
संवाददाता-महेश कुमार
लखनऊ। राजधानी लखनऊ को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने के दावों के बीच लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) का मास्टर प्लान-2016 अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। हालिया समीक्षा में इस योजना की कई बड़ी खामियां उजागर हुई हैं, जिससे साफ हो गया है कि कागजों पर तैयार किया गया यह प्लान जमीनी सच्चाई से काफी दूर है।
शासन के निर्देश पर एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार की अध्यक्षता में गठित समिति जब इस मास्टर प्लान की समीक्षा में जुटी, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि शहर के कई हिस्सों में सड़कों का ऐसा खाका तैयार किया गया है, जो वास्तविकता में संभव ही नहीं है।
सबसे चौंकाने वाला मामला कालिदास मार्ग का है, जहां मुख्यमंत्री आवास के सामने 24 मीटर चौड़ी सड़क को सीधे गोमती नदी में समाप्त होते दिखाया गया है। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिना जमीनी सर्वे के ही यह योजना बना दी गई थी।
इसी तरह अयोध्या रोड को कागजों में 100 मीटर चौड़ा दर्शाया गया है, जबकि जमीनी स्तर पर इसकी चौड़ाई इससे काफी कम है। आईआईएम रोड का भी यही हाल है, जहां पहले से मौजूद 60 मीटर सड़क के दोनों ओर आबादी बस चुकी है, लेकिन मास्टर प्लान में इसे 150 मीटर तक चौड़ा दिखाया गया है।
कानपुर रोड, मोहान रोड और सीतापुर रोड जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी इसी तरह की खामियां सामने आई हैं। बिना वास्तविक स्थिति का आंकलन किए सड़कों की चौड़ाई तय कर दी गई, जिससे अब विकास कार्यों में बाधाएं आ रही हैं। कई लोगों के भवन नक्शे पास नहीं हो पा रहे, क्योंकि प्रस्तावित सड़कें उनकी जमीन के बीच से गुजरती दिखाई गई हैं।
इन खामियों ने उस समय के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि मास्टर प्लान तैयार करते समय जमीनी सर्वेक्षण को नजरअंदाज किया गया और दफ्तर में बैठकर ही पूरा रोड नेटवर्क तय कर दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर के विकास की नींव उसका मास्टर प्लान होता है। यदि यही योजना त्रुटिपूर्ण हो, तो भविष्य की परियोजनाएं भी प्रभावित होती हैं। लखनऊ जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर के लिए यह स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है।
फिलहाल एलडीए द्वारा गठित समिति इन खामियों को दूर करने की दिशा में काम कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि संशोधित मास्टर प्लान में जमीनी वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए जरूरी बदलाव किए जाएंगे, ताकि विकास कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ सकें।
यह घटनाक्रम न केवल एलडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि योजनाओं को लागू करने से पहले उनका जमीनी परीक्षण कितना जरूरी है। अब देखना होगा कि संशोधित योजना कितनी कारगर साबित होती है और लखनऊ को वास्तव में एक व्यवस्थित ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने में कितनी मदद मिलती है।
मुख्य बिंदु
- LDA मास्टर प्लान-2016 की समीक्षा में बड़ी खामियां उजागर
- कई सड़कें कागजों में गोमती नदी में जाकर खत्म होती दिखीं
- कालिदास मार्ग पर 24 मीटर सड़क सीधे नदी में दिखाई गई
- अयोध्या रोड को कागजों में 100 मीटर चौड़ा दर्शाया गया
- IIM रोड को 150 मीटर चौड़ा दिखाया, जबकि जमीनी स्थिति अलग
- कई जगहों पर बिना सर्वे के बनाई गई सड़क योजना
- कानपुर रोड, मोहान रोड, सीतापुर रोड में भी गड़बड़ी
- घनी आबादी के बीच अव्यावहारिक चौड़ाई का प्रस्ताव
- लोगों के नक्शे पास होने में आ रही दिक्कतें
- अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
- समिति द्वारा खामियों को सुधारने की प्रक्रिया शुरू
- संशोधित प्लान में जमीनी हकीकत को शामिल करने की तैयारी

















