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डॉक्टर न मिलने पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, पीएचसी पर धरना; एक घंटे तक जाम रहा रक्षपालपुर-अझुवा मार्ग

संवाददाता- दुर्गेश कुमार मिश्रा

खखरेरू/फतेहपुर। धाता विकासखंड के मुबारकपुर गेरिया स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में लंबे समय से चिकित्सक की तैनाती न होने से क्षेत्रीय लोगों का गुस्सा आखिरकार शनिवार को सड़क पर फूट पड़ा। नाराज ग्रामीणों और हिंदू सुरक्षा परिषद के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन करते हुए स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इतना ही नहीं, आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने रक्षपालपुर-अझुवा मार्ग को लगभग एक घंटे तक जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद जाम समाप्त कराया जा सका। हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दो दिन के भीतर अस्पताल में नियमित चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।

डेढ़ लाख आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2022 में स्थापित इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पिछले करीब एक वर्ष से नियमित चिकित्सक की तैनाती नहीं है। इसके कारण क्षेत्र के दर्जनों गांवों की लगभग डेढ़ लाख आबादी को सामान्य उपचार के लिए भी 15 से 20 किलोमीटर दूर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती हैं। कई बार मजबूरी में लोगों को झोलाछाप चिकित्सकों के पास जाना पड़ता है, जो मरीजों की जान के लिए खतरा साबित हो सकता है।

अस्पताल परिसर में जुटे सैकड़ों ग्रामीण

शनिवार सुबह करीब 10 बजे हिंदू सुरक्षा परिषद के कार्यकर्ता और सैकड़ों ग्रामीण अस्पताल परिसर में एकत्र हुए। उन्होंने अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और डॉक्टरों की अनुपस्थिति को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण का उद्देश्य ग्रामीणों को उनके क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में अस्पताल केवल भवन बनकर रह गया है। लोगों ने आरोप लगाया कि मरीज अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन उन्हें डॉक्टर नहीं मिलते।

सड़क जाम कर जताया विरोध

जब प्रदर्शन के बावजूद कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो दोपहर करीब 12:30 बजे प्रदर्शनकारियों ने रक्षपालपुर-अझुवा मार्ग पर जाम लगा दिया। अचानक मार्ग बंद होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना पर पहुंचे थाना प्रभारी सत्यपाल सिंह ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया। उन्होंने धरने का नेतृत्व कर रहे हिंदू सुरक्षा परिषद के विद्यार्थी प्रकोष्ठ के अंशु मिश्रा की एसडीएम खागा से वार्ता कराई। प्रशासन द्वारा समस्या के समाधान का आश्वासन दिए जाने के बाद जाम समाप्त कराया गया।

अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास

धरने की सूचना मिलने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धाता के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि पीएचसी में तैनात चिकित्सक का स्थानांतरण मई 2026 में हुआ है और विभाग द्वारा आगे की प्रक्रिया की जा रही है वहीं दूसरी ओर, केंद्र में तैनात फार्मासिस्ट अनिल कुमार ने दावा किया कि पिछले छह माह से अस्पताल में कोई चिकित्सक तैनात ही नहीं है। दोनों अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास सामने आने के बाद प्रदर्शनकारी और अधिक भड़क गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि चिकित्सक की तैनाती थी तो वह कभी अस्पताल में दिखाई क्यों नहीं दिए। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग वास्तविक स्थिति छिपाने का प्रयास कर रहा है।

बदहाली का शिकार अस्पताल

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने अस्पताल की अव्यवस्थाओं को भी उजागर किया। उनका कहना है कि अस्पताल परिसर में जंगली झाड़ियां उग आई हैं और चारों तरफ गंदगी फैली हुई है। इतना ही नहीं, अस्पताल का हैंडपंप पिछले दो माह से खराब पड़ा है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल में सफाईकर्मी की भी तैनाती नहीं है, जिसके कारण परिसर की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग केवल कागजों में व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखाता है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।

मरीजों को लौटना पड़ रहा खाली हाथ

गौराहार गांव की निवासी शांति देवी ने बताया कि वह पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थीं, लेकिन डॉक्टर के न मिलने पर उन्हें चार दिन बाद आने की सलाह देकर वापस भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि गरीब और ग्रामीण लोग इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल आते हैं, लेकिन यहां डॉक्टर ही नहीं मिलते। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है, जहां इलाज का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल होता है।

निरीक्षण के दावों पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक द्वारा नियमित निरीक्षण किए जाने के दावों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण हो रहा होता तो अस्पताल परिसर में इतनी गंदगी, झाड़ियां और खराब हैंडपंप जैसी समस्याएं नहीं होतीं। लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी केवल कागजों में व्यवस्थाओं को बेहतर दिखाकर क्षेत्रवासियों को गुमराह कर रहे हैं।

उग्र आंदोलन की चेतावनी

हिंदू सुरक्षा परिषद और ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दो दिन के भीतर अस्पताल में नियमित चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई और मूलभूत सुविधाएं बहाल नहीं हुईं तो बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन में हिंदू सुरक्षा परिषद के गौ रक्षा प्रांत अध्यक्ष आशीष शुक्ला, विद्यार्थी प्रकोष्ठ के अंशु मिश्रा, विष्णुकांत तिवारी, अमन सिंह, मनीष गोस्वामी, शिवम, संत सेवक, बिल्लू, सतबीर, लवलेश, अंकुर पाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं उनका अधिकार हैं और जब तक अस्पताल में डॉक्टर तथा आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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