यूपी क्राइम अलर्ट न्यूज़ ब्यूरो
कानपुर: समेत देश के कई राज्यों में फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। कोलकाता के एक संगठित गिरोह ने लोगों को दुबई घुमाने और कम समय में करोड़पति बनाने का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये ठग लिए। शुरुआती जांच में 42 लोगों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है, जबकि पुलिस इस पूरे नेटवर्क के जरिए 80 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की आशंका जता रही है। मामले में रायपुरवा निवासी इंटीरियर कारोबारी शैलेंद्र कुमार ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कोलकाता के एक दंपती समेत कई अन्य लोगों पर आईटी एक्ट, धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस अब इस पूरे गिरोह के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।
पीड़ितों के मुताबिक, ठगों ने ‘मोनेजेई एफएक्स फोरेक्स’ नामक कंपनी के जरिए लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया। मई 2024 में कानपुर के गोविंद नगर इलाके में एक सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें लोगों को बड़े-बड़े मुनाफे के सपने दिखाए गए। सेमिनार में दावा किया गया कि कंपनी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फॉरेक्स ट्रेडिंग करती है और हर महीने 5 से 6 प्रतिशत तक का निश्चित लाभ देती है। साथ ही, निवेशकों को यह भी बताया गया कि कंपनी का दुबई में बड़ा नेटवर्क है और वहां से संचालन होता है।
गिरोह ने शुरुआत में कुछ निवेशकों को मामूली मुनाफा देकर उनका भरोसा जीत लिया। इससे अन्य लोगों को भी योजना पर विश्वास हो गया और उन्होंने भी निवेश करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे निवेश की रकम बढ़ती गई और कई लोगों ने लाखों रुपये इस स्कीम में लगा दिए। कुछ लोगों ने तो कर्ज लेकर भी निवेश किया, यह सोचकर कि उन्हें जल्द ही बड़ा मुनाफा मिलेगा।
जब निवेशकों ने अपने पैसे वापस निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने ‘सर्वर हैक’ होने का बहाना बनाकर भुगतान रोक दिया। लोगों को बार-बार आश्वासन दिया जाता रहा कि जल्द ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। लेकिन समय बीतने के साथ निवेशकों को शक होने लगा कि उनके साथ धोखाधड़ी हो रही है। इसके बाद कई पीड़ितों ने एकजुट होकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
गिरोह ने अपने जाल को और मजबूत करने के लिए कुछ निवेशकों को दुबई भी ले जाया। वहां ‘एमटीईई9’ नाम की कंपनी का हवाला देकर आलीशान दफ्तर और महंगी लाइफस्टाइल दिखाई गई। दुबई में खुद को सफल बिजनेसमैन के रूप में पेश कर आरोपियों ने निवेशकों का भरोसा और पक्का किया। इसके बाद उनसे और ज्यादा निवेश करने के लिए कहा गया। निवेशकों ने नकद, चेक और ऑनलाइन माध्यम से बड़ी रकम आरोपियों के खातों में ट्रांसफर कर दी।
जांच में सामने आया है कि यह ठगी का नेटवर्क केवल कानपुर तक सीमित नहीं है। हरियाणा, पंजाब, कोलकाता और गाजियाबाद समेत कई राज्यों में भी इसी तरह लोगों को ठगा गया है। पीड़ितों में शैलेंद्र कुमार (करीब 20 लाख रुपये), राजेश साहू (करीब 15 लाख रुपये) समेत कई अन्य लोग शामिल हैं। कई पीड़ितों ने अपनी जीवनभर की बचत इस स्कीम में गंवा दी।
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। जिन बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर किया गया, उनकी डिटेल खंगाली जा रही है। इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह है, जो लंबे समय से लोगों को ठगने का काम कर रहा था। जल्द ही इसके मास्टरमाइंड तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर इस तरह की ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। लोग अधिक मुनाफे के लालच में आकर बिना जांच-पड़ताल के निवेश कर देते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी जानकारी और वैधता की जांच करना जरूरी है।
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान कंपनी या व्यक्ति के झांसे में न आएं। यदि कोई योजना असामान्य रूप से ज्यादा मुनाफे का दावा करती है, तो उससे सतर्क रहें। साथ ही, किसी भी तरह की ठगी का शिकार होने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि लालच में आकर बिना सोचे-समझे निवेश करना भारी पड़ सकता है। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह के साइबर फ्रॉड से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।











