upcrimealertnews.com

वेतन विवाद ने लिया हिंसक रूप: नोएडा फेज-2 की फैक्ट्री के बाहर बवाल, आगजनी और तोड़फोड़ से मचा हड़कंप

डेस्क रिपोर्ट 

Noida में वेतन वृद्धि को लेकर कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन सोमवार को अचानक हिंसक रूप ले बैठा। Noida फेज-2 स्थित एक निजी कंपनी के बाहर हजारों अस्थायी कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा प्रदर्शन देखते ही देखते उग्र हो गया, जिसके बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बन गया। प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों में आग लगा दी, पुलिस और निजी गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की तथा पुलिस पर पथराव भी किया। हालात को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, Noida फेज-2 स्थित मदरसन कंपनी के अस्थायी कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि, सेवा शर्तों में सुधार और नए श्रम कानूनों को लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से वेतन बढ़ोतरी और नौकरी को स्थायी करने की मांग प्रबंधन के सामने रखी जा रही थी, लेकिन उनकी बातों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था। इसी नाराजगी के चलते सोमवार सुबह बड़ी संख्या में कर्मचारी कंपनी के मुख्य गेट के बाहर जमा होने लगे।

सुबह से ही कंपनी के बाहर कर्मचारियों की भीड़ बढ़ने लगी थी। देखते ही देखते हजारों कर्मचारी मौके पर पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। वेतन बढ़ाओ, श्रम कानून लागू करो और कर्मचारियों के अधिकार दो जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात कर रखा था ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण बताया जा रहा था, लेकिन कुछ समय बाद कर्मचारियों और पुलिस के बीच कहासुनी हो गई। इसी के बाद माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और देखते ही देखते भीड़ उग्र हो उठी। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के बाहर खड़े कई वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। कुछ वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे इलाके में धुएं का गुबार छा गया और आसपास के लोगों में दहशत फैल गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के बाहर खड़ी कई निजी गाड़ियों और पुलिस वाहनों को निशाना बनाया। इस दौरान पुलिस की एक जिप्सी को पलट दिया गया और उसे बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। राहगीरों और स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। अचानक हुए इस हमले में पुलिस के कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। कुछ पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें भी आईं। पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने और भीड़ को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन जब भीड़ बेकाबू हो गई तो पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

आंसू गैस के बाद भी जब स्थिति नियंत्रण में नहीं आई, तब पुलिस ने लाठीचार्ज किया। कई घंटों की मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाया जा सका। इसके बाद पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। अतिरिक्त पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को भी मौके पर तैनात किया गया ताकि दोबारा कोई हिंसक घटना न हो।

इस पूरे घटनाक्रम का असर यातायात व्यवस्था पर भी पड़ा। प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के कारण Noida-Ghaziabad लिंक रोड, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और आसपास के प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया। हजारों वाहन घंटों तक फंसे रहे, जिससे ऑफिस जाने वाले लोगों, स्कूल बसों और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन एहतियातन इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से वेतन वृद्धि, स्थायी नौकरी और श्रम कानूनों के पालन की मांग कर रहे थे। उनका आरोप है कि कंपनी प्रबंधन उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज कर रहा था, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता गया। वहीं कंपनी प्रबंधन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं प्रदर्शन के दौरान किसी बाहरी तत्व ने माहौल बिगाड़ने में भूमिका तो नहीं निभाई।

फिलहाल Noida का फेज-2 इलाका तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताया जा रहा है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि दोबारा कोई अप्रिय घटना न हो सके। यह घटना एक बार फिर श्रमिकों की मांगों और औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते तनाव की ओर इशारा कर रही है।

Exit mobile version