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डिग्री घोटाले की जांच तेज! कॉल रिकॉर्ड से अधिवक्ता शमशाद पर शक गहराया

सवांददाता सुनील तिवारी

कानपुर: फर्जी डिग्री और अंकपत्रों की खरीद-फरोख्त के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए नाम सामने आ रहे हैं। इस मामले में अब बाबूपुरवा निवासी अधिवक्ता शमशाद अली फिर से पुलिस के निशाने पर आ गए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार उनसे दोबारा पूछताछ की तैयारी की जा रही है और जल्द ही उन्हें थाने बुलाकर बयान दर्ज किए जाएंगे। इससे पहले भी पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए थाने लाई थी, लेकिन कुछ ही देर में उन्हें छोड़ना पड़ा था।मामले की शुरुआत तब हुई जब 18 फरवरी को किदवई नगर थाना पुलिस ने जूही कलां स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय पर छापा मारा था। यहां से उत्तर प्रदेश समेत नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों की एक हजार से अधिक अंकतालिकाएं और डिग्रियां बरामद हुई थीं। पुलिस ने गिरोह के सरगना रायबरेली निवासी शैलेंद्र कुमार ओझा समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि शहर के कई लोगों को फर्जी एलएलबी की डिग्रियां उपलब्ध कराई गई थीं।
जांच के दौरान बाबूपुरवा निवासी अधिवक्ता शमशाद अली समेत शहर के दस अधिवक्ताओं के नाम सामने आए। इतना ही नहीं, आरोपियों की कॉल विवरणी खंगालने पर पुलिस को शमशाद और गिरोह के सरगना के बीच कई बार लंबी बातचीत के प्रमाण भी मिले हैं। यही वजह है कि पुलिस को संदेह है कि अधिवक्ता का इस पूरे प्रकरण से सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध हो सकता है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है।
इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया था जब कुछ दिन पहले शमशाद को थाने लाए जाने के दौरान महापौर के अधिवक्ता बेटे अनुराग पांडेय अपने साथियों के साथ थाने पहुंच गए और उन्हें छोड़ने का दबाव बनाया। इसके बाद पुलिस ने लिखित कार्रवाई कर उन्हें जाने दिया था। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामाजिक माध्यमों पर तेजी से वायरल हुआ था। अब पुलिस एक बार फिर पूरे प्रकरण की कड़ियां जोड़ते हुए साक्ष्य जुटा रही है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में डिग्री कांड में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

घाटमपुर तहसील में मारपीट का VIDEO वायरल, महिला और बेटियों ने वैज्ञानिक को पीटा

सवांददाता सुनील तिवारी

कानपुर: घाटमपुर तहसील परिसर में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक महिला और उसकी दो बेटियों ने फॉरेंसिक साइंस विभाग में तैनात वैज्ञानिक संतोष कुमार कुरील को चप्पलों और लात-घूंसों से पीटना शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तीनों ने वैज्ञानिक को उनकी कार से बाहर खींच लिया और सरेआम मारपीट की। तहसील परिसर में मौजूद लोगों ने इस घटना का वीडियो अपने मोबाइल में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जानकारी के मुताबिक घाटमपुर क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला का गांव के ही एक व्यक्ति से जमीन को लेकर सिविल कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। शनिवार को वह अपनी दो बेटियों के साथ अदालत में तारीख पर आई थी। उसी दौरान झांसी में तैनात वैज्ञानिक संतोष कुमार कुरील भी तहसील परिसर में मौजूद थे। महिला ने उन पर पुराने विवाद को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए बहस शुरू कर दी, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई।सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने ले गई। वैज्ञानिक की तहरीर पर महिला और उसकी दोनों बेटियों के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वहीं महिला ने भी वैज्ञानिक पर जमीन के मामले में मदद का भरोसा देकर दो वर्षों तक दुष्कर्म करने और बाद में मेडिकल रिपोर्ट में हेराफेरी कराने का आरोप लगाया है। महिला का यह भी कहना है कि आरोपी उसे मुकदमे की पैरवी न करने के लिए धमका रहा था।
बताया जा रहा है कि पुलिस जब संतोष कुमार कुरील को थाने ले जाने लगी तो उन्होंने खुद को एडिशनल एसपी बताकर पुलिसकर्मियों पर रौब झाड़ने की कोशिश की, लेकिन जांच में वह फॉरेंसिक साइंस विभाग में वैज्ञानिक निकले। थाना प्रभारी के मुताबिक वैज्ञानिक की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और दोनों पक्षों के आरोपों की जांच कर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

सपा के होली मिलन कार्यक्रम में हंगामा! ‘PDA’ बैनर पर पुलिस की एंट्री

कानपुर: उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में शुक्रवार को कानपुर के नवाबगंज स्थित पंडित दीनदयाल सनातन धर्म विद्यालय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की अहम समन्वय बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित पार्टी और संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। राजनीतिक दृष्टि से इसे 2027 के चुनाव की रणनीति तय करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।सूत्रों के मुताबिक बैठक में वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों की गहन समीक्षा की गई। खासतौर पर उन सीटों पर चर्चा हुई जहां पार्टी को आंतरिक कलह और कार्यकर्ताओं की नाराज़गी का नुकसान उठाना पड़ा। माना जा रहा है कि इन्हीं हालातों को देखते हुए संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने तथा जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की रणनीति पर जोर दिया गया।
बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी समेत संगठन के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। चर्चा के दौरान पार्टी के भीतर चल रही आपसी खींचतान, कार्यकर्ताओं की नाराज़गी और क्षेत्रीय स्तर पर मिल रहे फीडबैक पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।2024 की हार से सबक, खोई सीटें वापस पाने की तैयारी
बताया जा रहा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह का असर कई सीटों पर देखने को मिला था। बुंदेलखंड क्षेत्र की बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन और फतेहपुर जैसी सीटें भाजपा के हाथ से निकल गई थीं, जबकि फर्रुखाबाद सीट पर भी पार्टी को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अब नाराज़ और उपेक्षित महसूस कर रहे कार्यकर्ताओं को फिर से साधने की कोशिश में जुट गया है। इसके तहत कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाने, उनकी समस्याओं को सुनने और संगठन में सक्रिय भूमिका देने की रणनीति बनाई जा रही है, ताकि चुनाव से पहले पार्टी का जनाधार मजबूत किया जा सके।अमर शहीद को श्रद्धांजलि
बैठक से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सी एस ए पहुंचकर अमर शहीद चंद्र शेखर आज़ाद जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके बलिदान को याद करते हुए नमन किया। तो वहीं अब राजनीतिक संदेश साफ है।
कानपुर में हुई इस बैठक से एक बात साफ नजर आ रही है कि भाजपा और संघ अब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। संगठन को मजबूत करने, अंदरूनी मतभेद खत्म करने और नाराज़ कार्यकर्ताओं को मनाकर एकजुट करने की रणनीति पर तेजी से काम शुरू कर दिया गया है, ताकि आने वाले चुनाव में खोया जनाधार फिर से हासिल किया जा सके।

जहरीला पानी बना खतरा | 90% लोगों के खून में मिला क्रोमियम, प्रशासन कटघरे में

सवांददाता -सुनील तिवारी

कानपुर। शहर के औद्योगिक इलाकों में रहने वाले लोगों की सेहत पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि शहर के जाजमऊ और रूमा सहित कई क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के खून की जांच में बड़ी मात्रा में कैंसरकारी तत्व क्रोमियम पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक हजारों लोगों के खून के नमूने लिए जा चुके हैं, जिनमें से आई रिपोर्टों में लगभग 90 प्रतिशत लोगों के शरीर में क्रोमियम की मौजूदगी सामने आई है। इसके अलावा कुछ लोगों के खून में पारा और सीसा जैसे खतरनाक तत्व भी पाए गए हैं, जो लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। बताया जाता है कि स्वास्थ्य विभाग ने जनवरी में जाजमऊ और रूमा क्षेत्र के लोगों के खून के नमूने जांच के लिए एकत्र किए थे। 500 से ज़्यादा लोगों के नमूने लिए गए, जिनमें से 200 से ज़्यादा रिपोर्ट फरवरी में सामने आईं। इनमें 215 लोगों के शरीर में क्रोमियम पाया गया, जबकि चार लोगों में पारा और दस लोगों में सीसा मिला। चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी गंभीर रिपोर्ट सामने आने के बावजूद इससे प्रभावित लोगों के इलाज की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। विभाग का कहना है कि अभी तक लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं मिले हैं, इसलिए उपचार की जरूरत नहीं बताई जा रही है।
दूसरी ओर जाजमऊ, रूमा, पनकी औद्योगिक क्षेत्र, नौरैयाखेड़ा, गोलाघाट, राखी मंडी और तेजाब मिल जैसे इलाकों में पीने का पानी पहले की तरह ही दूषित आ रहा है। जलकल विभाग और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभाग भी पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार क्रोमियम, सीसा और पारा जैसे तत्व शरीर के लिए बेहद खतरनाक होते हैं और ये यकृत, गुर्दे समेत कई अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि हजारों लोगों के खून में जहरीले तत्व मिलने के बावजूद प्रशासन अब भी लक्षणों का इंतजार कर रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों की जांच की जानी है, लेकिन अब तक केवल आंशिक जांच ही हो पाई है। बैठकें और योजनाएं बनने के बावजूद जमीन पर कोई ठोस काम दिखाई नहीं दे रहा, जिससे साफ है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते शहर की बड़ी आबादी की सेहत और जीवन दोनों खतरे में पड़े हुए हैं।

भ्रष्टाचार में फंसे लेखपाल आलोक दुबे बर्खास्त, आय से अधिक संपत्ति का मामला

सवांददाता -सुनील तिवारी

कानपुर। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों में घिरे चर्चित लेखपाल आलोक दुबे पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी के आदेश के खिलाफ दायर उनकी अपील को खारिज करते हुए यह कड़ा फैसला सुनाया। जांच में सामने आया कि राजस्व निरीक्षक के पद पर तैनाती के दौरान आलोक दुबे भूमियों के क्रय-विक्रय के कारोबार में सक्रिय रूप से संलिप्त थे और अपने पदीय अधिकारों का दुरुपयोग कर निजी लाभ अर्जित कर रहे थे। साथ ही उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप भी प्रमाणित पाए गए, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई तेज कर दी गई थी।मंडलायुक्त ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि अपीलकर्ता ने राजस्व निरीक्षक के पद पर रहते हुए अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं किया, बल्कि सरकारी पद और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए निजी स्वार्थ सिद्धि के लिए जमीनों के खरीद-फरोख्त में भूमिका निभाई। जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की, जो सेवा आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन है।मामले की गंभीरता को देखते हुए मंडलायुक्त ने आलोक दुबे की अपील को निरस्त करते हुए तत्कालीन राजस्व निरीक्षक एवं वर्तमान लेखपाल को तत्काल प्रभाव से पद और राजकीय सेवा से पदच्युत करने का आदेश जारी कर दिया। आदेश की प्रति जिलाधिकारी कानपुर नगर तथा संबंधित कर्मचारी को भेज दी गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई को राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है और अधिकारियों का कहना है कि सरकारी पद का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कदम उठाए जाएंगे।

वर्दी पर दाग: तस्करों से मिलीभगत में 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड

सवांददाता-सुनील तिवारी

कानपुर। शहर में नशे के कारोबार को लेकर पुलिस की साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पुलिस कमिश्नर की जांच में सामने आया है कि कुछ पुलिसकर्मी ही चरस-गांजा तस्करों को संरक्षण दे रहे थे और छापेमारी से पहले उन्हें अलर्ट कर देते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक दरोगा समेत तीन हेड कॉन्स्टेबल के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और सभी को निलंबित कर दिया गया है।
जांच के दौरान पुलिसकर्मियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगाले गए तो कई तस्करों के नंबर सामने आए। मोबाइल की जांच में कुछ ऑडियो भी मिले, जिनमें पुलिसकर्मी नशा तस्करों को माल हटाने के टिप्स देते सुनाई दिए। इतना ही नहीं, सर्विलांस से बचने के लिए मैसेज में इमोजी भेजकर भी तस्करों को अलर्ट करने की बात सामने आई है।जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा सचेंडी थाने में तैनात रहे हेड कॉन्स्टेबल जितेंद्र प्रताप सिंह को लेकर हुआ, जिसके पास करोड़ों की संपत्ति होने के संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि उसने मंधना क्षेत्र में महंगी जमीन और मकान खरीदा है, जबकि कुछ संपत्तियां पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर भी बताई जा रही हैं। इसके अलावा हेड कॉन्स्टेबल कमलकांत, रंजीत शर्मा और दरोगा श्रवण कुमार तिवारी पर भी तस्करों को संरक्षण देने के आरोप सामने आए हैं।पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने मामले को गंभीर मानते हुए सभी संदिग्ध पुलिसकर्मियों की संपत्ति और गतिविधियों की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जो भी पुलिसकर्मी नशा कारोबारियों से मिलीभगत कर समाज को गुमराह करने और अपराधियों की मदद करने में दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।

कानपुर: सपा विधायक अमिताभ बाजपेई की गैस एजेंसी में बड़ी चोरी का खुलासा | 7 आरोपी गिरफ्तार

कानपुर बिल्हौर थाना क्षेत्र में आर्यनगर से सपा विधायक अमिताभ बाजपेई की गैस एजेंसी के गोदाम में हुई बड़ी चोरी का पुलिस ने सफल खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से चोरी किए गए गैस सिलेंडर और वारदात में प्रयुक्त वाहन भी बरामद किए हैं।
जानकारी के अनुसार बिल्हौर के दीपपुर गांव स्थित गैस एजेंसी के गोदाम का मंगलवार रात चोरों ने ताला तोड़ दिया था। इसके बाद चोरों ने गोदाम से कुल 137 गैस सिलेंडर लोडर वाहन में भरकर पार कर दिए थे। बुधवार सुबह जब एजेंसी के कर्मचारी गोदाम पहुंचे तो ताला टूटा देखकर चोरी की घटना का पता चला, जिसके बाद हड़कंप मच गया।घटना की सूचना पर पुलिस ने एजेंसी प्रबंधक की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि गोदाम से 14 किलो के 127 भरे घरेलू गैस सिलेंडर, सात खाली सिलेंडर और 19 किलो के तीन कॉमर्शियल सिलेंडर चोरी हुए थे। चोरी गए सिलेंडरों की कीमत करीब पांच लाख रुपये आंकी गई थी।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए टीमें गठित कर जांच शुरू की और आखिरकार सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से चोरी किए गए सिलेंडर और वारदात में इस्तेमाल किया गया वाहन भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और चोरी की घटनाओं के संबंध में भी जानकारी जुटा रही है।

महाराष्ट्र बैंक मामला: अदालत से राहत, लेकिन हाईकोर्ट में ED की अपील क्या बदल देगी तस्वीर?

यूपी क्राइम अलर्ट न्यूज़ ब्यूरो

मुंबई: महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के कथित 25,000 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में विशेष अदालत ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दाखिल की गई दो क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए दिवंगत अजित पवार समेत अन्य आरोपितों को राहत दे दी। इन रिपोर्ट्स में अजित पवार, उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और भतीजे रोहित पवार को क्लीन चिट दी गई थी, जिसे अदालत ने बरकरार रखा। विशेष अदालत के जज महेश के. जाधव ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ईओडब्ल्यू की जांच और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया जा रहा है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा इस रिपोर्ट का विरोध करने और मामले में हस्तक्षेप की मांग को भी सिरे से खारिज कर दिया। इसके साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे समेत करीब 50 अन्य व्यक्तियों द्वारा दायर विरोध याचिकाओं को भी नामंजूर कर दिया गया।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इसी तरह की एक याचिका पहले भी ईडी द्वारा दायर की गई थी, जिसे खारिज किया जा चुका है। उस फैसले के खिलाफ ईडी की अपील फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में विचाराधीन है। अदालत के अनुसार, बार-बार एक ही प्रकार की आपत्तियां उठाना न्यायिक प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा करता है।

यह मामला लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ था। आरोप था कि महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक और उससे जुड़ी संस्थाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं, जिनमें कई प्रभावशाली नेताओं के नाम सामने आए। हालांकि, ईओडब्ल्यू की जांच में पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के आधार पर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई थी। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। एक तरफ इसे अजित पवार के परिवार के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इस मामले को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। आने वाले समय में बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित अपील और विस्तृत आदेश के बाद इस मामले में और स्पष्टता आने की उम्मीद है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता अजित पवार का 28 जनवरी 2026 को एक विमान दुर्घटना में दुखद निधन हो गया था। उनके अचानक निधन से राज्य की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। दशकों तक राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले पवार का नाम इस घोटाले में प्रमुख रूप से सामने आया था, लेकिन अदालत के इस फैसले के बाद उन्हें कानूनी रूप से राहत मिल गई है। फिलहाल अदालत के विस्तृत आदेश अगले सप्ताह तक जारी होने की संभावना है, जिसके बाद इस मामले के विभिन्न पहलुओं पर और अधिक जानकारी सामने आ सकती है। साथ ही, यह भी देखना अहम होगा कि ईडी की लंबित अपील पर हाईकोर्ट क्या रुख अपनाता है और क्या इस मामले में आगे कोई नई कानूनी दिशा तय होती है।

लूट से खुला 1600 करोड़ का खेल! 68 बैंक खातों से चला हवाला नेटवर्क

कानपुर: कानपुर में हवाला और अवैध कमाई से जुड़े बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। क्राइम ब्रांच ने देर रात मुठभेड़ के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि उनकी निशानदेही पर चार अन्य को भी दबोच लिया गया। जांच में सामने आया कि लूटी गई रकम जाजमऊ के टेनरी और स्क्रैप कारोबारी महफूज की थी, जो घटना के बाद से फरार है। पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि महफूज और उसके परिवार के 12 बैंकों के 68 खातों में करीब 1600 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है।

इस मामले में हवाला कारोबार के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों में फंडिंग की आशंका जताई जा रही है। पुलिस आयुक्त ने आरबीआई, आयकर विभाग, जीएसटी और प्रवर्तन निदेशालय से भी जांच के लिए पत्राचार करने की बात कही है।पकड़े गए आरोपियों के बारे में जानकारी मिली है कि वारदात के बाद वे जामा मस्जिद, कश्मीर और नेपाल समेत कई स्थानों पर गए थे।घटना 16 फरवरी की है, जब यशोदा नगर निवासी व्यापारी मो. वासिद और उसका साथी अरशद बैंक से नकदी निकालकर जाजमऊ जा रहे थे। श्यामनगर क्षेत्र में बदमाशों ने बाइक में टक्कर मारकर हमला किया और रुपयों से भरा बैग लूट लिया। हालांकि बाद में वासिद अपने बयान से मुकर गया और लूट की तहरीर देने से इनकार कर दिया।फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और फरार महफूज की तलाश तेज कर दी गई है।

SIR में देरी पर ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार | CJI की सख्त टिप्पणी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में देरी को लेकर कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा बार-बार ‘अस्पष्ट और अप्रासंगिक’ कारणों के साथ याचिका दायर करने पर नाराजगी जताई और स्पष्ट कहा कि इस तरह की प्रवृत्ति अब बंद होनी चाहिए।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत में बेवजह के कारणों के साथ आने की आदत खत्म होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को तेज करने के लिए अदालत को अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करना पड़ा और झारखंड व ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों की तैनाती करानी पड़ी। न्यायिक प्रक्रिया में दखल के आरोप खारिज सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारी न्यायिक अधिकारियों को दस्तावेजों पर प्रशिक्षण दे रहे हैं, जो अदालत के निर्देशों के खिलाफ है।

हालांकि, पीठ ने इस दलील को खारिज करते हुए साफ किया कि दस्तावेजों की वैधता पर अंतिम फैसला केवल न्यायिक अधिकारी ही लेंगे।न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रशिक्षण देना आवश्यक है। अदालत ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वे समन्वय बनाकर एसआईआर प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करें और अनावश्यक देरी से बचें।

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