलिए किसी भी प्रकार के आरोप या दावे तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज चाहता है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, ताकि समाज में किसी प्रकार का भ्रम न रहे और जो भी सत्य हो वह जनता के सामने आए।

मामले पर लगातार बढ़ रही चर्चा

गौरतलब है कि राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा, चांदी की शिलाओं और अन्य मुद्दों को लेकर पिछले कुछ समय से विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और अन्य लोगों की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। हालांकि इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान और किसी सक्षम जांच एजेंसी की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

निष्कर्ष

राम मंदिर से जुड़े इस विवाद में सिंधी सभा द्वारा एसआईटी जांच की मांग किए जाने के बाद मामला एक नए चरण में पहुंच गया है। एक ओर आरोप लगाए जा रहे हैं तो दूसरी ओर उन आरोपों पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच ही इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने ला सकती है। जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी दावे को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।

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