कानपुर के बर्रा थाना क्षेत्र में स्थित गुलाबी बिल्डिंग के पास चल रहे देसी और अंग्रेजी शराब के ठेके को लेकर क्षेत्रीय महिलाओं का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर फूट पड़ा। मंगलवार को बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचीं और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महिलाओं का आरोप है कि इस ठेके के कारण इलाके का माहौल लगातार खराब हो रहा है और आए दिन असामाजिक गतिविधियों में बढ़ोतरी हो रही है।
प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि शराब ठेके के आसपास नशे में धुत लोगों की भीड़ लगी रहती है, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खासकर स्कूली छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को यहां से गुजरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं ने बताया कि कई बार नशे में धुत लोग राह चलती लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़खानी करते हैं, जिससे पूरे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय निवासी सरोज देवी ने कहा, “हम लोग कई महीनों से इस ठेके को हटाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है। हमारी बेटियां यहां से निकलने में डरती हैं। क्या हमें अपनी सुरक्षा के लिए भी सड़क पर उतरना पड़ेगा?” इसी तरह अन्य महिलाओं ने भी प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि यह पहली बार नहीं है जब महिलाओं ने इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई हो। इससे पहले भी कई बार धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। महिलाओं ने जिलाधिकारी (डीएम) से मिलकर अपनी समस्याएं रखी थीं। उस दौरान डीएम ने आश्वासन दिया था कि 31 मार्च तक इस शराब के ठेके को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो महिलाओं का आक्रोश और बढ़ गया।
मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और ठेके को तत्काल बंद करने की मांग की। प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि मौके पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने महिलाओं को समझाने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना है कि यह सिर्फ शराब ठेके का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा और सम्मान का सवाल है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगी। कुछ महिलाओं ने यह भी चेतावनी दी कि वे सड़क जाम और भूख हड़ताल जैसे कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगी।
स्थानीय लोगों का भी इस मुद्दे पर समर्थन देखने को मिला। कई पुरुषों ने भी महिलाओं के साथ खड़े होकर इस ठेके को हटाने की मांग की। उनका कहना है कि क्षेत्र में लगातार बढ़ रही आपराधिक गतिविधियों के पीछे इस शराब ठेके की बड़ी भूमिका है। लोगों का मानना है कि ठेके के कारण न केवल कानून-व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि बच्चों के भविष्य पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।
वहीं, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पर्याप्त बल तैनात किया गया है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और संबंधित विभागों से चर्चा की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इससे जनाक्रोश बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या आम नागरिकों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं। जब महिलाएं अपनी बुनियादी सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएं, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
फिलहाल, बर्रा क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। सभी की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है। अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
महिलाओं की एक ही मांग है—शराब के इस ठेके को तुरंत बंद किया जाए या इसे किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सम्मान का माहौल बहाल हो सके।