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कानपुर में संचारी रोग नियंत्रण अभियान की शुरुआत: जोनल बैठक के साथ घर-घर सर्वे, निक्षय शिविर में 100 लोगों की जांच

कानपुर नगर(डेस्क रिपोर्ट):
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान की शुरुआत के साथ ही कानपुर नगर में स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम ने संयुक्त रूप से व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। 1 से 30 अप्रैल 2026 तक चलने वाले इस अभियान के साथ 10 अप्रैल से दस्तक अभियान भी संचालित किया जा रहा है। इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी खतरनाक बीमारियों की रोकथाम करना है। इसी क्रम में आज जोन तीन के जोनल अधिकारी कार्यालय में पार्षदों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को अभियान की रूपरेखा, उद्देश्यों और जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।


जोनल बैठक में हुई विस्तृत चर्चा

बैठक में जिला क्षयरोग अधिकारी DTO डॉ. सुबोध प्रकाश और जिला कोऑर्डिनेटर सुधीर यादव ने पार्षदों को टीबी (क्षय रोग) के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि टीबी अभी भी एक गंभीर बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और सही इलाज से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। डॉ. सुबोध प्रकाश ने पार्षदों से अपील की कि वे अपने-अपने वार्ड में लोगों को टीबी के लक्षणों लगातार खांसी, बुखार, वजन घटना के बारे में जागरूक करें और संदिग्ध मरीजों को जांच के लिए प्रेरित करें। साथ ही उन्होंने निक्षय योजना” के तहत मिलने वाली सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी।


घर-घर सर्वे और दस्तक अभियान

दस्तक अभियान के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन कर रहे हैं। इस दौरान बुखार, टीबी के संभावित मरीजों और कुपोषित बच्चों की पहचान की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें न केवल बीमारियों की पहचान कर रही हैं, बल्कि लोगों को साफ-सफाई और मच्छर जनित रोगों से बचाव के उपाय भी बता रही हैं। इसके अलावा, जिन क्षेत्रों में जलभराव या गंदगी की समस्या है, वहां विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव

मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए नगर निगम द्वारा फॉगिंग और एंटी-लार्वा का छिड़काव भी किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्य नियमित रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में किया जाएगा ताकि मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सके।


जरौली गांव में निक्षय शिविर का आयोजन

अभियान के तहत जरौली गांव में पार्षद अभय शुक्ला के आवास पर एक निक्षय शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। पार्षद की अध्यक्षता में करीब 100 लोगों का एक्स-रे किया गया। इसके अलावा शिविर में लोगों की ब्लड प्रेशर, शुगर और बीएमआई बॉडी मास इंडेक्स की भी जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर ही जरूरतमंद लोगों को मुफ्त दवाइयां भी वितरित कीं।


जनजागरूकता पर विशेष जोर

अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू जनजागरूकता है। जब तक लोग खुद सतर्क नहीं होंगे, तब तक इन बीमारियों पर पूरी तरह नियंत्रण पाना मुश्किल है। लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का उपयोग करें और बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।


जनप्रतिनिधियों की भूमिका अहम

बैठक में मौजूद पार्षदों को अपने-अपने क्षेत्रों में अभियान को सफल बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया। अधिकारियों ने बताया कि जनप्रतिनिधि यदि लोगों को जागरूक करेंगे, तो अभियान का प्रभाव और भी बढ़ेगा। पार्षद अभय शुक्ला ने कहा कि वे अपने क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर लगातार काम कर रहे हैं और आगे भी इस अभियान में पूरा सहयोग देंगे।


अभियान का उद्देश्य और महत्व

संचारी रोग नियंत्रण अभियान का मुख्य उद्देश्य मौसमी बीमारियों को फैलने से पहले ही रोकना है। हर साल मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया और अन्य बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं। ऐसे में पहले से तैयारी करना बेहद जरूरी है। इस अभियान के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचे और कोई भी व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे।


स्वास्थ्य विभाग की अपील

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे इस अभियान में सहयोग करें और स्वास्थ्य टीमों को सही जानकारी दें। साथ ही, किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण नजर आने पर तुरंत जांच कराएं।


निष्कर्ष

कानपुर नगर में संचारी रोग नियंत्रण अभियान की शुरुआत के साथ ही स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। जोनल बैठक, घर-घर सर्वे, फॉगिंग और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए इस अभियान को जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है। यदि जनसहभागिता और प्रशासनिक प्रयास इसी तरह जारी रहे, तो निश्चित रूप से डेंगू, मलेरिया और टीबी जैसी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।

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