सवांददाता-सुनील तिवारी
कानपुर। शहर में नशे के कारोबार को लेकर पुलिस की साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पुलिस कमिश्नर की जांच में सामने आया है कि कुछ पुलिसकर्मी ही चरस-गांजा तस्करों को संरक्षण दे रहे थे और छापेमारी से पहले उन्हें अलर्ट कर देते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक दरोगा समेत तीन हेड कॉन्स्टेबल के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और सभी को निलंबित कर दिया गया है।
जांच के दौरान पुलिसकर्मियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगाले गए तो कई तस्करों के नंबर सामने आए। मोबाइल की जांच में कुछ ऑडियो भी मिले, जिनमें पुलिसकर्मी नशा तस्करों को माल हटाने के टिप्स देते सुनाई दिए। इतना ही नहीं, सर्विलांस से बचने के लिए मैसेज में इमोजी भेजकर भी तस्करों को अलर्ट करने की बात सामने आई है।जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा सचेंडी थाने में तैनात रहे हेड कॉन्स्टेबल जितेंद्र प्रताप सिंह को लेकर हुआ, जिसके पास करोड़ों की संपत्ति होने के संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि उसने मंधना क्षेत्र में महंगी जमीन और मकान खरीदा है, जबकि कुछ संपत्तियां पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर भी बताई जा रही हैं। इसके अलावा हेड कॉन्स्टेबल कमलकांत, रंजीत शर्मा और दरोगा श्रवण कुमार तिवारी पर भी तस्करों को संरक्षण देने के आरोप सामने आए हैं।पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने मामले को गंभीर मानते हुए सभी संदिग्ध पुलिसकर्मियों की संपत्ति और गतिविधियों की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जो भी पुलिसकर्मी नशा कारोबारियों से मिलीभगत कर समाज को गुमराह करने और अपराधियों की मदद करने में दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।
















