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लखनऊ में शंकराचार्य की सभा, ‘जजिया’ बयान से बढ़ी चर्चा

मुख्य संवाददाता यूपी क्राइम अलर्ट न्यूज़

लखनऊ: ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार को लखनऊ पहुंचे, जहां से उन्होंने ‘गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान’ की शुरुआत की। शहर पहुंचते ही उन्होंने हनुमान सेतु मंदिर में दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया और इसके बाद कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हो गए।
आयोजकों के अनुसार 11 मार्च को शीतला अष्टमी के अवसर पर आशियाना क्षेत्र में स्थित कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक उपवन के पास पासी किला चौराहे पर दोपहर 2:15 बजे से शाम 5 बजे तक मुख्य सभा आयोजित की जाएगी। इस दौरान शंकराचार्य ‘गो-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ अभियान का औपचारिक शंखनाद करेंगे और समर्थकों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में संत समाज, विभिन्न संगठनों और बड़ी संख्या में गोभक्तों के शामिल होने की संभावना है।इस आयोजन को लेकर प्रशासन ने 26 शर्तों के साथ अनुमति दी है। इनमें भड़काऊ भाषण और आपत्तिजनक नारेबाजी पर रोक, हथियार और आतिशबाजी पर प्रतिबंध, ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन, सीमित वाहनों की अनुमति और रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर बंद रखने जैसी शर्तें शामिल हैं। किसी भी उल्लंघन की स्थिति में प्रशासन तत्काल कार्रवाई कर सकता है।
भक्तों की संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस ने भी विशेष सुरक्षा व्यवस्था की है। आशियाना, पीजीआई और कृष्णानगर थाना क्षेत्रों की पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है और कार्यक्रम स्थल पर अतिरिक्त बल तैनात किया जाएगा।इस दौरान शंकराचार्य का एक बयान भी चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि आयोजन स्थल का किराया और अन्य शुल्क आयोजकों द्वारा जमा कराया गया है और यह स्थिति उन्हें मुगलकाल के ‘जजिया’ कर की याद दिलाती है। उनका कहना था कि जैसे उस समय लोग अपने धर्म के पालन के लिए जजिया देते थे, वैसे ही आज भी धर्म के कार्यों के लिए शुल्क देना पड़ रहा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं है।शंकराचार्य ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने और देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर जनजागरण करना है। यह यात्रा वाराणसी के संकटमोचन मंदिर से शुरू होकर कई जिलों से होते हुए लखनऊ पहुंची है।

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