सवांददाता-अरुण जोशी
कानपुर। वैश्विक स्तर पर बढ़ती युद्धजन्य परिस्थितियों का असर अब सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर दिखाई देने लगा है। तेल और गैस संकट के चलते उत्पादन लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिससे देशभर के उद्योगों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। इसी गंभीर मुद्दे पर कानपुर में उद्यमियों ने एकत्र होकर अपनी समस्याएं रखीं और सरकार से तत्काल राहत की मांग की। कोआपरेटिव स्टेट सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोआपरेटिव स्टेट चेयरमैन विजय कपूर की अध्यक्षता में शहर के सैकड़ों उद्यमियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने वर्तमान हालात को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो उद्योगों का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है।
50% उद्योग बंद, बाकी भी संकट में
प्रेस वार्ता में बताया गया कि वर्तमान स्थिति में लगभग 50 प्रतिशत उद्योग पूरी तरह बंद हो चुके हैं, जबकि 30 प्रतिशत उद्योग बंदी के कगार पर हैं। शेष 20 प्रतिशत उद्योग भी अपनी पूर्ण क्षमता से काम नहीं कर पा रहे और केवल 80 प्रतिशत उत्पादन पर चल रहे हैं उद्यमियों के अनुसार, तेल और गैस की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि और कच्चे माल की कमी ने उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे न केवल उद्योगों की लागत बढ़ी है, बल्कि उत्पादों की कीमतों में भी इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।
रोजगार और आजीविका पर संकट
उद्योगों की खराब स्थिति का सबसे बड़ा असर रोजगार पर पड़ा है। कई फैक्ट्रियां बंद होने के कारण हजारों श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। जो उद्योग अभी चल भी रहे हैं, वे अपने कर्मचारियों को नियमित वेतन देने में असमर्थ हैं। प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि कई श्रमिकों के सामने अपने बच्चों की स्कूल फीस भरना तक मुश्किल हो गया है। इससे समाज के आर्थिक ताने-बाने पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
गैस और कच्चे माल की भारी कमी
उद्यमियों ने कहा कि उद्योगों को न तो पर्याप्त एलपीजी गैस मिल रही है और न ही जरूरी कच्चा माल उपलब्ध हो पा रहा है। इस कारण उत्पादन प्रक्रिया बाधित हो रही है और उद्योगों की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।
सरकारी वसूली पर उठे सवाल
वर्तमान संकट के बीच सरकारी विभागों द्वारा टैक्स और बिलों की वसूली को लेकर भी उद्यमियों ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हाउस टैक्स, वाटर टैक्स, बिजली बिल और जीएसटी की वसूली के लिए मार्च माह में अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है, जो इस समय उद्योगों के लिए असहनीय है। उद्यमियों का कहना है कि जब फैक्ट्रियां बंद हो रही हों और श्रमिकों को वेतन तक न मिल पा रहा हो, ऐसे समय में सख्त वसूली नीति उद्योग-व्यापार के लिए घातक साबित हो सकती है।
फ्यूल चार्ज बढ़ोतरी ने बढ़ाई परेशानी
केस्को द्वारा 10 प्रतिशत फ्यूल चार्ज बढ़ाए जाने का मुद्दा भी बैठक में उठाया गया। उद्यमियों ने कहा कि इस तरह के फैसले उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं और मौजूदा संकट को और गहरा करते हैं।
वसूली स्थगित करने की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह मांग प्रमुख रूप से उठाई गई कि सरकार को मार्च माह के वसूली लक्ष्यों को आगे बढ़ाना चाहिए, ताकि उद्योगों को संभलने का समय मिल सके। उद्यमियों ने चेतावनी दी कि यदि उद्योग ही बंद हो जाएंगे, तो सरकार को राजस्व कहां से मिलेगा।
कालाबाजारी से बढ़ रही समस्या
उद्यमियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व इस संकट का फायदा उठाकर कालाबाजारी कर रहे हैं, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो रही है। उन्होंने प्रशासन से ऐसे तत्वों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
वैश्विक हालात पर जताई चिंता
चेयरमैन विजय कपूर ने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानवीय संकट भी है।
शांति की अपील
कार्यक्रम के अंत में विजय कपूर ने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि युद्ध में शामिल सभी देश विवेक और दूरदृष्टि का परिचय दें और जल्द से जल्द इस संकट का समाधान निकालें। उन्होंने कहा कि विश्व में शांति स्थापित होने पर ही आर्थिक स्थिति सुधर सकती है।
बड़ी संख्या में उद्यमी रहे मौजूद
इस प्रेस वार्ता में शहर के सैकड़ों उद्यमी शामिल हुए। प्रमुख रूप से विजय कपूर, बलराम नरूला, हरीश ईसरानी, सुशील मोहन टकरू, संदीप मल्होत्रा, निखिल गुप्ता, एनके गुप्ता, रमेश गुलाटी, दिनेश कुशवाहा, अनूप कुशवाहा, अर्पित अवस्थी, अरुण जैन, श्यामलाल मूलचंदानी, वीरेन्द्र मिश्रा, अरविंद झा, अशोक जुनेजा, अवधपाल सिंह, बॉबी कपूर, दीपक रामचंदानी, गिरीश बजाज, गोपाल सदाना, हरि किशन वर्मा, जगदम्बा विश्वकर्मा, मनोज सक्सेना, नरेश पंजाबी, निशित सिंहल, पम्मी खन्ना, प्रवीन विज सहित अनेक उद्योगपति मौजूद रहे।

















