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सरकारी कर्मचारियों के लिए सख्त नियम, छुट्टी और निवेश की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों की सेवा संबंधी जानकारी को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए सख्ती बढ़ा दी है। अब सभी विभागों को अपने कर्मचारियों के अवकाश से संबंधित पूरा विवरण 25 मार्च तक मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इस संबंध में मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की ओर से कार्मिक विभाग ने शासनादेश जारी कर दिया है।
शासनादेश में कहा गया है कि राज्य के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है तथा अवकाश की स्वीकृति भी इसी पोर्टल के माध्यम से सुनिश्चित की जानी है। हालांकि समीक्षा में पाया गया कि कई विभागों में अवकाश से जुड़ी जानकारी अधूरी या आंशिक रूप से ही दर्ज की गई है। इसलिए सरकार ने सभी आहरण-वितरण अधिकारियों को तय समय सीमा में पूरा डेटा अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।इसी के साथ सरकार ने कर्मचारियों की संपत्तियों और निवेश की जानकारी देना भी अनिवार्य कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली‑1956 के नियम-21 और नियम-24 में संशोधन को मंजूरी दी गई। नए नियम के अनुसार यदि कोई कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में छह माह के मूल वेतन से अधिक की राशि शेयर, स्टॉक या अन्य किसी निवेश में लगाता है तो उसे इसकी जानकारी विभागाध्यक्ष को देनी होगी और धन के स्रोत का विवरण भी देना पड़ेगा।साथ ही चल संपत्ति के मामले में भी नियम कड़े किए गए हैं। अब दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की किसी चल संपत्ति की खरीद पर सूचना देना अनिवार्य होगा। पहले अचल संपत्ति की घोषणा हर पांच साल में करनी होती थी, लेकिन संशोधित नियमों के तहत अब कर्मचारियों को हर वर्ष अपनी तथा परिवार के सदस्यों के नाम पर अर्जित या दान में प्राप्त संपत्तियों, पट्टे या गिरवी रखी संपत्तियों और अन्य निवेशों का विवरण देना होगा। इससे सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

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