सवांददाता-अभिषेक तिवारी
कानपुर: कमिश्नरेट पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। चोरी के एक मामले में पुलिस ने बीते 10 मार्च को रंजीत नामक युवक को हिरासत में लेकर तीन दिन तक रखा और बाद में उसे जेल भेज दिया। जेल पहुंचने के कुछ ही समय बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर पुलिस उसे इलाज के लिए उर्सला अस्पताल लेकर गई, जहां उपचार के दौरान रंजीत की मौत हो गई।
मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब देर शाम मिलेट्री कैंप चौकी पुलिस मृतक के घर पहुंची और बेटे की तबीयत खराब होने का हवाला देकर उसके पिता को थाने ले गई। आरोप है कि थाने में पुलिस ने उनसे कुछ कागजातों पर हस्ताक्षर कराने का दबाव बनाया। हालांकि पिता बिना हस्ताक्षर किए ही घर लौट आए और परिवार को बेटे की मौत की जानकारी दी। छह बहनों के इकलौते भाई की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और आक्रोशित परिजनों ने मिलेट्री कैंप चौकी के सामने सड़क पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही एसीपी दिलीप कुमार सर्किल फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और घंटों मशक्कत के बाद परिजनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन देर रात तक हंगामा जारी रहा।
वहीं शनिवार दोपहर मृतक के परिजन न्याय की मांग को लेकर जिलाधिकारी कानपुर से मिलने के लिए निकले, लेकिन आरोप है कि रास्ते में जूही और बाबूपुरवा थाना पुलिस ने बल प्रयोग कर उन्हें रोक दिया। इस घटना के बाद पुलिस की भूमिका पर और भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इधर शहर में पहले से ही कमिश्नरेट पुलिस की कार्यशैली को लेकर कई विवाद सामने आते रहे हैं। कभी फर्जी एनकाउंटर तो कभी फर्जी मुकदमों में लोगों को जेल भेजने के आरोप लगातार चर्चा में रहे हैं। हाल ही में गांजा तस्करी में कुछ पुलिसकर्मियों के नाम सामने आने से विभाग की किरकिरी हो चुकी है। वहीं सचेंडी थाने में तैनात एक दरोगा पर गंभीर आरोप दर्ज होने के बावजूद उसकी गिरफ्तारी न होना भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
रंजीत की मौत के बाद जहां परिवार न्याय की मांग पर अड़ा है, वहीं कानपुर जेल प्रशासन फिलहाल पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है। हालांकि उच्च अधिकारियों ने प्रेस
मुख्य बिंदु
- हिरासत के बाद मौत: चोरी के मामले में हिरासत में लिए गए युवक रंजीत की जेल भेजे जाने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई।
- उर्सला अस्पताल में दम तोड़ा: जेल में तबीयत बिगड़ने पर रंजीत को उर्सला अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
- परिजनों का आरोप: परिवार ने पुलिस पर हिरासत में मारपीट और जबरन कागजों पर हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया।
- चौकी के सामने धरना: छह बहनों के इकलौते भाई की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने मिलेट्री कैंप चौकी के सामने सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया।
- पुलिस से झड़प: जिलाधिकारी से मिलने जा रहे परिजनों को जूही और बाबूपुरवा पुलिस ने रास्ते में रोक दिया।
- पुलिस की कार्यशैली पर सवाल: घटना के बाद कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
- जांच की मांग: परिजन और स्थानीय लोग मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
















