सवांददाता – सुनील तिवारी
कानपुर के भीतरगांव विकासखंड के साढ़ कस्बे में स्थित उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की शाखा में डेयरी केसीसी लोन के नाम पर घूसखोरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि शाखा प्रबंधक और फील्ड ऑफिसर दलालों के माध्यम से लोन पास कराने के बदले मोटी रकम वसूल रहे हैं। स्थानीय उपभोक्ताओं और बैंक मित्र अनुज कुमार साहू समेत करीब आधा सैकड़ा लोगों ने शाखा प्रबंधक हिरेंद्र सिंह चौहान और फील्ड ऑफिसर विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि 1,52,900 रुपये के लोन पर 20 से 25 हजार और 2,95,000 रुपये के लोन पर 30 से 35 हजार रुपये तक की उगाही की जाती है। यदि कोई उपभोक्ता पैसे देने से इनकार कर देता है तो उसकी पास हो चुकी फाइल भी रोक दी जाती है।पीड़ितों का आरोप है कि यह अवैध वसूली पिछले कई महीनों से जारी है और उपभोक्ताओं को दलालों के माध्यम से भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता है। बैंक मित्र अनुज कुमार साहू का कहना है कि बिना घूस दिए फाइल आगे नहीं बढ़ाई जाती, जिससे गरीब उपभोक्ता परेशान हैं।मामले को लेकर उपभोक्ताओं ने बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय पहुंचकर लिखित प्रार्थना पत्र दिया है और साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं।ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
मैनेजर बोले—मेरे खिलाफ रची जा रही साजिश, जांच कराई जाए
हिरेंद्र सिंह चौहान, तत्कालीन शाखा प्रबंधक, ने अपने ऊपर लगे घूसखोरी के आरोपों को निराधार बताते हुए इसे साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि उनसे पहले तैनात शाखा प्रबंधक और बैंक मित्र के माध्यम से कुछ संदिग्ध और अनियमित लेनदेन किए गए थे। जब उन्होंने इन लेनदेन की जांच शुरू की, तो इससे जुड़े लोगों ने उनके खिलाफ शिकायतें कराकर उन्हें बैंक से हटवाने की कोशिश शुरू कर दी।शाखा प्रबंधक के मुताबिक 13 मार्च को कुछ लोग उनकी शाखा में जबरन घुस आए और उनके साथ अभद्रता तथा गाली-गलौज की। उन्होंने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्य एकत्रित कर क्षेत्रीय थाने में प्रार्थना पत्र भी दिया गया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
मुख्य बिंदु
- कानपुर के भीतरगांव ब्लॉक के साढ़ कस्बे स्थित यूपी ग्रामीण बैंक शाखा में रिश्वतखोरी का आरोप।
- शाखा प्रबंधक और फील्ड ऑफिसर पर लोन पास कराने के नाम पर घूस लेने का आरोप।
- 1.52 लाख के लोन पर 20–25 हजार और 2.95 लाख के लोन पर 30–35 हजार रुपये वसूली का आरोप।
- करीब 50 उपभोक्ताओं ने क्षेत्रीय प्रबंधक को लिखित शिकायत देकर जांच की मांग की।
- आरोप है कि दलालों के माध्यम से कई महीनों से अवैध वसूली चल रही थी।
- पैसे न देने पर पास हो चुकी फाइल भी रोक देने का आरोप।
- शाखा प्रबंधक ने आरोपों को साजिश बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
- मामले को लेकर पुलिस और बैंक प्रशासन से जांच की मांग।
















